आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य […]

माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर […]

तुम तो हो फ़ाजिल मनुज हम कहे जाते पिशुन हैं गिरे निर्वास गुल, क्यों उठाकर सूँघते हो। वह प्रभा जिससे तुम्हें अनुरक्ति हमसे हो गई, असलियत वो है नहीं केवल दिखावा है हमारा, वास्तविकता में […]

भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू | देशवा मे आइल रफाइल तेज तर्रार हो | सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू | जहा जहा भिड़वा हमसे चोट खुब खईबा | जमीनिया अकाशवा सगरो मार […]

तुमसे ही लिखना सीखा है तुमसे से ही कहना सीखा है, जो बात उगी भीतर के मन में उसको ही कहना सीखा है। सच्चाई तो सच्चाई है सच पर ही चलना सीखा है, झूठ से […]

“मित्र” वो मेरा सगा नहीं है , मगर भाई से बढ़कर है। कोमिडन नहीं है, मगर हंसाता है; कार्टून से बढ़कर है। थोड़ा जिदी है, मगर इतराता नहीं है‌। बेपरवाह है खुद के लिए, पर […]

मैं भी साधारण मानव हूँ, तुम भी साधारण मानव हो कमियां तुम में भी मुझ में भी आंसू तुम में भी मुझ में भी। गलती तुम से भी हो जाती है गलती मुझ से भी […]

ना गम है ना दर्द है जो बिताया दोस्तों के साथ वो ही सुनहरा वक्त है ना है कोई खून का रिश्ता फिर भी निभाते ये दिलवाले है एक दूसरे में खुश रहते ये मस्त […]

वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में जो माँ की महिमा का बखान करे। शारदे की लेखनी भी माँ बनके मातृशक्ति का भरसक गान करे।। माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है माँ हीं तो है पालनकारी। […]

विदा देने में रोता तो कैसे उनके जाने में रोता तो कैसे यात्रा का सफर का है जीवन इन पड़ावों में रोता तो कैसे। वो चले छोड़ जीवन की धारा थम गई उनकी धड़कन सदा […]

माँ!!! तूने जो संस्कार मुझमें कूट कूट कर भरे उसने ही ईंट-गारा बनकर मुझे बनाया मनुष्य रूप। तेरी दी हुई शिक्षा ने हर जंग में मेरा साथ दिया, कर्म पथ की ओर समर्पित रहा भटकाव […]

जीवन की गाडी चले निरंतर पहियों की पकड़ सड़क से हो। कोई फिसले नहीं कहीं पर , पहचान सुपथ पर पकड़ से हो। ह्रदय हो तो हो प्रेम भरा जिसकी पहचान धड़क से हो। आवाज […]

आओ कवितायें करते हैं मीठी-मीठी, प्यारी प्यारी श्रृंगार भरी, मनुहार भरी दिल में उगते नव प्यार भरी आओ कवितायें करते हैं, रूठी – रूठी, टूटी- फूटी, योग भरी , वियोग भरी, चाहत में भी, दुत्कार […]

छोटे से भानिज को अपने साथ ले आया था अपने शहर मैं, क्योंकि उसके पापा गंभीर रोग से पीड़ित होकर चल बसे थे संसार से, उस दुर्गम पर्वतीय गाँव में तीसरी- चौथी कक्षा में प्राइमरी […]

रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे […]

मैं कवि नहीं हूं कविता सौ कोस दूर मुझसे कैसे बखान हो अब तेरा स्वरूप मुझसे। तेरे गुण बहुत अधिक हैं, मेरे पास शब्द कम हैं लय में भी आजकल कुछ, बिखरी हुई चुभन है। […]

हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।।

इंद्रधनुष के सात रंगों सी, अपनी हो ये यारी। रहो सदा आप मेरे हृदय में, बनकर दिल की रानी। साथ तेरा हो मेरे साथ में, बनकर सूरज की लाली। हाथ तेरा हो मेरे हाथ में, […]

जब तुम उदास हो, कोई भी ना पास हो, तब जो सहारा देती है , सब दुख बाट लेती है, वो मां ही तो है। बिस्तर गीला किया मैंने, वह सो गई गीले में , […]

दोस्तों से मिले मुद्दतें हो गईं, देखे हुए चेहरे खिले, मुद्दतें हो गईं कोरोना ने जाल बिछाया ऐसा, बाहर ना निकल सके हम बाहर की बहार देखे मुद्दते हो गई कोई जल्दी से लाए इसका […]

कर चले मेरी महफ़िल को सूना क्या खता हो गई आज मुझसे, इस तरह क्यों चले जा रहे हो क्या खता हो गई आज मुझसे। जिंदगी भी समझ से परे है समझ से परे है […]

फ़िक्र कर इस बात की कि बेटियां घटने लगी हैं, ख़तरा है मानव जाति पर यह घंटियाँ बजने लगी हैं। छेड़ना प्रकृति को महंगा पड़ा है , सभ्यता पर दाग गंदला सा लगा है। —– […]

