जय श्री राम ।। —————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है, सबका अपना-अपना पाठ है, सबको वही निभाना है ।। ———————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है […]
जय श्री राम ।। —————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है, सबका अपना-अपना पाठ है, सबको वही निभाना है ।। ———————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है […]
जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी आँखें…!! जब भी किसी प्रेमी युगल ने देखा मेरी तरफ […]
जी करता है कागज में तस्वीर तेरी ऊतार दूं , दिल के किसी कोने का राज उसमें उकेर दूं | ख़्वाब में था जो, हकीकत में उसे देख रहा हूं , खुद पे नहीं अंकुश, […]
तेरी मुस्कान बांधे जा रही है , हमें ……….. जिंदगी की डोर बनकर रंगीन सुतली की तरह, लिबास की बैल्ट समझ ले या फिर आजकल का इलास्टिक रम गई है उस तरह तू जिस तरह […]
जय श्री राम ।। ————————— घट-घट में राम बसे तन-तन में राम बसे कोई ढूँढे तो उसे सर्वत्र राम ही राम दिखे ————————————– असत् की सत्ता कितना भी जोर लगा ले मन माया जितना भी […]
JAY SHRI RAM कहने को तो कहती है दुनिया साथ देंगे हम तुम्हारा जब काम आती है साथ देने को तब क्यूँ साथ छोड़ देती है जमाना ——————————————- ये दुनिया है, साथ नहीं देती कोई […]
JAY SHRI RAM वृक्ष कबहुँ नाही फल भखे, नदी ना संचे नीर परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर ।। ———————————————– रमता योगी बहता पानी कभी न रूकता सुनो रे भाई! जिसको जिससे मिलना है मिलकर […]
पौष पूर्णिमा के चंद्र देखो, नभ में कैसे चमक रहे हैं। सर्द रातों में चांदनी सहित, देखो ना कैसे दमक रहे हैं। चांदनी भी ठंड में सिमटी सी जाए, चंद्र उसको देख-देख मुस्काएं। यह ठंड […]
उमंग ऐसी जगाओ स्वयं के जीवन में, फटक न पाए निराशा कभी भी जीवन में। रखी नहीं रहती सजा के थाल में खुशियां, वरन स्वयं की मेहनत से, जीतनी आज हैं तुम्हें खुशियां। उमंग रोशनी […]
समय कीमती धन है सबसे, सृष्टि का निर्माण हुआ है तब से। समय खर्च करने से आपको, कुछ धन मिल सकता है। किंतु धन खर्च करने से, बीता समय नहीं मिलता है। सोच समझ कर […]
जिंदगी में अभाव रहते हैं मगर तुझे अभाव में सँभलना है, पैर रख कर कंटीली राहों में लक्ष्य तक स्वयं पहुंचना है। बाहरी छोड़ कर सारा दिखावा आत्मा के स्वरों को सुनना है। छोड़ कर […]
यदि इच्छा-शक्ति हो सबल, तो हर कार्य करना हो सरल। योग्यता यदि कम भी है तो, इच्छा-शक्ति का विस्तार करो। किसी कार्य को कभी ना समझो भार, हर दायित्व से प्यार करो। फ़िर कठिन डगर […]
खूबसूरत हो मगर कैसे कहूँ कैसे हो, किसकी उपमा दूँ और बोलूं कि ऐसे हो। पुराने कवियों ने कहा कि फूल हो तुम अब बताओ नया क्या कहूँ कि क्या हो तुम। परन्तु कुछ तो […]
कविता-पर्यावरण है क्या ——————————- सभी सुनो, पर्यावरण है क्या, क्या इसकी परिभाषा है, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, जीव जंतु मानव – जिससे प्रभावित हो, उसी को कहते पर्यावरण है| अंबर भू धूप हवा पानी वर्षा […]
मजबूरियां तुम दूसरे की क्यों समझते हो नहीं, भाव दिखते वेदना के क्यों समझते हो नहीं। गोद में बच्चा पकड़कर ठुस भरी बस में कोई माँ खड़ी हो तो उसे क्यों सीट देते हो नहीं। […]
कविता-चारआने की संपत्ति को ————————————— चार आने की संपत्ति को रुपये में खरीदा था खरीदा उस वक्त मैंने जब बाजार में भाव गिरा था, मैं बाजार में नया खरीददार बोली लगी, मैं समझ नहीं पाया […]
कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब […]
तुम धरा हो, मैं वृक्ष हूं तुम चैतन्य हो, मैं प्रेम हूं | तुम नदिया हो, मैं किनारा हूं तुम अग्नि हो, मैं हवनकुंड हूं | तुम जीव हो, मैं श्वास हूं तुम मर्यादा हो, […]
आइना पूंछता है ********** यह सवाल हर रोज मानती क्यूं नहीं सलाह मेरा । चेहरा वही है क्यूं वक्त जाया करती है मेरा निखार आएगा कैसे वही पहली सी फितरत है तेरा ज़िद […]
ईमेल, चैटिंग ही अपना भविष्य क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? नववर्ष का कार्ड नहीं प्रेमपत्र लेखन स्वीकार नहीं कलम कागज का जमाना बना अतीत विशेष क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? क्या […]
ऊंचे उड़ना चाहता, है मेरा मन आज, लेकिन पंख उगे नहीं, माने खुद को बाज। माने खुद को बाज, हवा में उड़ता है बस, भूल असलियत स्वयं, भूमि पर गिरता है बस। कहे लेखनी उड़ो, […]
दर्द आम जन का समझो तो तब मनुज हो आवाज बन सको तो सचमुच में तब मनुज हो। भूखा गली में सोया पूछा नहीं किसी ने बच्चा भी उसका रोया पूछा नहीं किसी ने। वो […]
कविता-बावरी ——————– सुन बावरी क्यों लड़ती है मुझसे, एक दिन रूठ जाऊंगा, तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा, संग में कॉलेज आना जाना, पार्को में समय बिताना, होटल में खाना खाना, फोन पर चैटिंग करना […]
देख लिया दुनिया तुझको अब और नहीं कुछ चाहत है, हर तरफ चेहरे पर एक चेहरा है अपनों से ही हर जन आहत है। अब और फरेब की गुंजाइश नहीं यहां अपनापन की लगी नुमाइश […]
इन मैले वस्त्रों में घूमूं, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ बनूं,उडूं गगन को चूमूं, मेरा मन भी करता है। माँ संग जाना बर्तन धोना, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ पढूं-लिखूं, मेरा […]
एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!! मगर हम हमेशा वास्तविकता की अवहेलना कर चुनते हैं कल्पनाओं […]
गांव में आई हूं मैं । बहुत दिनों के बाद। खेतों में सरसों पीली देखी, गगन की रंगत नीली देखी। खूब चमकते तारे देखे, बहुत दिनों के बाद। गेहूं की सुनहरी बाली देखी, तरुवर की […]
कविता-जहर पिला दो —————————– जहर पिला दो जहर खिला दो मम्मी पापा उपकार करो जन्म नहीं देना मम्मी दर्द मेरा एहसास करो मुझ नन्हीं बच्ची पर हवसी रहम नहीं करता है, मन की प्यास बुझा […]
मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने सींच देना है, जय हिंद का जेहन में सबके गीत […]
गलत को रोकना होगा गलत को टोकना होगा सभी को सोचना होगा, हो ऊंचा नाम भारत का स्वयं को झौंकना होगा। सभी को सद दिशा देकर सभी को देश हित में रह स्वयं को झौंकना […]
वे न बोले हम न बोले चुप रहे, सच के आगे आज भी हम छुप रहे, रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा बस अंधेरे के ही नगमे लिख रहे।
कब तलक फूंकती रहेंगी गाड़ियां कब तलक यह आग सी मन में रहेगी, कब तलक सब ठीक होगा देश में, कब दिखेंगे लोग सच्चे वेश में।
गणतंत्र पर ऐसा होना हम सबकी ही नाकामी है सबका पत्थर हो जाना हम सबकी ही नादानी है। न इधर झुके न उधर झुके सूखी लकड़ी से अड़े रहे, अलग रंग के झण्डे क्यों ऐसे […]
सभी अपना काम ईमानदारी से करें, जो दायित्व हो अपना उसे सच्चाई से पूरा करें, भ्रष्टाचार न होने सदाचार का मार्ग अपनाएं, वही देश के अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, वही गणतंत्र पर देश […]
