रुला देने वाली कविता

माँ

‘ माँ ’ माँ को खोकर हुआ माँ की ममता का एहसास, पाना चाहा था माँ को और प्रतिबिम्बों में, पर कहीं नहीं मिला माँ का दुलारता हाथ, वो लोरियाँ, वो प्यार भरी थपकियाँ, वो उलाहने, वो डाँटना फिर पुचकारना | बेटी को पाकर माँ और ज्यादा याद आती है, उसकी एक-एक बातें बचपन को दोहराती हैं, मेरी भीगी पलकों को देख उसका परेशान होना, क्या कहूँ उससे एक माँ को है एक माँ की तलाश | -सन्ध्या गोलछा »

माँ

ममता के आइने मे प्यारी सी सूरत है माँ, सूरज की धूप मे छाया का आँचल है माँ, दुखों के समन्दर में सुख का किनारा है माँ, दुनियॉ की भीड़ में सकून का ठिकना है माँ, अँधेरी कोठरी में रौशनी का उजाला है माँ, प्रेम और स्नेह में प्रकर्ति की गोद है माँ। बेमोल अलंकारों में अनमोल नगीना है माँ, निराकार भगवान की साकार प्रतिमा है माँ॥ राही# »

माँ के लाल

भगत सिंह, शिव राज गुरु, सुखदेव सभी बलिदान हुए, इस धरती माँ की खातिर कितने ही अमर नाम हुए, ब्रिटिश राज की साख मिटाने को एक जुट मिटटी के लाल हुए, कभी सीने पर गोली खाकर कभी फांसी पर लटक काल के गाल हुए, इंकलाब के नारों से भगवा रंग मिलकर लाल हुए, तिरंगे को लहराने की चाहत में शहीद माँ के लाल हुए॥ राही (अंजाना) »

माँ

माँ ही एक ऐसा बैंक है यारों, जो हर दुःख सुख के भाव सहेजे, कभी भी देदे नोट पुराने रक्खे जो पल्लू में लपेटे, पापा मानो क्रेडिट कार्ड कभी न करते जो इनकार, खुद वो टूटा जूता पहने हमको लादें सब कुछ यार, हम करते हर पल कितनी मांगे, जब तब पापा की जेब झांके, पापा बस रखकर उधार की पर्चा, चेहरे पर छिपाते धर मुस्कान का कर्जा, मुँह से न बोले वो कुछ भी यार, अब कुछ भी तुम समझो मेरे यार, करलो जी भर कर उनसे प्यार॥ र... »

माँ हूँ मैं

ममता की छाँव तले , समता का भाव लिए, इंसानियत का सभी में, संचार चाहती हूँ, माँ हूँ मैं,हाँ भारत माँ, एकता और सदभाव का, प्रवाह चाहती हूँ । माँ हूँ मैं,हाँ प्रकृति माँ, संरक्षण की चाह है, जो भी है अपनी संपदा, जल, वायु, धरा का, सभी में समान रूप से, सदुपयोग चाहती हूँ जीवन संरक्षण करने में, सभी का सहयोग चाहती हूँ । माँ हूँ मैं,हाँ देवी माँ, सुख समृद्धी का आशीर्वाद, लुटाती हूँ,करबद्ध प्रार्थना न, फल-फूल ... »

अपनी माँ को तरसती हूँ

दो रोटी गर्म गर्म फूली हुई सी आज भी जो मिल जाये तो मै दौङी चली आऊँ, दो कौर तेरे हाथों से खाने को जो अब मिल जाये, तो मै सब कुछ छोङ आ जाऊँ। तेरे हाथों की चपत खाने को अब तरसती हूँ मै, तेरी मीठी फटकार खाने को अब मचलती हूँ मै, बहुत याद आती हैं हर डाँट तेरी, वो झूठा गुस्सा शरारतों पर मेरी। वो हाथ पकङकर लिखवाना, कान पकङ घर के अंदर लाना, वो घूमती आँखों के इशारे तेरे, भ्रकुटियाँ तन जाने तेरे, मुझको परी बना... »

मां की महिमा

कौन बिन माँ के जगत में जन्म पाया , देव से बढ़कर तुम्हारी मातृ माया , है नही ऋण मुक्त कोई मातृ से , जन्म चाहे सौ मिले जिस जाति से , दूसरा है रूप पत्नी का तुम्हारा , जो पुरुष का रात दिन बनती सहारा , सुख दुःख में है सदा संधर्ष करती , धर्म अपना मानकर अनुसरण करती , तू बहन है तीसरे परिवेश में , भ्रातृ की रक्षा करे परदेश मे , ले बहन का रूप जब आती धरा पर , भावनाये याद है राखी बराबर । एक तेरा रूप पुत्री में... »

