आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है चाय और काफ़ी रहती थी सगी बहनों सी ग्रीन टी आकर सौतन सी अकड़ रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही […]
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है चाय और काफ़ी रहती थी सगी बहनों सी ग्रीन टी आकर सौतन सी अकड़ रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही […]
आंखें बोझिल हैं मगर, नींद गई है रूठ, लगता है कुछ आस भी, आज गई है टूट। वो खर्राटे मार कर, उड़ा रहे हैं नींद, हम कोशिश करते रहे, अपनी आंखें मीच।
संगीत सहित हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे राम तुम्हीं हो भव-भय हरन वाले — 2 बार गायें काटो भव-बंधन मेरे ———————————— हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो […]
मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ——————————————– मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम […]
प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा ———————————————– प्रभु राम देना साथ हमारा हम […]
जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) (2 बार गाये) ————————————————————————– जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे […]
संगीत सहित जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है ————————————— जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते […]
राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन की विकार तु हटाये जा राम से ही जन्मों का पाप धुलता राम से ही राम मिलता राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन […]
जय श्री राम ———————- माता तुम्हीं हो जग के पिता है सबके राम दया करो मा जानकी हम हैं तेरी संतान —————————— माता तुम्हीं हो जग के पिता है सबके राम ।।1।। ——————————- जन्म तुम्हीं […]
जय श्री राम ———————— राम की सृष्टि, राम की माया राम का है ये जग सारा जिसने जाना मेरा यहाँ कुछ नहीं वहीं है प्रभु राम का प्यारा ।।1।। ———————————————— राम का प्यारा बन दुनिया […]
jay shri ram जब सब नर में तुम्हीं बसे हो राम तब क्यूँ किसी को रावण बनाते हो राम और क्यूँ किसी का बेड़ा पार लगाते हो राम —————————————————- जब सब नर में तुम्हीं बसे […]
जय श्री राम ———————– अपनी किरदार निभाने ही पड़ेंगे जो लिखा है, वो होना ही है सब मौन ना हो सकते जहां में कुछ कोलाहल भी जरूरी है ।।1।। ——————————————— सब मौन अगर हो जाये […]
जय श्री राम ——————— इतना भी कोई गिरा न होता मन पाप करता, मन डरता इसका मतलब ये नहीं कि नर नारायण ना होता ।।1।। —————————— माया तो मायापति की अर्ध्दांगनी है मन भी ईश्वर […]
जब आंख से एक आंसू छलका, हो गया मन कुछ हल्का-हल्का। निकल गया था कुछ रुका-रुका सा, एक गुबार बीते कल का। वजन था आंसुओं में भी, कभी सोचा नहीं था ये संयम रखते रखते, […]
छोंड़ दी थी जो गलियां हमने कभी, आज सजकर फिर उन्हीं में जाना है संदेश भेजा है उन्होंने प्रेम का, जिनको हमने रब से ज्यादा माना है…
कभी धूप सुहाती है कभी भाती है छाया, कभी विरक्ति आती है कभी लुभाती है माया। कभी मीठा कभी खट्टा कभी कड़वा कसैला, बदलते स्वाद भाते हैं अलग से ख्वाब आते हैं। समय अस्थिर, न […]
विद्यालयों में रौनक लग गई, देखो फ़िर से कक्षाएं लग गई। फ़िर से बच्चों का है शोर, प्री बोर्ड का अब है जोर। बच्चों मास्क लगाकर आओ, शिक्षा संग सेहत भी पाओ। मिल-जुल कर रहो […]
न नखरा करेंगे न इजहार करेंगे। हम तो सिर्फ वसन्त के आने का इंतजार करेंगे।।
मत देख अपनी नज़र से हर बार कभी तो ले तु मेरी नज़र उधार ।
लक्ष्य कहता है कि पथ में लाख बाधाएं रहेंगी, जब व्यथित हो जाओगे टूटने वाले ही होगे, तब समझना आ गए हो पास मेरे, सौ निराशा मार्ग घेरें, रोकना मत तुम कदम को, एक दिन […]
💜Valentine special💜 कुछ गुलाबों के पंख बिखरा के गये थे यहाँ, लौटकर आए तो उन्हें सिमटा हुआ पाए… दे रही हैं गवाही खामोंशियां ये रातों की, ओढ़ के वो इश्क की थी चादर यहाँ आए….!!
