क्या कोई हमें बतायेगा वो कौन निर्दयी होगा जंगल में आग लगाकर घर में चैन से सोया होगा। लपटों से जिंदा जलकर जो खाक हो रहे थे प्राणी, उन निरपराध जीवों की ऐसे निकल रही […]
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क्या कोई हमें बतायेगा वो कौन निर्दयी होगा जंगल में आग लगाकर घर में चैन से सोया होगा। लपटों से जिंदा जलकर जो खाक हो रहे थे प्राणी, उन निरपराध जीवों की ऐसे निकल रही […]
गेहूँ के दाने क्या होते, हल हलधर के परिचय देते, देते परिचय रक्त बहा है , क्या हलधर का वक्त रहा है। मौसम कितना सख्त रहा है , और हलधर कब […]
क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्तव्य पथ पर जो मिला यह भी सही वह भी सही, वरदान नहीं मांगूंगा, हो कुछ भी पर हार नहीं मानूंगा” अटल बिहारी वाजपेई जी […]
खुद को नफा दिलाओ मगर जान बूझकर नुकसान दूसरे का करो ठीक नहीं है। चोरी छिपे गलत करो व साफ बन फिरो भगवान की नजर है तुम्हें देख रही है। कितनी ही निगाहें गड़ाइयेगा और […]
हिन्दु पंचांग के अनुसार, आज मार्गशीर्ष मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी है दिन है शुक्रवार मार्गशीर्ष मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी को पवित्र ग्रंथ भगवत्-गीता की, मनाई जाए जयंती जिसको कहते हैं गीता […]
मन तुम्हारा हो गया यह तन तुम्हारा हो गया मन की पर्तों में जो गहरे दर्द बोये थे कभी तेरा निश्छल प्रेम उन जख्मों का मरहम हो गया…. तुम धूप-सी लगती रही मैं नीर-सा बहता […]
गांव छूट गया मैं शहर में आ गया याद छूटी ही नही मन गांव में ही रह गया, तन शहर में आ गया। वो खेतों की हरियाली, चिड़ियों की चहक, झींगुरों का संगीत, सावन के […]
खिल रही है धूप दिन में तो जरा राहत सी है, रात काटूं किस तरह से भीति की आहट सी है। आपको मौसम सुहाना लग रहा होगा भले ही पर मेरे मन की उमंगें आज […]
किसान दिवस स्पेशल:- ********************* २३ दिसम्बर को हर वर्ष किसान दिवस मनाया जाता है मीठी-मीठी बातें कर हम किसानों को फुसलाया जाता है बैठा है दिल्ली में किसान मांगे अपने हक का मान पर सरकार […]
माँ ने कहा:- सुनते हो जी आज ही के दिन हुआ था जन्म हमारे बेटे का पिता ने बोला हाँ, याद है माँ बोली अब फोन करके कर देती हूँ विश माँ ने बेटे को […]
कई वर्षों की प्रतीक्षा के बाद, जब शबरी के आश्रम आए श्री राम शबरी ने कहा श्रीराम से, आए हो तुम तो निज काम से रावण का वध ना करना होता तो तुम इस वन […]
हर अंधेरे को एक सवेरा मिलता है हर कांटो के ताज पर फुल खिलता है। फिक्र क्यूं करना समस्याओ की हे मनूष्य? हर काले बादल को एक रोशनी का किनारा मिलता है। संघर्ष किए बिना […]
जिंदगी की चली दौड़ है भागने में लगे आप-हम प्यार करने की फुर्सत नहीं है रोटियां खोजनी हैं जरूरी। पालना जिसको परिवार है उसको कैसे भी करके स्वयं को काम में है खपाना, कमाना रात-दिन […]
कृष्णा जी की प्यारी ,राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी,संग वृषभानु दुलारी तुम बिन कोई ना ठौर हमारी, जाऊँ बलिहारी पल पल याद करूँ त्रिपुरारी, आऐ शरण तिहारी कृष्णा जी की प्यारी, राधा न्यारी […]
गीत – वो मुस्कुरा रहे है | दिल तोड़कर है मेरा नाजो अदा वो मुस्कुरा रहे है | गिरा कर है घर मेरा अपना घर वो बसा रहे है | बड़ा ही हसीन गुल था […]
मौन का मतलब समझते हो पथिक? यह दवा है दर्द की जो दर्द को ज्यादा चढ़ाकर कम किया करती है मन का। आप तो बस खो गए मन खोजता ही रह गया आपका चेहरा नयन […]
