कर्म ही जीवन का सार, कर्म ही प्राणों का आधार कर्म करते हुए हो इच्छा, सौ वर्ष तक जीने की कर्म नहीं तो इस दुनियां में जीना है बिल्कुल बेकार कर्म,परिश्रम नहीं हुआ तो, जीवन […]
कर्म ही जीवन का सार, कर्म ही प्राणों का आधार कर्म करते हुए हो इच्छा, सौ वर्ष तक जीने की कर्म नहीं तो इस दुनियां में जीना है बिल्कुल बेकार कर्म,परिश्रम नहीं हुआ तो, जीवन […]
करेला हूँ मगर इतना भी कड़वा मत समझना तुम, जरा सा भून लेना फिर नमक के साथ लेना तुम। हवा की कुछ नहीं गलती उसे क्यों दोष देते हो, जरा मेहनत करो बहती हवा को […]
सीख…. एक कीट पतंगा दिख रहा था अद्भुत मैं, उसको लख रहा था वह धीरे से उड़ चला , और प्रकाशित हो गया , पाठ एक पढा़ रहा था हाँ,मुझको बता रहा था गति ही […]
जिन्दगी में भले ही हमें आलसी लोग काफी दिखें, पर कई इस तरह के हैं कर्मठ अंत तक काम करते दिखे। एक काकी है दुर्बल मगर ऊंचे-नीचे पहाड़ी शहर में, सिर से ढोती है भारी […]
धर्म ईमान -इन्साफ को मानकर आदमी बनकर तुम जगमगाते रहो त्याग से ही मनुज बन सका देवता देवता बन सबों में समाते रहो || न घबराओ तुम संघर्षों से कभी तूफानों में भी उगता तारा […]
काव्य-गोष्ठी का हुआ, कार्यक्रम, शानदार सावन का धन्यवाद है, आयोजन किया है पहली बार सावन कवि सतीश जी ने, लिया संचालक भार कविताओं की गूंज उठी मधुर झंकार सभा सजी सहज सुंदर बज उठे सितार.. […]
मुखौटे लगा कर, आए हैं कुछ लोग महफ़िल में आज का, मज़मून क्या है.. *****गीता
उज्ज्वला का सिलिंडर सबको मिला, सब खुश थे, मगर वो रात भर सो न पाई। यह सोचकर कि – कोई मेरा नाम भी लिस्ट में जोड़ देता एक वोट तो मैं भी थी उसकी आंखें […]
उस गरीब माँ का अब अंत्योदय राशनकार्ड से नाम कट गया है, क्योंकि उसका बेटा पिछले महीने अठारह बरस का हो गया है, औऱ उसने आठ सौ का मोबाइल भी खरीद लिया है। डेरी से […]
वह पत्थर तोड़ती थी पर दिल की कोमल थी अपने सीने से लगाकर बच्चों को रखती थी भूँख जब लगती थी उसको तो बासी रोटियाँ पोटली से निकाल कर खा लेती थी पर अपने बच्चों […]
तहे-दिल से शुक्रिया ! मोहब्बत में जो रुसवा किया तुमने, ————————————————- हम तो बर्बाद हो जाते जो थोड़ा प्यार दे देते…
तुम्हारे लिए ही तो गजल, नज्में लिखती हूँ मैं मैं तो कुरान में भी पढ़ती हूँ तुम्हें | तुम्हें खो देने का खयाल इतना तड़पा देता है मुझे रात को जब भी आँख खुलती है […]
तुमसे दूर जाने के बहाने बहुत हैं साहब!! ————————————————- पर तुम्हारे पास आने के बहाने ढूंढते हैं हम
ये बेचारा दिल बस तुम पर मरता है पागल है जो तुमसे इतना प्यार करता है तुम्हारी बेरुखी से तो मौत अच्छी है पर ये दिल एक तेरी ख्वाहिश में धड़कता है…
भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल | होत रहे ज़ोर सरेआम अबला केहु मान बचावल ना गइल | ले लिहस कातिल जान केहु पानी आँख बहावल ना गइल | जात धरम देख करे राजनित, ई केवन […]
नजारा गजब दिखा किसी ऊँचे रसूख की पार्टी में, बचा हुआ खाना सामने के कूड़ादान में फैंका गया, कुछ उसके अंदर पड़ा कुछ सड़क गिरा, फिर जानवरों द्वारा इधर उधर फेंटा गया, सुबह वहां पर […]