अपनी तमाम विषमताओं के साथ अनगिनत विविधताओं के बावजूद सबसे माकूल व्यवस्था है अपना गणतंत्र। इस बदलते समय की बस यह मांग है लोक के प्रति तंत्र की सहिष्णुता और तंत्र के प्रति लोक की […]
अब हम हैं स्वतंत्रत देखो यह अपना गणतंत्र। ७२वी वर्षगांठ में भी देखो उमंग, कहां से लाया कैसा मंत्र यह अपना गणतंत्र। देख के इसका रूप सलौना पाक तरस रहा,चीन रचता षड़यंत्र यह अपना गणतंत्र।
सुन्दर-सुन्दर झांकियों में समाया भारत, आज राजधानी के राजपथ पर आया भारत। केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश अरुणाचल, सब की झांकी आई है। केरल ने नारियल के सुनहरे फाइबर से, सारी झांकी सजाई है। कर्नाटक ने […]
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय हिंद, जय हिंद। हम सबको मिलकर इसकी उन्नति में जुट जाना है, सब तरफ रहे खुशहाली, हरियाली को पाना है। […]
भारतीय होने पर गर्व है, आज 26 जनवरी का पर्व है। देश के दुश्मनों को मिलकर हराएं, आओ हर घर में तिरंगा फ़हराएं। ना केवल जश्न मनाना है, ना केवल झंडा फ़हराना है, जो कुर्बान […]
स्वप्न पलकों पर सुहाने सजते रहे, दीप मोहब्बत के जलते रहे। धड़कन भी गीत गुनगुनाने लगी, सांसे भी कविता सुनाने लगीं। पायल के घुंघरू सरगम बजाने लगे, कलाई के कंगन गीत गाने लगे, धानी चुनर […]
उस रात बहुत रोई थी, बहुत देर में मैं सोई थी। स्वप्न में तुम्हें बुला कर, कांधे पर सर रखकर, रोते-रोते सोई थी मैं उस रात बहुत रोई थी। यह था नेह तुम्हारा, एक बार […]
हार मिलती है मगर, हार जाना नहीं, सैकड़ों हार से भी, हार जाना नहीं। तोड़ दे यदि परिस्थिति, टूट जाना नहीं, प्यार कर जिन्दगी से, रूठ जाना नहीं। निराशा घेर लेगी, जब कभी भाव तेरे, […]
पहले खुद पर रखो पूर्ण विश्वास तुम, तब जमाने से मांगो खुला साथ तुम। हीन भावों को खुद से करो दूर तुम, शक की बातें स्वयं से रखो दूर तुम। हो गलत यदि कहीं पर […]
यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है यह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान है स्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान है क्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार […]
वृद्ध माता पिता का सहारा बनो है जरूरत उन्हें तुम सहारा बनो, याद कर लो वे बचपन दिन आज तुम, पाले-पोसे थे कितने सलीके से तुम। आंच आने न दी जिसने तुम पर कभी, पूरी […]
कोई दिक्कत है अगर सीधे सीधे बोल, भीतर-भीतर विष जड़ी मत रखना तू घोल। मत रखना तू घोल जहर दूजे को देने, पड़ जायेंगे कभी तुझे लेने के देने। कहे लेखनी अमिय, बाँट ले बाहर […]
इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जिसके घर में प्रतीक्षारत हो कोई, उसका पग घर की ओर, जल्दी-जल्दी चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जो […]
रविवार की छुट्टी थी, पर कोहरा कर्तव्य निभाने आ गया सर्दियों के मौसम में, और सर्दी बढ़ाने आ गया। धूप भी डर कर छुप गई है, ठंड का डंडा चलाने आ गया। घूम रहा है […]
घर आँगन में फूलों सी खिलती हुई लड़कियाँ! फ़ीकी दुनिया में मिसरी सी घुलतीं हुई लड़कियां!! उदासियों की भीड़ में हँसती हुई मिलती हैं! ज़िम्मेदारी के बोझ तले पिसती हुई लड़कियाँ!! ढल जाती हैं पानी […]
# द्रौपदी की प्रतिज्ञा द्रौपदी का परिचय- आ खींच दुशासन चीर मेरा, हर ले मेरा सौंदर्य सजल । आ केश पकड़ कर खींच मुझे, अपना परिचय दे ऐ निर्बल । मैं राजवंशिनी कुल कीर्ति हूँ, […]
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