हे स्वर्णरश्मि ! हे दिनकर छवि ! विलम्ब न कर आजा झटपट निकला जाये मेरा दमखम प्रभु निवेदन है तुमसे विनम्र कर जोड़ खड़ा देखो मानव संकुचित है प्रकृति का हर अंग-अंग अविराम पड़े कोहरे […]
साँस से भाप उड़ती रही, आपको भी दुराशय से देखा यह नजर पाप करती रही। मन किसी और पथ पर रमा था जीभ कर करके दिखावा निरन्तर नाम का जाप करती रही। पुष्प सुन्दर खिला […]
बीते कल की परछाई है और तुम्हारी यादें हैं मैं हूँ, मेरी तन्हाई है और तुम्हारी यादें हैं..!! सर्द अंधेरी इन रातों में थोड़ी सी मदहोशी है टूटी सी इक अंगड़ाई है और तुम्हारी यादें […]
जी रहे हैं स्वयं हम दिवास्वप्न में, खुद को भूले हुए हैं बड़े मग्न हैं। पीठ संसार के दर्द से फेरकर, आँख सबसे चुराकर बड़े मग्न हैं। ओढ़ कर तीन कम्बल पसीना हुआ, उस तरफ […]
माटी की मूरत होते हैं बच्चे जैसा बनाओगे वैसे बन जाएंगे चाहो तो उनको गांधी बना दो जो सत्य की राह का पथिक बनेगा चाहो तो उसको भगत सिंह बुलाओ वो देश की खातिर मर […]
गीत जिन पर लिखे वे पुराने हुए उनको देखे बिना भी जमाने हुए, अब सफर में जुड़े मित्र हैं सब नए वो पुराने न जाने कहाँ गुम हुए। बीतते रह गए दिन रही आस बस […]
**हास्य रचना** *********************** सुबह-सुबह उठो नहीं, रजाई में पड़े रहो सूर्य की लाली हो या पापा की गाली हो, तुम निडर उठो नहीं, तुम निडर डटो वहीं बेशर्म बन के अड़े रहो, रजाई में पड़े […]
साल भर में मेरा वजन ढाई सौ ग्राम बढ़ गया उनको लगा कि मध्याह्न भोजन योजना का मकसद पूरा हो गया, आंकणों में मेरा नाम और वजन दर्ज हो गया।
जब तक खुले थे विद्यालय दिन में खाने को मिलता था, पानी की दाल भले ही थी पर कुछ जीने को मिलता था। कोविड़ क्या आया, क्या बोलें स्कूल के पट सब बंद हुए, थोड़ा […]
कूड़े के ढेरों में कुछ तो मिलेगा, जरा सा खुशी का सहारा मिलेगा। नन्हें हैं वे, रात भर सोचते हैं, प्रातः को कूड़े में पथ ढूंढते हैं। बहुत खुश हुए जब मिली एक कॉपी आधी […]
मेरी सांसों पे तेरा अधिकार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। ना सूरत पसन्द, ना शोहरत पसन्द तेरी चाहत पे ऐसा इकरार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। मुझे […]
नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख […]
ठंड में ये भूख भी ज्यादा सताती है, है नहीं चर्बी मगर हड्डी हिलाती है। भाग पहुँचा रोज खाता हूँ मगर ये भूख भी लौट कर फिर से मेरा मन कुलबुलाती है। सोचता हूँ हम […]
“राजा दशरथ और श्रवण कुमार” ************************** उठा लिया एक भारी बोझ-सा कंधे पर अंधे माँ-बाप को तीर्थ यात्रा कराई श्रवण कुमार सा हो लाल मेरा यही दुआ करे हर माई’ राजा दशरथ गये आखेट को […]
आपकी किरणें ओ सूरज! सृष्टि को वरदान हैं, मूल हैं प्रकृति का बीज में ये प्राण हैं। पेड़-पौधे , जीव सारे आपके होने से हैं आपकी प्रभा के आगे दीप सब बौने से हैं। पालती […]
आज कोई गीत नहीं है, गीता के, गीतों के गुलदस्ते में रीता है गुलदस्ता मेरा, रीता ही लेकर आई हूं कुछ अपने मन की कहने, कुछ आपके मन की सुनने आई हूं आज जल बहुत […]
माता-पिता अकेले छोड़े हैं गांव में, कोई नहीं सहारा रोते हैं गांव में। तकलीफ और दुःख में पानी भी पूछने को, कोई नहीं है संगी जीवन है डूबने को। ताकत नहीं रही अब हाथों में […]
