मार्गशीर्ष मास अतिपावन। उत्पना व मोक्षदा सुहावन।। सफला अरु पुत्रदा एकादशी। पौष मास मह बहु सुखरासी ।। षटतिला अरु जया बड़नामी। माघ मास के उत्तम फलकामी ।। विजया आमलकी फागुन मास। पापमोचनी कामदा मधुमास।। बरुथिनी […]

प्यार के हजारों रंग देखे मगर उन सभी रंगों में आत्मीयता का अभाव ही मिलता है लौटकर फिर तुम्हारे पास आ जाती हूँ फिर से उलझ जाती हूँ मैं बातों के जंजाल में, दुनिया के […]

एक बार अकबर बादशाह को प्यास लगी। वह अपनी प्यास बुझाने के लिए एक फकीर के झोंपड़ी के निकट गया। जब उसने आवाज लगाई तो एक बारह साल की बच्ची बाहर निकल कर फिर वापस […]

समकालीन कविता के जाने-माने नाम थे वह, हिंदी कविता की शान थे वह। राजनीतिक चेतना व मानवता की सुरम्य आभा से सरोबार थे वह, ‘पहाड़ पर लालटेन’ सी चमकती पहचान थे वह। संघर्ष में जूझती […]

प्यार की बदलती परिभाषा ************************** 5 साल का बेटा बोले, मम्मी आई लव यू, मम्मी भी उत्तर में बोले बेटा, लव यू टू…… 15 साल का बेटा बोले, मम्मी आई लव यू, मम्मी बोली, बेटा […]

१० दिसम्बर १९४८ ई० को संयुक्त राष्ट्र सभा ने संयुक्त रुप से मानवाधिकारों की घोषणा को अंगीकृत किया गया… जिसमें प्रस्तावना और ३० अनुच्छेद हैं प्रस्तावना में कहा गया:- हर मनुष्य को समानता एवं स्वतंत्रता […]

ठंड बढ़ती जा रही है वह सिकुड़ता जा रहा है रात भर सिकुड़ा हुआ तन अकड़ता जा रहा है। सिर व पैरों को मिलाकर गोल बन सोने लगा, नींद फिर भी दूर ही थी क्या […]

मस्तमौला चाल मेरी मैं पुहुप हूँ गांव का आ गया तेरे शहर कंटक समझ मत पांव का। घूमता बेघर फिरा हूँ है मनोरथ छांव का जिंदगी वारिधि सरीखी क्या भरोसा नाव का।

ऐसा नहीं कि हम तेरे करतूतों से अनजान हैं पर शिकायत किससे करें अपनी आदत से हम लाचार हैं । चाहते हैं बदल दे खुद को जवाब दे हर बेअदली का परेशा हैं समझा के […]

श्वेत कागज में कलम घिसता हूँ, इधर-उधर की कहीं कुछ भी नहीं जो है दिल में उसे लिखता हूँ। विजुगुप्सा से दूर रहता हूँ प्रेम के भाव बिकता हूँ। मिट्टी में खेलते बच्चों की सच्ची […]

बड़ी अजीब है ये घुँघरू। बन्धे जब दुल्हन के पैरों में बड़े खुशनसीब है ये घुँघरू।। झनकती जब ये कोठों पर बड़े हीं गरीब हैं ये घुँघरू । बांध के किन्नर भी नाचे पर बदनसीब […]

अनीता नाम था उसका। देखने में सुंदर नहीं थी। फिर भी चंचलता व मीठे बोल से ही कब अमित उसका दीवाना बन गया उसे पता ही नहीं चला। उपर वाले ने गोरा रंग चुरा कर […]

जो भी लिखता है मन स्वयं के लिए, प्यार-नफरत के भाव खुद के लिए। उसे न जोड़ना कभी भी अपने भावों के लिए अपनी चाहत के लिए। अलग ही रास्ते हैं न कोई वास्ते हैं, […]

वह सोचता है, यदि रूठ जाऊं तो वो मुझे मनाये वो सोचती है रूठने पर वो मुझे मनाये, एक सोचता है दूसरा मुझे मनाये रूठने पर न वो मनाती है न वो मनाता है, रूठना […]

