विचारों को जब बाँध रही थी, अरमानों के साँचे ढाल रही थी, खिन्न हुई, उद्वगिन हुई जब, खुद को मैं आँक रही थी । विचारों को खोल चली जब, निरन्तर प्रवाह से जोड़ चली जब, […]
विचारों को जब बाँध रही थी, अरमानों के साँचे ढाल रही थी, खिन्न हुई, उद्वगिन हुई जब, खुद को मैं आँक रही थी । विचारों को खोल चली जब, निरन्तर प्रवाह से जोड़ चली जब, […]
कुछ रिश्ते भुलाए नही जाते कुछ नाम मिटाए नही जाते बस जाते हैं जो लोग दिलों में वो लोग कभी भुलाए नही जाते…
जब भी बैठता हूं किसी सिरहाने से सटकर, बहुत सी यादें याद आ जाती हैं… इस आधुनिकता के खेल में भी मुझे, अपने बचपन की याद आ जाती है.. रसना खुश नही इन मंहगे पकवानो से, बस […]
शहर छोड़ गये हो सोचा मैंने, जब से तुम नजर नही आये… अजीब हो तुम भी शहर में होकर भी, तुम हमारे शहर नही आये… जो तुम न दिखते हो पास तो, अल्फाजों की निंदा […]
उनके मुस्कुराने से आ गयी मुस्कान हमारे चेहरे पर वरना किसी गम में डूबी जा रही थी जिंदगी मेरी
हरवक्त मैं तुमसे बात किया करता हूँ! यादों से मैं मुलाकात किया करता हूँ! हर ख्वाब बेइंतहाँ जलाता है लेकिन, तुमसे गुफ्तगूँ हर रात किया करता हूँ! मुक्तककार- #महादेव’
यह डगर है अनजान ,सफर भी लम्बा बड़ा, गंतव्य की खोज में, तू यहाँ अकेला खड़ा पीछे हैं तिमिर के बादल ,आगे संसार पड़ा , रुक न पलभर को राही , हिम्मत के कदम बड़ा […]
शामे-आलम में तेरी प्यास चली आती है! लहर ख्वाहिशों की मेरे पास चली आती है! दर्द की दीवारों से टकराती है जिन्द़गी, ख्वाबों की तस्वीर बदहवास चली आती है! मुक्तककार-#महादेव’
असल में बंध जाते हैं…. नशे में घुल जाते हैं…. ये दिल के रिश्ते…. दिल को ही समझ आते हैं….
है कुछ करना भी मुझे कुछ नया सा कुछ अलग की मैं न बस रहूँ एक धूमिल खंडित नग——(१) तोड़के बंधन सभी, छोड़के सब व्याधियां लो चला मैं देख लो नव सृजन करने अभी——-(२) […]
आया खत मेरे इश्क का आज सिर्फ़ पता था मेरा, और कुछ नहीं|
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में मगर मुस्कुराये वो एक भी दफ़ा नहीं, मेरी मुस्कुराहट पे|
न जाने क्यों कुछ यादें अटक सी जाती है दिल में बार बार दोहराती रहती है खुद को अधूरे लफ्जों में|
अगर लम्हों की क़ीमत जान जाएँ हर इक लम्हे में पोशीदा सदी है
कैसे पढ़ूँ तेरा ख़त अँधेरा बहुत है, अपनी आहट से इसे रोशन कर दे…
बंधु ! शक्ति–स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के अकल्पनीय दिवस और अंतत: वैभव एवं विजय के पर्व ‘दशहरा’ पर मन–मानस में व्याप्त ‘लोभ–मोह–आघात’ के प्रतीक “रावण” का दहन । आप सभी का हार्दिक अभिनंदन एवं […]
शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से, आशिक़ हूँ जनाब कोई फरयादी नही
सपने में भी जब कभी तुम्हारा ख्याल आता है- तो दर्द से तड़फ कर जाग जाता हूँ मै . जब अंधेरों के सिवा कुछ मिलता नहीं वहां- तो खुद ही खुद से घबरा जाता हूँ […]
इस बात का गम नहीँ की तु मुझे मिल ना पाया। अफ़सोस है की जिसे तुमने चाहा उसके जैसा बन ना पाया। ●Follow Me At Instagram @Officialman4u ●Send Fb Request At Fb.Com/Manmohansingh.shekhawat
सब कुछ मिलकर लगे जैसे कुछ ना मिला हो कैसी कमी नज़र आती है हाथों की लकीरों में जिनसे मिलते थे हम अक्सर सब-ओ-रोज़ आज सिर्फ यादें ही मिला करती है तस्वीरों में
क्या हुस्न अदा,कैसा शिक़वा गिला किस्मत में ना था प्यार इसलिए ही ना मिला खुदा जानता है मेरा दिल झरने के पानी की तरह साफ़ है पर यह भी सच है की कमल कभी भी […]
ना नजरों में नज़ाकत रहती है ना दिल में कोई आहट रहती है हाँ पहले था ‘मन’ अंदर से ज़िंदा अब तो उसकी दिखावट रहती है
कोई और बात ना करे चलता है पर तू ना करे तो दिल जलता है तू ही तो है मेरे हर नगमे मेरी नज़्म तुझसे दिन शुरू तुझी से ढलता है
दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत। गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥ सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल। बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल॥ क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली […]
विजय सत्य की हुई हमेशा, हारी सदा बुराई है, आया पर्व दशहरा कहता करना सदा भलाई है. रावण था दंभी अभिमानी, उसने छल -बल दिखलाया, बीस भुजा दस सीस कटाये, अपना कुनबा मरवाया. अपनी ही […]
