इतना भिगो मत मुझको ओ बादल! दल-दल बन न डुबो दूँ, मुहब्बत। खाली-खाली लगूँ या हरी सी हरियाली को बिछा दूँ। चुप ही रहूँ या बता दूँ मुझे है, उनसे जरा सा चाहत। या होने […]

आंखें चुरा कर जाओ भले ही, दिल न चुरा कर जाओ। बिखरे हुए हैं मोती नयन के, उनको जुड़ा कर जाओ। बाहर बरखा बरस रही है, अतर नदी सी पथ में पड़ी है रुकने दो […]

आप कुछ कहें न कहें, सब कुछ कह जाती हैं हमसे, आपकी ख़ामोशियाँ। ख़ुशियों का इज़हार भी करती और बता देती हैं आपकी परेशानियाँ, आप कितना भी छुपा लो, ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा […]

आप कुछ कहें न कहें, सब कुछ कह जाती हैं, आपकी ख़ामोशियाँ। ख़ुशियों का इज़हार भी करती और बता देती हैं आपकी परेशानियाँ । आप कितना भी छुपा लो, ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा […]

रिश्वत ————— रिश्वत लेकर ही काम करते हैं कुछ लोग और धर्मात्मा बनते हैं कुछ लोग यूँ उछल उछल कर अपने परोपकारों का गाना गाते हैं करते धरातल पर कुछ नहीं परंतु डींगे बड़ी बड़ी […]

यादों का तो काम है चले आना हमारा काम है उन जलते दीपकों को बुझाना बुझा दो उन तमाम यादों के टिमटिमाते चिरागों को जला लो दिल में नए खयालों को भूल जाओ और छुपा […]

रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं, अखियाँ तुझे देखन को तरसीं। बिजली चमक रही है चम-चम, बरस रहा है पानी छम-छम। नभ में काली बदली छाई, शीतल पवन याद ले आई। सूर्य नहीं आज अम्बर में, […]

जब प्यास से व्याकुल होकर धरती चिल्लाती है चट्टानें भी रो पड़ती हैं अपनी आंखों से झरना बहा देती हैं तब लगता है पत्थर भी पिघलता है मां जब बेटी की विदाई के बाद दीवार […]

आर्यन सिंह के मोहब्बत के रास्ते मे इम्तिहानो का सिलसिला दर्शाती ये नई कविता “- फंसा इश्क के चक्रव्यूह मे मिलता ठौर नही है सभी विरोधी हुए आज कोई मेरी ओर नही है नही किसी […]

दिल से नहीं निकली, तेरे चले जाने की बात। सुकून से नींद नहीं आई किसी रात। बुरा वक्त बीत जाता है , यही सुनते आए थे.. हमारा नहीं बीत रहा है, कैसे हुए हालात। ऑंखों […]

टिप-टिप करती हुई बूंदे मन को बहुत भा रही हैं बूंदों की बौछार के साथ तेरा पैगाम ला रही हैं बिजलियों की गड़गड़ाहट सता रही है हमको, पर तेज हवा के झोंके तेरे आने के […]

धन्न्न पैसा त्यर कमाल कस्स्ये बतूं त्यर हाल जों ले जांछे वों बबाल धन्न्न पैसा त्यर कमाल जब ऊंछे तू देश बटी तू भले क्वे जिन भैटे त्वै के हाल्छया सब अंग्वाल धन्न्न पैसा त्यर […]

आँख मलती जग रही बिटिया मुँह बनाती | ठप्प दुकान नहीं कोई ग्राहक बुरा समय | गलियाँ तंग आवाजाही हो रही चुभे दीवार | अशोक बाबू माहौर

इस दीर्घ रचना के पिछले भाग अर्थात् बारहवें  भाग में आपने देखा अश्वत्थामा ने दुर्योधन को पाँच कटे हुए नर कंकाल  समर्पित करते हुए क्या कहा। आगे देखिए वो कैसे अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य के अनुचित […]

उदास रातों को जगा कर और थोड़ा चांद निचोड़ कर दिन में उजाला भर दिया पंछियों की आवाज सुनाई दी है किसी ने सुबह का आगाज़ कर दिया, यूंँ तो रोज सुनाई देती है शहनाई […]

