जाते समय वे कह गए थे, उदास न होना प्रिये। यह नौकरी है फ़ौज की जाना पडेगा अब मुझे। सीमा में कुछ गड़बड़ है, उसको ठीक करना है हमें, हिन्द के दुश्मन मिटाकर चैन लेना […]

कहो ड्रैगन ! क्या समझे थे क्या अब भी बासठ का सन है , या ताकत में भारत तुझसे किसी मामले में भी कम है। तभी पीठ पर छुरा घौंपने आया था गलवान में, दिखा […]

कविता – कारगिल की चोटी से | घुस आया धोखे से दुश्मन पर बिरो ने मार भगाया था | दिया जवाब करारा उनको , छट्ठी दूध याद कराया था | काँप उठे हृदय कायरो , […]

असहायों की मदद को उठो, रुको मत, उठो उठो ना, जो असहाय हैं, जिनका कोई सहारा नहीं उन्हें तुम सहारा दो। जो डूब रहे हैं उन्हें किनारा दो। उठो, सोचो मत, उठो तुम मदद कर […]

उन वीरों को नमन करें हम जो सीमा पर जूझ रहे हैं , भारत माँ की रक्षा खातिर जो दुश्मन को कूट रहे हैं। ऊँचे – ऊँचे, ठन्डे – ठन्डे कठिन पर्वतों की चोटी पर, […]

हम सभी का मूल माँ है यदि नहीं होती जो माता किस तरह इस सुरमयी संसार को मैं देख पाता। जनम जननी ने दिया इससे अधिक कोई किसी को दे नहीं सकता है कुछ भी […]

प्यार सबसे करो, छोड़ दो नफ़रतें, नफरतों के लिए है नहीं जिंदगी। जितनी भी हो सके बाटों सबको खुशी दूसरे को रुलाना नहीं जिंदगी। जो भी मेहनत से पाओ रहो उसमें खुश हक हड़पना किसी […]

दुखी है आज इंसान देखो उसका व्यवहार। कर रहा है मनमानी आगे पीछे की उसने नहीं जानी, अपनी अभिलाषा का दामन चाेड़ा कर लिया उसने जो कभी नहीं होने वाली पूरी उसकी इच्छा, इसी के […]

जय हो कृषक, जय हो किसान, भारत मां का तू सम्मान “लॉकडाउन” की मजबूरी में, महंगे दामों बेच रहे थे,जब साहूकार अपना सामान तब भी भूमिपुत्र ने अन्न दिया, अधिक दाम भी नहीं लिया शत […]

मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई। रौनक लग गई मेरे घर पर, बजने लगे ढ़ोल शहनाई आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार, लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार देख के उसको […]

यूँ तो मानव सोचता है मैं सदा जीवित रहूँगा, सब चले जायेंगे लेकिन में यहां चिपका रहूँगा। पर समय का चक्र कोई रोक पाता है नहीं, कब है आना कब है जाना जान पाता है […]

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ […]

जीवन दायनी ये नदियां पहुँचती हैं जब विकरालता के चरम पर लील लेतीं हैं उनकी ज़िन्दगियाँ जिन्दा रहते हैं जो इनके करम पर।। भूमि तो उर्वर कर जाती हैं पर कयी दंश भी दे जाती […]

बाढ़ —— करनी है कुछ जनों की,सजा कितनों ने पाई है नदियों का यह रौद्र रूप हमारे कर्मों की भरपाई है । प्रकृति के दोहन में रहे यूँ मदमस्त हम कितना भी पा ले लगता […]

मुझको मेरे होने का एहसास कराने आई तू। फिर से जीवन जीने का आस जगाने आई तू । तुझे देख खुद को देखती,तुझसे ही खुद को परखती देख तुझे मै और निरखती,तुझ संग मैं भी […]

तेरी सफलता के चमक के आगे सितारों की चमक फीकी हो ! तेरे कठिन मेहनत का फल नीले गगन से भी ऊँची हो! ऐसी हो तेरी जय गाथा तू आगे सफलता तेरे पीछे हो! मुकम्मल […]

आसमां में हैं जितने सितारे पङे उतने ही हैं तुझसे मेरे सपने जुड़े अपने जीवन को देना एक पहचान तू पूरे करना चुन चुन के अरमान तू। बेटियों से है माता की शक्ति बढ़ी अकेलेपन […]

गांव का मकान रोता तो होगा। मेरे आने की आस में सोता ना होगा।। ख़ुद को संभालने की कोशिश करता। घुट घुट के खंडहर होता तो होगा।। सिपाही बनकर पड़ा ताला भी। अब जंग से […]

गोरखा राइफल के जांबाज कैप्टन एम० के ० पांडे ने दुश्मन को घेरा वो बटालिक की दुर्गम पहाड़ी उस पहाड़ी से दुश्मन खदेडा। लग चुकी थी उन्हें गोलियाँ, फिर भी दुश्मन का बंकर उड़ाया, बन […]

मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साफ दिनों तक जो चली थी लङाई कितनों ने जान की बाजी लगाई थी 527 जवानो ने […]

