केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]
केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]
अजब-गजब से लोग हैं! ना जाने क्यों इंसानियत से इतना जलते लोग हैं कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं। मगर कुछ मगरूर होकर अपनी ही धुन में बेहोश हैं।
तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं। —————————————- दिल बहुत बार दुखाया तूने पर तुझे देख कर यही एहसास होता है कि सदियों से तुझे जानता […]
दूरियां कितनी भी हों मिटाता चला जाऊंगा तेरे दिल में कितनी भी कड़वाहट हो मैं अपने व्यवहार से तेरे दिल में जगह बनाऊंगा तू कितनी भी कोशिश कर ले तुझे भी हो जाएगा मेरी वफाओं […]
आज पुष्प सुगंध फैला जा कल मंदिर में चढ़ना है अरे तुझे इस बाग़ में अपनी छाप छोड़कर जाना है, ताकि विदाई के मौके पर अन्तस् से निकले आंसू रोक न पाए खोटी कविता धरा […]
प्यार जताने की बात वह करते हैं जो अक्सर दिल जलाया करते हैं। होठों पर रखते हैं गुलाब और हाथों में जहर का प्याला लिए रहते हैं।
सिसकते जज्बात हँसने लगे तुम्हें देखकर न जाने ऐसा क्या था तुममें! जो मेरी बिखरी जिंदगी को तुमने दो पल में ही समेट लिया। और ऐसा समेटा कि मैं कभी फिर बिखर ना सका। टूटा […]
जहां गंगा पवित्र है , वही पवित्र तो नाला भी होता था कभी, अगर गंगा पाप धोती है ! तो नाला पापों को समेटता है अपने में। पर नाले को कौन पूजेगा, पर कभी नाला […]
बैरन हुई है दुनिया जब से तुम से नजर मिली तेरे प्रेम जाल में फंस कर ही यह आत्मा स्वतंत्र हुई।
इतना न दूसरे से परेशान होइए प्यार कीजिये, मनुहार कीजिये रूठे हुए दिलों को मनाने के वास्ते मनुहार कीजिये इजहार कीजिये
दर्द की भी भावुकता देखो, दर्द से मेरे वो पिंघल गया। काश तुम्हें वो मिल जाए, इतनी सी दुआ, वो भी कर गया।
कुछ इधर से खाया कुछ उधर से मोटे पेट हो गए रात भर नकली नोट छापे सुबह सेठ हो गए
हुक्के सी हैं लत्त तुम्हारी, लगी जो ; हम से छुट्टे ना । और रेशम-सा हैं विश्वास हमारा कभी जो तुमसे टूटे ना ।………
बारिश की बूँदों से डरना कैसा। बिन पतछड़ का चमन कैसा।
अपना शीश चढ़ा देते हैं जो भारत के कदमों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें सलाम करते हैं हम. सरहद पर सीना ताने बन्दूक लिए हैं कन्धों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें […]
दोस्तो ! मेहनत मे दिन- रात देखा नही जाता। मंजिल हो करीब तो मैदान छोड़ा नही जाता।।
दूसरे को आगे बढ़ते देख वे ऐसे दुखी हुए रात भर सोये नहीं सुबह सुखी हुए
जाओ न इस तरह से बरसात की ऋतु है, रूठो न इस तरह से बरसात की ऋतु है। छोटी सी जिंदगी है दूरी में मत बिताओ, तन्हा रहो न ऐसे बरसात की ऋतु है। बाहर […]
क्या कहने उस दिन के जब गुरूजी हुआ करते थे। घर में हो या पाठशाला में तन-मन से बच्चे पढ़ते थे।। एक आदर था सबके दिल में ग्रंथ गुरू और ज्ञान प्रति। होकर उत्तीर्ण कक्षा […]
आये है आप तो स्वागत हम करेंगे। मेहमान नवाज़ी का फ़र्ज अदा करेंगे।।
चलो फिर से एक- दूजे से बिछड़कर देखते है, प्रेम मे वियोग की पराकाष्ठा को हम देखते है।
रियासत है मेरी यह याद रखना, तहजीब का चलन बरकार रखना।
उनके शहर में, हम बेकार आ गए, उनका खरीदा था शहर, हम बेकार आ गए।
1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]
कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य […]
माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर […]
तुम तो हो फ़ाजिल मनुज हम कहे जाते पिशुन हैं गिरे निर्वास गुल, क्यों उठाकर सूँघते हो। वह प्रभा जिससे तुम्हें अनुरक्ति हमसे हो गई, असलियत वो है नहीं केवल दिखावा है हमारा, वास्तविकता में […]
भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू | देशवा मे आइल रफाइल तेज तर्रार हो | सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू | जहा जहा भिड़वा हमसे चोट खुब खईबा | जमीनिया अकाशवा सगरो मार […]
तुमसे ही लिखना सीखा है तुमसे से ही कहना सीखा है, जो बात उगी भीतर के मन में उसको ही कहना सीखा है। सच्चाई तो सच्चाई है सच पर ही चलना सीखा है, झूठ से […]
“मित्र” वो मेरा सगा नहीं है , मगर भाई से बढ़कर है। कोमिडन नहीं है, मगर हंसाता है; कार्टून से बढ़कर है। थोड़ा जिदी है, मगर इतराता नहीं है। बेपरवाह है खुद के लिए, पर […]
मैं भी साधारण मानव हूँ, तुम भी साधारण मानव हो कमियां तुम में भी मुझ में भी आंसू तुम में भी मुझ में भी। गलती तुम से भी हो जाती है गलती मुझ से भी […]
ना गम है ना दर्द है जो बिताया दोस्तों के साथ वो ही सुनहरा वक्त है ना है कोई खून का रिश्ता फिर भी निभाते ये दिलवाले है एक दूसरे में खुश रहते ये मस्त […]
वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में जो माँ की महिमा का बखान करे। शारदे की लेखनी भी माँ बनके मातृशक्ति का भरसक गान करे।। माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है माँ हीं तो है पालनकारी। […]
विदा देने में रोता तो कैसे उनके जाने में रोता तो कैसे यात्रा का सफर का है जीवन इन पड़ावों में रोता तो कैसे। वो चले छोड़ जीवन की धारा थम गई उनकी धड़कन सदा […]
माँ!!! तूने जो संस्कार मुझमें कूट कूट कर भरे उसने ही ईंट-गारा बनकर मुझे बनाया मनुष्य रूप। तेरी दी हुई शिक्षा ने हर जंग में मेरा साथ दिया, कर्म पथ की ओर समर्पित रहा भटकाव […]
जीवन की गाडी चले निरंतर पहियों की पकड़ सड़क से हो। कोई फिसले नहीं कहीं पर , पहचान सुपथ पर पकड़ से हो। ह्रदय हो तो हो प्रेम भरा जिसकी पहचान धड़क से हो। आवाज […]
आजकल वफ़ा और कदर सोने के भाव है, मगर धोखा यहां पुलिस की तरह , हर चौराहे पर मिलता है।
एक दूसरे से प्यार करना , फिर एक दूसरे को समझना, फिर शादी कर लेना, और फिर खुशहाल जीवन जीना, ये सब काल्पनिक सा लगता है।
आओ कवितायें करते हैं मीठी-मीठी, प्यारी प्यारी श्रृंगार भरी, मनुहार भरी दिल में उगते नव प्यार भरी आओ कवितायें करते हैं, रूठी – रूठी, टूटी- फूटी, योग भरी , वियोग भरी, चाहत में भी, दुत्कार […]
छोटे से भानिज को अपने साथ ले आया था अपने शहर मैं, क्योंकि उसके पापा गंभीर रोग से पीड़ित होकर चल बसे थे संसार से, उस दुर्गम पर्वतीय गाँव में तीसरी- चौथी कक्षा में प्राइमरी […]
रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे […]
मैं कवि नहीं हूं कविता सौ कोस दूर मुझसे कैसे बखान हो अब तेरा स्वरूप मुझसे। तेरे गुण बहुत अधिक हैं, मेरे पास शब्द कम हैं लय में भी आजकल कुछ, बिखरी हुई चुभन है। […]
हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।।
इंद्रधनुष के सात रंगों सी, अपनी हो ये यारी। रहो सदा आप मेरे हृदय में, बनकर दिल की रानी। साथ तेरा हो मेरे साथ में, बनकर सूरज की लाली। हाथ तेरा हो मेरे हाथ में, […]
जब तुम उदास हो, कोई भी ना पास हो, तब जो सहारा देती है , सब दुख बाट लेती है, वो मां ही तो है। बिस्तर गीला किया मैंने, वह सो गई गीले में , […]
मेरे रोम- रोम में बसे तेरा नाम , कण कण में तू रग- रग में तू, अद्वितीय तू, अखंड तू, क्षण- क्षण में रमा है तू, सुक्ष्म रूप भी है तेरा , और विशालकाय पर्वत […]
दोस्तों से मिले मुद्दतें हो गईं, देखे हुए चेहरे खिले, मुद्दतें हो गईं कोरोना ने जाल बिछाया ऐसा, बाहर ना निकल सके हम बाहर की बहार देखे मुद्दते हो गई कोई जल्दी से लाए इसका […]
कर चले मेरी महफ़िल को सूना क्या खता हो गई आज मुझसे, इस तरह क्यों चले जा रहे हो क्या खता हो गई आज मुझसे। जिंदगी भी समझ से परे है समझ से परे है […]
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