माँ!! इतना बूढ़ी होने के बाद भी तुम इतनी परवाह करती हो मेरी, खाया या नहीं, रात को ठंड हो रही है कम्बल ओढ़ लेना अच्छी तरह। पहुंचते ही फोन कर देना, अच्छे से जाना, […]
माँ!! इतना बूढ़ी होने के बाद भी तुम इतनी परवाह करती हो मेरी, खाया या नहीं, रात को ठंड हो रही है कम्बल ओढ़ लेना अच्छी तरह। पहुंचते ही फोन कर देना, अच्छे से जाना, […]
कभी हँसना कभी रोना सिखाती है जिन्दगी दो राहगीरों को पास लाती है जिन्दगी जब प्यार में पड़कर तड़प उठते हैं दो दिल क्या बताऊं कितना मुस्कुराती है जिन्दगी…
कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..
क्या कहें अब जब तू खफा ‘मैं फकीर और तू खुदा’ इबादत में तेरी मिट गया मेरा मजहब और मेरा खुदा…
ऐ खुदा ! क्यों है तू खफा किस बात की तू मुझे देता है सजा मेरा मुकद्दर रूठा मुझसे हमदम हुआ जबसे जुदा…
मेरे जज्बातों की कद्र कभी नहीं की उसने फकत आँसुओं की सौगात दी उसने हम उसी की खातिर मिट गये यारों! मेरे वजूद की कभी ना फिक्र की जिसने…
आहटें आती रहें, सदा उनके आने की सदाएं भी सुनती रहें, सदा उनके गाने की मैं नज़्म लिखती जा रही थी, फ़कत पन्नों पर, यही तो बात है लफ़्ज़ों के मुस्कुराने की.. *****✍️गीता
भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं…
पैर जमीं पर ही रहने दो मेरे क्योंकि अक्सर आसमान की ऊंचाइयों से अपने दिखाई नहीं पड़ते…
थोड़ी देर के लिए थम गई थीं साँसें जब रुक गया था वो चलते-चलते, मुड़कर देखा एक बार जब उसने हम सहम गये और मध्यम हो गई साँसें.
ज़िन्दगी का सफ़र है, कभी कड़वा कभी सुहाना मिलते हैं अच्छे दोस्त यहां, कभी दुश्मन भी मिले माना पर तू चल अपनी राह पथिक, ज़िन्दगी है, सब चलता है कभी भला लगे, कभी खलता है […]
दुनियां में किसकी मौत और किसकी जिन्दगी है जिन्दगी ही मौत और मौत जिन्दगी जीवन मिला तो तय है ,मरना भी पड़ेगा हम सबको एक राह ,गुजरना ही पड़ेगा || जीवन तो खाना -वदोश है […]
एक बहू अपनी सास को हमेशा भला बुरा कहा करती थी। सास चुपचाप रह जाती थी। क्योंकि उसका पति नहीं था। एक बेटा भी था तो वह बीवी के गुलाम बन कर ऐश की ज़िन्दगी […]
भोजपुरी गजल – जिनगी अब जहर भइल | तोहसे प्यार भइल घाव अब कहर भइल | खा के धोखा आशिक एहर ना ओहर भइल| रूप के चाँदनी मे प्यार के आसरा खोजली | रूप मिलल […]
हार हुई आज नारी की, चढ़ी भेंट दुराचारी की सारे-आम कत्ल कर गया, ना आई उसे कुछ दया बेहया घूम वो रहा है, समाज क्यूं सो रहा है मानवता मर रही है, दानवता फली फूलती, […]
कोई उसे जान से भी ज्यादा चाहा था किसी बेवफा को। उसने पल में ही तोड़ दिए सपने हंसते हंसते किसी को।।
ए मेरे दोस्त मुझे यह गम नहीं कि तुम मेरे न हो सके, गम तो इस बात की है कि तुम मुझे कभी समझ न सके।
18-हँसना मेरी मजबूरी ( मुक्त छंद 16 मात्रा ) फूलों में आज सुगंध नहीं खुशियों का कोई भाव नहीं न चेहरे पर मुस्कान कहीं पर हँसना मेरी मजबूरी..। विनय रूप कायरता बनती आंखों से जलधारा […]
आपने भाग १ में पढ़ा – (राम उसे देख कर बुरी तरह से डर गया। वह बांध के नीचे से रास्ते के तरफ आ रहा है। आखिर वह राम से क्या चाहता है। जबकि राम […]
आनन्द दें अच्छे दिन, बुरे दिन देते अनुभव तो कोसें ना किसी दिन को, ज़िन्दगी की सफलता में दोनों की जरूरत है मानव.. *****✍️गीता
यूं देखकर भी क्यों अनजान बनते हो देवता हो दिल के क्यों हैवान बनते हो मैं जानती हूँ तुम क्या हो क्यूं सबके सामने महान बनते हो..
