कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब […]
कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब […]
तुम धरा हो, मैं वृक्ष हूं तुम चैतन्य हो, मैं प्रेम हूं | तुम नदिया हो, मैं किनारा हूं तुम अग्नि हो, मैं हवनकुंड हूं | तुम जीव हो, मैं श्वास हूं तुम मर्यादा हो, […]
आइना पूंछता है ********** यह सवाल हर रोज मानती क्यूं नहीं सलाह मेरा । चेहरा वही है क्यूं वक्त जाया करती है मेरा निखार आएगा कैसे वही पहली सी फितरत है तेरा ज़िद […]
ईमेल, चैटिंग ही अपना भविष्य क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? नववर्ष का कार्ड नहीं प्रेमपत्र लेखन स्वीकार नहीं कलम कागज का जमाना बना अतीत विशेष क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? क्या […]
ऊंचे उड़ना चाहता, है मेरा मन आज, लेकिन पंख उगे नहीं, माने खुद को बाज। माने खुद को बाज, हवा में उड़ता है बस, भूल असलियत स्वयं, भूमि पर गिरता है बस। कहे लेखनी उड़ो, […]
दर्द आम जन का समझो तो तब मनुज हो आवाज बन सको तो सचमुच में तब मनुज हो। भूखा गली में सोया पूछा नहीं किसी ने बच्चा भी उसका रोया पूछा नहीं किसी ने। वो […]
कविता-बावरी ——————– सुन बावरी क्यों लड़ती है मुझसे, एक दिन रूठ जाऊंगा, तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा, संग में कॉलेज आना जाना, पार्को में समय बिताना, होटल में खाना खाना, फोन पर चैटिंग करना […]
देख लिया दुनिया तुझको अब और नहीं कुछ चाहत है, हर तरफ चेहरे पर एक चेहरा है अपनों से ही हर जन आहत है। अब और फरेब की गुंजाइश नहीं यहां अपनापन की लगी नुमाइश […]
इन मैले वस्त्रों में घूमूं, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ बनूं,उडूं गगन को चूमूं, मेरा मन भी करता है। माँ संग जाना बर्तन धोना, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ पढूं-लिखूं, मेरा […]
एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!! मगर हम हमेशा वास्तविकता की अवहेलना कर चुनते हैं कल्पनाओं […]
गांव में आई हूं मैं । बहुत दिनों के बाद। खेतों में सरसों पीली देखी, गगन की रंगत नीली देखी। खूब चमकते तारे देखे, बहुत दिनों के बाद। गेहूं की सुनहरी बाली देखी, तरुवर की […]
कविता-जहर पिला दो —————————– जहर पिला दो जहर खिला दो मम्मी पापा उपकार करो जन्म नहीं देना मम्मी दर्द मेरा एहसास करो मुझ नन्हीं बच्ची पर हवसी रहम नहीं करता है, मन की प्यास बुझा […]
मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने सींच देना है, जय हिंद का जेहन में सबके गीत […]
गलत को रोकना होगा गलत को टोकना होगा सभी को सोचना होगा, हो ऊंचा नाम भारत का स्वयं को झौंकना होगा। सभी को सद दिशा देकर सभी को देश हित में रह स्वयं को झौंकना […]
वे न बोले हम न बोले चुप रहे, सच के आगे आज भी हम छुप रहे, रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा बस अंधेरे के ही नगमे लिख रहे।
कब तलक फूंकती रहेंगी गाड़ियां कब तलक यह आग सी मन में रहेगी, कब तलक सब ठीक होगा देश में, कब दिखेंगे लोग सच्चे वेश में।
गणतंत्र पर ऐसा होना हम सबकी ही नाकामी है सबका पत्थर हो जाना हम सबकी ही नादानी है। न इधर झुके न उधर झुके सूखी लकड़ी से अड़े रहे, अलग रंग के झण्डे क्यों ऐसे […]
