इस दीर्घ कविता के दसवें भाग में दुर्योधन द्वारा श्रीकृष्ण को हरने का असफल प्रयास और उस असफल प्रयास के प्रतिउत्तर में श्रीकृष्ण वासुदेव द्वारा स्वयं के विभूतियों के प्रदर्शन का वर्णन किया गया है।अर्जुन […]
इस दीर्घ कविता के दसवें भाग में दुर्योधन द्वारा श्रीकृष्ण को हरने का असफल प्रयास और उस असफल प्रयास के प्रतिउत्तर में श्रीकृष्ण वासुदेव द्वारा स्वयं के विभूतियों के प्रदर्शन का वर्णन किया गया है।अर्जुन […]
नभ में बादल घुमड़ रहे हैं, पंछी भी इधर-उधर उड़ रहे हैं l वृक्षों की ड़ाली पर बैठी, कोयल कुहू-कुहू करती l लगता है बरखा आएगी, धरा की प्यास बुझा जाएगी l पेड़-पौधे सब झूम […]
गर कोई मुझसे पूछे कभी बता मन तेरा बसता है कहीं झट से मैं बोल दूं मगधेश की गौरवमई परम्परा समेटे है जहां बस वहीं।। भोले भाले लोग जहां के मेहनत नस नस में है […]
जुलाई की शुरुआत है कहाँ खोई सावन की बरसात है ? तन पर लिपटे कपड़े सर्प के समान लगते हैं झोपड़पट्टी वालों का तो और भी बुरा हाल है। रूखे रूखे पत्ते हैं डालियाँ मुरझाई […]
कुमार विश्वास की कविता:- मांग की सिंदूर रेखा” एक प्रेमी के हृदय की वेदना को तो बखूबी व्यक्त करता है। जब उसकी प्रेमिका का विवाह किसी और के साथ हो रहा होता है, तब प्रेमी […]
गरम हवा बन कर लू, तन-मन को जला रही है l कैसे बाहर निकलूँ मैं घर से, यह धरा को भी तपा रही है l एक बारिश को तरसता, आज क्यूँ है मेरा मन l […]
आज चिकित्सक दिवस पर, चिकित्सकों को है नमन l शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, लगा रहे सबको वैक्सीन l कठिन समय में देते साथ, रोगी का थामें हैं हाथ l तन-मन को देते सुकून, दिल्ली […]
खेल होता है कौन नहीं समझता है, आम को पीठ पीछे धोखा मिलता है, कौन नहीं समझता है। खास को बिना मांगे सब कुछ मिल जाता है, कौन नहीं समझता है। जिसकी बोलने की आदत […]
मेरे हृदय की घंटियों को किसी ने जोर से बजाया है मैं आनंदित हो उठी हूं तुम्हारा फोन आया है तुम्हारा फोन आया है। ह्रदय की सरजमी को तुमने अंदर तक हिलाया है तुम्हारा फोन […]
आशियाना ढूँढ रही हूँ इस प्रकृति के संसार में । कहीं तो होगा मेरा आशियाना इस हरे भरे संसार में ।। बरसात से दोस्ती कर ली धूप से जोड़ा नया रिश्ता । जब ठंड में […]
कब से उठाए बैठी हूँ अपनी घूंघट उनके दीदार के लिए । एक वो है ख्वाबों में आशियाना तलाशते है मेरे लिए।।
अंधेरी रात है नभ को ढका है बादलों ने, छुप गए हैं सितारे, तब उजालों को बुलाया है लबों ने। मुहब्बत को कहा है आपने जबसे मिठाई, हुई बेचैन यह रसना कर रही है ढिढाई। […]
दो माह पूर्व ही विवाह हुआ था उसका किसी की नाजों से पाली गई बिटिया थी वह, कितनी प्यारी गुड़िया थी वह। अचानक पता चला उसका निधन हो गया है। न बीमार थी, न कोई […]
कदमों की दिशा तूने खुद ही बनानी पड़ेगी, लोग जायें उधर लोग जायें इधर, अपनी मंजिल तुझे खुद ही चुननी पड़ेगी। अपने सपनों की सीढ़ी बनानी पड़ेगी, और सपनों की डलिया भी बुननी पड़ेगी। साफ […]
कंबल की अभिमंत्रित प्यासी जटाएं, एकाकीपन में डूब गईं… जिसकी सुगंध वासुकी की स्वांसों को महका रही थी•• तभी कोई अनजानी अन- पहचानी आकृति, बादलों के कंधों पर सो गई और दृढ़ हनु को अंश […]
उम्र का फासला अलग जरूरत से ज्यादा आशा सदस्यों की अपूर्व ब्यस्तता बढ़ती शिकायत का है कारण शांत मन ही कर सकता निवारण सब सभी से समझते भी नहीं सब को हम समझाते भी नहीं […]
