फ़िक्र कर इस बात की कि बेटियां घटने लगी हैं, ख़तरा है मानव जाति पर यह घंटियाँ बजने लगी हैं। छेड़ना प्रकृति को महंगा पड़ा है , सभ्यता पर दाग गंदला सा लगा है। —– […]

देख सखी, सावन की सुन्दर गीली – गीली सुबह सुहानी घिरे हुए हैं बादल नभ में चारों ओर बरसता पानी। सूरज की किरणों ने शायद खुली छूट दे दी बादल को, तभी घेरकर नभमंडल को […]

तू हड़बड़ाता क्यों है , और घबराता क्यों है, तेरे दुख दर्द को , कोई देख रहा है, तू अपने ज़हन में , झांक जरा सा ‌। वो रमा है तेरे ही, अंतर्मन में; मन […]

गर्व हमें है इस भूमि पर,जिस पर हमने जन्म लिया कर्म है मेरा उसे संवारना,जिसने हमपर उपकार किया । मातृभूमि वह मेरी, जहाँ महावीर ने अवतरण लिया कर्मभूमि वह मेरी,बुद्ध ने जहाँ अहिंसा का वरण […]

खोल अपनी आँख को तू देख ले ना गौर से, अब समय है बेटियों का देख ले तू गौर से। पुत्र से आगे बढ़ी हैं, हर तरह से बेटियां। माँ -बाप को सुख दे रही […]

सांझ पड़ रही है धीरे धीरे अँधेरा रफ़्तार ले रहा है। चिडियांएं घौंसलों में लौट रही हैं। पहाड़ों की चोटियों से झुरमुट-झुरमुट उजाला लौट रहा है छिपे सूरज की ओर। अँधेरा उतर रहा है नीचे […]

दूजे से चिढ़ना छोडो जो बढ़ता है बढ़ जाने दो जी, आप चलो अपनी राहों में औरों को भी चलने दो जी, अपनी मेहनत से तुम पाओ औरों को भी पाने दो जी , टांग […]

एक गांव में किस्मतवाली बूढ़ी अम्मा रहती है, चार हैं बेटे चार बहू हैं, फिर भी भूखी रहती है। अलगौझे में नहीं बंटा जो एक वही सामान थी क्योंकि किसी चाह नहीं थी बूढ़ी मां […]

मातु पिता में ईश्वर होते कहता भारत का ये ज्ञान। माॅम डैड में गोड बसे है क्या कहा फिरंगी ग्रंथ महान।। गुरुकुल की राह भुलाए जब से। ग्रैजुएट मूर्ख कहलाए तब से।। ऐसा मूर्ख भला […]

महानता व्यक्तित्व मे नहीं, शब्दों में होती है l पहचान लिवास से नहीं, आत्मा से होती है l बल शारीरिक शक्ति में नहीं, आत्म बल में होती है l वीरता प्रवंचना से जीती विजय में […]

बेटी कोई वस्तु नहीं जो जो उसका दान करोगे, बेटी तो बेटी है, क्यों बेटी का दान करोगे। ब्याह करो पर दान नहीं क्या यह उसका अपमान नहीं, जो वस्तु समझ कर दान हो गई, […]

नौकरी हाय, रोजगार कार्यालय आवेदन पर आवेदन कर ठेके पर आदमी रखने को, इंटरव्यू की चिट्ठी आई, एक सीट पर सौ अभ्यर्थी कैसे हो पद की भरपाई, ऊपर से तब फोन आते हैं, अधिकारीगण दब […]

तेरी सूरत पर निर्भर रह कर नहीं किया था प्यार तुझे मैंने तेरी सीरत देखी तभी किया था प्यार तुझे। सूरत सदा नहीं रहती है सीरत देती है अंतिम साथ, तन आकर्षित संबंधों का अधिक […]

थक कर बैठ गया क्यूं राही, क्या अभी थकान बाक़ी है? नहीं मिलती मंज़िल आसानी से, अभी इम्तिहान बाक़ी है। जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी, घबराना नहीं है तुझको, अभी […]

नेपाल !! तू मेरा मित्र रहा है, चीन के बहकावे में न आ, वह तुझे शून्य करवा देगा, तेरा अस्तित्व मिटा देगा। अब तक इतिहास में यही दर्ज है नहीं रहा तू गुलाम कभी, अब […]

चीन के चक्कर में पड़ कर क्यों फुदक रहा नेपाल तू, भूल गया क्या रिश्ते – नाते संबंधों का हाल तू। रोजी-रोटी चली आज तक जिस भारत की भूमि से आज उसे ही आँख दिखाता […]

कौन-सी मंजिल है अपनी किसे किधर जाना कहाँ है क्या है पहचान अपनी किस डगर से जाना यहाँ है । लौटकर भी आएँगे यहाँ पर या वही रम जाएँगे सोच लो रूक कर जरा क्या […]

कहां है वो , सबकी नींव धरने वाला! सबका दाता कहलाने वाला! कैसे खा गए , वो दरिंदे उस कच्ची सी कली को, बहुत ख़रोंचे है, मोम जैसे हाथों पर ! निकली है बाहर आंखें, […]

