ये कैसी बेबसी है नाराज़गी को ढो रहे हैं अक्षमता को आकने के बदले दूसरे की कमियों को गिन रहे हैं । ये दिन है कैसा ना उम्मीदों का आसिया है ख़्वाहिशों के जलने की […]

हां दोस्ती है, इन दिनों रजाई से उसको ओढ़े बिना नहीं कटते सुनहरे पल पहाड़ी रातों के। खुद की तारीफ के न पुल बांधो हम तो कायल रहे हैं वैसे ही तुम्हारी नेह भरी बातों […]

ऐसी क्या बात है सखी, क्या हो तुम मुझसे नाराज सखी करके चुनरी का ओला सखी, क्यूं कर दिया अबोला सखी ना कोई संदेश ना दूरभाष सखी, आती है तेरी बहुत याद सखी क्या मुझसे […]

उत्प्लावन करती हृदय में, अतृप्त अवांछित आकांक्षाएं संकीर्ण एवं सूक्ष्म वेग के व्याकरण’ गढ़ती हैं असंतृप्त आस्थाओं का प्रतीत प्रेम मधुमास की मधुर गर्जना करता है और ले जाता है पीपल की घनी छांव में, […]

जाने क्यूं आजकल खुद पर प्यार आने लगा है अपना ही चेहरा अब हमको रिझाने लगा है पहले डूबे रहते थे हम किसी की आँखों की मदहोशी में अब तो अपना चेहरा ही हमको भाने […]

वो मुझसे यूं बोले, तुम बहुत प्यारी हो तुम सबसे न्यारी हो कभी-कभी कलेजा जलाती हो, फिर भी मुझे बहुत भाती हो लिखती रहती हो कविताएं तुम, इतना सब कैसे कर पाती हो कभी-कभी क्रोधित […]

तुम्हारे कानों के झुमके बहुत ही प्यारे हैं तुमने मुस्कुरा के जब कहा हम तुम्हारे हैं तुम्हारी बोली मुझको भजन-सी लगी तुम्हारी हँसी भी फूलों से प्यारी लगी तुमने जब कहा हम बहुत प्यारे हैं […]

लेख:- ‘मातृभाषा एकमात्र विकल्प’ मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिये भाषा का प्रयोग करता है। वह अपनी बात लिखित,मौखिक व सांकेतिक रूप मे दूसरे तक प्रेषित करता […]

टूटे तारे के बारे में, किसने कब सोचा है उससे मांगे सब दुआ, यह ना पूछे कोई भी बता तेरे संग क्या हुआ क्या कोई तेरा साथी छूटा, तारे क्यूं तेरा दिल टूटा वह टूटा, […]

मैं हूं किसान, आप सा ही एक इन्सान मेहनत से अपनी, बीज बोता हूं ज़मीं में, सींचता रहता हूं पौधे अपनी आंखों की नमी से देखी है बागों की बहारें, मेहनत से हम कभी ना […]

क्या पता इस ज़िन्दगी में, आज सा कल हो ना हो क्या पता इस ज़िन्दगी में, अब जैसा पल हो ना हो आज सी खुशियां ना हो तो.. आज जैसे ग़म ना हों आज मिल […]

अपनी खुशियों पर रहें खुश दूसरों से क्यों भिड़ें, बात छोटी को बड़ी कर पशु सरीखे क्यों लड़ें। जिन्दगी जीनी सभी ने क्यों किसी को ठेस दें, हो सके तो कर भलाई प्रेम का संदेश […]

प्रिये, यह आज तुमने कैसी चाय है बनाई कौन सी लजीज़ वस्तु है मिलाई घूंट-घूंट पीते अजब रूहानी मस्ती है छाई इससे पहले तो कभी ऐसी चाय ना पिलाई। नही जानाँ, आज बस चाय बनाते […]

बिना स्वार्थ के दोस्ती, होती है एक औषधि जहां स्वार्थ और शर्त है प्यार में, वो टिकता कहां संसार में दोस्ती का रिश्ता भी खास है, दोस्ती केवल दोस्ती ही नहीं, एक दोस्त का विश्वास […]

मत बहा आँसू पी जा दर्द भी है तो, काम ले हिम्मत से आंसू हैं अमी का जल, नहीं होना विकल सब कुछ ठीक होगा और आयेगा सुहाना कल। वक्त सब दिन एक सा रहता […]