गुरु माँ

कोई भी कमी कोई भी शिकायत नहीं छोड़ती, अपने बच्चे की परवरिश में वो माँ कोई खामी नहीं छोड़ती, खुद रह भी ले भूखी पर वो माँ किसी दिन भी बच्चे को भूखा नहीं छोड़ती, लड़ जाती है कलयुगी काल से भी पर, वो माँ अपने बच्चे की खातिर कोई कसर नहीं छोड़ती, खुद जागती रहती है पूरी रात चिन्ता में फिर भी, पर वो माँ हमे सुलाने को कोई लोरी नहीं छोड़ती, करती है दिन रात मेहनत हर तरह से देखो, पर वो माँ हमारे ऐशो आराम में कोई कमी... »

माँ की करनी

कोई भी कमी कोई भी शिकायत नहीं छोड़ती, अपने बच्चे की परवरिश में वो माँ कोई खामी नहीं छोड़ती, खुद रह भी ले भूखी पर वो माँ किसी दिन भी बच्चे को भूखा नहीं छोड़ती, लड़ जाती है कलयुगी काल से भी पर, वो माँ अपने बच्चे की खातिर कोई कसर नहीं छोड़ती, खुद जागती रहती है पूरी रात चिन्ता में फिर भी, पर वो माँ हमे सुलाने को कोई लोरी नहीं छोड़ती, करती है दिन रात मेहनत हर तरह से देखो, पर वो माँ हमारे ऐशो आराम में कोई कमी... »

मां तेरा लाल आयेगा

माँ तुम राह देखती होगी कि मेरा लाल आयेगा पर सरहद पर जंग इतनी छिड़ी थी कि तेरा लाल नआ पाया वो इतने सारे थे कि माँ तेरा लाल अकेला पड़ गया मैंने एक – एक को मार गिराया वो भी अकेला रह गया अचानक उसने भारत माता का नारा लगाया मैंने जैसे ही भारत माता के चरणों में शीशे झुकाया उसने धोखे से मुझे मार गिराया अब कोई गम न करना मां भारत माता पर कुरबान हुआ हूँ तिरंगे में लिपटा जब मेरा शव आयेगा तो आंसू एक न बहा... »

माँ और मैं

माँ और मैं

अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं, माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं, फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं, माँ को मेरी अफसर दिखने लगा था मैं, जब छोड़ कर घर को नौकरी पर जाने लगा था मैं, माँ को मेरी उसका सहारा लगने लगा था मैं॥ राही (अंजाना) »

माँ

रूठ जाता हु कभी अगर कोई नहीं आता माँ, तेरे सिवा मनाने के लिए; घाव गहरे है मेरे; कोई नहीं आता माँ; तेरे सिवा सहलाने के लिए;.. अक्सर भटक जाता हु मैं; कोई नहीं आता माँ; तेरे सिवा राह दिखाने के लिए..; उदास रहता हु अगर कभी; कोई नहीं आता माँ; तेरे सिवा हसाने के लिए… माँ सिर्फ तू आती है ; और कोई नहीं आता, मेरे पास खुशियाँ बरसाने के लिए. »

माँ

।। माँ ।। वो दूर गया है परसों से माँ सोई नहीं है बरसों से माँ की आँखों से ही तो घर-घर में उजाला है। ए वक्त,ए हवा,ए फिज़ा जरा संभल मुझे कम न समझ हर वक्त मेरे साथ मेरी माँ का साया है। मुझे खौफ नहींअब किसी बदी का मेरे माथे पर माँ ने काला टीका जो लगाया है। मैं रोई नहीं, माँ को मेरे गमों की भनक लगे जब भी मैंने देखा, माँ ने छुप कर भीगा आँचल सुखाया है। गर्दीशों में भी खुश हूँ,माँ की दुआओं का असर है वरना ... »

माँ की याद

बा मुश्किल छोड़ जाती थी वो माँ मुझे जिस मकान में, आज सूना है घर का हर एक कोना उस मकान में, सुनाती थी दिन रात माँ जहाँ साफ़ सफाई के पीछे, आज लगे हैं यादों के घने जाले उस मकान में, सुन लेती थी माँ आहट जहाँ मेरे कदमों की, लगा हुआ है आज ताला खुशियों के उस मकान मे॥ राही (अंजाना) »

