Shayari

दर्द है आह! है मोहब्बत में मजा भी तो है
इश्क गुनाह है मुसीबत है सजा भी तो है !
दो दो जिस्म में एक जान है रजा भी तो है
जिन्दगी है यही फिर भी ये कजा भी तो है !!
उपाध्याय…


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2 Comments

  1. Sridhar - July 9, 2016, 9:09 pm

    Bahut sundar

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