सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से […]
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सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से […]
सागर की लहरों में जैसे खो जाएगा, 2020 भी अलविदा हो जाएगा फ़िर नूतन-वर्ष मनाएंगे (2021) नूतन-वर्ष मनाने से पहले (2020) बीते वर्ष पर ग़ौर फरमाना है फ़िर नूतन-वर्ष मनाना है पिछला वर्ष कोरोना लाया […]
ज़रा सा मुस्कुरा देना नव वर्ष से पहले हर पीर भुला देना नव वर्ष से पहले ज़रा सा प्यार दे देना नव वर्ष से पहले टूटे तार जोड़ लेना नव वर्ष से पहले ना सोचो […]
बिना तुम्हारे इस ठंडक में बिस्तर से उठने का मन नहीं है, आ जाओ ना, चली आओ, उनके हाथ उनके साथ, ताजगी बनकर नाराजगी तजकर, अन्यथा उठने में हैं असहाय, आ जाओ ना चाय।
कविता -शिक्षा प्रेमी ———————– हे शिक्षा प्रेमी क्या बात कही तुमने सच्चाई संग प्रहार किया उतर गए कई नकाब, बेच रहे शिक्षा को, शहरों में खोलकर दुकान, फीस पर फीस, निकली जनता की खीस, बस्ते […]
ऐलान नया हो कोई, उद्घोष नया हो जज्बे भी नये हों और जोश नया हो हों राग नये से सभी , तान हो नई हौसले बुलंद हों, उड़ान हो नई मिल जाए नयेपन की एक […]
गरीब को भी इंसान समझना है तुम्हें क्या पता कब कहाँ मिल जायें भगवान तुम्हें। भूख क्या होती है यह भी समझना है तुम्हें, इंसान हो इंसानियत को भी समझना है तुम्हें। मिली है बुद्धि […]
नुपुर तुम्हारी शोभा नहीं ज्ञान को अंगीकार करो शक्ति रूप तुम धर कर के पाश्विक प्रवृत्ति का संघार करो। सिर्फ सदन तक तेरी शोभा नहीं विशाल गगन तुम्हारा आँगन है अपने आकांक्षाओं को पंख लगा […]
एक बार यमराज आया धरती पर। सोच में पड़ गया मानव को देखकर।। क्या खुशनसीब हैं ये इन्सां। मरणशील को कारें कारें मैं अमर यमराज को केवल भैंसा।। देखा सोचा झल्लाना बैठ गया सिर ठोंककर। […]
आंख से बह चली, अश्रु की बूंद कुछ कह चली तुम तो क्रोध कर गए, मैं सब कुछ सह चली नयनों से बह चली अश्रु बूंद कुछ कह चली तुम तो स्नेह में भीग उठे […]
निडर होकर निकले हर लड़की काश ! ऐसा भी दिन आए, बेटों से डर ना लगे हर बेटा पूजा जाए… कर्म हों सबके अच्छे संस्कार हों भरे, शुद्ध हो आचरण बेटों का ऐसा पाठ पढ़ाया […]
ठंड में लब फटे से रहते हैं आजकल वे कटे से रहते हैं, दूर कितना भी चले जायें पर दिल व साँसों से सटे रहते हैं। कभी करीब आते हैं फिर कभी दूर हटे रहे […]
❤माँ और पत्नी❤ ******************* माँ से जब मांगी एक रोटी, माँ के चेहरे पर मुस्कान खिली… पत्नी से मांगी जब रोटी तो मन ही मन नाराज हुई…. माँ कहती ओ बेटा ! तू कितना ज्यादा […]
वही दिल जुड़ाता है करीब लाता है, फिर वही इस तरह से दूरियां बढ़ाता है। वो रब हमें इस तरह खेल ही खेल में कभी मिलाता है कभी गम बढ़ाता है। हम तो बस चाहते […]
जो हो रहा है घटित अपने चारों तरफ उसे बयान कर दे ना मेरी कलम! लिख दे ना। जी रहे घर बिना लिबास बिना, ठंड में ओढ़नी बिना सोते ऐसे जीवन लिए कुछ कर दे […]
सौ दीप जला लो मंदिरों में, चाहे हजार दीये जले तेरे आँगन में, जब-तक तेरे मन की तम ना होंगे दुर । तब-तक है तेरे सारे दीये की रौशन सुन ।। ——————————————————- एक दीप जलाओ […]
ठंडक बढ़ रही है लगातार केवल तेरा अहसास गला रहा है जिंदगी में जमी बर्फ को, सर्द हवाएं नाजुक गालों से टकराकर अपने पैरों के निशान छोड़ रही है काले काले टिपके जैसे निशान, मेरी […]
