मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है जैसे मोमबत्ती जलकर पिघलती जा रही है कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में कुछ बेखबर-सी पिघलती जा रही है पिघल गई धागे को जलाने के जश्न […]
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मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है जैसे मोमबत्ती जलकर पिघलती जा रही है कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में कुछ बेखबर-सी पिघलती जा रही है पिघल गई धागे को जलाने के जश्न […]
सरल नहीं है ये जीवन, पर कठिन भी नहीं है इसे समझना जिस तुला पर तौलते हो औरों को तुम, किसी दिन उसी तुला पर, स्वयं को भी तौलना कभी जिंदगी का हंसाना, कभी पाली […]
किस तरफ की बात बोलूं कुछ समझ आता नहीं, सत्य क्या है झूठ क्या है कुछ समझ आता नहीं। एकतरफा बात सुनकर धारणा कुछ और थी दूसरे के पक्ष को सुन कुछ समझ आता नहीं। […]
खुशियाँ तो मन की उथल-पुथल से सीधी जुड़ी हुई हैं, मन में यदि संतुष्टि है तब हम जरा सी बात पर खुश हो सकते हैं, मजे में रह सकते हैं। मगर मन अनियंत्रित है, और […]
निकलूं कब बाहर मैं घर से हरदम बैठा रहता मौसम के डर से एक साल में बारह महीने चार महीने गिरे पसीने फिर सोचूं मैं निकलूं बनके तब होती बरसात जमके आठ महीने यूं ही […]
चाहती हूँ एक कविता लिखना मगर नाकाम हो जाती हूँ विषय चुनने के लिए छटपटाती हूँ शब्द कुछ ऐसे हों भावनायें मेरी व्यक्त करें और कह दें वह जो मैं कह नहीं पाती हूँ निरर्थक […]
लरजती लौ चरागों की यही संदेश देती है अर्पण चाहत बन जाये तो मन अभिलाषी होता है बदलते चेहरे की फितरत से क्यों हैरान है कैमरा जग में कोई नहीं ऐसा जो न गुमराह होता […]
गज़ल ****************** सुना तुमने नहीं हमको, सुना हमने नहीं तुमको मगर महसूस करते थे हर एहसास में तुमको जुनून था तुमको हरगिज यार! औरों की मोहब्बत का, सब कुछ जानते थे हम मगर रोंका नहीं […]
सर्द मौसम में, अश्क भी जम गए अल्फाज उनके सुनकर, मेरे हर पल थम गए शून्य में घूमने लगा, मेरा वजूद सारा ज़रा सी धूप लगी तो, नैन हमारे नम गए अजीब था उनका अलविदा […]
कुदरत का अनमोल रत्न ******************** कुदरत का अनमोल रत्न है ये जीवन जब हों फूल से रिश्ते तो महकता है जीवन अगर हों बेनाम से रिश्ते तो सुगंध ही दुर्गंध बन जाती है फिर बोझिल- […]
अब सवेरा हो गया है, कब मुझे लगने लगे। अस्त सारा तम हुआ है कब मुझे लगने लगे। उग रही कोपल खुशी की दृगजल अब सुखना है, दूर मन का गम हुआ है कब मुझे […]
प्यार के हजारों रंग देखे मगर उन सभी रंगों में आत्मीयता का अभाव ही मिलता है लौटकर फिर तुम्हारे पास आ जाती हूँ फिर से उलझ जाती हूँ मैं बातों के जंजाल में, दुनिया के […]
समकालीन कविता के जाने-माने नाम थे वह, हिंदी कविता की शान थे वह। राजनीतिक चेतना व मानवता की सुरम्य आभा से सरोबार थे वह, ‘पहाड़ पर लालटेन’ सी चमकती पहचान थे वह। संघर्ष में जूझती […]
ठंड बढ़ती जा रही है वह सिकुड़ता जा रहा है रात भर सिकुड़ा हुआ तन अकड़ता जा रहा है। सिर व पैरों को मिलाकर गोल बन सोने लगा, नींद फिर भी दूर ही थी क्या […]
मस्तमौला चाल मेरी मैं पुहुप हूँ गांव का आ गया तेरे शहर कंटक समझ मत पांव का। घूमता बेघर फिरा हूँ है मनोरथ छांव का जिंदगी वारिधि सरीखी क्या भरोसा नाव का।
श्वेत कागज में कलम घिसता हूँ, इधर-उधर की कहीं कुछ भी नहीं जो है दिल में उसे लिखता हूँ। विजुगुप्सा से दूर रहता हूँ प्रेम के भाव बिकता हूँ। मिट्टी में खेलते बच्चों की सच्ची […]
