इश्क़ ने हमें बर्बाद किया; फिर भी दिल ने; खुद को आबाद किया।-२ अरे! ना आती है , तो ना आए ! नींदें रात को, मैं भी चौकीदार ! गर्व से! मोदी जी को याद […]

सावन पर इतना सन्नाटा, ना देखा पहले कभी क्या हुआ, ये क्यूं हुआ, कहां चले गए सभी सावन सूना सा है, कवियों कलम उठालो फ़िर से भर दो रंग अपनी कलम से, फ़िर से सभा […]

जब चारों ओर अंधेरा हो, किसी डर ने आपको घेरा हो छोड़ के उस डर को, आगे की जीत का सोचो जो ख़्वाब सजाए थे कभी, आपने अपने अपनों के लिए उन ख़्वाबों की ही […]

जिस वतन का खाना खाते हो, डाल के अपनी थाली में आज उसी वतन के हित की खातिर, उसी वतन की मिट्टी के, दीए जलाना अबकी बार दिवाली में चीन की लड़ियां नहीं जलाना, सरहद […]

शस्त्र उठा लो अब सीते, श्री राम नहीं आएंगे करनी होगी खुद अपनी रक्षा, श्री रघुनाथ नहीं आएंगे शस्त्र उठा लो हे द्रौपदी, श्री श्याम नहीं आएंगे सभा में अपने भी,अपने ना रहे बिगुल बजा, […]

सोंच समझकर कदम बढ़ाओ राह बहुत पथरीली है। साथी मीठे सुर गुंजाओ, दुनियाँ तो जहरीली है।। ख़ुशी परायी देख ख़ुशी से किसका हृदय मचलता है। कौन हृदय है जिसके भीतर प्रेम- पपीहा पलता है। बिना […]

मेरा नाम बाबूजी ने, बड़े लाड से रखा था बेला…… मेरे जन्म पर एक पौधा भी रोपा था, बेला का….. बेला के फूल की तरह, खिलती रही, बढ़ती रही यौवन की दहलीज चढ़ती रही, बेला […]

कभी अकेला महसूस हो तोह शायरों की बसती जाओ जनाब किसी का प्यार पूरा नहीं पर बात वह मोह्बत की करते है जिनके प्यार को समाज ने ना अपनाया बात वह दिलों को जोड़ने की […]

अजीब है यह दुनिया जिनोंहने बात बैर की की, लोगों को बाटने की की बात वह राम राज्य की करते है जिनके बिरियानी खा कर हम लखनऊ की नवाबी ठाठ के गुण गाते है बात […]

कविता-अपनी भूख मिटाने के लिए ——————————————— भूख मिटाने के लिये, परिवार चलाने के लिए, लेबर चौराहे पर जाते हैं, आतें हैं मालिक कई मजदूरी की मोल भाव करते हैं | मजदूरी मिलती ना, गाली मिल […]

किसी का कोई हमसफ़र, कहीं खो जाए अगर तो ज़िन्दगी की ख़ुशी के लिए, उसे ढूंढ़ कर ले आएं घर गलती किसकी है, किस से हुई, ये सुलझ ही जाएगा मगर, खो ना जाए , […]

तपकर धूप से मुझमें निखार आया है, शोलों पर चलकर अब सम्हलना आया है। कायनात में लिखूँगी अपने प्यार की कहानी, जुनून से अपने अब यह विश्वास आया है।

*****हास्य-रचना***** परदेस में कहते हैं मेरा बेटा प्यार में है युवा हो गया है.. किसी के प्यार में पड़ गया भारत में कहेंगे, सुनती हो.. मैं तो शर्म से गढ़ गया अपना ये बरखुरदार, किसी […]

ज़िन्दगी मोहब्बत के बिना, नहीं चलती है एक साथी है जरूरी, ना हो किसी का कोई, हमसफ़र, तो उसकी कमी खलती है हमसफ़र की आंखों में, दिखें चांद-सितारे आंखें आइना हैं, मोहब्बत का ज़िन्दगी जी […]

झरने झर-झर बह रहे थे, समीर के शोर कुछ कह रहे थे कितना आनन्द आता होगा उन्हें, जो यहां पे रह रहे थे ये सोचती-सोचती मैं चली जा रही थी, वहीं कहीं अंदर को, एक […]

बदनाम हो गये ———————— बदनाम हो गये जमाने के नजरों में, वजूद खो दिया खुद का उसे मनाने में, इल्जाम लगता है इसे कोई और मिल गई, क्या पता उसे – रोते-रोते मेरी जिंदगी खाक […]

तस्वीर में नाचती थी वो, रात को घुंघरू बजते थे गीली मिलती थी दीवार सदा, उसके आंसू उसे भिगोते थे चूल्हे पे बनाती रोटी मां, उसकी, ये तस्वीर बना देता सोचती रहती थी वो, उस […]

पनघट से पानी लाती नारी की तस्वीर सजाली कमरे में, उस रईस ने ये कभी ना सोचा, ये कौन से गांव की है । *****✍️गीता

आज वो नज़र चुराए बैठे हैं, जज़्बात अपने छिपाए बैठे हैं, हमसे छिपा ना पाएंगे जज़्बात लेकिन, जाने क्यूं शर्त लगाए बैठे हैं .. *****✍️गीता

वो हुनर में हमारी बराबरी करने चले थे अरे ! वो नासमझ हैं ये क्या करने चले थे हमने तो तबाह कर दिया खुद को मोहब्बत में तब जाकर लिखना आया है वो तो जल्दबाजी […]