ख्वाब जो देखें हैं उनका टूटना बिखरना बहन के लिए मुश्किल है भाई की शिकायत सुनना भाई कहां गलतियों से बाज कभी आते हैं जो आशाएं रखी है अपनी बहन बेटी से वो सम्मान औरों […]
सखि बनती नहीं क्यूं दुश्मन बन जाती है क्या बताऊं नारी ही नारी के काम नहीं आती। अपनी बात को मनवाने के लिए कितने झूठ सच कहा सहारा उसने लिए अहम तुष्टि की खातिर,क्या-क्या कर […]
मेरे हिस्से की स्वांस पूछती है- रात्रि में श्यामल ओस से लक्षित वह कौन-सा प्रतिबिंब है जो सुनाई तो देता है, परंतु दिखाई नहीं देता चौमास की अर्धगन्ध से बने पुतलों से फूले हुए पलस्तर […]
यहां जान बहुत सस्ती है, नहीं दुंगा! मैं जीने आया हूं तेरे लिए। और चांद तारों का क्या हैं करना! मैं खुशियां लाया हूं तेरे लिए। — Manush
ओ हवा! लू न बन, हवा ही रह, जरा सा ठंडक दे, जरा सा झौंका दे, हिला दे जुल्फों को, खोल दे लफ्जों को प्यार की बात कह दे, ऐसा कह दे जिससे कुछ दिन […]
हरदोई के गोपामऊ में जन्मे रघुवंश सहाय वर्मा जी को उनकी जन्मतिथि पर, प्रज्ञा शुक्ला’ की तरफ से शब्दों का सुनहरा गुलदस्ता सप्रेम भेंट:- ————————– 30 जून को जन्मे रघुवंश सहाय जी जन्मतिथि पर उनकी […]
अंधेरी रात है नभ को ढका है बादलों ने, छुप गए हैं सितारे, तब उजालों को बुलाया है लबों ने। मुहब्बत को कहा है आपने जबसे मिठाई, हुई बेचैन यह रसना कर रही है ढिढाई। […]
पाक नाम रखने से कोई पाक नहीं बन जाता आदत बिगड़ चुकी जिसकी सुधार मुश्किल से आता नादानियां इतनी कि उन्होंने गुस्ताखियों का उन्हें अंदाजा भी नहीं उस जहाँ में क्यूँ आखिर कोई इंसान जन्म […]
संजय गांधी जी की पुण्यतिथि ———————— 23 जून 1980 को चिराग एक बुझ गया संजय गाँधी नाम था उनका एक विमान दुर्घटना में चला गया। दिलचस्पी थी उनको विमान कलाबाजी में प्रतियोगिताओं में भाग लेकर […]
श्री राम’ के नाम पे बोलो कब तक तुम राजनीति करोगे? ब्रह्म विरोधी, कर्म विरोधी बोलो कब तक तुम छुप पाओगे पूँछ रहा है मुझसे भारत कैसी ये राजनीति हुई है चारों ओर है संकट […]
जितिन प्रसाद जी को प्रज्ञा शुक्ला की पाती:- सेवा में, प्रिय जितिन चाचा’ भगवाधारी ‘कांग्रेसी चाचा श्री, आज तुम्हारी छवि धूमिल हो गई जितिन जी, या कि कहूँ मैं छवि ही तो मिट गई जितिन […]
नागार्जुन जी के जन्मदिवस पर सप्रेम भेंट मेरी कुछ पंक्तियां:- ———————- हिंदी साहित्य के यात्री’ युवाओं के सारथी राजनीतिक विश्लेषक थे वह जय हो भारत भारती हिंदी में विख्यात हुए वह नागार्जुन’ के नाम से […]
गुम कर दिया तेरे प्यार में पर फिर भी यही सवाल रहा क्या करती हो मेरे लिए। छोङ दिया अपनी पसंद भूल गयी क्या था नापसंद भुला बैठी खुद के अस्तित्व को फिर भी सवाल […]
उधर किसी की हसरतें पुरी हुई इधर किसी का दिल जला क्या कहे दोस्त सब की अपनी अपनी तक़दीर है अचानक एक दिन उनका ख़त आया उस में एक ही पंक्ति लिखा था ए क़ाबिल […]
जीवन में स्वाभिमान और झुकाव दोनो जरुरी हैं स्वाभिमान कभी°°° स्वयं का अपमान होते नहीं देख सकता और झुकाव कभी अपमान होने नहीं देता। •••झुकी हुई झाड़ियां कभी नहीं टूटती बड़े बड़े दरख्ते अक्सर टूट […]
बाँस की तरह सदा तना रहता हूँ मुश्किलों के आगे भी नहीं झुकता हूँ पवन के झोंको के थपेड़े खाकर अनर्गल वार्तालाप और प्रपंच में फंस कर कई बार रोया हूँ कई बार टूटा हूँ, […]
प्रेम का दूसरा नाम हो तुम क्या कहें मीठा रसीला आम हो तुम। सुबह-सुबह की मनोहर सी छठा हो कहूँ या किसी कीर्तन की शाम हो तुम। बढ़ा रही हो इस कदर अपनी, मुहब्बत की […]