माँ

धुएं से भरे चूल्हे में माँ का वो रोटी बनाना, यूँही नहीं है माता का मेरी ममता लुटाना, आँखों से बहाती है आंसू फिर हांथो से अपने खिलाती है, आसान नहीं है मेरी माता का मेरी खातिर ये प्यार जताना, पाल पोस कर करती रही वो मुझको बड़ा, कितना मुश्किल होता होगा आज माँ का मुझसे यूँ दूरी बनाना॥ राही (अंजाना) »

प्यारी माँ

जब मैं छोटी बच्ची थी माँ की प्यारी दुलारी थी माँ तो हमको दूध पिलाती, माँ भी कितनी भोली – भाली । माखन – मिश्री घोल खिलती बड़े मजे से गोद में सुलाती, माँ तो कितनी अच्छी है सारी दुनिया उसमें है । – Rajat »

तुम भी तो इक माँ हो आखिर..

जैसे गोरे गालों पर माँ काला टीका करती थी तुमने काली रातों में इक उजला चांद सजाया है तुम भी तो इक माँ हो आखिर.. – सोनित www.sonitbopche.blogspot.com »

आसमां ये मुझे कभी खरीद नहीं सकता मैं पाँव हमेशा जमीं पे टी’काके रखता हूँ ।।

जिंम्मेदारियों का बोझ मैं उठा’के रखता हूँ मेले में बेटे को काँधे पे बिठा’के रखता हूँ ।। आसमां ये मुझे कभी खरीद नहीं सकता मैं पाँव हमेशा जमीं पे टी’काके रखता हूँ ।। रखते होंगे बेशक,दिल में लोग दुश्मनी मगर मैं फिर भी सबसे बना’के रखता हूँ ।। है ख्वाईशें मेरे दिल में भी बहुत दोस्तों मगर मैं पाँव चादर तक फैला’के रखता हूँ ।। मिलती है मेरी कमाई में बरकत यूँ मुझे पूरी तनख़्वाह... »

माँ

माँ तू कुदरत का करिश्मा है या तेरा करिश्मा है इन्सान कोई भी हो तेरी चाहत तो सबको होती है   या इ »

माँ की चिट्टि

माँ की चिट्टियां आती रहीं मैं अपनी दुनिया में गहरे डूबता ही रहा »

माँ जैसा

मुझे याद नहीं कि किसी और ने मुझे मेरी माँ जैसा खाना खिलाया हो … »

हक़ मेरी माँ को होता

हक़ मेरी माँ को होता

“हक मेरी माँ को होता”   मेरी तकदीर में जख्म कोई न होता, अगर तकदीर बनाने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी तस्वीर पे आज धूल न होता, अगर तस्वीर पोछने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी आँखों में अश्क आया न होता, अगर आँख सजाने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी तकफिन में कोई वहम न होता, अगर तकफिन बनाने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी इमारत दुःखो से भरा न होता, अगर इमारत भरने ... »

माँ

??????(मुक्तक)???????? ????????? माँ चरण आपके स्वर्ग का रूप है। माँ सभी शक्तियो का मिला रूप है। जिंदगी श्याम मेरी न होगी कभी। माँ नजर आपकी प्रेम का धूप है। ????????? रचनाकार अविनाश सिंह अमेठिया (देवरिया) +919135481448 ????????? »

माँ का दूध या सतनो का जोड़ा

माँ का दूध या सतनो का जोड़ा

************माँ का दूध या सतनो का जोड़ा ,किस नजर से देखे दुनिया सारी ********************** हमेशा देखा है राह चलते लोग रिश्तेदार यहां तक की अपने दोस्त यार तक ,महिलओं को घूर घूर के देखते हें उनके वक्ष सथल को अगर किसी ने दुप्पटा डाला हुआ है तो भी सरक जाये वो एक झलक उस पल के लिए मचलते हें सारी पहनती हैं तो उसकी कमर और ब्ब्लाउज से अंदाजा लगाया जाता हैं ,उसके स्तन कैसे होंगे हद हैं आज जिनस टॉप डालती हें... »

माँ

अहसास प्यार का माँ के, माँ की यादें, माँ का साथ। गज़ब सुकूँ मिलता है, जब माँ सर पर फेरे हाथ॥ माँ के हाँथ की थपकी, माँ का प्यार, वो माँ की ममता। बच्चे को भोजन देकर भूखे सोने की क्षमता॥ माँ ही सृष्टि रचयिता, शिशु की माँ ही रचनाकार है। प्रेम, भक्ति और ज्ञान सभी से बढ़कर माँ का प्यार है॥ बिन माँ सृष्टि अकल्पित नामुमकिन इसका चल पाना है। शब्दों में नामुमकिन माँ को अभिव्यक्ति दे पाना है। ________________ श... »