उनका नंबर भी है और मुलाकात के सिलसिले भी होते रहते हैं मुकद्दर ऐसा है हम फिर भी रोते रहते हैं बात सदियों से नहीं हुई उनसे ना हम उनकी तरफ देखते हैं आ भी […]

जितने बदले नंबर तुमने —————————— जितने बदले नंबर तुमने हर नंबर तेरा मिल सकता , स्वाभिमान है बीच में आता है, क्योंकि तुने ही मुझे ठुकराया है, मत सोच हमें कोई नहीं मिल सकता, पहले […]

जो कर सकता है उसने उनकी मदद करनी ही होगी, जो कड़कड़ाती ठंड में भी खुले में सोते हैं। छोटे छोटे बच्चे ठिठुरते हैं तो भीतर ही भीतर रोते हैं। आने वाला है ठंड का […]

यादों में रहेगी —————— बेचैन सा रहता हूं, बन पागल फिरता हूं, मिल जाए मुझे पुनः, हर रोज दुआएं करता हूं, मान दी हमने कई मन्नते, कभी मस्जिद में भी चादर चढ़ाया करता हूं, खुदा […]

तकिया ————- रोती रही कईयों दिन तक, दोस्त खबर भी देते रहें, हम भी रोते घर बैठे, जब कोई पूछे हाल मेरा, झूठी हंसी दिखाते रहें, कब सोया कब जागा हूं, मैं जानू या रात […]

मैं थककर चूर थी जा बिस्तर पर लेटी थी साँसें तेज थीं बदन में अकड़न थी आँखें अधखुली थीं शायद नींद थी कुछ पुरानी-सी यादें कर रही बेचैन थी वो बहुत देर से देख रहा […]

भूल नहीं सकते ———————– भूल नहीं सकते वो रातें, वो मनहूस घड़ी थी या मेरी किस्मत फूटी, एक नादानी से जंग छिड़ी, जब से बिछड़े ना कभी मिले, कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका, […]

*******हास्य – रचना******* वो बाहर आना चाहता था, पर कुछ था.., जो उसको रोकता था कोई तो था.., जो उसको टोकता था कोरोना काल में , व्याधि के इस हाल में सब घर में ही […]

विद्यालय से अवकाश लेकर, हमने बहुत आराम किया सारे ताम-झाम से मुक्ति लेकर, कल, ना कुछ भी काम किया बचपन की एक सखी से, दूरभाष पर बात करी कुछ अपनी कही, कुछ उसकी सुनी ख़ूब […]

बीत गईं लाखों शामें पर ना भूली वो रात अभी तक | तुमने छोंड़ दिया था जिस पथ पर मैं बैठी हूँ उस राह अभी तक | तुम हो धड़कन तुम ही हो दिल मेरा […]

वो जाते-जाते एक सबक सिखा गया कि कोई किसी का नहीं होता और कोई किसी के लिए नहीं रोता चार दिन का मेला है ये जिन्दगी ना कोई किसी के साथ जाता ना कोई किसी […]

करो कुछ भी मगर मजबूर पर हँसना नहीं अच्छा, किसी का दर्द बढ़ जाये ये सब करना नहीं अच्छा। करो कुछ भी मगर मजबूर पर हँसना नहीं अच्छा, किसी का दर्द बढ़ जाये ये सब […]

शरद पूर्णिमा का चांद आया झिलमिल सितारों को लिए, खीर भी बनाई है कल चाव से सब खाएंगे, वो अमृत-रस बरसाएगा सौभाग्य देकर जाएगा सुन्दर सजीला चांद शरद का, आंगन में रौनक ख़ूब लगाएगा । […]

सुन्दर चमकता चाँद देखेंगे शरद का आप हम छत पर चलेंगे रात के नौ-दस बजे के बीच हम। मांग लेंगे चाँद से दाम्पत्य जीवन में बहारें, चाँद की सुन्दर चमक को आप हम खुद में […]

रंग दो अपने दिलों को, कुछ इस कदर प्यार से कि जैसे रंगा हो आसमां, शाम की बहार से ना कोई द्वेष हो मन में, ना कोई दुर्भावना स्नेह ही बरसे, चहुं ओर, हो प्रेम […]

किया है प्यार तो इकरार से इन्कार क्या करना। है मरना शौक़ बचने का जतन बेकार क्या करना। तेरा आगोश ही मझधार बनकर गर डुबाता हो, तो आशिक़ दिल ये कहता है कि दरिया पार […]

कविता- अपना इलाहाबाद ———————————– दिन भर टहल रहे थे, पार्क सहित संगम में, देख दशा हम शोक में डूबे, अपना इलाहाबाद है ऐसा| एक तरफ तो न्यायालय है, एक तरफ संगम है, एक तरफ तो […]

कागज़ की कश्ती चलती थी कागज़ का जहाज़ भी उड़ता था, थे अमीर बहुत तब हम, वो बचपन कितना, अच्छा था सखियों संग ,उपवन में जाकर आंख-मिचौली खेली थी, स्वादिष्ट बहुत लगता था वो आम […]

इस भ्रामक दुनियां में, बनूं आशा की किरण अन्दर ही अन्दर आहत हुई, फ़िर भी मैं, मुस्काती हूं कोमल हूं, कमज़ोर नहीं हूं, खुद को ये समझाती हूं राह कितनी भी कठिन हो, देखना चाहती […]

भाग्य भरोसे भूल से, नहीं बैठना है मनुज प्रभु भी करते हैं, उनकी ही मदद जो अपनी मदद, आप, किया करते हैं.. यहां “आप” शब्द का प्रयोग सर्वनाम में किया गया है, जिसका अर्थ “स्वयं” […]