महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्यम की राह
May 7, 2020 in मुक्तक
सत्य कि राह दिखाते बुध्द,
बिछड़ों को मिलाते बुध्द ।
परेशान आत्मा को गले लगाकर,
दुःख दर्द को सारे हर लेते बुध्द।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अजन्मी बेटीयां
May 7, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बहुत प्यारा है
नाक के नीचे बेटी मरती ऐंसा हिन्दुस्तान हमारा है
जोर शोर में लगे है नेता जी बेटी को बचाने में
नेता जी के कार्यक्षेत्र में दम तोड़ रहीं है बेटी नाले में
सहकारी अस्पतालों में हो रहा कर्म काण्ड बेटी का
चन्द रूपये के खातिर विनाश हो रहा है बेटी का
धन के लोभ में डाक्टर बाबू भी बने है कसाई
इज्जत के सारे जंजीरों को है अब बेंच खाई
निज अखबार के पन्नों पर बेटी का गुणगान है होता
शाम ढले बेटी का मारने का इंतजाम है होता
अस्मत लूटते दिन रात यहां दिखलाकर सपने बड़े बड़े
बेटी का यौवन निहारते नेता जी खड़े खड़े
फिता काटते बेटी बचाओ अभियान का शर्म हया बेंच खाई
खूद की लुगाई का अबार्शन करवाकर ज्ञान देते देखो भाई
महेश गुप्ता जौनपुरी
धन्य हो अन्नदाता
May 5, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
धन्य हो अन्नदाता
इस वैश्विक कोरोना महामारी में
लड़ते किसान सुबह शाम खेत में
बन्द पड़े सब कमा काज
दबे देखो कोरोना का राज
देश के मेहनती किसान
है देखो बहुत ही परेशान
नहीं है डर कोरोना का
नहीं है डर मर जाने का
भरना है पेट देश के मेहमानों का
खटिया खड़ी देश के कारोबारियों का
लडना है वैश्विक कोरोना के प्रकोप से
देश बर्बाद हो रहा बस आरोप से
मेरा तन मन सब समर्पित है
दाने का एक एक टुकड़ा अर्पित है
देश के मेहमानों के लिए
कोरोना के प्रकोप के लिए
लडना बहुत जरूरी है
मेरा हाथ जोड़ कर विनती है
घर में रहो घर में रहो यही निवेदन है
पालन करो लाकडाउन का यही अनुमोदन है
महेश गुप्ता जौनपुरी
शायरी
March 8, 2020 in शेर-ओ-शायरी
रोज मर्रा की जिंदगी में,
बहुत कुछ सीखा हैं हमने,
दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक,
जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक,
महेश गुप्ता जौनपुरी
कविता
March 8, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा
सत् सत् है नमन तुम्हे
पहला अक्षर निकला था जब
वो था अर्पण मातृ तुझे
तुम है जननी तु है वानी मेरी
तुझसे ही है जीवन की कहानी
सदा चले तुझसे ही जिंदगानी
ऋणी रहूंगा मैं तेरा हे महरानी
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा
सत् सत् है नमन तुम्हे
महेश गुप्ता जौनपुरी
शेर
March 8, 2020 in शेर-ओ-शायरी
जिसे मैं देख गुनगुनाता हूं
जिसे मैं देख मुस्कुराता हूं
जिसके आगोश में मैं खो जाता हूं
उसका हो कर मदहोश हो जाता हूं
उसी का दीदार करके
मैं खुद में ही खो जाता हूं
महेश गुप्ता जौनपुरी
हे नीलकंठ महादेव
March 8, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
भस्म का श्रृंगार करके
मृग छाल को धारण करके
गले में सांपों का हार पहन के
गंगा को जटा में बांध के
तीनों लोक में हो देवों के देव
हे नीलकंठ शंकर महादेव
डमरु को हाथों में लेकर
नन्दी पर संवार होकर
त्रिशूल को अस्त्र बनाकर
दया धर्म को शस्त्र बनाकर
तीनों लोक में हो देवों के देव
हे नीलकंठ शंकर महादेव
महेश गुप्ता जौनपुरी
सरकार को आईना
October 30, 2019 in Other
