फूलों ने जब साथ दिया, मैं भी महकना सीख गया चिड़ियों ने जब साथ दिया, मैं भी चहकना सीख गया चलना गिरना, गिरकर चलना, लगा रहा यह जख्मो भर पापा की जब उंगली थामी, तब […]

आज मेरी मां के चेहरे पर मायूसी छाई है फिर भी देख कर मुझे वह मुस्कुराई है मेरी रोटी के खातिर जल जाते थे जो हाथ पहली बार मां के उन हाथों मे कम्पन अाई […]

पप्पू परधानी मा खड़ा हयिन जनता के गोडे मा पड़ा हयिन जनता ताई वय लड़ा हयिन जनता ताई वय खड़ा हयिन जितय ताई वय हैरान हयिन पूर्व परधान से परेशान हयिन भावी परधान लिखाए लिहिन […]

बहुत ढूंढा, बहुत कोशिश की, बहुत आवाज लगाई। लेकिन वह वापस ना आया, वह बचपन था मेरे भाई। गांव की गलियों में खेलना, कूदना, दौड़ना, भागना, गलती छुपाने के लिए हर बात पर, मां की […]

शीर्षक भार्इ- बन्धु हे भ्रातृ लिखे हो जो छंद मुझे, पढ़कर मैं बहुत प्रसन्न हुआ । उत्तर में लिखा सवैया हूं, जैसा मन में उत्पन्न हुआ ।। जो कुछ त्रुटियां होगी उसमें, तुम ध्यान नहीं […]