पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]

मोहब्बत की गवाही देने लगती हैं धड़कने सुलझाने से सुलझ जाती है सब उलझने चाँद को पाने की हिम्मत आने लगती है ज़िंदगी में आती हैं जितनी अड़चने ! Like Comment

शांति ओढ़ लेना प्रतिरोध छोड़ देना ज़रूरी नहीं कायरता ही हो हो सकता है आने वाले संघर्ष की तैयारी हो बात बात में ताने देना देखने पर आँखे मटकाना बोलते वक़्त मुह बिचकाना ज़रूरी नहीं […]

दूर दूर तक कानों में ना कोई धड़कन, ना आवाज़ , ना ही थिरकन रक्त के संचार की , बस कथन, बंधन ,रुदन , आदेश , निर्देशन , चलते फिरते लोगों का जमघट, फिर भी […]

किताबे भी दर्द मे रोती हैं सिसकती हैं ,लहू लहान तेरे दर्द में होती हैं ************ वो चंद घंटे पहले शहर में उतरा ,शहर की कुछ गलियो मे घूमा सड़को को देखा ,जन्नत घूमा,रंग बिरंगे […]

एक मित्र ने यही मुझसे ब्रम्हास्त्र की फरमाइश की थी तो जी लीजिये जी पेश है   खुद से जो पूछा कि क्या चाहिए दिल बोला कि फिर वो समां चाहिए वो बहती हवा वो […]

रात घनी अंधेर बड़ी है, फिर से राम पधारो जी | देव संत और मनुज उबारो, दुष्टन को संघारो जी || काहू सो कहूँ ब्यथा अपनी मैं नित ही पंथ निहारूं | दनुजन को तुम […]

बड़ी बेदर्द सी रातें है काफ़ी सुन के सोता हूँ, जहाँ तुम याद आती हो , वहीं चुपके से रोता हूँ| ये रोने और सोने का नहीं है सिलसिला लेकिन , कहीं जब दर्द आँखों […]

जापान से बुलेट ट्रेन लाने की ज़रूरत नहीं है बुलेट ट्रेन हम भी बना सकते हैं और चला सकते हैं अगर जापान से कुछ लाना ही है … तो उनकी आदतें लाई जाएँ उनकी सांस्कृतिक […]

टेक्नोलॉजी कैसे आएगी ——––—-/–/——-// टेकनोलॉजी कैसे आएगी इस देश में जब तर्क को आस्था के डिब्बे में बंद कर दिया गया हो … जब विज्ञान को धर्म के तले दबा दिया गया हो जब देश […]

कितना होता है गुरूर इंसान को ये करता अपनों से दूर इंसान को जिसको देखो वही मद में चूर है वक़्त देता सबक जरूर इंसान को राजेश’अरमान’

अब तो धब्बों की भी नुमाइश होती है बस चर्चे में रहने की खवाइश होती है ज़िक्र उसका भला क्यों करता जमाना यहाँ तो सुर्खिओं की परस्तिश होती है राजेश’अरमान’

जो समाज में समता का समर्थक है जो देश का विकास चाहता है जो अंधकार की जगह प्रकाश चाहता है जो अंध विश्वास ,पाखंड ,भेदभाव हटाना चाहता है जो सामाजिक दीवारों को तोड़ना चाहता है […]

यह जापान है ——————- यह हिंदुस्तान नहीं ,बाबू … जापान है जहाँ गुरु ग्राम और घंटा घड़ियाल नहीं विज्ञान है यहाँ आप आज़ाद है अपने विकास के लिए उन्नति के प्रयास के लिए यहाँ नम्रता […]

दुनिया की रस्मों में इन्सां कहाँ मगर गया वो शहर की रौनक में कौन भर जहर गया अब भी बैठे ही उन लम्हों की चादर ओढ़कर वो भी एक दौर था वक़्त के साथ गुजर […]

 उसके जाने  आने के दरम्यां  छुपी सदियाँ थी   कुछ था पतझड़ सा  तो कुछ हरी वादियां थी उसकी ख़ामोशी में दबी दबी सी बैठी थी उसकी आँखों में कुछ बोलती चिंगारियां थी  लिपटी है […]

खार भी रखते पर आँखों में बसे फूल भी है सादगी की मिसाल पर चेहरे में पड़े शूल भी है वो बदलते रहे कुछ ज़माने ज्यादा मेरे वास्ते नए अंदाज़ भी है कुछ पुराने से […]

खार भी रखता पर आँखों में बसे फूल भी है सादगी की मिसाल पर चेहरे में पड़े शूल भी है वो बदलते रहे कुछ ज़माने ज्यादा मेरे वास्ते नए अंदाज़ भी है कुछ पुराने से […]

उनके  अश्कों में  भी  इक  रंग नजर  आता है मुझे, तन्हा रातों  में  भी  कोई  संग  नजर  आता है मुझे, उल्फ़त  में   उनकी  मैं  भी  बे-जा़र  हो  गया लगता, अब्र  का  शाया  भी  गेसुओं […]

चाहिये तो जनाब ले जाओ मेरे ग़म बे हिसाब ले जाओ   सारी बातें तो आप ने कह दीं अब मेरा भी जवाब ले जाओ   रात में काम  जुगनूओं का है डूबता  आफ़ताब ले […]

देहरी लाँघी नहीं घुटन में घुटती रहीं बच्चे रसोई बिस्तरे की दूरियाँ भरती रहीं बंदिशों की खिड़कियों के काँच सारे तोड़ डाले लो तुम्हें आजाद करता हूँ |  **** पायलों ने पाँव कितने आज तक […]

न बाँधों मन पतंग को,उड़ जाने दो नवीन नभ की ओर हंस सम भरने दो,अति उमंग मे नई एक उड़ान स्वतंत्र भावों की डोर मे बंध निर्भय,करने दो अठखेलियाँ स्वच्छंद न खींचो धरा की ओर,बाँध […]

कुछ ख्वाब कुछ अफ़साने वही लोग आये कुछ सुनाने अपनी अपनी वीरानी सब की देखने आये वो तेरे कुछ वीराने देखने आये वो फिर ज़ख्म तेरे कहते आये तेरे ज़ख्म कुछ सहलाने वो भी उकता […]

वो फुरसतों के काफिले वो रोज़ मिलने के सिलसिले वो शहर कहाँ खो गया जहाँ पास रहते थे फासले कुछ तो हुआ अजीब सा खो गए रास्ते ग़ुम है मंज़िलें हर निगाह में जूनून सा […]

आज नहीं तो कल चुका दूँगा , कुछ प्यार मुस्तआर ही दे दो, चोरी छुपे नहीं सरेआम माँगता हूँ , आखरी वक्त का सलाम ही दे दो, सरीक हो जाओ मेरी हयात में रूह बनकर […]

होकर जुदा तुमसे हर शाम यूँ ही होती है! शामों-सहर जिन्दगी तमाम यूँ ही होती है! मैं खोजता हूँ सब्र को जाम के पैमानों में, मेरी मयकशी तेरे नाम यूँ ही होती है! Composed By […]