आये दिन सांसद में कोई ना कोई बिल पारित हो रहा है जिसमें जनता के ऊपर नकेल कसने के लिए कुछ ना कुछ फेर बदल किया जा रहा है । सरकार जनता को आईना दिखाने में नहीं चुकती भोली भाली जनता का फायदा उठाकर सरकारी बाबू भी जनता को गुमराह करके पैसे ऐंठते नजर आ ही जाते हैं तमाम प्रकार की समस्या जनहित में विकराल रूप धारण कर रही है । उन सभी में से एक समस्या चलान है चालान के नाम पर जो ट्रैफिक नियम सुधारने का प्रयास कर रहीं हैं सरकार तो यह कहना बिल्कुल ग़लत नहीं होगा कि ट्रैफिक का हाल ज्यों का त्यों है हां सरकारी बाबू ट्रैफिक रूल्स का फायदा उठाकर मलामाल हो रहें हैं । जनता मोटरसाइकिल पर दो से तीन ब्यक्ति होने पर चालान भरने पर मजबुर है वहीं सरकार के गिरेबान में झांक कर देखा जाये तो सिर्फ रेल ब्यवस्ता को ही देखकर तबियत बिगड़ने लगता है । जनरल डब्बा में तो भेड़ बकरियों की तरह लोग यात्रा करने पर मजबुर है यहीं नहीं यहीं हाल रिजर्वेशन में भी है सरकार इस मुद्दे पर क्यो नहीं सोचती क्या जनता को ही सुधारने का ठेका ली है सरकार अपने कार्य ब्यवस्था पर कब सोचेंगी ।
विकास के भरोसे
October 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
विकास के भरोसे कब तक रोटी सेंकोगें
मैली मैली गंगा मईया कब तक तुम बोलोगे
राजनीति के पहिए का वीरों तुम इलाज करो
गंगा के अभियान को जन जन तक प्रसार करो
धनुष बाण टांगें कब तक कंधा तुम ढुढ़ोगे
राम के शस्त्र का मर्यादा कब तक भूलोंगे
अपनी गलती कब तक एक दुसरो पर ठेलोग
लक्ष्य साधकर गंगा का कब तक तुम जियोगे
कमर कसो इतिहास रचो गंगा को साफ करो
घर घर अलख जगाकर अब तो इंसाफ करो
अपने अंदर का रावन दहन कर हार को स्विकार करो
थैली कुड़ा करकट को गंगा से अभिमुक्त करो
उठो प्यारे जी जान लगाकर मईया तुमको पुकार रही
खून के एक एक बूंद का हिसाब मईया तुमसे मांग रही
मैली मैली कलंक का मईया उध्दार चाह रही
स्वच्छ सुंदर अविरल धारा मईया अब मांग रही
गंगा मईया नहीं राजनीति की हिस्सा है
भारत के वीर सपूतों की गंगा मईया है
गंगा मईया नहीं है मुद्दा राजतिलक कुर्सी की
गंगा मईया है भारत में धरा की पवित्र धरोहर है
मुम्बई विजय सिंह केश पर मेरा कविता
October 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
सिधे साधे पर रोब दिखाकर
साबित तुमने कर ही दिया
बेगुनाह को पीट पीट कर
सुपुर्द खाक कर ही दिया
क्या न्याय की उम्मीद करें अब
भ्रष्ट कानून के वर्दीधारी से
गुंडागर्दी फैल चुका है
अब न्याय के अधिकारी में
अंधा कानून का पाठ पढ़ाकर
दांत चियार कर हंस ही दिया
विजय को कस्टडी में लेकर
भड़ास अपना निकाल ही लिया
नहीं किया था कत्ल किसी का
ना चोरी ना छिनारा
बेबुनियादी इल्जाम लगाया
मनबढ़ बिगड़ी औलादों ने
सत्य पर रहकर अडिग रहा
किया गुनाह भयंकर
होता अगर छिछोरा विजय
हाथ कभी ना आता
कानून को गुमराह करके
भाग कहीं विजय जाता
नाम में अपने अभिमान था विजय को
सत्य बोला सच के राह चला
देख कर अंधी कानून व्यवस्था
विजय अपने प्राण को त्याग चला
ना जाने कितने विजय बिछड़ गये
कानून के ऊपर विश्वास करके
यह कोई अनजान गलती नहीं
यह सत्य का एक परिभाषा है
जंगल राज बनाकर बैठे हैं
न्याय के कानून धारी ही
रौब में अकड़ कर चलते हैं
खुद को समझते है कानूनधारी
महेश गुप्ता जौनपुरी
मैं अंधभक्त बना रहा
October 14, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैं अंधभक्त बना रहा
चीख पुकार को सुनता रहा
एकता का गुणगान करता रहा
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाई भाई करता रहा
खून के छींटों पर आंख मूंद चलता रहा
मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा
अपने अंदर का ज़मीर मैं मारता रहा
डर भय से गड़गड़ा कर कांपता रहा
घड़ीयाली मगरमच्छ आंसू यूं ही बहाता रहा
वेगुनाह के लाश पर फूलों का गुच्छा चढ़ाता रहा
मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा
आस पड़ोस की घटनाओं से मैं सहमा रहा
स्वच्छ सुंदर भारत का गला घोंटता रहा
दुनिया के दुःख दर्द को यूं ही मैं सहता रहा
मैं अंदर के डर को मैं सुबह शाम पालता रहा
मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा
खून की छींटों में अपनों को मैं खोता रहा
चाकू के धार को चुप चाप सहता रहा
हिंदू मुस्लिम पर दिन रात आरोप गढ़ता रहा
बेदर्द खूनी हत्यारों को हौसला अफजाई करता रहा
मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा
महेश गुप्ता जौनपुरी
बर्बाद इश्क
October 14, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
वो इश्क के चक्कर में लाइलाज बैठे थे
करके इंग्लिश में पी एच डी बर्बाद बैठे थे
चौराहे के राहों में पलकें बिछा कर बैठे थे
प्यार के चक्कर में उनके इंतजार में बैठे थे
बड़ी उम्मीद थी उनको अपने प्यार के भरोसे पर
वो वेवफा निकली सर से पांव तक लेकर
प्यार की गम में सारी डिग्रियां धरी रह गई
जिसे जी जान से चाहा बिना मिले चली गई
यूं ही नहीं कोई बाबरा दिल लगाता है किसी से
कोई गहरी प्यार की प्रतिक्रिया मिली होगी उसे
पश्चाताप में दिवाना बाबरा पागल ही हो गया
इश्क के चक्कर में दुनिया से देखो बेगाना हो गया
अपनी जिन्दगी को करके प्यार में आबाद
दर दर भटकने के लिए दिलजला हो गया बर्बाद
महेश गुप्ता जौनपुरी
हवा
October 14, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
वसंती आयी वसंती आयी
देखो देखो वसंती आयी
साथ में हरियाली लायी
फूलों की महक लायी
भौरो को संग लेकर आयी
ओंस की बूदो को लायी
घर ऑगन को महकायी
वसंत आयी वसंती आयी
देखो देखो वसंती आयी
कोयल की कूक सुनायी
मौसम ने ली अगड़ायी
सर-सर-सर हवा आयी
जीवन में खुशीया लायी
वसंत ने जादुई छड़ी घुमायी
पतछड़ दुम दबाकर भागी
वसंती आयी वसंती आयी
देखो देखो वसंती आयी
हरियाली का डेरा लायी
मौसम बड़ा सुनहरा लायी
रंग बिरंगे फूल खिल आयी
चारो ओर सुन्दरता छायी
मदमस्त वसंती ऋतु आयी
सबके मन हर्षित करने आयी
वसंती आयी वसंती आयी
देखो देखो वसंती आयी
महेश गुप्ता जौनपुरी
गरीबी का दर्द
September 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
गरीबी का दर्द
क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरी
सुख गया है आंखों के पानी
रिमझिम बारिश की फुहार में
समेट रखा है आंचल में
गरीब तेरी कहानी को
उपहास बनायेगी ये दुनिया
तू कल भी फुटपाथ पर था
आज भी तेरी यही कहानी है
गरीब था तू गरीब रहेगा
वंचित तू तकदीर से रहेगा
सुन गरीब लगा लें जोर
अपना अस्तित्व बचा ले अब
अब ना कोई कर्ण लेगा जन्म
अब ना कृष्ण का वरदान मिलेगा
तेरी करनी तु ही जाने
मैं तो मतवाला आगे बढ़ा
तरस आयेगी भी तो
कैद कैमरे में कर लुंगा
तेरे दुख दर्द से
मैं पर्दा कर लुंगा
आगे आगे बहुत आगे
मैं बढ़ते बढ़ते बढ़ जाऊंगा
तेरा कर्म तु जाने
गरीबी में जियो या मर जाओ
कड़ी धुप बारिश गर्मी ठण्डी
सब परीक्षा लेंगे तेरी
कभी फटेहाल चादर ओढ़े
कभी रफू किये कपड़े पहन लेना
उपहास उड़ाती रहेंगी दुनिया
गरीबी में तुम मौन ही रहना
महेश गुप्ता जौनपुरी
वीर भगत सिंह
September 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
वीर शहीद भगत सिंह
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थे वीर बहादुर
आजादी के तराने के लिए झूल गये फांसी पर
भारत मां का नारा लगा कर चूम गये माटी को
हमें अभिमान है वीर जवान तुम्हारे कुर्बानी पर
हंसते हंसते देश पर न्योझावर जान अपना कर दिया
हे वीर शहीद मैं तुमको भूल नहीं पायेंगे
शेर सिंह सा दहाड़ था भगत सिंह के आवाज में
भारत मां के लिए सदा कुर्बान था वीर सरदार
हंसते हंसते जिसने चूम लिया फांसी को
आजादी का सपना बांट दिया जन्म भूमि माटी में
अपने दिल की आवाज को ना दबने दिया खुनी घाटी में
हे वीर शहीद मैं तुमको भूल नहीं पायेंगे
हे वीर शहीद वन्दन करता हूं तुम्हारे चरणों को
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं देश की माटी को
इंकलाब की चिंगारी जलाकर मसाल गजब जलाया था
हे वीर शहीद पुकार रही है वतन की मिट्टी तुमको
आजा गले लगा लो आजादी के तराने को
हे वीर शहीद मैं तुमको भूल नहीं पायेंगे
महेश गुप्ता जौनपुरी
बिटिया
September 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
मां बाप की लाडली होती बिटिया
जीवन को रोशन करती है बिटिया