करीब पांच बरस के राज के आंखों में उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं दिख रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे उस कूड़े के ढेर में कोई खजाना हाथ लग गया था। थैली लेकर […]
आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं तेरी बेरुखी से हैरान-सी हूँ मैं जमीं पर पैर भी नहीं रुकते तितलियों के पंख भी रचते खाली मैदान-सा है दिल मेरा जहाँ परिंदे भी नहीं बसते दिल के फैसलों […]
स्वयं टूटकर स्वयं जुडूँगा सब कुछ अपने आप करूँगा। विगत दिनों जो भूलें की हैं उनका पश्चाताप करूँगा।। मेरी त्रुटि थी किया भरोसा मैंने अपने यारों पर। समझ न पाया पग रख बैठा मैं जलते […]
कविता- प्रेम से भिक्षा —————————- प्रेम है शिक्षा, प्रेम से भिक्षा, प्रेम ही सब कुछ , बिना प्रेम नहीं- जग मे जीने की इच्छा| प्रेम ही देखो, युद्ध कराये, प्रेम ही देखो, बुद्ध बनाये| मातृभूमि […]
है गम नहीं कि, खर्च हो रहा हूँ, जिंदगी के सारे, मर्ज ढ़ो रहा हूँ, ज़रा मुगालते में था अब तक। अब सिर्फ अपने, सपने जी रहा हूँ.
जब याद तुम्हारी आती है दिल यादों में खो जाता है आँखों में उमड़ते हैं बादल जी मेरा घुट घुट जाता है || प्यार की सूनी गलियों में हर वक्त भटकता रहता हूँ जिन राहों […]
आज मन में विचित्र-सा खयाल आया मेरा मन दुःखा और भर आया क्यों सदियों से प्रेंम की परीक्षा होती है क्यों पुरुष के पीछे स्त्री रोती है होती क्यों है हमेशा एकतरफा मोहब्बत क्यों कृष्ण […]
कभी सुख,कभी दुख यही देती है ज़िन्दगी स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है, ऊपर, नभ में कुछ नहीं है ये धरा है , माया नगरी, स्वर्ग के दर्शन हों कभी, कभी नर्क भी दिखे यहां […]
पापा! दिवाली आने वाली है इस बार धनतेरस में क्या लोगे? हवेली वाले दोस्त के पापा उसके लिए गियर वाली साईकल ले रहे हैं। पड़ौस के दोस्त के पप्पा, उसके लिए बिग कार ले रहे […]
गम न झेल पाया नशा आजमाया, दायित्व को स्वयं के निभा न पाया नशा आजमाया, बुरी संगतों में पड़कर तूने नशा आजमाया। नशे पर फिर तूने सब कुछ लुटाया, बाद में नशे ने तुझे गटर […]
करता है कौन, किससे प्यार यहाँ ? प्यार तो है दो दिलों का व्यापार यहाँ… जिसमें अपनी पूंजी कोई और लगाता है पर उसका मुनाफा कोई और उठाता है…
वो आज कहने लगे हमसे लौट आओ फिर से मेरी जिन्दगी में बहार लौट आएगी… मैंने एक धुन में कहा- मैं गुजरा वक्त हूँ साहब जो घड़ी बीत गई फिर ना लौट आयेगी…
भावना सद्भावना ( 12-मात्रा ) स्वच्छंद वितान में मानवीय विधान में शब्द की झंकार में गीत मधुर सुहावना भावना सद्भावना ..। तन में दिव्य शक्ति हो दिल में प्रेम भक्ति हो सदा मित्र के भाव […]
बुढापा हो, औऱ उस पर बीमारी हो, औऱ कोई सहारा भी न हो, जेब में दो कौड़ी भी न हो, सड़क के किनारे पड़ा हुआ शरीर हो, उसे देखकर यदि आपका मन आपको झकझोरता है […]