सभी अपना काम ईमानदारी से करें, जो दायित्व हो अपना उसे सच्चाई से पूरा करें, भ्रष्टाचार न होने सदाचार का मार्ग अपनाएं, वही देश के अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, वही गणतंत्र पर देश […]
अपनी तमाम विषमताओं के साथ अनगिनत विविधताओं के बावजूद सबसे माकूल व्यवस्था है अपना गणतंत्र। इस बदलते समय की बस यह मांग है लोक के प्रति तंत्र की सहिष्णुता और तंत्र के प्रति लोक की […]
अब हम हैं स्वतंत्रत देखो यह अपना गणतंत्र। ७२वी वर्षगांठ में भी देखो उमंग, कहां से लाया कैसा मंत्र यह अपना गणतंत्र। देख के इसका रूप सलौना पाक तरस रहा,चीन रचता षड़यंत्र यह अपना गणतंत्र।
सुन्दर-सुन्दर झांकियों में समाया भारत, आज राजधानी के राजपथ पर आया भारत। केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश अरुणाचल, सब की झांकी आई है। केरल ने नारियल के सुनहरे फाइबर से, सारी झांकी सजाई है। कर्नाटक ने […]
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय हिंद, जय हिंद। हम सबको मिलकर इसकी उन्नति में जुट जाना है, सब तरफ रहे खुशहाली, हरियाली को पाना है। […]
भारतीय होने पर गर्व है, आज 26 जनवरी का पर्व है। देश के दुश्मनों को मिलकर हराएं, आओ हर घर में तिरंगा फ़हराएं। ना केवल जश्न मनाना है, ना केवल झंडा फ़हराना है, जो कुर्बान […]
स्वप्न पलकों पर सुहाने सजते रहे, दीप मोहब्बत के जलते रहे। धड़कन भी गीत गुनगुनाने लगी, सांसे भी कविता सुनाने लगीं। पायल के घुंघरू सरगम बजाने लगे, कलाई के कंगन गीत गाने लगे, धानी चुनर […]
उस रात बहुत रोई थी, बहुत देर में मैं सोई थी। स्वप्न में तुम्हें बुला कर, कांधे पर सर रखकर, रोते-रोते सोई थी मैं उस रात बहुत रोई थी। यह था नेह तुम्हारा, एक बार […]
हार मिलती है मगर, हार जाना नहीं, सैकड़ों हार से भी, हार जाना नहीं। तोड़ दे यदि परिस्थिति, टूट जाना नहीं, प्यार कर जिन्दगी से, रूठ जाना नहीं। निराशा घेर लेगी, जब कभी भाव तेरे, […]
पहले खुद पर रखो पूर्ण विश्वास तुम, तब जमाने से मांगो खुला साथ तुम। हीन भावों को खुद से करो दूर तुम, शक की बातें स्वयं से रखो दूर तुम। हो गलत यदि कहीं पर […]
यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है यह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान है स्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान है क्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार […]
वृद्ध माता पिता का सहारा बनो है जरूरत उन्हें तुम सहारा बनो, याद कर लो वे बचपन दिन आज तुम, पाले-पोसे थे कितने सलीके से तुम। आंच आने न दी जिसने तुम पर कभी, पूरी […]
कोई दिक्कत है अगर सीधे सीधे बोल, भीतर-भीतर विष जड़ी मत रखना तू घोल। मत रखना तू घोल जहर दूजे को देने, पड़ जायेंगे कभी तुझे लेने के देने। कहे लेखनी अमिय, बाँट ले बाहर […]
इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जिसके घर में प्रतीक्षारत हो कोई, उसका पग घर की ओर, जल्दी-जल्दी चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जो […]
रविवार की छुट्टी थी, पर कोहरा कर्तव्य निभाने आ गया सर्दियों के मौसम में, और सर्दी बढ़ाने आ गया। धूप भी डर कर छुप गई है, ठंड का डंडा चलाने आ गया। घूम रहा है […]
घर आँगन में फूलों सी खिलती हुई लड़कियाँ! फ़ीकी दुनिया में मिसरी सी घुलतीं हुई लड़कियां!! उदासियों की भीड़ में हँसती हुई मिलती हैं! ज़िम्मेदारी के बोझ तले पिसती हुई लड़कियाँ!! ढल जाती हैं पानी […]
