Author: Neetesh Thapar

  • महसूस न हो

    थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो,
    मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,

    सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
    मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

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