10 Comments

  1. अपराधों का करती क्यूँ न प्रतिकार तू , आनुप्रासिक छठा से सुसज्जित और यथार्थ पर आधरित प्रेरक पंक्तियाँ

  2. “दुर्योधन , दुहशासन जैसे लोगों की कमी नहीं है आज भी”
    ऐसे लोगों का प्रतिकार करना ही चाहिए ऐसे लोग समाज पर एक बदनुमा दाग हैं। कविता में कवयित्री ने दुर्गा चंडी का अवतार लेने की बात भी कही है, जी कि ऐसी विकट परिस्थिति में अति आवश्यक है।
    … बहुत ही सटीक प्रस्तुति ।

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