रात थी बात थी एक मुलाकात की तू मेरे साथ था मैं तेरे साथ थी पढ़ रहे थे तुम रात्रि में रश्मियां आँच में तेरी मैं फिर पिघलती रही चूड़ियों ने कहा जो था कहना […]

मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है जैसे मोमबत्ती जलकर पिघलती जा रही है कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में कुछ बेखबर-सी पिघलती जा रही है पिघल गई धागे को जलाने के जश्न […]

लौट चल साथी ! यहाँ गम सबसे जियादा (ज्यादा) है बेबुनियादी रस्मोरिवाज में मन उलझा जाता है करते रहे कोशिश लाख जिंदगी संवारने की पर तरुवर में पीत पत्र फल से जियादा है नई सुबह […]

बेईमान-सा मन गिरती-उठती दीवारें आज सिर उठाकर खड़ी हैं यूँ तो सरचढ़ी हैं पर कुछ जिम्मेंदारियां भी हैं छत को संभाले हुए दिन भर खड़ी रहती हैं शाम को थककर चूर हो जाती हैं रात […]

सरल नहीं है ये जीवन, पर कठिन भी नहीं है इसे समझना जिस तुला पर तौलते हो औरों को तुम, किसी दिन उसी तुला पर, स्वयं को भी तौलना कभी जिंदगी का हंसाना, कभी पाली […]

किस तरफ की बात बोलूं कुछ समझ आता नहीं, सत्य क्या है झूठ क्या है कुछ समझ आता नहीं। एकतरफा बात सुनकर धारणा कुछ और थी दूसरे के पक्ष को सुन कुछ समझ आता नहीं। […]

बोया था एक रोज बड़े नाजोअंदाज से प्रेम का बीज’ आज उसमें फल पके हैं मायूसी और बेबसी के बहुत लदा है वो वृक्ष माँ अक्सर कहा करती थी तुम्हारा बोया बीज एक पुष्ट पौधा […]

खुशियाँ तो मन की उथल-पुथल से सीधी जुड़ी हुई हैं, मन में यदि संतुष्टि है तब हम जरा सी बात पर खुश हो सकते हैं, मजे में रह सकते हैं। मगर मन अनियंत्रित है, और […]

निकलूं कब बाहर मैं घर से हरदम बैठा रहता मौसम के डर से एक साल में बारह महीने चार महीने गिरे पसीने फिर सोचूं मैं निकलूं बनके तब होती बरसात जमके आठ महीने यूं ही […]

,,,,,,,मैरी हजारो बातें हजारो लोगो के बीच यू गूम हो सी जाती है, मेरी वही अनकही सी बातें जुबां पर आते आते ना जाने क्यू थम सी जाती है,, मैरी इस चुप्पी को लोग खामोशी […]

खूबरसूरत जिन्दगी आपके कारण ही है, आप हैं, तब है सभी कुछ जिन्दगी में रंग है। आप इस सूखी धरा में प्रेम की बरसात हैं, और क्या अवलम्ब खोजूँ आपका जब संग है। हों भले […]

मुहब्बत पवित्र है पवित्र से भी पवित्र है, अनुपमेय है, वह बंट नहीं सकती, सच्ची की मुहब्बत कभी घट नहीं सकती। न दिखावा इसमें न औपचारिकता, मुहब्बत देखती है बस वास्तविकता। मुहब्बत जीवनोदक है इसका […]

चाहती हूँ एक कविता लिखना मगर नाकाम हो जाती हूँ विषय चुनने के लिए छटपटाती हूँ शब्द कुछ ऐसे हों भावनायें मेरी व्यक्त करें और कह दें वह जो मैं कह नहीं पाती हूँ निरर्थक […]

मुश्किल बहुत है खुशियों की तिजोरी भरना दुःख की गगरी भरने में दो पल नहीं लगते झूम जाता है मन जब कोई अपना कह देता है… अपनेपन के लिए तरसता रहता है जीवन नये सिक्के […]

