शायद मेरे गम की कभी रात आखिरी हो! तेरे दर्द़ से कभी मुलाकात आखिरी हो! मैं कबतक याद रखूँ तेरे अफसानों को? तेरी यादों से तो कभी बात आखिरी हो! Composed By #महादेव mkraihmvns@gmail.com

गरीबी में पला बड़ा,धूप छाँव रहा खड़ा, मजबूरी में पनपा,किस्मत का मारा है । मेहनत पर जीता रहा,हर गम पीता रहा, देख कभी लेता नही,किसी का सहारा है । दो समय के खाने को,लेता नही […]

????मेरी माँ???? मेरे दिल की बैचेनी को,खुद जान लेती है माँ, मेरे गम को मिटाकर,मुझे ख़ुशी दे देती है माँ, जिंदगी की धूप में,छाया बन साथ देती है माँ निकलता हूँ रोज़ सुबह,घर से जब […]

  हनीमून-टूर पर नवयुगल ने , हिल-स्टेशन के आलीशान होटल में : आनन्दपूर्वक सुहागरात मनाई बिदाई में ‘रिटर्न-गिफ़्ट’ के बतौर, होटल-प्रबंधन से एक ‘सी.डी.’ पाई . ‘वे’ बहुत खुश थे————– कि ; ‘सी.डी.’ के माध्यम […]

सामूहिक विवाह का आयोजन था कम खर्च में–ज़्यादा निपटें यही असली प्रयोजन था चारों ओर हा….हा……..कार मचा था “ मे……………..ला ” — सा लगा था वर—वधू मंडप में सहमे से खड़े थे कुछ कानूनन ना-बालिग […]

अकेला ही सही पर मैं चला करता हूँ नाम तेरे से, दिल में हौसला करता हूँ,, कभी जी लेता हूँ खुद के वास्ते मैं भी पिलाके पानी चिड़ियों का भला करता हूँ,, बनने बिगड़ने की […]

हर दर्द मां सहती रही, पूरी मेरी हर बात की., हर जिद को मेरी मान के हर वक्त मेरे साथ थी, अब मै बडा़ जबहो गया कैसे भुलादूं मां को मै , दुनियाँ ही मेरी […]

रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I  कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]

~~”मजदुर”~~ ..वह ‘सृजनकर्ता’ है ‘दुख’ सहके भी ‘सुख’ बांटता है.. ..वो ‘मजे’ में ‘चूर’ हैं, बस इसलिए ‘मग़रूर’ हैं.. ..हम ‘मजे’ से ‘दूर’ हैं, बस इसलिए ‘मजदूर’ हैं.. ..सेतु , नेहेरे , बांध उसके, ‘श्रम’ […]

“जब चाँद भीगता था छत पर” बहका सावन-महकी रुत थी, ये हवा भी मीठी चलती थी. जब चाँद भीगता था छत पर, तब बारिश अच्छी लगती थी. वो बाल खुले बिखरे-बिखरे, होठों पे’ कभी आ […]

डरते डरते ही सही मैनें आखिर वो बात कह ही दी जो लफ़्जों में कभी ढल ना सके वो अहसास आज बयां हो ही गये मगर दिल अभी भी गमगीन सा बैठा हुआ है जो […]

अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। वादियां सब गूँज उठी और वृक्ष खड़े प्रणाम कीए। तवा,गंजाल,कुण्डी,चोरल और मान,हटनी को साथ लीए। अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। कपिलधार से गिरकर आई […]

ये दुनिया भी गज़ब का मेला, इतनी भीङ पर हर कोई अकेला, कभी हँसना,तो कभी है रोना, कुछ खोना,तो कुछ है पाना।। खिलखिलाते कुछ चेहरे हैं, कुछ ग़म छुपाते सेहरे हैं, सर पर छत नीले […]

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से, शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं! Composed By #महादेव

।। सड़क का सरोकार ।। : अनुपम त्रिपाठी सड़कें : मीलों—की—परिधि—में बिछी होती हैं । पगडंडियां : उसी परिधि के आसपास छुपी होती हैं ॥ सड़कें : रफ्तार का प्रतीक हैं । पगडंडियां : जीवन […]

यूँ गयें  हो  दूर  हम  से  जैसे  कुछ  था  ही   नहीं, लगता है पुरानी सोहबतों को भी तुम भूल गये हो, इतना भी आसान नहीं भूला देना किसी को, जुर्म मेरा है या फिर […]

तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है,…..! (गीत) तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है, कल्पना कवि की है, वंचना कवि की है, वंचना कवि की है, वंदना कवि की है ……..! तू स्फूर्ति है […]

चला खुद को लेकर न जाने कहाँ …! चला खुद को लेकर न जाने कहाँ, अनजाना सफ़र ये, न जाना जहाँ ……! समझ जब ये आया, समझता हूँ मैं, जाना समझता न कुछ भी यहाँ. […]

कुछ बीते हुये वो दिन, कुछ भूली बिसरी यादें, कुछ पुराने से पलछिन, कुछ अधूरे से वादें ।। याद बहुत अाते हैं वो बीते हुए पल, वो मीठा सा रिश्ता,वो प्यार निश्छल, वो हमारा तुमको […]

रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं और वह अंधेरों में छिपता रहा तन्हाइयों में खोता गया और सूरज से आँख मिलाने से डरता रहा दिन दिन न थे उसके अब रातों का उसको इंतज़ार रहने लगा […]

  निगाहें उठाकर जिधर देखते हैं तुम्हें बस तुम्हें हमसफर देखते हैं उडीं हैं गुबारों सी अब हसरतें भी खड़े हम तो बस रहगुजर देखते हैं न कर पाई आबाद शहरों की बस्ती तो वीरान […]

पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]