वो हमसे कतराने लगें हैं धीरे- धीरे दूर जाने लगे हैं दिल में उनके जगह नहीं बची है हमारे लिए, तभी तो हमसे नजरें चुराने लगे हैं…
दीप जलता रहा, जब बहुत देर तलक लौ भी टिमटिमाने लगी, लो तेल भी हुआ ख़त्म और उसकी जान भी, डगमगाने लगी…. *****✍️गीता
जो सपने अधूरे रह गए वही शब्दों में बदल गए लिखना अब और नही है मुझे पर अभी ज़िंदगी के कई और इंतिहाम रह गए ।। अब तू ही बता दे क्या है तेरे इरादे […]
प्रदूषण की मार, सह रहा संसार रोको इस प्रदूषण को मनुज, वरना फिर पछताओगे दूषित होती रही धरा यूं ही तो कैसे रह पाओगे वायु प्रदूषण यूं ही होता रहा तो, शुद्ध पवन की सांस […]
ज़रा सी देर क्या हुयी तुम यूँ ख़फा हुए । ज़रा सी बात पर बस यूँ ही चल दिए। जरा सी देर क्या हुयी नज़र यूँ फिरा लिए जैसे हम नहीं कोई जहाँ अलग बसा […]
तेरा मेरे लिए होना, उतना जरूरी, जितना जरूरी , ज़हान को हवा पानी है, तू अंजाम है, मेरे इश्क का , तू सुकून है , मेरी बैचेनी का, कम शब्द में कहुं तो दिल की […]
देवी देवता करते हैं गंगा का गुणगान इसके घाटों पर बसे हैं ,सारे पावन धाम गंगा गरिमा देश की ,शिव जी का वरदान गोमुख से रत्नाकर तक ,है गंगा का विस्तार भागीरथी भी इन्हे ,कहता […]
कविता- सभी सो रहे —————————- सभी सो रहे हैं, घरों में पड़े हैं| हम ही हैं दीवाने, अभी जग रहे हैं| बड़ा दुख है हमको जो जग रहे हैं। दिखे ना किनारा, चले जा रहे […]
दोस्तों का दिल से सम्मान है, उनकी दोस्ती पर हमें,अभिमान है दोस्ती होती है ,सुधा समान, सुधा की एक बूंद ही महान है निज स्वार्थ से ऊपर उठी जो दोस्ती, उस दोस्ती में दोस्तों की […]
बहुत मिला इस ज़िन्दगी से, सब कुछ कहां,किसे हासिल मगर रह ही जाता है, किसी का “काश”, और, कहीं किसी का “अगर”.. *****✍️गीता
छपरा जिला के सांई गाँव में ग्वालों की घनी आवादी थी। वहाँ के लोग गाय भैंस पाल कर ही अपना घर परिवार चलाते थे। उसी गाँव में राम नाम का एक ग्वाला था। वह प्रतिदिन […]
रास्ते के पत्थर समझ के, ठोकर मार कर चले गए वो। हम किनारे पे खड़े रहे, किसी के हो कर गुजर गए वो।।
खुद को जला के हम, अपनी प्यास कहाँ बुझा पाए। समंदर भी मुझे देख कर , अपनी धारा बदलती जाए ।।
दीदार करके उसका मैं पाक हो गई मेरी मोहब्बत से जिन्दगी आबाद हो गई करता रहा वो मेरे इजहार का इन्तजार पर मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!!