नमन है मेरा उन वीरों को, जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं भारत मां की रक्षा खातिर, सीने पर गोली खाते हैं जय हिन्द का लगता नारा है जोश की कमी नहीं है,जोश बहुत सारा […]

आज कारगिल विजय दिवस है नमन करें उन वीरों को, जिनके अदम्य शौर्य साहस से जीत मिली भारत माँ को. छलनी कर दुश्मन का सीना भारत मां का मान बढ़ाया, देश के गौरव की रक्षा […]

पुकार रही है भारतमाता आप सभी संतानों को, कलम उठा लो, खड़क उठा लो ख़त्म करो हैवानों को. बाहर-भीतर देश के दुश्मन, जो उन्नति के बाधक हैं, सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहे जो कारक हैं. […]

तुम्हारे जाने से रो पड़ा जगत सारा आओ देखे दिल बेचारा हर मूवी की तरह इस मूवी से भी जीत लिया तुमने दिल हमारा आओ देखे दिल बेचारा जिस बॉलीवुड ने तुम्हे दुत्कारा उसको कर […]

देश में बेकारी है आखिर किसकी जिम्मेवारी है। अक्षरबोध साक्षरता या अल्पज्ञान की बिमारी है।। मशीनी क्रांति का जोर या फिर बढ़ती हुई आबादी है। रोजगारों का अभाव या फिर निकम्मेपन सरकारी है।। साक्षर नहीं […]

कविता- आरती उतारा हमने | साल सैकड़ो श्रीराम तिरपाल मे आरती उतारा हमने | धूप गर्मी बरसात मे प्रभु भिंगी आंखो निहारा हमने | भगवान को भी जाना पड़ेगा कोर्ट के दर पता न था […]

चपरासी पद की भर्ती में, पीएचडी धारक आवेदक हैं, एक अनार है सौ बीमार हैं, जुगाड़ में बैठे पहरेदार हैं, इस जुगाड़ के खेल ने सारी प्रतिभाओं को निराश कर दिया, बेकारी के रोग ने […]

वो कोई सुखद घटना ही नहीं, मानो सुखों का वरदान था मेरे लिए। उसका आना, हृदय का आह्लादित हो जाना , मेरे आंगन की मुस्कुराहट सी, कुदरत की बनावट सी, मानो खुशियों का भण्डार था […]

बाद मरने के अपने, हम बहुत रोए उन्हें पता ही ना चला, उन्हें लगा हम थे सोए कुछ देर बाद, उन्हें हुआ अहसास, रो के बोले,”क्यूं चले गए मेरे ख़ास” किसी को खोज रही थी […]

गरीब गरीब रह गया, सेठ सौ गुना सेठ। खाई सा अंतर हुआ, भूख बराबर पेट।।1 गरीबों के उत्थान की, बनी योजना लाख। कागज में पूरी हुई, उस तक पंहुची खाक।।2 —– सतीश पाण्डेय

.एहसास खोज कर रही हूं, जिंदगी कही चली गयी है । कुछ कहा भी नही, कोई संदेश नही, कुछ पता नहीं, नहीं तो मै रुठने ही नहीं देती। ले जाती उसे बाग में,मॉल मे,किसीं झिल […]

“क्योंकि मैं इंसान हूं ” इंसानियत है मेरे अंदर, क्योकि मैं इंसान हूं । धर्म है मेरे में मानवता का; और बंधन भी है , नैतिकता का अंदर; क्योंकि मैं इंसान हूं। अगर मैं मान […]

हर जीव को जीने का हक़ है, जीवों ने डाली है अर्जी कुदरत ने अपील सुनी है, अब ना चले बस, मानव की मर्ज़ी क्षुधा मिटाने की खातिर, निर्दोषों को है मारा, कैसा है शैतान […]

मन किसी सूखी नदी सा हो रहा आप कहती हो कि बारिश आ गई, जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस एक सूनापन सा मन में गड रहा, कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ […]

कितने बदल गये है इंसान। बेच कर अपना ईमान।। सच्चाई से कोस दूर भागे। झूठ के बीज बोये बेईमान।। बुरी नजर वाले का मुंह है गोरा। नेकी करने वाले को बना दिए हैवान।। झूठ के […]

 बात ऐसी हो गई कि नींद नहीं आएगी ; हमें आज। वो लोयल नहीं, ढोंगी थे, उजागर हुई , मगर ये बात। आंखों से वो बड़े भोले लगते, शर्म हया का ,क्या नाटक करते […]

दु:शासन दुर्योधन की जोङी कबतक गुल खिलाएगी एक दिन चौसर की गोटी खुद उनको नाच नचाएगी — दिन बदलते ही जिनकी फितरत बदले थोड़ी सी भी लाज नहीं,पलपल जिनकी हसरत बदले लाभहानि के सौदे पे […]

हम क्या हमारा व्यक्तित्व क्या। अनन्त ब्रह्माण्ड के प्रान्गन में , हम क्या हमारा अस्तित्व क्या । कब किसके गर्भ में, कैसे कौन पनप रहा कैसे कब कौन-सा किसका सुमन कहाँ किस उपवन में महक […]