घर परिवार को समेट कर रखती बिटिया
रिस्ते कि बागडोर को निभाती बिटिया
सुख दुख में साथ निभाती बिटिया
जिम्मेदारी से कभी ना भागती बिटिया
होंठों कि मुस्कान बन जाती बिटिया
अंधेरे में उजाला बन साथ निभाती बिटिया
अपने प्रेम भाव से सिंचित करती है बिटिया
जीवन के हर मोड़ पर संग चलती है बिटिया
बाबा के हर दर्द को समझ जाती है बिटिया
समय समय पर खुशीयों का त्याग करती है बिटिया
बचपन की नादानी में भी समझदारी दिखाती बिटिया
प्रेम लुटाती गले लगाती हंस हंस कर रहती है बिटिया
महेश गुप्ता जौनपुरी
गीत
September 30, 2019 in गीत
नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
चमचम चमकेला बिंदिया ए माई
सुनर सुनर पऊआ में लागल बा महावर
हाथवा में सोहेल गंदा चक्र ए माई
महेश इन्द्रशेन करत बा पुजनवा तोहार
दुखवा से ऊबारी कवनो जादू चलाई
कई द हमनो के नईया पार ए माई
नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
बढल जात बांटे बहुत ए पाप ये माई
कई देतु कलयूग के सत्यानाश ए माई
हमनी बांटी तोहरा सरनवा में ये माई
नयन के कटारी लागत बांडू बड़ी दयालू
दिव्य ज्योति कवनो जला दी ये माई
करी कवनो हमनी पर चमत्करवा ये माई
नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
महिमा तोहरा हमनी बखानी का माई
करेलू सबके मनोपूर्ण ये माई
हमनी बानी अनाथ रख दि सरवा पे हाथ
हमनी क बिगड़ी बना दि ए माई
नौ दिन क बांटी भूखल प्यासल ये माई
भगतन क करि जा कल्याण ए माई
महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे बापू गांधी जी
September 27, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
मेरे बापू गांधी
दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था
सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था
राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था
हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था
गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर
ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया
खट् खट् की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था
चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था
गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में
राष्ट्रहित में ध्वजा फहराकर देश का मान बढ़ाया
बापू के पीछे पीछे हिन्द सेना जब चलती थी
गोरों कि फौज डरें सहमे छिपते फिरती थी
गोरों के अत्याचारों से गली मोहल्ला थर्राया था
बापू ने अपने आंदोलन से गोरों को पस्त किया था
गोरे शैतानों को उनके भाषा में सबक सिखाया
बापू के चरणों का मैं शीश झुका वन्दन करता हूं
महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे बापू गांधी जी
September 26, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
मेरे बापू गांधीजी
दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था
सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था
राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था
हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था
गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर
ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया
खट् खट् की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था
चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था
गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में
राष्ट्रहित में ध्वजा फहराकर देश का मान बढ़ाया
बापू के पीछे पीछे हिन्द सेना जब चलती थी
गोरों कि फौज डरें सहमे छिपते फिरती थी
गोरों के अत्याचारों से गली मोहल्ला थर्राया था
बापू ने अपने आंदोलन से गोरों को पस्त किया था
गोरे शैतानों को उनके भाषा में सबक सिखाया
बापू के चरणों का मैं शीश झुका वन्दन करता हूं
महेश गुप्ता जौनपुरी