जाते समय वे कह गए थे, उदास न होना प्रिये। यह नौकरी है फ़ौज की जाना पडेगा अब मुझे। सीमा में कुछ गड़बड़ है, उसको ठीक करना है हमें, हिन्द के दुश्मन मिटाकर चैन लेना […]

कहो ड्रैगन ! क्या समझे थे क्या अब भी बासठ का सन है , या ताकत में भारत तुझसे किसी मामले में भी कम है। तभी पीठ पर छुरा घौंपने आया था गलवान में, दिखा […]

कविता – कारगिल की चोटी से | घुस आया धोखे से दुश्मन पर बिरो ने मार भगाया था | दिया जवाब करारा उनको , छट्ठी दूध याद कराया था | काँप उठे हृदय कायरो , […]

असहायों की मदद को उठो, रुको मत, उठो उठो ना, जो असहाय हैं, जिनका कोई सहारा नहीं उन्हें तुम सहारा दो। जो डूब रहे हैं उन्हें किनारा दो। उठो, सोचो मत, उठो तुम मदद कर […]

उन वीरों को नमन करें हम जो सीमा पर जूझ रहे हैं , भारत माँ की रक्षा खातिर जो दुश्मन को कूट रहे हैं। ऊँचे – ऊँचे, ठन्डे – ठन्डे कठिन पर्वतों की चोटी पर, […]

हम सभी का मूल माँ है यदि नहीं होती जो माता किस तरह इस सुरमयी संसार को मैं देख पाता। जनम जननी ने दिया इससे अधिक कोई किसी को दे नहीं सकता है कुछ भी […]

प्यार सबसे करो, छोड़ दो नफ़रतें, नफरतों के लिए है नहीं जिंदगी। जितनी भी हो सके बाटों सबको खुशी दूसरे को रुलाना नहीं जिंदगी। जो भी मेहनत से पाओ रहो उसमें खुश हक हड़पना किसी […]

दुखी है आज इंसान देखो उसका व्यवहार। कर रहा है मनमानी आगे पीछे की उसने नहीं जानी, अपनी अभिलाषा का दामन चाेड़ा कर लिया उसने जो कभी नहीं होने वाली पूरी उसकी इच्छा, इसी के […]

जय हो कृषक, जय हो किसान, भारत मां का तू सम्मान “लॉकडाउन” की मजबूरी में, महंगे दामों बेच रहे थे,जब साहूकार अपना सामान तब भी भूमिपुत्र ने अन्न दिया, अधिक दाम भी नहीं लिया शत […]

मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई। रौनक लग गई मेरे घर पर, बजने लगे ढ़ोल शहनाई आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार, लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार देख के उसको […]

यूँ तो मानव सोचता है मैं सदा जीवित रहूँगा, सब चले जायेंगे लेकिन में यहां चिपका रहूँगा। पर समय का चक्र कोई रोक पाता है नहीं, कब है आना कब है जाना जान पाता है […]

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ […]

जीवन दायनी ये नदियां पहुँचती हैं जब विकरालता के चरम पर लील लेतीं हैं उनकी ज़िन्दगियाँ जिन्दा रहते हैं जो इनके करम पर।। भूमि तो उर्वर कर जाती हैं पर कयी दंश भी दे जाती […]

बाढ़ —— करनी है कुछ जनों की,सजा कितनों ने पाई है नदियों का यह रौद्र रूप हमारे कर्मों की भरपाई है । प्रकृति के दोहन में रहे यूँ मदमस्त हम कितना भी पा ले लगता […]

मुझको मेरे होने का एहसास कराने आई तू। फिर से जीवन जीने का आस जगाने आई तू । तुझे देख खुद को देखती,तुझसे ही खुद को परखती देख तुझे मै और निरखती,तुझ संग मैं भी […]

तेरी सफलता के चमक के आगे सितारों की चमक फीकी हो ! तेरे कठिन मेहनत का फल नीले गगन से भी ऊँची हो! ऐसी हो तेरी जय गाथा तू आगे सफलता तेरे पीछे हो! मुकम्मल […]

आसमां में हैं जितने सितारे पङे उतने ही हैं तुझसे मेरे सपने जुड़े अपने जीवन को देना एक पहचान तू पूरे करना चुन चुन के अरमान तू। बेटियों से है माता की शक्ति बढ़ी अकेलेपन […]

गांव का मकान रोता तो होगा। मेरे आने की आस में सोता ना होगा।। ख़ुद को संभालने की कोशिश करता। घुट घुट के खंडहर होता तो होगा।। सिपाही बनकर पड़ा ताला भी। अब जंग से […]

गोरखा राइफल के जांबाज कैप्टन एम० के ० पांडे ने दुश्मन को घेरा वो बटालिक की दुर्गम पहाड़ी उस पहाड़ी से दुश्मन खदेडा। लग चुकी थी उन्हें गोलियाँ, फिर भी दुश्मन का बंकर उड़ाया, बन […]

मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साफ दिनों तक जो चली थी लङाई कितनों ने जान की बाजी लगाई थी 527 जवानो ने […]

नमन है मेरा उन वीरों को, जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं भारत मां की रक्षा खातिर, सीने पर गोली खाते हैं जय हिन्द का लगता नारा है जोश की कमी नहीं है,जोश बहुत सारा […]