ऐ वक़्त ढूँढ लायेंगे तुम्हें । खो दिया उन क्षणों को कयी स्वप्न सुनहले पलते थे खौफजदा उन पलक को जिनमें ख़ौफ के मंज़र तैरते थे विलखती आत्मा में आश की ज्योत जलाने को ऐ […]
वो लोट-पोट हो रहा था जमीन पर, जिस तरह केंचुआ तिनके से छूने पर फड़फड़ाने लगता है, वैसे वह बेचैनी से फड़फड़ा रहा था। किसी का तो बेटा रहा ही होगा अब इस तरह नशे […]
ठंड थी खूब पहाड़ों की ठंड, पानी मे कंकड़ जम जाते हैं पानी के नल तक फट जाते हैं, वो बाज़ार में भटकने वाला शराबी बेचैन था, जुगाड़ में था कुछ पीने को मिले तो […]
ह्रदय कांप उठा, देखकर एक तस्वीर बर्फ की पहाड़ियां थी, एक मशीन गन जंग खाए पड़ी थी वहां मौत मुंह बाए खड़ी थी कुछ वीर जांबाज़ों के थे शव शव क्या कंकाल ही थे, उनके […]
झूठी हंसी से अच्छा है, चलो खुल कर रो लेते हैं बार-बार नजर अंदाज होने से अच्छा है कि नज़र आना ही छोड़ देते हैं रोज़-रोज़ चोट खाने से अच्छा है कि चलो हम चलना […]
ओ विरह की वेदना ! मुझको पकड़ा दो कलम साथ में दे दो मुझे रात की तन्हाइयां और दो मुझको तुम रंग-बिरंगी स्याहियां अधखुली-सी इक कली रात यों कहने लगी “कलम और स्याही” ना हो […]
जाने कितने अल्फाज ठिठुर गये जो लिखे थे मन के कागज पर मैंने सिकुड़ गये कुछ ठण्ड की कटीली रातों में तो कुछ जम गये बर्फ के गोलों में सुबह धूप निकलेगी तो पिघलेंगे यही […]
चल रही आंधियां हैं थपेड़े ठंड के हैं, लिख रहा बेजुबानी भाव कुछ मंद से हैं। फिजाँ झकझोरने को पास कुछ भी नहीं है नैन सूखे हुए हैं होंठ कुछ बन्द से हैं। नहीं हो […]
पिता-पुत्र सैर को, निकल पड़े खेतों की ओर ठंडी-ठंडी पवन चल रही चलते पानी का था शोर कोयल कूक रही पेड़ों पर, और कहीं नाचते मोर तभी पुत्र ने वहीं पे देखा एक जोड़ी पुराने […]
जब नारी का जन्म हुआ, मां-बाप का चेहरा क्यूं सन्न हुआ ये बात समझ ना पाती थी जितना भी सोचूं उतनी ही उलझती जाती थी हर गीत से लेकर कहानी तक बचपन से लेकर जवानी […]
प्रेम वह है जो आंखों में, मन में दूजे के प्रति उमड़ चाहत के बीज उगा देता है, विरक्त और बुझे मन में, तत्क्षण अनुराग जगा देता है। प्रेम वह है जो सिंचित कर, मन […]
हौसला रख, न घबरा काम ले हिम्मत से तू जिन्दगी आसान होगी मंजिलें कदमों में होंगी। हो निराशा जब कभी दिल बैठ सा जाये अगर, तू जगाना खुद की हिम्मत मुश्किलें आसान होंगी। आँख भर […]
एक छोटे से ढाबे के बाहर खड़ी होकर वो गुहार कर रही थी, रख लो ना इसे काम पर, ग्यारह बरस का हो गया है यह, माँज लेगा चाय के गिलास, धो देगा जूठे बर्तन […]
सोंधी-सोंधी गाँव की यादें चौपाटी पर परधानी की बातें पके-पके से स्वर्णिम धान गाँव के बूढ़े, बाल, किसान सब आते हैं मुझको याद गोरी के गोरे-गोरे गाल जिन पर हँसकर झूले लट ना भूला मैं […]
गुनगुनी धूप है इस ठंड में थोड़ा सहारा, अन्यथा हम बर्फ बनकर ठोस हो जाते। इस गली में गुजरते आपने देखा हमारी झोपड़ी को अन्यथा हम गम भरे बेहोश हो जाते। इन दिनों मन जरा […]
तृष्णा तुम भी अद्भुत हो मन में इतना रम जाती हो, ये भी मेरा वो भी मेरा सब कुछ मेरा हो कहती हो। पूरी कभी नहीं होती हो जीवन भर आधी रहती हो, नश्वर जीवन […]
कर सकूँ यदि भलाई नहीं, तो बुराई करूँ क्यों भला आपको दे सकूँ यदि नहीं कुछ तो खुटाई करूँ क्यों भला। हो अगर कोई मुश्किल समय काम में कुछ नहीं आ सकूँ तब मुझे हक […]
