आज भी मुझे तेरी कमी महसूस होती है! ख्वाबों की पलकों में नमी महसूस होती है! रूठी हुई है मंजिल भी तकदीर से मेरी, दर्द की कदमों तले जमीं महसूस होती है! #महादेव_की_कविताऐं'(26)

जिम्मेंदारी को जब उसने महसूस किया तो, ऑटो रिक्शा भी चलाने लगती हैं वो ! पढ़ लिख के सक्षम होकर के वो अब, अंतरिक्ष में वायुयान उड़ाने लगती हैं वो !! कितने उदाहरण देखेंगे आप […]

अब तुम्हारी याद आती है,भूलूं कैसे ये बतला दो, तुम मेरी हो नहीं सकती,समझूँ कैसे ये बतला दो! वो सपना जो देखा समझा हूँ तेरे साथ रहकर मैं, हकीकत में नामुमकिन हैं यही मुझको बतला […]

कभी न कभी हमारा ख्वाब बदल जाता है! रूठे हुए पलों का जवाब बदल जाता है! जज्बों की आजमाइशें होंगी कभी न कम, दर्दे-जिन्दगी का आदाब बदल जाता है! #महादेव_की_कविताऐं'(24)

बस इतनी सी बात हमें आज तक समझ नहीं आई की उसने हमको तन्हा और सफा क्यों छोड़ दिया क्यों थाम लिया दामन किसी और का हमारे रहते की उसने हमारी मोहोब्बत और बफा क्यों […]

मैं अंजान हूँ इस सफ़र में मुझे कुछ नहीं है आता तू ही बता मेरे साथी कैसे बढूँ इस डगर में। चुन ली है राह मैंने तेरे संग ज़िन्दगी की अब तू ही मेरा सहारा […]

   जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल जेब में भले ही गोपाल ठन–ठन है  आज़कल।   साथ   देने  को   कोई  दूसरा  साथ में नहीं बस  अपना बेचारा  साफ मन है आज़कल।   तुम    जब […]

तेरा नाम लेकर तन्हाई मिल जाती है! तेरा दर्द बनकर रुसवाई मिल जाती है! शामों-सहर भटकता हूँ मैं तेरे लिए मगर, मेरी जिन्द़गी को जुदाई मिल जाती है! #महादेव_की_कविताऐं'(25)

बर्बाद कर बैठ जाते हैं अक्सर वो चेहरे हसीन होते हैं, पर अंधेरों की सरपरस्ती में ही वो खुद का वजूद लिए होते हैं, अब क्या बद्दुआयें दें हम उन आइना ऐ हुस्नों को, जो […]

शांत समुद्र.. दूर क्षितिज.. साँझ की वेला.. डूबता सूरज.. पंछी की चहक.. फूलों की महक.. बहके से कदम.. तुझ ओर सनम.. उठता है यूँ ही.. हर शाम यहाँ.. यादों का नशा.. यादों का धुआँ.. कुछ […]

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, […]

सोये होते तो उठ जाते बेहोश हैं लोग अभी उठाने में ज़रा समय लगेगा, गहरे हैं रिश्ते मगर फिर भी दूरियां हैं, बीच में हैं खड़ी दीवारों को गिराने में ज़रा समय लगेगा।। आँखों में […]

रक्खे तो हैं कुछ टुकड़े सम्भाल कर, प्यारे से दिल के चन्द हिस्से सम्भाल कर, बनाते थे लोग पल पल बात कई, आज बस छिपा के रक्खे हैं कुछ किस्से सम्भाल कर, बहुत सारे तोहफा […]

तेरे लिए हरपल बेकरार सा रहता हूँ! तेरे लिए हरपल तलबगार सा रहता हूँ! गुफ्तगूँ की चाहत भी जिन्दा है लेकिन, तेरी बेरुखी से लाचार सा रहता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं'(24)

ख़्वाब देखती है आँखै मेरी भी उड़ना चाहती हु मै भी पढू , लिखू बनू अफसर मै भी आकाश मै उड़ता जहाज देखू मै जब भी साथ वो अपने मुझे ले जाता है पढ़ने , […]

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल […]

  उम्मीद-ऐ-दिल से हर कोई बफा नहीं करता खुवाईश-ऐ-मंज़िल से हर कोई गिला नहीं करता निकल पड़ते है न जाने कितने ही लोग सफर-ऐ-इश्क़ की तरफ मगर ये इश्क़-ऐ-मंज़िल हर किसी को मिला नहीं करता […]

अलग हो कर पानी से, कमल खिला नहीं करते बिछड़ कर लोग किसी से मिला नहीं करते यूँ तो आती है बाहर ज़िन्दगी में सबके मगर बुझे हुए चिरागों से उजाले हुआ नहीं करते देव […]

रब का अनमोल वरदान बिटियाँ हैं | ज़ैसे की, तुफ़ान से टकराता दिया हैं | रिश्तों के मोती तो अक़्सर बिख़र ज़ाते, मगर, दो परिवारों को ज़िसने सिया हैं | प्यार के किस्से तो बड़े […]

मेरी जिन्दगी से यादों को तुम ले लो! मेरे दर्द की फरियादों को तुम ले लो! हर घड़ी रुलाती हैं अब तेरी ख्वाहिशें, मेरे ख्यालों से इरादों को तुम ले लो! #महादेव_की_कविताऐं'(23)

मैं बेटी हूँ फिर भी मैं अकेली हूँ मैं सबकुछ नहीं कर सकती क्योंकि मैं बंधन में बंधी हूँ किसी को मैं पसंद नहीं तो कोख में ही मार दी जाती हूँ गर में किसी […]

  माँ,मैं तेरे हर सपने को सच करके दिखाउंगी तेरे हर मुसीबत मे तेरे, मैं भी काम आउंगी रोशन कर दूंगी मैं तेरा नाम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे […]

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर […]

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें […]

बोलो मेरे मन मै क्या लिखूँ आज मै कुछ लिखना चाहती हूँ अपनेही विचारों में खोयी रही, अपने मन से पूछती रही माफकरना दोस्तों कोई शब्द न मिले, मै कुछ भी न लिखपाई, कुछभी न […]

तेरी काया नहीं तो तेरा साया ही सही कुछ तो है जो मेरे साथ बाकी है, कभी मेरे ख़्वाबों में तेरे अक्स का मुझे छू कर चले जाना, तो कभी तेरे संग बीते लम्हों का […]

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, तिरंगे के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर मौसम […]