भावों की जननी हिंदी है, मां है अपने धाम की। कोरोना काल में हाय, हैलो, छूटा , जय हुई अपने प्रणाम की । हिंदी में अपने भाव रचे , हिंदी ही अधरों पर सजे । […]

************ हास्य रचना********* एक सखी ने पूछा वॉट्सअप पर दूजी से, क्या चल रहा है ज़िन्दगी में… दूजी वाली बोली… Jsdfghyybttuiokhfeyppourebm पहली ने कहा, ये क्या है,कुछ समझ नहीं आया.. दुजी वाली बोली, वो ही […]

मासूम सी ख्वाहिश है इस ज़िन्दगी से, छोटी सी फरमाइश है इस ज़िन्दगी से। ना मांगे चांद,सितारे हम, मिले ना कभी कोई गम.. होती रहे खुशियों की बारिश, इस ज़िन्दगी में। बहुत कश्मकश रहीं इस […]

सावन पर कविताओं की बहार छाई है मेरी कविता अभी तो ना तैयार होके आई है। कहती है थोड़ा और बन संवर लूं … अच्छी सी दिखूंगी थोड़ा और निखर लूं । सब को लिखते […]

मैं अंतर्मुखी हूं, इसीलिए कभी – कभी कुछ दुखी हूं, और कभी – कभी कुछ सुखी हूं । बोलने से पहले तौलती हूं, यदा – कदा मन का कह नहीं पाती, तो थोड़ी खौलती हूं […]

” गीता” इस संसार में, दो तरह के लोग, परवाह नहीं इस भयंकर रोग की, भागे फिरते रोज़ । दूजे वाले डरकर रहते, घर से बाहर कम निकलते, मगर मज़े की बात देखो, ……. दोनों […]

बिट्टू लेता था आंखे मींचे, मैंने सोचा सोया है वो। मैंने एक सखी को फ़ोन लगाया, सुबह पति से हुई लड़ाई का सारा वृतांत सुनाया । फोन रख के जब मैं पलटी, बिट्टू मुझको घूर […]

बात 4-5 साल पहले की है। मेरे छोटे भाई ने एक लड़की पसंद कर ली। लड़की विजातीय थी, बस घर में कोहराम मच गया। जो चाचा,मामा फूफा मेरे भाई पर लाड लुटाते थे, मानो उसके […]

नारी हो निराशा नहीं, टूटे ना तेरी आशा कहीं,। निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा । तेरी जीत का परचम लहरएगा । खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं, खुदी को कर बुलंद इतना, कि […]

तुम नारी हो, यूं अबला न बनो । दुर्गा – अवतारी हो, सबला तो बनो । बीती बातों को छोड़ परे, आगे के रस्ते तय तो करो । रस्ता था, कांटो वाला बीत गया रस्ता […]

वक्त अनमोल है, ना कोई इसका मोल है । मुफ़्त में मिले, कुदरत से, इसकी कीमत पहचान । गर तू करेगा वक्त की कद्र……. तो वक्त भी तेरी कद्र करेगा ऐ इन्सान । जीवन जी […]

बहुत ही ख़ूबसूरत होती है दोस्ती, निज स्वार्थ से ऊपर होती है दोस्ती। कुछ रिश्ते मिलते हैं, हमें जन्म से, कुछ रिश्ते मिलते हैं, समाज की रीत से मगर निज चुनाव पर होती है दोस्ती […]

सतयुग में ऋषि – मुनि करते थे हवन, ताकि, ना रहें कीटाणु, शुद्ध हो वातावरण । कलियुग में ऋषि – मुनियों का भेष बनाकर, बैठे हैं कुछ पाखंडी………………….. इनसे बचकर रहना मनुज, जाग सके तो […]

मां और पत्नी दोनों गुरू, दोनों से नव-जीवन शुरू। मां कहे , पत्नी सिखाती, पत्नी कहे, मां सिखाती । विनम्रता की पराकाष्ठा देखो, सिखाने का श्रेय एक-दूजे को दिलाती ✍️…गीता