गर किसी को वफा क्या है पता है तो गनीमत है, अर्थ क्या है मुहोब्बत का, पता है तो गनीमत है। पेट अपना भरा हो खूब जब स्वादिष्ट भोजन से, भूख फुटपाथ पर बैठी पता […]
गलती उसकी कुछ नहीं थी कुदरत की करामात थी, बाजार में कालिया के इस बार बारह बच्चे हो गए। अब उनकी परवरिश में लग गई, सभी को दूध पिलाना, उतनों के लायक दूध बने ऐसा […]
एक दिल कहता है, फिर एक मर्तबा किसी से इश्क़ कर। दूसरा दिल कहता है, ए नादान पुरानी दास्तां से तो डर।।
बच्चे दिए थे उसने चार बच्चे, रात को ठंड थी, चूँ चूँ, कूँ कूँ कर रही थी वह एक बार भौंक भी दी दर्द में, सामने के भवन में सो रहे आदमी की नींद में […]
चल घटा जो हुआ इश्क़ में, शायद अच्छा ही हुआ। कम से कम नादान दिल, तीर ए नजर से तो बचा।।
मुहब्बत में मुकाम तो मिलता है मुकद्दर वालों को। हम बेवजह ही आज़माए अपनी सोए मुकद्दर को।।
ले लो ना खीरा ले लो, चटपटा नमक लगा खीरा, मसालेदार चना ले लो, ले लो जी, गुब्बारे ले लो, रंग बिरंगे गुब्बारे। आप लोगे हमारी मजबूरी का समाधान होगा, आप खीरा, चना लेंगे, हमारी […]
लड़के!! 20 नम्बर की चाबी ले आ, जा उस गाड़ी के नट खोल, टायर में हवा भर, जा मोबिल ऑयल ले आ, उस गाड़ी में ग्रीस कर ले। औजार निकाल, औजार संभाल, जा ग्राहकों को […]
इस गली में नजारा रोज दिखता है, प्लास्टिक की थैलियों में भर कर फैंका हुआ दाल-चावल हर रोज दिखता है। खुशबू आती है, सोचता है गरीब मन, खुदा भी किस तरह की किस्मत लिखता है, […]
माँ!! इतना बूढ़ी होने के बाद भी तुम इतनी परवाह करती हो मेरी, खाया या नहीं, रात को ठंड हो रही है कम्बल ओढ़ लेना अच्छी तरह। पहुंचते ही फोन कर देना, अच्छे से जाना, […]
कभी हँसना कभी रोना सिखाती है जिन्दगी दो राहगीरों को पास लाती है जिन्दगी जब प्यार में पड़कर तड़प उठते हैं दो दिल क्या बताऊं कितना मुस्कुराती है जिन्दगी…
कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..
क्या कहें अब जब तू खफा ‘मैं फकीर और तू खुदा’ इबादत में तेरी मिट गया मेरा मजहब और मेरा खुदा…
ऐ खुदा ! क्यों है तू खफा किस बात की तू मुझे देता है सजा मेरा मुकद्दर रूठा मुझसे हमदम हुआ जबसे जुदा…
मेरे जज्बातों की कद्र कभी नहीं की उसने फकत आँसुओं की सौगात दी उसने हम उसी की खातिर मिट गये यारों! मेरे वजूद की कभी ना फिक्र की जिसने…
आहटें आती रहें, सदा उनके आने की सदाएं भी सुनती रहें, सदा उनके गाने की मैं नज़्म लिखती जा रही थी, फ़कत पन्नों पर, यही तो बात है लफ़्ज़ों के मुस्कुराने की.. *****✍️गीता
भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं…
पैर जमीं पर ही रहने दो मेरे क्योंकि अक्सर आसमान की ऊंचाइयों से अपने दिखाई नहीं पड़ते…
थोड़ी देर के लिए थम गई थीं साँसें जब रुक गया था वो चलते-चलते, मुड़कर देखा एक बार जब उसने हम सहम गये और मध्यम हो गई साँसें.
ज़िन्दगी का सफ़र है, कभी कड़वा कभी सुहाना मिलते हैं अच्छे दोस्त यहां, कभी दुश्मन भी मिले माना पर तू चल अपनी राह पथिक, ज़िन्दगी है, सब चलता है कभी भला लगे, कभी खलता है […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.