पियक्कड़ों के शहर में शरबत ढूंढ रहा हूं खारे सागरों से मीठा पानी पुकारता रहा हूं अपने हाथों से अंजुली भर के पानी पिलाती हो मुझे मैं वही छोटा सा तालाब अपने घर रोज चाहता […]

आहिस्ता-आहिस्ता मौसम बदल रहा है। एक शीतल पवन का झोंका मुझसे बोल रहा है.. ‘मुझे तेरा ताप है कम करना’, फिर ना ऑंखें नम करना। हिय में छुपाकर ग़म अपने, तुम धीरे-धीरे कम करना । […]

तुम नमकीन थी मैं चाय था दोनो एक प्लेट में आकर मिलते थे वहीं से हमारी गुड मॉर्निंग शुरू होती थी बगल वाली प्लेट के बिस्कुट हमें देख जलते थे, इतना जलते थे कि वहीं […]

अश्क ने नैनों से बहकर होंठ पर संगम किया पत्थरों ने बिन कहे ही प्रेम का वर्णन किया। ताप बढ़ता ही गया जब कक्ष के भीतर हृदय के आपने मुस्कान देकर ताप में चंदन दिया।

“रोटी” —————– तप्त अंगारों से नहा कर आई हूँ मैं ठंडक की आस मिटा कर आई हूँ मैं बुझा लो अपनी जठराग्नि को तुम्हारी ही छुधा को शांत करने आई हूँ मैं मेरे ही कारण […]

हिमाचल के इस मंदिरों के ज़रूर करें दर्शन, मिलेगा सभी कष्टों और दुखों से छुटकारा जय बाबा धुंन्धेशवर महादेव हिमाचल की खूबसूरती को तो सभी जानते हैं| मगर हिमालय की गोद में बहुत से मंदिरों […]

सब तरफ हरा-भरा है खूब रौनक सी सजी है, फूल-पत्ती की छठा, रोज बढ़ने में लगी है। है उसे भी आस सावन जल्द आयेगा, तृप्त करने प्यास हिय की नीर लायेगा। बीज से अंकुर उग […]

बीती बातों को याद कर, मत कुरेदना अपने घावों को। ह्रदय में ही रहने देना, अपने हृदय के भावों को । मरहम नहीं लगाती दुनियाँ, मरहम की मत करना आस। केवल ज़ख्म देखना चाहती है, […]

समय तो है निरंतर गतिमान आओ वक्त के साथ चलें । घंटों खड़े होकर आईने के सामने सूरत को ही क्यों सजाते रहते आओ अपनी सीरत को भी हम निखारतें चलें । आओ वक्त के […]

हे कवि, तुम लिखना मत छोड़ना कोई कुछ भी कहे कभी कलम मत तोड़ना l तुम से ही सीख ले रहा, यह सारा संसार है अपने गीतों से जग दिखलाना, तुम्हारे कांधे पर भार है […]

भूखा गरीब का बच्चा अपने गरीब पिता से कहा पापा बहुत भूख लगी है कहीं से रोटी ला दो हमारी पेट की आग बुझा दो पिता ने कहा -बेटा, चारो तरफ करोना के क़हर है […]

चढ़ा आषाढ़ श्याम घन घिर आए, आ कर खूब नीर बरसाए। किसी अपने के बिछोह में, नैन नीर मेरे भी आए। ऑंचल भीगा, नयन भी भीगे, यादें आईं अपार। इधर मेरे नैना बरसे, उधर गिरी […]

आज एक नयी धुन लगी मेरे मोबाइल को बोला आज याद आ रही है चिट्ठी अम्मा की मिलने की जिद पकड कर के निकला पडा जेब से तड़के चल पड़ा किसी पुराने कमरे की ओर […]

तेरे एक इशारे पे जो तू चाहे मैं वो ले आता तेरे जीवन के अंधेरे मिटाने को सौ जुगनुओ से उजाला चुरा ले आता तेरे बंजर पड़े खेतों में अपनी आँखों से बरसात करा देता […]

इस दीर्घ रचना के पिछले भाग अर्थात् ग्यारहवें भाग में आपने देखा कि युद्ध के अंत में भीम द्वारा जंघा तोड़ दिए जाने के बाद दुर्योधन मरणासन्न अवस्था में  हिंसक जानवरों के बीच पड़ा हुआ था। आगे […]

