Vandaana, Author at Saavan's Posts

भारत माता

भारत माता सिसक रही है भारत माता, आॅचल भी कुछ फटा फटा है चेहरे का नूर कहीं नहीं है,घूंघट  भी कुछ हटा हटा है।। क्या कारण है, सोचा है कभी? क्यों माॅ इतनी उदास है गुलामों  सी सहमी खडी, जब आजादी उसके पास है। पहले चढते थे शीश  सुमन, लहू से तिलक हो जाता था सफेद आॅचल माॅ का तब लाल चूनर कहलाता था आॅखों से बहती थी गंगा जमूना, की पावन अमृत द्यारायें चरणों पे झुककर हिमाचल मस्तक रोत नवाता था। बोते थे बीज चाॅदी... »

एक शहीद का खत

एक शहीद का खत….. ‘माॅ मेरे खत को तू पहले आॅखों से लगा लेना चूमना होठों से इसे फिर आॅचल में छिपा लेना।’ कि….. बेटा तेरा आज अपने कर्तवय  से हट गया युद्ध बाकि था अभी और वो मर गया। पूछे्गे बाबूजी जब क्या किया मेरे लाल ने कह देना बाकि हेै अभी कुछ सांसे बाल में ऐसा पूत नही जना मैंने जो पीठ दिखा आ जाये मरेगा सौ मार कर, नही ंवो, जो मेरा दूद्य लजा जाये सीने पर खायेगा गोली, छाती पे तमगे होगें उस... »