माँ पर मार्मिक कविता

माँ सरस्वती

झंकार उर में मात कर दो, माँ वीणा पाणी वर दायनी हैं अवगुण जहाँ, हुंकार भर दे अज्ञान तम दूर भागे, मेरे सर पे हाथ रख दो झंकार उर में मात करदो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

मेरी गलती माँफ करो।

मेरी गलती माँफ करो।

अगर हुई गलती मुझे माँफ करो, हर गलती मेरी शर्मनाक है, या तुम मार गिरावो या माँफ करो। गलती किया इसलिए माँफी माँग रहा, अगर लगता गलती– गलती का अनुमोदन है तो इसे भी स्वीकार करो,, गलती हुई मुझसे इतनी पर दु:ख मत होना, तुम्हे पता है विजली भी गिरती ऊँचे पेड़ पर गिरता तब पर भी वतावरण उसे माँफ करता ,,नई पौधा जन्म देने का प्रयास करता, या तो तुम मेरी गलती माँफ करो ,या मार गिरावो। मुझे से गलती हुई पर दु:ख... »

माँ

माँ न होती, तो यह श्रष्टि न होती पृथ्वी है माँ, प्राण है माँ उचित अनुचित की , द्रष्टि है माँ -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)- »

मां

जन्म दिया मां तूने ही इस काबिल मुझे बनाया है, हर फर्ज अपना‌ मेरे प्रति निभाया है। दिल से दिल का यह अनमोल रिश्ता, वाह खुदा क्या बनाया है।। »

टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए

टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए

टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए, जिस पल बंटवारे में उसकी ममता आई।। – राही (अंजाना) »

मेरी गलतीयाँ माँफ कर देना

मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज् »

मेरी गलतीयाँ माँफ कर देना

मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज् »

सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं, तामील दिलाने को मुझे जब वो खुद को भूल जाती है, पहनाती है तन पर मेरे जिस पल कपड़े मुझे, वो सर से खिसकता हुआ अपना पल्लू भूल जाती है, बेशक मुमकिन ही नहीं एक पल जीना जिस जगह, वहीं ख़्वाबों की एक लम्बी चादर बिछा के भूल जाती है।। राही (अंजाना) »

मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है

मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है

बेशक खुशबू से भरा होगा मेरे दोस्त तेरा सनम, मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है।। – राही (अंजाना) »

माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा

माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा

माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा, ये बचपन का पौधा बड़े हिसाब से ख़र्चा जाएगा, मेहनत लगी है गहन किसकी परवरिश में कितनी, दो एक रोज़ में सरेआम इसका चर्चा हो जाएगा।। राही (अंजाना) »

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