5 Comments

  1. त्राहि त्राहि कर रही तेरी धरा
    खतरे में पङा ये सारा जहाँ
    मनुज काल का ग्रास बन जा रहा
    तू क्यू छिपा, बता बैठा कहाँ।
    आह से उपजा हुआ गान इसी को कहते हैं। मानव जीवन की पीड़ा को आपने बखूबी चित्रित किया है। वाह

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