हावी होने लगता हैं कुछ थोड़ा पाकर ही चाहे वो धन/पद/शोहरत हो, कमतर को पांव की जूती समझ अभिलाषा करता हैं राज्य करने की, और विपन्न व्यक्ति अपने अधूरेपन को गाता हुआ अन्तस की कांति […]

कैसे बांध बनाऊँ नयनों में, अन्दर से सैलाब है आया कैसे भूलूँ तेरी यादों को एक माँ का मन यह जान न पाया जुल्म हुआ है…. एक माँ के जीवन में, कैसा दर्दनाक दिन दिखलाया॥ […]

फिर एक राही मंजिल से भटक गया। सभी उम्मीदें पल में ही टूट गया।। थी जुस्तजू उसे अपना भी कारवाँ होगा। मुकद्दर के पन्नों पे अपना भी नाम होगा।। वक्त ने ऐसा पैंतरा बदला ए”अमित”। […]

बिरोध के फूल खिलें हैं माशूम की निगाहों में मजे करने की चाहत दफन हुई कैदखाने में बच्चे का अधिकार दया बंद जनक के खाने में ऊंची उड़ान की चाहत गुम क्यूं हुई मयखाने में […]

यूँ तो ख़ामोशियों की कोई ज़ुबान नहीं होती लेकिन… प्रेम में ख़ामोशियों को समझना बहुत मायने रखता है l अगर एक दूजे की ख़ामोशियों को भी नहीं समझ पाए तो…. लफ्ज़ तो लफ्ज़ हैं, कितना […]

जब अपनी ख़ामोशियों में, सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ सुकून के कुछ पल, महसूस करती हूँ यहाँ l सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा, मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता…. बेचैन सी इस ज़िन्दगी […]

ये कौन चित्रकार है जिसने रंग बिखेरे नभ में इन रंगों से प्रेरित होकर गीत आ गए मेरे लब पे हरे भरे वृक्ष बनाकर यह सुन्दर संसार रचाया हृदय में इतना प्रेम भरा क्यूँ, कोई […]

तेरे दीवानों में नाम मेरा भी शुमार न हो ये कैसे मुमकिन है तुमसे मुझे प्यार न हो। एक लम्हा भी ऐसा मेरा गुज़रता नहीं, कि मैं सोचूँ तुम्हें और मुझे ख़ुमार न हो। मेरी […]

छुपाकर ही रखना बेबसी, मानुष ! दिल ए इज़हार मत करना, कर लेना बातें,परछाईं से अपनी, जमाने को दीदार मत करना, और बैठे हैं लोग खोल कर कानों को, दर्द ए इक़रार मत करना, माना […]

ऐ ढलती शाम, ऐ लालिमा बड़ा ताज्जुब है मिजाज के ऐसा तू कभी रंगीन न था बला तो सही उनके दीदार के बाद तू इतना रंग बिरंगी कैसे हो गया। सूरज तो बेचारा इमान से […]

इस दीर्घ कविता के दसवें भाग में दुर्योधन  द्वारा श्रीकृष्ण को हरने का असफल प्रयास और उस असफल प्रयास के प्रतिउत्तर में श्रीकृष्ण वासुदेव द्वारा स्वयं के  विभूतियों के प्रदर्शन का वर्णन किया गया है।अर्जुन […]

नभ में बादल घुमड़ रहे हैं, पंछी भी इधर-उधर उड़ रहे हैं l वृक्षों की ड़ाली पर बैठी, कोयल कुहू-कुहू करती l लगता है बरखा आएगी, धरा की प्यास बुझा जाएगी l पेड़-पौधे सब झूम […]

गर कोई मुझसे पूछे कभी बता मन तेरा बसता है कहीं झट से मैं बोल दूं मगधेश की गौरवमई परम्परा समेटे है जहां बस वहीं।। भोले भाले लोग जहां के मेहनत नस नस में है […]

जुलाई की शुरुआत है कहाँ खोई सावन की बरसात है ? तन पर लिपटे कपड़े सर्प के समान लगते हैं झोपड़पट्टी वालों का तो और भी बुरा हाल है। रूखे रूखे पत्ते हैं डालियाँ मुरझाई […]