अभिवृत अक्षांश, Author at Saavan's Posts

सारा जीवन खो आया हूँ तब आया हूँ

सारा जीवन खो आया हूँ तब आया हूँ पाप पुण्य सब ढो आया हूँ तब आया हूँ तुम पावन हो देवतुल्य, मैं तुम्हें समर्पित कलुष हृदय का धो आया हूँ तब आया हूँ आहुति देकर छल छंदों की प्रेम हवन में तपकर जलकर विरह वेदना प्रेम अगन में चिंतन की वेदी पर करके अश्रु आचमन सुनो बहुत मैं रो आया हूँ तब आया हूँ देह के आकर्षण हैं झूठे, जान चुका हूँ नहीं तारती सदा जाहन्वी मान चुका हूँ त्याग चुका हूँ कामुकता के बंधन सारे मलिन प... »

तिरंगा

नहीं तिरंगा मात्र ध्वजा ये जय का उदघोष भी है अमर शहीदों का प्रतीक बिस्मिल,भगत,बोस भी है उत्साह रगों में भरता यह क़ुरबानी को तत्पर करता हर देशभक्त हर राष्ट्रभक्त इस पर जीता इस पर मरता जिससे रंग चुराकर प्रकृति माता का श्रृंगार करे मान बढ़ाता वीरों का ये नित उनका सत्कार करे धर्म क्रांति सद्भाव प्रेरणा का देता सन्देश हमें प्राण न्योछवर करने का देता ये उद्देश्य तुम्हें यह पटेल का साहस है और ये भगत की क़ुर... »

सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है

तीन रंगों से बना हुआ पहचान हमारी है सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है आन, बान, सम्मान का सूचक राष्ट्रनिष्ठा और ज्ञान का सूचक प्रतीक ये अपने संविधान का है अपने अभिमान का सूचक सारे जग में न्यारा तिरंगा आन हमारी है सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है अमर शहीदों की अभिलाषा ये हर भारतवासी की आशा गर्वित कर देता हर मनु को दूर करे हर मन की निराशा सारे जग में हमारा तिरंगा जान हमारी है सारे जग से प्या... »

रण निश्चित हो तो डरना कैसा

मन शंकित हो तो बढ़ना कैसा रण निश्चित हो तो डरना कैसा जब मान लिया तो मान लिया अब विरुद्ध चाहे स्वयं विभु हों जब ठान लिया तो ठान लिया अब सन्मुख चाहे स्वयं प्रभु हों है अमर आत्मा ..विदित है तो फिर हार मानकर मरना कैसा रण निश्चित हो तो डरना कैसा जब उरिण अरुण मातंड लिए तुमने निश्चय हैं अखण्ड किये अब जीत हो या मृत्यु हो अब जीना क्या बिना घमण्ड लिए निश्चित सब कुछ विदित है तो फिर बन कर्महीन तरना कैसा रण निश... »

तुमसे हैं सब एहसास मेरे

कभी समय की ठोकर से, यदि हिल जाएँ विश्वास मेरे कभी जो तुमसे कहने को यदि, शब्द नहीं हों पास मेरे कभी तुम्हारी अभिलाषाएं,.. यदि मैं पूर्ण न कर पाऊँ प्रिय तुम भूल नहीं जाना, ..तुमसे हैं सब एहसास मेरे कभी जो मेरा क्रोध यदि, ….अति से ज्यादा बढ़ जाये कभी जो मेरा अहम् यदि,…… प्रेम के आगे अड़ जाये कभी जो यदि मैं झूठे कह दूँ, व्यतीत हुए आभास मेरे प्रिय तुम भूल नहीं जाना, ..तुमसे हैं सब एहसास... »