जो भी लिखता है मन स्वयं के लिए, प्यार-नफरत के भाव खुद के लिए। उसे न जोड़ना कभी भी अपने भावों के लिए अपनी चाहत के लिए। अलग ही रास्ते हैं न कोई वास्ते हैं, […]
क्यों दोधारी तलवार से हैं लोग… क्यों सच को स्वीकार नहीं कर पाते हम लोग…. जानते हैं कुछ साथ नहीं कुछ जाना फिर भी क्यों जोडने की होड़ में लगे हैं लोग… सब कहते है […]
गीतों में अपने जज्बात लिखा करता था, गीतों में मुझसे बात किया करता था हाथों में लेकर मेरा हाथ, घंटों चलता रहता मेरे साथ वो लड़का मुझे बहुत मोहब्बत किया करता था मैं लिखती थी, […]
चैन से अब सो रहा मन मत जगा अब आग तू, दूर हो जा स्वप्न से भी मत लगा अब आग तू। आग केवल शान्त है। भीतर पड़े हैं कोयले फूंक मत, रहने दे ऐसे […]
मांग की सिन्दूर रेखा ****************** हर सुबह बड़े स्वाभिमान से सजाती हूँ अपनी मांग में लाल सिन्दूर मेरे रूप लावण्य में मैं स्वयं एक वृहद परिवर्तन पाती हूँ…. मांग की सिन्दूर रेखा खूब लम्बी सजाती […]
सुख -दुख जीवन का हिस्सा है, ये तो ज़िन्दगी भर का किस्सा है निराशा का भाव दे सुख की घड़ी, आशा का संचार करें, एक नज़र तारीफ भरी सुख देकर ही सुख मिलता है, दुख […]
ढूंढो मेरा प्रेम पथिक ! जाने कहाँ खो गया है कंकड़ीली-पथरीली राहों में विस्मृत-सा हो गया है उदासीन राहों में राही तुम भी भटक ना जाना मेरा प्रेम मिले जो कहीं उसे मेरी याद दिलाना […]
फूल बोने होंगे परिवेश में अपने खुशबू लुटानी होगी, उल्फत जगानी होगी, नफ़रतों की सारी कड़ियाँ मिटानी होंगी। जो हो सके न अपने जो दूर जा चुके हों कहकर पवन से खुशबू उन तक ले […]
पलकों पर सजे थे सपनें मैं थी नींद के आगोश में, वो आया सपनों में मेरे बोला मुझसे हौले से; पी लो रानी! प्रेम का प्याला मैं चाँद निचोड़ के लाया हूँ तेरी खातिर आसमान […]
एक तो शीतलहर दूजा बेगाना शहर। फिर भी अटल रहेंगे हम किसान धरने पर।। हम क्यों माने हार बंधु हम तो हैं अन्नदाता जग में। पेट चले संग फैक्टरी चले व्यापार पले अपनी पग में।। […]
नाखूनों से नोंच जमीं मैंने बोया है मेहनत का बीज हलधर हूँ कहलाता चाहे कह लो पीर-फकीर पीता हूँ कुआं खोदकर पानी बीती निर्धनता में जवानी पर अपनी मेहनत से भरता हूँ मैं सबका पेट […]
आज अपनी बात करो मेरी बात रहने दो नींद नहीं है आती एक अर्से से मुझे जुल्फों में सुला लो तहकीकात रहने दो मुलाकातों के गुल खिला लेंगे किसी और दिन मुझे अपने ख्वाबों में […]
दिन अगर बदल सकते पुनः अपने बचपन में लौट पाते । फिर से पापा की नन्हीं परी बन चार पैसे की नेमचुस खरीद लाते। घर की चौखट पे बैठे, बाट देखती चाचू की, पटाखो के […]
लो फिर आ गई है सर्दी पूरे लाव -लश्कर के साथ में। हवा भी ठण्ढी सूरज मद्धिम घना कुहासा दिन और रात में।। बिन बादल के बारिश जैसी गीलापन हर डाल -डाल व पात में। […]
सुबह-सुबह की लालिमा बिखरी हुई है सब तरफ ओस की बूंद मोती सी बिखरी हुई है सब तरफ। भानु का नूर है आलोक चारों ओर फैला, धरा-आकाश मानो बन गए मजनूँ व लैला। स्वच्छ पावन […]
हमें बस जीवंत बोध की दरकार है नहीं मुझे खुद पर, हाँ तुझपर एतवार है हम सजग प्राणी भले हैं पर स्वार्थ से सना अपना प्यार है । स्वार्थ से रचा-बसा राब्ता यह बस नाम […]
बाँसुरी की तान पर राधा दीवानी हो गई मीरा दीवानी हो गई प्रज्ञा’ दीवानी हो गई छेंड़ता मुझको है नटखट नंदबाबा का दुलारा छोंड़े ना मोरी कलाई ब्रज की गोपिन का है प्यारा प्रज्ञा लिखकर […]
जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था वो अन्दर से कमजोर है जिन वादों पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था कि डोर उसकी कमजोर है || करूँ किसकी याद ,जो […]
जल जाती हूं ज्वाला सी, जब अरमान मेरे जलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो धीरे-धीरे फलते हैं मीठे-मीठे बोल बोल कर, दुनिया वाले छलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो जख्म भी ढ़लते हैं […]
इबादत है तू मेरे सांसों में समाई खो ना जाना रूठ ना जाना सह ना पाऊँगा ज़िन्दगी में जिस चीज़ को चाहा है वो दूर हो जाती है कमी शायद मुझमें ही है पता नहीं […]
कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो, इतना किसी पर, काम पूरा ना होगा, तो जमाना हसे […]
कविता- धोखेबाज दोस्त ——————————– हजार झूठे स्वार्थी दोस्त से अच्छा, एक सच्चा परम मित्र हो, नाज किया समय पैसा बर्बाद किया, वही दोस्त आइना दिखा जाते, डूबते हुए इंसान से- किनारे होकर भी, मुंह फेर […]
यह जख्म कोई नया तो नहीं फिर दर्द का अहसास इतना गहरा क्यूँ ? कयी सितम अपनों ने किये पर उफ ना आज तक हमने किये अबतलक जो बेधते लब्ज़ असर कर न सके तेरे […]
उलझा हुआ कलमकार हूँ, तमाम विषयों से घिरा चयन की छटपटाहट में लय से भटका हुआ हूँ। शब्द में निःशब्द भर मौन में गुंजायमान ला अंकित करने में असफल रहा हूँ। ठिठुरते बचपन की व्यथा […]
छोटी- छोटी पंक्तियाँ हैं ये जो शायरी की मेरी, इन्हीं में तुम्हारी सब खूबसूरती है भरी। उपमान नए औऱ पुराने मिला जुला के, वर्णन जैसा भी किया सच सच किया है। देर रात चाँद आया […]
मौत के बाद क्या है किसी ने जाना नहीं है प्रकृति को क्यों किसी ने पहचाना नहीं है आखिर मृत्यु के रहस्य को ईश्वर ने क्यों छिपाया इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं […]
अरी सरिता, न रुक चलते ही बन चलते ही बन। राह में सौ तरह के विघ्न हों, उनको बहा ले जा, पत्थरों को घिस पीस दे सब नुकीलापन, पकड़ ले मार्ग तू अपना न ला […]
तीन दिसम्बर अठारह सौ चौरासी का पावन दिवस मनोहर था। घर-घर मंगल गान गुंजते बजे बधाईयाँ संग सोहर था।। आसमान से टपक सितारा आया बिहार के एक गांव में। सारण उर्फ सीवान जिले के जीरादेई […]
ओज कविता- शिकार किया करते है | पीठ पीछे से वार सदा सियार किया करते है | हिन्द के जवान मुंह सदा हुंकार किया करते है | नापाक दुशमनों तुम हमे क्या आजमाओगे | सामने […]
बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम जिन्दगी में सुगंध फैलाती मनोहर धूप सी तुम। मुस्कुराहट इस तरह की नाजुक सी, ठोस के साथ में घुलती जरा सा भावुक सी। कभी आलिम कभी हो […]
अश्कों का समन्दर है अँखियों में मेरी एक कागज की किश्ती कहाँ से चलेगी। है ये बदनाम बस्ती हमारी सनम इश्क की फिर कलियाँ कहाँ से खिलेगी।। रोकड़े में खरीदे सभी प्यार आकर प्यार की […]
खोजती रहती है दुनिया चैन मिलता ही नहीं, यह सही है वह सही है मन कहीं टिकता नहीं। आजकल की बात ही कुछ अलग सी हो गई असलियत के रंग का खून भी दिखता नहीं।
बहुत गमगीन हो रही ज़िन्दगी मुस्कुराने की दवा चाहिए। मर्ज बनकर खड़ी है नफरते प्यार की एक हवा चाहिए।। चाहते हैं सभी सेकना रोटियाँ तप्त-सा कोई तवा चाहिए। इन्सान बनकर रहे सर्वदा बनने को ना […]
एक छोटी -सी डब्बी में नाचती हैं सूईयाँ बेशक बन्द होकर। पर नचाती है सारी दुनिया को अपनी हीं नोंक पर।। न ठहरती है कभी न कभी ठहरने देती है। ये तो घड़ी है ‘विनयचंद […]
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