फिर हमें संदेश देने आ गया पावन दशहरा संकटों का तम घनेरा हो न आकुल मन ये तेरा संकटों के तम छटेंगें होगा फिर सुंदर सवेरा धैर्य का तू ले सहारा द्वेष हो कितना […]
देखते है सभी जलते रावण को आग की विषम लपटो कों जिनमें फ़टाकों के चिन्गारियों के बीच बेचारा रावण जल रहा है खाक हो जाता है हर साल फिर न जाने कहां से जन्म […]
किसलिए हर आदमी खुद को जला रहा है? सिलसिला-ए-दर्द़ से खुद को सता रहा है! ढल रही है जिन्दगी शीशे की शक्ल में, रास्तों में तन्हा पत्थर सा जा रहा है! मुक्तककार- #महादेव’
Kisi ko shikayat he, kisi ko gila he Hum magar beparvaah he, Nahi matlab agar koi jala he
हर सुबह ख्वाबों से रिश्ता टूट जाता है! प्यार का पलकों में गुलिस्ताँ छूट जाता है! खोजता हूँ मंजिलें तमन्नाओं की लेकिन, मुझसे चाहतों का फरिश्ता रूठ जाता है! मुक्तककार- #महादेव’
तेरा ख्याल तन्हा छोड़कर आया हूँ! दीवार-ए-दर्द को तोड़कर आया हूँ! भूला हूँ मंजिलों को वक्त-ए-सितम से, यादों की लहर को मोड़कर आया हूँ! मुक्तककार- #महादेव’
The “getting free” lure …..!. A young family, Mr. John, his wife, two kids, Doing well for themselves, Staying in a small bungalow, Found one morning, Their new car missing, Stolen from garage where it […]
मुन्तजिर हूं मैं मोहब्बत का मयखानों की मुझे तलाश नहीं इक दरिया है जिसे मैं ढ़ूढ़ता हूं पैमानों के जामों की मुझे प्यास नहीं
जिन्दगी भर भटका किये राह-ए-उम्मीद में, कभी पहुँच ही ना पाये दयार-ए-हबीब में, शाम ढ़ल गयी और हम यूँ ही बैठे रह गये, वो आये और जा बस गये निगह-ए-अंदलीब में, क्या […]
न जाने किस पैमाने में तोला करते हैं वो मोहब्बत, लुट गए उनकी वफ़ा में फिर भी न क़ाबिल-ऐ-ऐतबार ही रह गए…
क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. इस रिश्ते की बुनियाद हिलाने की शुरुआत तो मैंने की थी.. छुपकर तुमसे और किसी से पहले बात तो मैंने की […]
Mere jajbaato ko koi nahi samjata yahan Ghayal haalato ki koi kadr nahi kisi ko Ek khyaal tha jo sirf apna tha Ab khyaal bhi log loot ke le gaye
कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरवक्त तेरे दर्द़ से खुद को सताना है! मुमकिन नहीं है रोकना नुमाइश जख्मों की, हर शाम तेरी याद में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #महादेव’
आज कोई भी ले जाये मुझे मै चला जाऊंगा इस दुनिया से लेना देना नही अब से कुछ
खालिस बेमेल है जिंदगी मेरी निखरे हुए है जज्बात मेरे लफ़्ज मेरे एकदम मासूम है मगर फिर भी धोखे देती रहती है जिंदगी
वो पूर्ण शक्ति जब बिखर गया, कण-कण में सिमट गया , तब हुआ इस जग का निर्माण, वो परमपिता सृजनकर्ता जो, नित्य सूर्य बन अपनी किरणो से, नव स्फूर्ति का जीवो में करता संचार, वो […]
ता उम्र मैं इक अनजान सी राह में रहा, जागते हुए भी मैं सफ़र ए ख़्वाब में रहा, वो जिसे पाने को भटका मैं दर बदर ज़माने में, अंत समय में जाना वो मेरी जिस्मों […]
एक जैसे हो गए हैं चेहरे सारे, मेरी आँखों से कहीं खो गया है चेहरा तेरा, मुद्दते बीत गयी हैं सपना तुम्हारा देखे, जागता रहता है हर रोज बिस्तर पर तकिया मेरा, फ़हरिस्त होगी मरने […]
तेरे कदमों की आहट से खुश होती थी माँ तेरी, आज लगे रहते हैं लोग तेरे कदम उखाड़ने के लिए, कोई खुश नहीं होता आज तरक्की से तेरी, लोग मौका ढूंढते हैं आज हर कदम […]
थक कर के बैठ जाऊँ वो “राही” मैं नहीं, आँखों में ठहर जाऊँ वो आँसु मै नहीं, चिराग हूँ माना बुझना है मुझे मगर, रौशन ज़माना जो ना कर पाऊँ वो मैं नहीं, दिखता हूँ […]
दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं! रेंगते ख्यालों में नज़र आती हैं मंजिलें, जिन्दगी में जब भी ख्वाबों के दिये जलते हैं! मुक्तककार […]
मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है? राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है! यादें सुलग रहीं हैं पलकों में लेकिन, तेरा दामन हाथों से छूट गया है! मुक्तककार – #महादेव’
सब शब्दों का खेल है भैया वरना लड़ाई मे तो दोनो ही हारते है
‘हर अश्क सोख लेता है वो आंख से मेरे, रोने भी नहीं देता मुझे, दर्द का सहरा…।’ ………………………………………..सतीश कसेरा
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