कविता -जुआरी हूं ———————– हां जुआरी हूं, एक बार जुआ और खेलने दो, जो बचा है मेरे पास अब दांव पर लगाकर खेलूंगा, बिक गया सब कुछ मेरा अब उधार ले कर खेलूंगा, सभी अपनों […]
कविता- शिक्षा क्या है —————————— शिक्षा जो कोई लेकर चलता, उसको शिक्षा ले चलती है| मान प्रतिष्ठा धन वैभव देती है। जीवन का मार्ग सुगम कर देती है| मन मस्तिष्क आत्मा विकसित हो, उठे मन […]
कैसा जीवन हाय ! तुम्हारा ना चूड़ी ना गजरा डाला पैरों की पायल भी रूठी घुंघरू टूटा, चूड़ी टूटी जो देखे वो कहे अभागन जब चले गये हैं साजन ! तुझ पर कितने अत्याचार हुए […]
सुमन सी सुगंधि रहे, जीवन में तुम्हारी कांटा भी ना आए कभी राह में तुम्हारी आया तो शामिल होगी मेरी भी आह.. हर आह में तुम्हारी मैं तुम्हारी ज़िन्दगी में, कल रहूं, ना रहूं दोस्ती […]
जब कागज का नाव बनाया मैं तो बिल्कुल बच्चा था। तन का थोड़ा कच्चा था पर दिल का बड़ा ही सच्चा था।। जब कागज का नाव बनाया …. पतंग बनाया कागज का और एक जहाज […]
आत्मीयता कहीं खो गई है, वह शहर की गलियों में रो रही है। किसी को किसी से मतलब नहीं है, समन्वय की बातें खो गई हैं। सहभागिता के भाव ही नहीं हैं, एक दूसरे की […]
अभिलाष जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे? सब कहते तुम व्याप्त मही हो, पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो? नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ, इस जीवन को […]
कतरा ए गजल तू मेरी चाहत आहत मेरा दिल कर दिया | कह सर्वोपरि राहत मेरा दिल कर दिया | तेरे हुश्न का चर्चा अब सरेआम हो रहा | मै तेरा आशिक अब बदनाम हो […]
हौसला रखकर चलना होगा परिस्थिति हमेशा इसतरह कहाँ रह पाएगी । कबतक दर्द से नाता रहेगा कहाँ तक निराशाओं का यह भंवर सहमाएगी। कठिनाई के ये दिन जाते-जाते भी सकारात्मकता की सीख हमें दे जाएँगी […]
भारी ठंड है वे सिंधु बॉर्डर पर धरने पर हैं, कई बुजुर्ग किसान धरने पर हैं। दस वर्ष के बच्चे तक धरने पर हैं। ठिठुरन है लेकिन वे अड़िग धरने पर हैं। देश की सत्ता […]
दु:खो से उबरना क्या इनसे तो जन्मों का नाता है मीठा तो कभी-कभी नमकीन साथ निभा जाता है । ज्यादा मीठा हो तो मन जल्दी ही उब जाता है नमकीन के बल पर ही मीठा […]
माता-पिता को भूलकर तू चैन में खुद को समझ मत आज तेरा वक्त है फिर वक्त बदलेगा समझ ले । आज तू अपने में खुश है दूर बैठा है शहर में अपने बच्चे और पत्नी […]
ठंड में ठिठुरता जाता है, कोई शिकवा भी ना कर पाता है उसका ना कोई ठौर-ठिकाना, दूजे का भवन बनाता है ठक-ठक, खट-खट की आवाजों में ही, पूरा दिवस बिताता है ना निज का कोई […]
अनोखाजी चले बाजार। टौर से हो फटफटि सवार।। साथ में चली श्रीमति जी। चहक रहे थे आज पतिजी।। कितने अच्छे हैं टमाटर। आओ खरीदे साथ मटर।। क्या यार तुम भी हद करती हो। क्या फिर […]
रखो न हीन भावना बुलंद भाव से चलो, सदैव सिर उठा रहे कभी नहीं कहीं झुको। झुको उधर जिधर लगे कि सत्य की है भावना, सिर उधर झुके न जिधर झूठ की संभावना। तोलना किसी […]
जिन्दगी की सरगम पर गीत क्या मैं गाऊँ तुम्ही अब बता दो वो प्रीत कहाँ से लाऊँ। पतझङ सी वीरानी छायी है जीवन में ना कोई है ठिकाना खुशी अटकी है अधर में दो राहे […]
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