Neeraj Bhan, Author at Saavan's Posts

कांटो से लगे ज़ख्म

कांटो से लगे ज़ख्म तो सब भरते चले गए थे ‘ऐ-नीरज’ हैरत तो तब हुई जब इक फूल का स्पर्श नासूर बन गया !! »

Kaanto Se Lage Jakhm

Kaanto Se Lage Jakhm

Kaanto Se Lage Jakhm Toh sab Bharte Chale Gaye The ‘ai-neeraj’ Hairat Toh Tab Huyi Jab Ik Phool Ka Sparsh Nasoor Ban Gaya !! »

करने को कुछ और “करम” अभी बाकी हैं

टूट चूका हूँ , चाह जीने की छोड़ चूका हूँ ! फिर भी ज़िंदा हूँ क्यूँकि साँसे कुछ “नम” अभी बाकी हैं …! ना जाने कितने ही दर्द सह चुका ! ना जाने और कितने ही खाने को “ज़ख़्म” अभी बाकी है ! छोड़ के जा चुके हैं जो हमको ! “संग हैं हर पल मेरे ” मुझमें ये “भ्रम ” अभी बाकी है ! नाम-ए-पर्ची बहुत लम्बी है मेरे अपनों की ! बस इसी बात का मुझमें थोड़ा सा “अहम &#... »