भगवन तेरा खेल निराला
संगीत दिलों में बजता हैं जब,
धड़कने सुरीली हो जाती।
हर आहट एक मीठी दस्तक,
चेहरे पर हंसी खिला जाती।
खुद से बातें करते रहना,
खोए खोए से यूं रहना,
बात करें यदि तुमसे कोई,
क्या कहा??? पूछना पड़े दुबारा।
कैसा ये आत्मीय बंधन है!!
कैसा भगवन का खेल निराला।
उंगलियों पर नचा कर सबको,
खुद बैठ मजे से देखें तमाशा।
वाह रे भगवन!!
निमिषा सिंघल
वाह बहुत सुंदर
आभार
धन्यवाद
Thanks
आभार
Nice
Good
आभार
Thanks dear
Nice
😍😍🙏🙏