मृत्यु है निश्चित तो डरना कैसा ? जीवन है एक सत्य तो घबराना कैसा ? सीड़ियों पर बैठी मुश्किल देखे रस्ता•• जब हो बाजुओं में बल तो घबराना कैसा! करते रह तू प्रयत्न तो सुलझेगी […]
माँ तुम जीवन में सब कुछ हो, प्राण हो, सांस हो, भूमि पर मेरी पकड़ हो, हृदय की धड़कन हो, उत्साह का मूल हो, संसार बदल गया लेकिन माँ तुम वही वैसी ही ममतामयी फूल […]
भुला दो दर्द भरे गीतों को, •••बुला लो अपने हमदर्द और मित्रों को। मिट जाएगा मन का हर संताप, क्यों करते रहते हो तुम इतना प्रलाप। बुरा वक्त है धीरे-धीरे कट जाएगा, °°°तुम्हारे उदास होठों […]
“श्रद्धेय स्वामी विवेकानंद पर कविता” उतरा वह जहाज से अपने रेत में ऐसे लोट गया जैसे बरसों से बिछड़ा बच्चा हो मां की गोद गया जब नरेन’ से बने विवेकानंद तभी जानी दुनिया वाह थे […]
समय कठिन आये जब तब भी खोजो अवसर, हार मानो नहीं तुम करो संघर्ष डटकर। लहू को धमनियों में बहा दो खूब मथकर, जब तलक पा न जाओ कहीं बैठो न थककर। परीक्षा ले रहा […]
किनारे पर बैठकर क्यों नाव का इंतजार करते हो! छुपाते हो, डरते हो, फिर भी प्यार करते हो नेह की चादर में जिस दिन सोए थे तुम संग हम जान गए थे हमसे कितना प्यार […]
जीवन के हर मोड़ पर नई चुनौतियां आती है कहीं दे जाती है हार हमें कहीं जीत दे जाती है । कहीं मिलती है समीक्षाएं कहीं आलोचनाएं मिल जाती हैं । जीवन में मिली हर […]
कर्म है बीज जो भी करूँगा, वह उगेगा, खिलेगा मुझे कल, फल उसी के मुताबिक मिलेगा। धर्म है प्रेम, नफरत नहीं है, प्रेम की राह चलता रहूंगा, कल उसी के मुताबिक मिलेगा।
सुख-दुख सिक्के के दो पहलू, जीवन में आते जाते हैं, अच्छाई और बुराई का, फर्क हमें बतलाते हैं। दुख में सब सुमिरन करते हैं, श्री हरि- हरि नाम जपते हैं, अनुभूति हुई ज्यों सुख की, […]
“वक्त” ——— मैं डूबता-सा कल हूँ आऊंगा नहीं जकड़ लो बांहों में फिर आऊंगा नहीं जो भी करना है निश्चय कर तुम आज ही करो बैठा हूं सीढ़ियों पर तुम ध्यान तो धरो गुंजाइश नहीं […]
काम आते रहो दूसरों के आपकी राह खुलती रहेगी, तुम भलाई करोगे, भलाई, आपके पास आती रहेगी। नीर बहता रहा है नदी में सैकड़ों जीव पीते रहे हैं, आदि युग से अभी तक निरन्तर स्रोत […]
लिफाफे में बंद करके कुछ शिकायतें भेजती हूँ उनको तुम्हारे पास अभिलाषा है तुम तक पहुंचेंगी मेरी चिट्ठियां और मेरे मन की बात सुनवाई होगी या मुह फेर लोगे! या फिर आ लौटोगे मेरे पास […]
आकाश से एक बूंद गिरी मचल कर धरा पर विरहाग्नि में स्तब्ध उर्मिला को देख कर••• बोली हे उर्मिला! तू है दीपक जलाए उधर इंद्रजीत ने वो दीपक बुझाए। शक्ति से किया है प्रहार उसने […]
तेरे नैनों से प्रेम की बरसात हो गई लड़ झगड़ के देखो मेरी रात हो गई प्यार में हार गए हम सौ दफ़ा क्या करें अब तो जमानत भी जप्त हो गई सावन में बौर […]
आपकी चंचल चुनरिया को मैं भिगो दूँगा, मेघ का एक छोटा टुकड़ा बन सावन में झड़ी लगा दूँगा। बिछाने हर तरफ खुशी की हरियाली, अपने जीवन की हर एक घड़ी लगा दूँगा।
मिले हो आप है यह नसीब हमारा, तख्तों-ताज का मालिक बना है, दिल गरीब हमारा। आया है आपके जब से दिल करीब हमारा, नहीं रहा है किसी मायने दिल गरीब हमारा।
शायद मेरे ज़नाज़े के पीछे अश्क बहाती हुई कोई आ रही है। एक झलक देखें तो किस लिबास में मेरी ज़नाज़े के संग आ रही है।।
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