देख सखी, सावन की सुन्दर गीली – गीली सुबह सुहानी घिरे हुए हैं बादल नभ में चारों ओर बरसता पानी। सूरज की किरणों ने शायद खुली छूट दे दी बादल को, तभी घेरकर नभमंडल को […]

तू हड़बड़ाता क्यों है , और घबराता क्यों है, तेरे दुख दर्द को , कोई देख रहा है, तू अपने ज़हन में , झांक जरा सा ‌। वो रमा है तेरे ही, अंतर्मन में; मन […]

गर्व हमें है इस भूमि पर,जिस पर हमने जन्म लिया कर्म है मेरा उसे संवारना,जिसने हमपर उपकार किया । मातृभूमि वह मेरी, जहाँ महावीर ने अवतरण लिया कर्मभूमि वह मेरी,बुद्ध ने जहाँ अहिंसा का वरण […]

खोल अपनी आँख को तू देख ले ना गौर से, अब समय है बेटियों का देख ले तू गौर से। पुत्र से आगे बढ़ी हैं, हर तरह से बेटियां। माँ -बाप को सुख दे रही […]

सांझ पड़ रही है धीरे धीरे अँधेरा रफ़्तार ले रहा है। चिडियांएं घौंसलों में लौट रही हैं। पहाड़ों की चोटियों से झुरमुट-झुरमुट उजाला लौट रहा है छिपे सूरज की ओर। अँधेरा उतर रहा है नीचे […]

दूजे से चिढ़ना छोडो जो बढ़ता है बढ़ जाने दो जी, आप चलो अपनी राहों में औरों को भी चलने दो जी, अपनी मेहनत से तुम पाओ औरों को भी पाने दो जी , टांग […]

एक गांव में किस्मतवाली बूढ़ी अम्मा रहती है, चार हैं बेटे चार बहू हैं, फिर भी भूखी रहती है। अलगौझे में नहीं बंटा जो एक वही सामान थी क्योंकि किसी चाह नहीं थी बूढ़ी मां […]

मातु पिता में ईश्वर होते कहता भारत का ये ज्ञान। माॅम डैड में गोड बसे है क्या कहा फिरंगी ग्रंथ महान।। गुरुकुल की राह भुलाए जब से। ग्रैजुएट मूर्ख कहलाए तब से।। ऐसा मूर्ख भला […]

महानता व्यक्तित्व मे नहीं, शब्दों में होती है l पहचान लिवास से नहीं, आत्मा से होती है l बल शारीरिक शक्ति में नहीं, आत्म बल में होती है l वीरता प्रवंचना से जीती विजय में […]

बेटी कोई वस्तु नहीं जो जो उसका दान करोगे, बेटी तो बेटी है, क्यों बेटी का दान करोगे। ब्याह करो पर दान नहीं क्या यह उसका अपमान नहीं, जो वस्तु समझ कर दान हो गई, […]

नौकरी हाय, रोजगार कार्यालय आवेदन पर आवेदन कर ठेके पर आदमी रखने को, इंटरव्यू की चिट्ठी आई, एक सीट पर सौ अभ्यर्थी कैसे हो पद की भरपाई, ऊपर से तब फोन आते हैं, अधिकारीगण दब […]

तेरी सूरत पर निर्भर रह कर नहीं किया था प्यार तुझे मैंने तेरी सीरत देखी तभी किया था प्यार तुझे। सूरत सदा नहीं रहती है सीरत देती है अंतिम साथ, तन आकर्षित संबंधों का अधिक […]

थक कर बैठ गया क्यूं राही, क्या अभी थकान बाक़ी है? नहीं मिलती मंज़िल आसानी से, अभी इम्तिहान बाक़ी है। जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी, घबराना नहीं है तुझको, अभी […]

नेपाल !! तू मेरा मित्र रहा है, चीन के बहकावे में न आ, वह तुझे शून्य करवा देगा, तेरा अस्तित्व मिटा देगा। अब तक इतिहास में यही दर्ज है नहीं रहा तू गुलाम कभी, अब […]

चीन के चक्कर में पड़ कर क्यों फुदक रहा नेपाल तू, भूल गया क्या रिश्ते – नाते संबंधों का हाल तू। रोजी-रोटी चली आज तक जिस भारत की भूमि से आज उसे ही आँख दिखाता […]

कौन-सी मंजिल है अपनी किसे किधर जाना कहाँ है क्या है पहचान अपनी किस डगर से जाना यहाँ है । लौटकर भी आएँगे यहाँ पर या वही रम जाएँगे सोच लो रूक कर जरा क्या […]

कहां है वो , सबकी नींव धरने वाला! सबका दाता कहलाने वाला! कैसे खा गए , वो दरिंदे उस कच्ची सी कली को, बहुत ख़रोंचे है, मोम जैसे हाथों पर ! निकली है बाहर आंखें, […]