जाने क्या सोंचती रहती हूँ बस उसके ही खयालों में खोई रहती हूँ जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ देती है अपनी उलझनों में ही उलझी रहती हूँ…
गीतों में सबसे प्यारा गीत हो तुम मेरे हमदम मेरे मनमीत हो तुम नहीं चाह मुझे आसमां की बुलंदियों की मेरी तो जीत हो तुम…
दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं…
यदि किसी भूखे को हम दो कौर रोटी दे सकें तो तब कहीं सचमुच में हम इंसान कहने योग्य हैं। दर्द के आँसू किसी के पोंछ पायें, रोक पायें तब कहीं सचमुच में हम इंसान […]
खुद ही खाऊं खुद ही पाऊँ दूजे का हक भी खुद खाऊं दुनिया का जो भी अच्छा हो वह मुझे मिले, मैं सुख पाऊँ। सब पर मेरा राज चले सब मेरी बातों को मानें जिसको […]
आज कथनी का कर्म से कोई मेल नहीं है कहने को बातें ऊँची करने को कुछ नहीं है गीता रामायण की धरती पर हिंसा का संगीत चढ़ा है कैसे बचेगी मानवता दानवता का दल बहुत […]
जल रहा है आज रावण राम जी के वाण से, उड़ रही हैं खूब लपटें देखता जग शान से। गा रहे हैं जोश से सब राम राघव की बड़ाई अबकी ऐसा वाण मारो दूर भागे […]
इस सुरमयी संसार में सबको मिले सुख भोगने को दुख किसी को भी मिले मत राम जी वर आज दो। आपने त्रेता में जैसे, उस दशानन को संहारा, आज भी आकर निशाचर वृति को संहार […]
दशहरा पर्व यह पावन मुबारक हो सभी को, मिटे सारी बुराई खिले बस खूब अच्छाई। रावण सरीखी वृतियाँ सब दूर हो जायें, जीभ में शारदा माँ और वाणी में मिठाई। भलों का मार्ग कांटों से […]
– ** कलयुग का रावण -** ********************* हे राम रमापति अजर अमर रावण से ठाना महासमर ले आए जग की जननी को अपनी प्रिय अर्धांगिनी को ..। वह रावण की मर्यादा थी नहीं नजर लगा […]
लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां नोना बेरोजगार छन अभी नि आई कालो धन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां मंत्री जी की गाडी […]
रावण जलाना ही है तो मन में छिपे रावण को जलाओ। गर तुम से न जले तो सच्चे मन से श्री राम को बुलाओ।।
जब जब धर्म अधर्म के चंगुल में फंसा, तब तब इस धरती पे पुरुषोत्तम का जन्म हुआ। अत्याचार से धरती फटी अधर्म से नील गगन, तभी तो दिव्य पुरुष के हाथों अधर्मी का अंत हुआ। […]
विजयादशमी का यह पावन पर्व वर्षों से समाज को सच्चाई का सबक सिखाऐ पर आज यह एक प्रश्न उठाये आज प्रतयंजा कौन चढ़ाऐ कौन बाण आज छुड़ाए इस युग में कोई काबिल नहीं जो रावण […]
दशहरा का पर्व है आया अच्छाई ने बुराई को हराया विजय गीत सब मिल गाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || सोंचो तरक्की के जुनून में हम खुद से हो गए पराए हमको लगे जकड़ने ,ख्वाहिशों […]
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