आपकी मुस्कुराहट है अंधेरे में उजाले सी, बिलखती भूख में पाये उदर के लघु निवाले सी। मिटाती मानसिक पीड़ा, उगाती कुछ सुकूँ के पल, यही तो है दवा मन की यही दुश्वारियों का हल।
बीते दिन से सीख कर, कदम बढ़ा लो आज, जीवन को भरपूर जियो, जी लो पल पल आज, जी लो पल पल आज, रखो तुम आशा कल में, आज बदल जाएगा, जल्दी से बीते कल […]
खेल चल रहा था बच्चों का छोटे छोटे बच्चे थे, आपस में वे प्यारी प्यारी बातें बोल रहे थे। कोई थे धनवान घरों के कोई थे धन से कमजोर, लेकिन बच्चे सभी बराबर बात कर […]
शुभ संकष्ट चतुर्थी आई है, गणपति का आशीष लाई है। भोग लगाएं तिलकुट का, हर बाधा दूर भगाई है। इस दिन गणपति की उपासना से, हर संकट का नाश हो, तन निरोगी और दीर्घायु बने, […]
❤️तेरे बारे में क्या लिखूं तुझे …..❤️ ❤️सोचूँ तो ख्वाब बन जाते हो..❤️ ❤️तुझे देखूं तो सपना..❤️🌹 ❤️तुझे छू लूँ तो ख्वाहिश बन जाते हो..❤️ ❤️तुझे मांगू तो मन्नत..❤️ ❤️तुझ से बात करूं तो आदत […]
एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार ढ़लना पड़ता है । […]
गलत को यदि गलत बोलें नहीं तब कवि कहाँ हैं हम, बन्द आंखें कर चलें तब कवि कहाँ हैं हम। जी हुजूरी में रहे आदत कलम की है नहीं यदि किसी से दब गए तब […]
दूर तलक तनहाई का आलम अकेली बिरह वेदना सहती ख़ामोशी की गहरी चादर ओढ़े चुपचाप रहती है रात। किसको अपनी पीङ सुनाए कैसे उसको अपना मीत बनाए जिसके लिए कयी ख्वाब सजाए उधेड़-बुन में रोती […]
शिशु वस्त्रालय के पुतले से, एक बालक कर रहा था बातें , कितने सुंदर वस्त्र तुम्हारे एक भी ऐसे नहीं पास हमारे। परसों मेरा जन्म-दिन है, नए वस्त्र पहनने का मन है, मां को मालकिन […]
क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं, हम तुम्हारे काबिल नहीं, तुम हमारे मुनासिब नहीं ।। ——————————— क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं ।।1।। —————————————– सुना है रिश्ता […]
चरित्र बदलो चित्र बदल जायेगा ब्रह्मचर्य का पालन करो सारी सांसारिक दुःख मिट जायेगा याद उसे करो जो देता है साथ सभी का ।।1।। —————————————– सभी में उसी का स्वरूप है कोई दैत्य तो कोई […]
भव-बंधन हारे पार करो अब नईया मेरे तुझ से ही अब सब कुछ मेरा मुझमें नहीं रहा अब कुछ तेरा —————————– भव-बंधन हारे पार करो अब नईया मेरे ।।1।। —————————————– तुझमें समर्पित मैं, मुझमें समर्पित […]
मैं सबके सामने खड़ा हूँ, तुम मुझे जानने की कोशिश तो कर मैं बतला दूँगा, मैं कौन हूँ तुम मन से विकार हटा के तो देख ।।1।। ————————————— चलती राहों पे चलके पा सकते हो […]
जय श्री राम ।। —————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है, सबका अपना-अपना पाठ है, सबको वही निभाना है ।। ———————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है […]
जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी आँखें…!! जब भी किसी प्रेमी युगल ने देखा मेरी तरफ […]
