तुम मुझे देखकर सोंच रहे ये गीत भला क्या गायेगा जिसकी खुद की भाषा गड़बड़ वो कविता क्या लिख पायेगा लेकिन मुझको नादान समझना ही तेरी नादानी है तुम सोंच रहे होगे बालक ये असभ्य, […]

पन्द्रह अगस्त की बेला पर रवि का दरवाजा खुलता है, सब ऊपर से मुस्काते हैं पर अंदर से दिल जलता है जब सूखे नयन-समन्दर में सागर की लहरें उठती हैं, जब वीरों की बलिदान कथाएं […]