क्यों दोधारी तलवार से हैं लोग… क्यों सच को स्वीकार नहीं कर पाते हम लोग…. जानते हैं कुछ साथ नहीं कुछ जाना फिर भी क्यों जोडने की होड़ में लगे हैं लोग… सब कहते है […]

गीतों में अपने जज्बात लिखा करता था, गीतों में मुझसे बात किया करता था हाथों में लेकर मेरा हाथ, घंटों चलता रहता मेरे साथ वो लड़का मुझे बहुत मोहब्बत किया करता था मैं लिखती थी, […]

चैन से अब सो रहा मन मत जगा अब आग तू, दूर हो जा स्वप्न से भी मत लगा अब आग तू। आग केवल शान्त है। भीतर पड़े हैं कोयले फूंक मत, रहने दे ऐसे […]

मांग की सिन्दूर रेखा ****************** हर सुबह बड़े स्वाभिमान से सजाती हूँ अपनी मांग में लाल सिन्दूर मेरे रूप लावण्य में मैं स्वयं एक वृहद परिवर्तन पाती हूँ…. मांग की सिन्दूर रेखा खूब लम्बी सजाती […]

सुख -दुख जीवन का हिस्सा है, ये तो ज़िन्दगी भर का किस्सा है निराशा का भाव दे सुख की घड़ी, आशा का संचार करें, एक नज़र तारीफ भरी सुख देकर ही सुख मिलता है, दुख […]

ढूंढो मेरा प्रेम पथिक ! जाने कहाँ खो गया है कंकड़ीली-पथरीली राहों में विस्मृत-सा हो गया है उदासीन राहों में राही तुम भी भटक ना जाना मेरा प्रेम मिले जो कहीं उसे मेरी याद दिलाना […]

फूल बोने होंगे परिवेश में अपने खुशबू लुटानी होगी, उल्फत जगानी होगी, नफ़रतों की सारी कड़ियाँ मिटानी होंगी। जो हो सके न अपने जो दूर जा चुके हों कहकर पवन से खुशबू उन तक ले […]

पलकों पर सजे थे सपनें मैं थी नींद के आगोश में, वो आया सपनों में मेरे बोला मुझसे हौले से; पी लो रानी! प्रेम का प्याला मैं चाँद निचोड़ के लाया हूँ तेरी खातिर आसमान […]

आज नारी के पास क्या नहीं है। फिर भी पुरुष उसे अपनों से कमजोर ही समझ रहे है।जबकि,आज हमारी सरकार नारी के प्रति तरह तरह के शिक्षा दे कर पुरुष के मुकाबले में खड़ा करने […]

एक तो शीतलहर दूजा बेगाना शहर। फिर भी अटल रहेंगे हम किसान धरने पर।। हम क्यों माने हार बंधु हम तो हैं अन्नदाता जग में। पेट चले संग फैक्टरी चले व्यापार पले अपनी पग में।। […]

नाखूनों से नोंच जमीं मैंने बोया है मेहनत का बीज हलधर हूँ कहलाता चाहे कह लो पीर-फकीर पीता हूँ कुआं खोदकर पानी बीती निर्धनता में जवानी पर अपनी मेहनत से भरता हूँ मैं सबका पेट […]

तुम्हारी मौजूदगी को नजरंदाज करता है दिल बड़ी मुश्किल से संभलता है दिल साँसों से ज्यादा तेरी धड़कन में हूँ यही आजकल महसूस करता है दिल जब तू होता करीब तो थमती हैं साँसें और […]

आज अपनी बात करो मेरी बात रहने दो नींद नहीं है आती एक अर्से से मुझे जुल्फों में सुला लो तहकीकात रहने दो मुलाकातों के गुल खिला लेंगे किसी और दिन मुझे अपने ख्वाबों में […]

आवारगी में हम क्या से क्या कर गये ! देते रहे मोहब्बत और हम बेवफा हो गये, जाने कैसे डूबा तेरी आँखों में मैं ! सपने सारे टूटे, हम जुदा हो गये अब डर नहीं […]

फूलों ने पंखुड़ियों का हार बना कर पहना है प्रकृति की हरियाली का आज यही बस कहना है परियों के गहनों में सोने के बूटे पड़े हैं हम पत्तों के हारों में ओस मोती जड़ें […]