# द्रौपदी की प्रतिज्ञा द्रौपदी का परिचय- आ खींच दुशासन चीर मेरा, हर ले मेरा सौंदर्य सजल । आ केश पकड़ कर खींच मुझे, अपना परिचय दे ऐ निर्बल । मैं राजवंशिनी कुल कीर्ति हूँ, […]
बेटियों का कल बेहतर बनाने को, आओ उनका आज संवारें। बेटी पर अभिमान करो, जन्म लेने पर उसका सम्मान करो। बेटी को शिक्षा का अधिकार दो, बेटी को भी बेटों जैसा ही प्यार दो। उसकी […]
अनुभव के अतिरिक्त कोई आधार नहीं , परमेश्वर का पथ कोई व्यापार नहीं। प्रभु में हीं जीवन कोई संज्ञान क्या लेगा? सागर में हीं मीन भला प्रमाण क्या देगा? खग जाने कैसे कोई आकाश भला? दीपक जाने क्या है ये […]
एक ऐसी ज़िन्दगी, जो किसी कला के साथ, एकान्त में जीना सिखा दे, स्वयं के लिए कुछ वक्त देना सिखा दे। प्रभु ने किया मुझे सम्मानित, एक ऐसी ही कला से जिसे लोग प्रभु का […]
धन उतना हो पास में जितने से हो शांति, उस धन से क्या फायदा मन में रहे अशांति। शांति नहीं गर जिगर में खो जाती है कांति उल्टा-सीधा धन कमा आ जाती है क्लान्ति। जीवन […]
कागज़ की कश्ती लेकर, दरिया पार करने चल दिए। हम कितने नादान थे, अरे! यह क्या करने चल दिए। बचपन तो नहीं था ना, कि कागज़ की कश्ती चल जाती, भरी दोपहर में यह क्या […]
कौन हमसे आगे निकल गया, कौन हमसे पीछे रह गया, केवल यही ना देखना मानव, देखना है तो यह भी देखना कि, कौन हमारे साथ है, जुड़ना बहुत बड़ी बात नहीं, जुड़े रहना बहुत बड़ी […]
दिल ही तो मांगा था कौन सी कायनात मांंग ली जो शब्दो में उलझा कर मेरे दिल को ताार तार दिया गुनाह तो नही प्यार करना जो मुुुझे तबाह कर दिया
अपनी आदत बदल कर, पाओ खूब सुकून। रोज सीखना है नया, ऐसा रखो जुनून। सोते समय नहीं कभी, हो उलझन में ध्यान, कभी कभी तलवार को दे दो उसकी म्यान। गुस्सा छोड़ो आप भी नींद […]
पैदाइशी समझदार तो हम भी न थे, मगर परिस्थिति ने समझने लायक बना दिया पैदाइशी जिम्मेदार तो हम भी न थे, मगर छोटी सी उम्र में आई जिम्मेदारी ने जिम्मेदारी उठाने लायक बना दिया। हमारी […]
जनवरी की ठंड है पर ढल रही सी ठंड है कम हुआ है कोहरा लेकिन अभी भी ठंड है। बढ़ रहे हैं दिन घट रही हैं रात कटकटाना कम हुए हैं ठंड से अब दांत। […]
कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी जैसा साकार हो आकार हो प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत […]
ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन प्रतिदिन घटित होतीं वीभत्स त्रासदियाँ मिटा देंगी मानवता को जब […]
आलस अब तो नैन से, दूर चले जा दूर, आने दे अब ताजगी, आने दे अब नूर। आने दे अब नूर, बिछी सूरज की किरणें, नई रोशनी आज, ला रही मेरे मन में। कहे लेखनी […]
जख़्म तुझको मैं दिखा देता हूँ, दर्द अपना मैं भुला लेता हूँ। पास आकर जो बैठ जाते हैं, उनको अपना मैं बना लेता हूँ। कहते हैं मुझसे मन की अपनी, मैं भी मन उनसे लगा […]
आप इतने निडर बनो, डर डर से भग जाय, सच का चिमटा साथ हो, भूत स्वयं भग जाय। आगे ही बढ़ते रहो, पीछे मुड़ो न आप, सच की माला हाथ में, राम नाम का जाप। […]
क्षण में जीना सीख ले, क्षण जाता है बीत। रुकता नहीं एक भी क्षण, चलना इसकी रीत। कर क्षण का उपयोग तू, पीछे की सब भूल, अभी अभी है जिन्दगी, आगे पीछे शूल। क्षण मत […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.