Kumar Ashish, Author at Saavan's Posts

कुमार आशीष

कविता की राम-कहानी

तुम मुझे देखकर सोंच रहे ये गीत भला क्या गायेगा जिसकी खुद की भाषा गड़बड़ वो कविता क्या लिख पायेगा लेकिन मुझको नादान समझना ही तेरी नादानी है तुम सोंच रहे होगे बालक ये असभ्य, अभिमानी है मैं तो दिनकर का वंशज हूँ तो मैं कैसे झुक सकता हूँ तुम चाहे जितना जोर लगा लो मैं कैसे रुक सकता हूँ मेरी कलम वचन दे बैठी मजलूमों, दुखियारों को दर्द लिखेगी जीवर भर ये वादा है निज यारों को मेरी भाषा पूर्ण नहीं औ’ इसका... »

स्वतन्त्रता-दिवस

पन्द्रह अगस्त की बेला पर रवि का दरवाजा खुलता है, सब ऊपर से मुस्काते हैं पर अंदर से दिल जलता है जब सूखे नयन-समन्दर में सागर की लहरें उठती हैं, जब वीरों की बलिदान कथाएं मन उत्साहित करती हैं जब भारत माता के आँचल में आग आज भी जलती है, तब भारत के वीरों की कुर्बानी मुझको खलती है जब लाल किले के संभाषण से गद्दारी की बू आये, जब नेता-मंत्री के अधिवेषण मक्कारी को छू जाये जब शब्दों से बनी श्रृंखला में कवि नेत... »