मुझे लिख लो कहीं निकलने लगी हूँ तुम्हारी स्मृति से… खयालातों की दुनिया से बेदखल होने लगी हूँ मुझे छुपा लो कहीं… तुम जवाब दो हमको हम जवाब दें तुमको बातचीत का सिलसिला नजरों से […]

लरजती लौ चरागों की यही संदेश देती है अर्पण चाहत बन जाये तो मन अभिलाषी होता है बदलते चेहरे की फितरत से क्यों हैरान है कैमरा जग में कोई नहीं ऐसा जो न गुमराह होता […]

गज़ल ****************** सुना तुमने नहीं हमको, सुना हमने नहीं तुमको मगर महसूस करते थे हर एहसास में तुमको जुनून था तुमको हरगिज यार! औरों की मोहब्बत का, सब कुछ जानते थे हम मगर रोंका नहीं […]

सर्द मौसम में, अश्क भी जम गए अल्फाज उनके सुनकर, मेरे हर पल थम गए शून्य में घूमने लगा, मेरा वजूद सारा ज़रा सी धूप लगी तो, नैन हमारे नम गए अजीब था उनका अलविदा […]

पत्थर में डाल प्राण सेतु हम बनायेंगे माझी हैं मजधार के पार ही हो जायेगे ना रुकेंगे हम कभी आगे बढ़ते ही जायेगे सूर्य की आँखों से आँख हम मिलायेगे और चल पड़ेगे हम पवन […]

लिखकर अपने मन की पीर बोझ करूं मैं हल्का रोकर मिलता बड़ा सुकून लगता दिल को अच्छा आँसू से सींचू मैं जख्म हरे-भरे लहूलुहान हुए लेप लगाकर वही जख्म मेरे प्राणाधार हुए गटक लिए जो […]

राधा ने सिर पर धर मटकी बैठी छांव तले वट की जोह रही है श्याम को अखियां दिन बीता अब बीती रतियां श्याम बिना निष्प्राण है गैया देख रही सुध खोकर मैया क्यों निष्ठुर तू […]

कुदरत का अनमोल रत्न ******************** कुदरत का अनमोल रत्न है ये जीवन जब हों फूल से रिश्ते तो महकता है जीवन अगर हों बेनाम से रिश्ते तो सुगंध ही दुर्गंध बन जाती है फिर बोझिल- […]

मुझे लिखना कैसे आया ? अक्सर ये सवाल कर बैठते हैं लोग मैं कवियित्री क्यों बनी यही जानना चाहते हैं लोग पर कोई ये क्यों नहीं समझता ये कुदरत का वरदान नहीं मानवता का दिया […]

आँसू बहाते रहे हम रातभर इन्तजार करते रहे कोई आकर पोंछेगा ! कोई हाल तक पूंछने नहीं आया सिस्कियां कमरे के बाहर तक जाती रहीं तड़पकर चीख भी निकलती रही पर अनदेखा ही कर दिया […]

वो किसी की बातों में आने लगे हैं, तभी तो हमसे कतराने लगे हैं मोहब्बत दिख रही है उनकी आंखों में लेकिन, ना जाने क्यूं नज़रें चुराने लगे हैं लौट जाते हैं हमारे दर तक […]

कोई यहाँ आया नहीं गीत भी गाया नहीं फिर मधुर सी गुनगुनाहट कान में कैसे बजी। क्या पवन संदेश लाई भूतकालिक प्रेम का या किसी शैतान भँवरे की है यह मुझ पर ठिठोली। पर लगा […]

बीते कल की नहीं कहानी तुम चलती साँसों में बसा आज हो तुम प्यार की, दिल्लगी की बात नहीं इससे बढ़कर रहे हो नाज हो तुम। अहमियत क्या बताएँ, कैसी है तन में धड़कन है […]

बिटिया हुयी परायी ************* ना तुम भूलोगे ना हम हाँ, यह बंधन छूटे ना, मरते दम। यह पावन वेला, अश्रुओं की इसमें जगह नहीं नवरंग भरेंगे इसमें, निराशाओं की ठौर नहीं हंसकर कर पदार्पण, दूर […]

पतिदेव हर जगह, शान दिखाया करते थे “मैं कुछ सालों से, गीता के उपदेश पर चल रहा हूं” यह सब को बताया करते थे लोग भी उनके आगे, नतमस्तक हो जाया करते थे फ़िर एक […]