जी करता है कागज में तस्वीर तेरी ऊतार दूं , दिल के किसी कोने का राज उसमें उकेर दूं | ख़्वाब में था जो, हकीकत में उसे देख रहा हूं , खुद पे नहीं अंकुश, […]
तेरी मुस्कान बांधे जा रही है , हमें ……….. जिंदगी की डोर बनकर रंगीन सुतली की तरह, लिबास की बैल्ट समझ ले या फिर आजकल का इलास्टिक रम गई है उस तरह तू जिस तरह […]
जय श्री राम ।। ————————— घट-घट में राम बसे तन-तन में राम बसे कोई ढूँढे तो उसे सर्वत्र राम ही राम दिखे ————————————– असत् की सत्ता कितना भी जोर लगा ले मन माया जितना भी […]
JAY SHRI RAM कहने को तो कहती है दुनिया साथ देंगे हम तुम्हारा जब काम आती है साथ देने को तब क्यूँ साथ छोड़ देती है जमाना ——————————————- ये दुनिया है, साथ नहीं देती कोई […]
JAY SHRI RAM वृक्ष कबहुँ नाही फल भखे, नदी ना संचे नीर परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर ।। ———————————————– रमता योगी बहता पानी कभी न रूकता सुनो रे भाई! जिसको जिससे मिलना है मिलकर […]
पौष पूर्णिमा के चंद्र देखो, नभ में कैसे चमक रहे हैं। सर्द रातों में चांदनी सहित, देखो ना कैसे दमक रहे हैं। चांदनी भी ठंड में सिमटी सी जाए, चंद्र उसको देख-देख मुस्काएं। यह ठंड […]
उमंग ऐसी जगाओ स्वयं के जीवन में, फटक न पाए निराशा कभी भी जीवन में। रखी नहीं रहती सजा के थाल में खुशियां, वरन स्वयं की मेहनत से, जीतनी आज हैं तुम्हें खुशियां। उमंग रोशनी […]
समय कीमती धन है सबसे, सृष्टि का निर्माण हुआ है तब से। समय खर्च करने से आपको, कुछ धन मिल सकता है। किंतु धन खर्च करने से, बीता समय नहीं मिलता है। सोच समझ कर […]
जिंदगी में अभाव रहते हैं मगर तुझे अभाव में सँभलना है, पैर रख कर कंटीली राहों में लक्ष्य तक स्वयं पहुंचना है। बाहरी छोड़ कर सारा दिखावा आत्मा के स्वरों को सुनना है। छोड़ कर […]
यदि इच्छा-शक्ति हो सबल, तो हर कार्य करना हो सरल। योग्यता यदि कम भी है तो, इच्छा-शक्ति का विस्तार करो। किसी कार्य को कभी ना समझो भार, हर दायित्व से प्यार करो। फ़िर कठिन डगर […]
खूबसूरत हो मगर कैसे कहूँ कैसे हो, किसकी उपमा दूँ और बोलूं कि ऐसे हो। पुराने कवियों ने कहा कि फूल हो तुम अब बताओ नया क्या कहूँ कि क्या हो तुम। परन्तु कुछ तो […]
कविता-पर्यावरण है क्या ——————————- सभी सुनो, पर्यावरण है क्या, क्या इसकी परिभाषा है, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, जीव जंतु मानव – जिससे प्रभावित हो, उसी को कहते पर्यावरण है| अंबर भू धूप हवा पानी वर्षा […]
मजबूरियां तुम दूसरे की क्यों समझते हो नहीं, भाव दिखते वेदना के क्यों समझते हो नहीं। गोद में बच्चा पकड़कर ठुस भरी बस में कोई माँ खड़ी हो तो उसे क्यों सीट देते हो नहीं। […]
कविता-चारआने की संपत्ति को ————————————— चार आने की संपत्ति को रुपये में खरीदा था खरीदा उस वक्त मैंने जब बाजार में भाव गिरा था, मैं बाजार में नया खरीददार बोली लगी, मैं समझ नहीं पाया […]
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