कोमल हमेशा अपने माता पिता से डाट फटकार सुना करती थी। जबकि कोमल आठवीं कक्षा के छात्रा थी। पढ़ने लिखने में अपनी क्लास में अव्वल थी। सभी शिक्षक उसे मानते थे।प्रतियोगिता में बराबर बढ़ चढ़ […]

मन उड़ान तेरी पंखों बिना चलती रही, उस तरफ फिर इस तरफ सब तरफ बहती रही। चैन आया हो कहीं ऐसा नहीं संभव हुआ, एक स्थल पर न टिक पाया फिरा विस्मित हुआ। आज मीठा […]

आंसुओं को अमृत समझ के पी गए हम, तुम्हारी जुदाई में इस तरह जी गए हम तुम्हारे आने की आस पलती रही, तुम्हारी कमी सदा खलती रही कभी मन का मकरंद उड़ा, कभी दिल की […]

दिन अगर बदल सकते पुनः अपने बचपन में लौट पाते । फिर से पापा की नन्हीं परी बन चार पैसे की नेमचुस खरीद लाते। घर की चौखट पे बैठे, बाट देखती चाचू की, पटाखो के […]

सर्दी ने शीतलहर का थामा हाथ, सुहाने लगा कंबल का साथ दिन में भी धुंध है छाई, सूरज भी नहीं दे दिखाई अदरक वाली चाय सुहाए, गरम परांठे मन को भाएं आइसक्रीम से टूटा नाता, […]

सर्दी की धूप बड़ी सुहानी सेवन कर प्राणी सुखदाई । चेतन जीव की क्या कहिये सुख जड़ जात भी पाई।। ठण्ड हरे नित जीव जगत के अमराई नित भोजन पावै। विनयचंद विटामिन डी से अश्थि […]

कड़कती बिजली की तरह चमचमाती हुई आती हो और सर्द हवा सी छू के निकल जाती हो | इंतज़ार करते हुए तेरा मैं अक्सर ठिठुर जाता हूं संदेशा जो न आए तेरा तो व्याकुल हो […]

लो फिर आ गई है सर्दी पूरे लाव -लश्कर के साथ में। हवा भी ठण्ढी सूरज मद्धिम घना कुहासा दिन और रात में।। बिन बादल के बारिश जैसी गीलापन हर डाल -डाल व पात में। […]

सुबह-सुबह की लालिमा बिखरी हुई है सब तरफ ओस की बूंद मोती सी बिखरी हुई है सब तरफ। भानु का नूर है आलोक चारों ओर फैला, धरा-आकाश मानो बन गए मजनूँ व लैला। स्वच्छ पावन […]

दर्द जीवन में है जो रख सरोकार उससे, किसी को ठेस मत दे कर ले प्यार सबसे। पोछ ले अश्क सबके कष्ट मत दे किसी को, भाव समभाव के रख कद्र दे दे सभी को। […]

आज उठाई कलम है मैंने वीरों की तलवारों-सी पंक्ति है मेरी इतनी पैनी नैनों की तेज कटारी-सी चलती है जब कलम हमारी स्याही कम पड़ी जाती है लफ्ज हैं इतने भावुक मेरे कलम भी रोने […]

अवसाद के बादल घिरे पर तुम न आये प्रिये यह तिमिर बढ़ती जा रही बुझे हर उजास के दिये । आक्रोश है या ग्लानि इसे नाम दू कैसे खुद ही मौत का दामन थाम लूँ […]

हाथ पकड़ा दो कलम मैं लिखती जाऊं हर लफ्ज को तेरे हर एहसास को, मेरी हर एक पीर को आवाज दूं गर तुम सुनो ! मैं गायिका बन जाऊंगी तुम्हारी इक मुस्कान पर मैं सौ […]

हमें बस जीवंत बोध की दरकार है नहीं मुझे खुद पर, हाँ तुझपर एतवार है हम सजग प्राणी भले हैं पर स्वार्थ से सना अपना प्यार है । स्वार्थ से रचा-बसा राब्ता यह बस नाम […]

निम्नकोटि की कवि हूँ मैं !! हाँ, थोड़ी पागल हूँ मैं जाने कितनी खामियां मुझमें फिर भी सब कहते हैं अच्छी हूँ मैं ! मैं ना लिखती गज़ल कभी ना लिख पाती नज्म, रुबाई पद […]