जिन्हें हम दिल में रखते हैं उसे क्यूँ बता नहीं पाते हमें स्नेह है कितना कभी उनसे जता नहीं पाते । उम्मीदों के बीज मन में पाल कर क्यूँ रखते वजूद नहीं जिनका उन्हीं से […]
पत्थर हूँ मैं जिस पर घिस कर चन्दन माथे पर लगाने लायक होता है, शीतलता देता है, खुशबू बिखेरता है। थोड़ा सा मैं भी घिसता हूँ चन्दन के साथ, लेकिन आपको अहसास तक नहीं होने […]
हर एक कविता लिखता हूँ जो भी लक्षित नहीं कोई स्वयं लक्ष्य हूँ मैं। किसी से नहीं है अधिक प्यार मुझको किसी से नहीं कोई नफरत है मन में। स्वयं की खुशी को लिखता हूँ […]
*हाइकु विधा* ************** ऐ नींद ! बता तेरी क्या दुश्मनी है क्यों तू मेरे पास नहीं आती है डूबते हैं सब सपनों में क्यों तू मुझसे अदावत निभाती है ?? ना परेशान होती हूँ मैं […]
सन इकहत्तर के जंगी जवानों, आपको हम सभी का नमन, आप जांबाज थे हिन्द के आपको हम सभी का नमन। ऐसी ताकत दिखाई थी सच में देखता रह गया था वो दुश्मन, धूल ऐसी चटाई […]
“गुलमोहर का पुष्प” अति मनमोहक है सुगंध इसकी अद्धभुत है इसकी जड़ें मिट्टी को चारों ओर से जकड़े हैं मानों जैसे हाथों में वक्त पकड़े हैं रात्रि की उनींदी आँखों में कुछ गहरे सपने हैं […]
आज विजय दिवस है 1971 में भारत-पाक युद्ध में, भारत को मिली जीत का उत्सव है आज विजय दिवस है राष्ट्रीय समर-स्मारक पर, अखंड ज्योति जलती है दिल्ली में, उसी ज्योति से अग्नि लेकर, प्रज्वलित […]
गीत ठंडक के गुनगुनाता हूँ, शूल सी चुभ रही हवाओं में खुद ही खुद दांत कटकटाता हूँ, ये जो संगीत है स्वयं उपजा, इसकी धुन में रहता हूँ जिगर को नचाता हूँ। राग में रागिनी […]
ये कैसी बेबसी है नाराज़गी को ढो रहे हैं अक्षमता को आकने के बदले दूसरे की कमियों को गिन रहे हैं । ये दिन है कैसा ना उम्मीदों का आसिया है ख़्वाहिशों के जलने की […]
पहले जैसे सनम ! अब हम ना रहे जानते हैं ये हम कुछ बदल से गये… पर करें क्या बता है मेरी क्या खता ! तेरे आने से हम कुछ बदल से गये…. ना रही […]
हां दोस्ती है, इन दिनों रजाई से उसको ओढ़े बिना नहीं कटते सुनहरे पल पहाड़ी रातों के। खुद की तारीफ के न पुल बांधो हम तो कायल रहे हैं वैसे ही तुम्हारी नेह भरी बातों […]
उत्प्लावन करती हृदय में, अतृप्त अवांछित आकांक्षाएं संकीर्ण एवं सूक्ष्म वेग के व्याकरण’ गढ़ती हैं असंतृप्त आस्थाओं का प्रतीत प्रेम मधुमास की मधुर गर्जना करता है और ले जाता है पीपल की घनी छांव में, […]
जाने क्यूं आजकल खुद पर प्यार आने लगा है अपना ही चेहरा अब हमको रिझाने लगा है पहले डूबे रहते थे हम किसी की आँखों की मदहोशी में अब तो अपना चेहरा ही हमको भाने […]
टूटे तारे के बारे में, किसने कब सोचा है उससे मांगे सब दुआ, यह ना पूछे कोई भी बता तेरे संग क्या हुआ क्या कोई तेरा साथी छूटा, तारे क्यूं तेरा दिल टूटा वह टूटा, […]
मैं हूं किसान, आप सा ही एक इन्सान मेहनत से अपनी, बीज बोता हूं ज़मीं में, सींचता रहता हूं पौधे अपनी आंखों की नमी से देखी है बागों की बहारें, मेहनत से हम कभी ना […]
अपनी खुशियों पर रहें खुश दूसरों से क्यों भिड़ें, बात छोटी को बड़ी कर पशु सरीखे क्यों लड़ें। जिन्दगी जीनी सभी ने क्यों किसी को ठेस दें, हो सके तो कर भलाई प्रेम का संदेश […]
मत बहा आँसू पी जा दर्द भी है तो, काम ले हिम्मत से आंसू हैं अमी का जल, नहीं होना विकल सब कुछ ठीक होगा और आयेगा सुहाना कल। वक्त सब दिन एक सा रहता […]
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