ये कोरोना की बीमारी, ना इंसान से डरी ना हारी । इसने इतने सबक सिखाए , ज़िन्दगी में किसी ने नहीं सिखाए । कोई कहे काढ़ा पीलो, कोई जड़ी – बूटी बताए । तुक्का मार […]

हां, झूठी है औरत, अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित, औरों के लिए जगे रात तक हां, झूठी है औरत। मायके की तारीफ़ करे ससुराल में, ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में। कोशिश […]

हर क्यूं का जवाब नहीं होता, हर जवाब लाजवाब नहीं होता । यूं तो हम ख्वाब देखते हैं बहुत सारे, पर, हर ख्वाब तो पूरा नहीं होता ।

सावन की रिमझिम बूंदों में, भीगे तुम भी, भीगे हम भी भीग गया है तन – मन सारा। नभ से मेघा जल बरसाते, धरती को हैं सरस बनाते गीले हैं आगे के रस्ते। अरे! अरे, […]

हास्य- कविता सत्य – नारायण जी की पूजा थी, शर्मा जी के धाम। गुप्ता जी भी पहुंच गए, छोड़ के सारे काम। आरती के समय सामने, जब थाली आई, डाला दस रुपए का फटा नोट, […]

गुरू की महिमा का मैं, कैसे करूं बखान । गुरू से ही तो किया है, ये सब अर्जित ज्ञान। ऐसा कोई कागज़ नहीं, जिसमे वो शब्द समाएं। ऐसी कोई स्याही नहीं, जिससे सारे गुरू – […]

साजिशें भी थीं, सामने गुनहगार भी थे। जवाब हमारे पास, तैयार भी थे। हम चुप रह कर सब सहते रहे, थोड़े नादान ही सही हम,मगर थोड़े समझदार भी थे।

आज धरा से मिला आकाश ,तो अच्छा लगा। नन्हीं – नन्हीं बूंदों से हरी हो गई घास ,तो अच्छा लगा। तल्ख़ हो जाए ,कुछ बातों से जब दिल, कोई दे जाए बातों की मिठास , […]

कुछ तो बेबसी रही होगी, जो राहों पर निकल पड़ा मज़दूर। ना साधन है ना रोटी है,, निज घर जाने को मजबूर। कुछ सपने लेकर आया था शहर, वो सपने हो गए चकनाचूर । कड़ी […]

तपती धरती पर पड़े, जब बरखा की फुहार, सोंधी सुगन्ध से महके धरती, ठंडी चले बयार। मयूर नाचे झूम – झूम कर, बुलबुल राग सुनाए, तितली प्यारी आए सैर को, कोयल कुहू – कुहू गाए। […]

अपनों का साथ मिले तो, हार में भी जीत है। अपनों का साथ हो तो, हर दिवस ख़ुशी का गीत है। है निशा का अन्धकार तो, एक दीपक साथ निभाएगा । तिमिर से अब भय […]

वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही। तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही। फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे। खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।

आज कैसे – कैसे हुए जज़्बात के रोना आया, बीती किसी बात पे रोना आया। एक दुखती रग है, गर दबा देता है कोई, नहीं मिलती उस दर्द से निजात पे रोना आया…

तीन साल का बिट्टू मेरा मुझसे था नाराज़, मैंने पूछा क्या हुआ है, गुमसुम क्यूं हो आज। बोला, मैं आपको अपनी शादी में नहीं बुलाऊंगा, हंसी रोक कर मैंने पूछा, क्या हुआ बताओ ना । […]

कोई जब जाता है, दूर कहीं, यादें छोड़ जाता है, पास यहीं। उससे कहो अपनी यादों से तो आ के मिल, एक बार ही सही, फिर पहले सा आ के खिल। यूं ही आजा एक […]