माँ

माँ… कितनी प्यारी प्यारी है माँ खुशबू है” फुलवारी है माँ मेरी पहली पहली चाहत मुझमें नज़र आई जो शबाहत मैं था जब नन्हा सा बच्चा कौन मेरी तक्लीफ समझता मुझको समझा मुझको जाना मेरी इशारों को पहचाना क़दम क़दम चलना सिखलाई गिरने लगा तो दौड़ी आई रोते रोते जब भी आया आँसू पोछा गले लगाया पीर” क़लन्दर “वली पयम्बर माँ का साया सब के सर पर फूल चमन के चाँद सितारे लगते नहीँ तुझ जैसे प्यारे जन्... »

“आखिर माँ हैं वो मेरी”

आखिर माँ है वो मेरी मुझे पहचान जातीं हैं……. मैं बोलूँ या ना बोलूँ कुछ वो सब कुछ जान जातीं हैं, मेरी खामोशी से ही मुझे वो भाँप लेती हैं, मेरी बातों से ही मेरी नज़ाकत जान लेती हैं, भरे दरिया में मेरे अश्को को वो पहचान लेती हैं, आखिर माँ है वो मेरी मुझे पहचान जातीं हैं…… मेरे हर दर्द को वो दूर से महसूस करती हैं, मेरी हर हार को भी वो मेरी ही जीत कहती हैं, मेरे सपनों की महफिल का... »

माँ मेरी

तुम्हारे हाथ का हर एक छाला, चुभा जाता है इस दिल में एक भाला, हर एक रेखा जो तुम्हारी पेशानी पर है, एक दास्तां बयां कर जाती किसी परेशानी की है, बता जाती है वो दर्द को,जो सहे तुमने, हमें लाने इस हसीन जहां में अपने। उंगलियाँ पकङ चलना सिखाया, मामा,दादा,बोल बोल देखो खूब बुलवाया, खाना खाना, नाचना गाना सब सीखे तुमसे, तंग किया,फिरकी की मानिंद घुमाया,फिर भी ना खीजीं हमसे, हर रोज़ नयी तैयारी थी, हम ही तो तुम... »

मां : दो पहलू ममता के

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मेरी माँ

????मेरी माँ???? मेरे दिल की बैचेनी को,खुद जान लेती है माँ, मेरे गम को मिटाकर,मुझे ख़ुशी दे देती है माँ, जिंदगी की धूप में,छाया बन साथ देती है माँ निकलता हूँ रोज़ सुबह,घर से जब ऑफिस, रोज़ की तरह,आँखों में इंतज़ार भर लेती है माँ, आता हूँ जब में लौटकर, सुनसान सड़क पर, चिंता की लकीरे लिए मेरी राह देखती है माँ ✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष” +9184 4008-4006 »

माँ

हर दर्द मां सहती रही, पूरी मेरी हर बात की., हर जिद को मेरी मान के हर वक्त मेरे साथ थी, अब मै बडा़ जबहो गया कैसे भुलादूं मां को मै , दुनियाँ ही मेरी माँ से है मां खुशियों की सौगात थी बागी के दिल कि आह,. »

वो माँ है

वो माँ है आँखों में छुपी हमारी हर ख़ुशी , हर मुस्कराहट का राज़ है तो वो माँ है, गम हो की दुख़,दर्द ही क्यों न हो दिल मे , उस दर्द में छुपे हर सवाल का जवाब है तो वो माँ है, दुखाये दिल जब ये दुनिया कही हर मुकाम पे, संभाल मुझे समझाने वाली वो है तो वो अपनी माँ है, आंसू आए जहाँ चहेरे पर जब कभी , हाथ आँचल संभाले आये वो साथ मेरी माँ है, ये मुस्कान, ये हँसी, चहेरे पे जो हरदम दिखे,दुनिया की तब्दील मुश्किलों क... »

माँ-बाप की लाडो

माँ-बाप की लाडो

माँ–बाप की लाडो   ज्यौं जोगि छोड़े दुनिया को त्यों अपनी दुनिया छोड़ आई हूँ मैं तेरी जोगन हो आई हूँ अपना व्याह रचा आई हूँ   बाबुल का आँगन सूना कर तेरा स्वारन चल आई हूँ वीरो की बाँहे छोड़ जीवन तेरे लड लगा आई हूँ   मै माँ–बाप की लाडो तेरी परछाई बन चल आई हूँ अपनी मंज़िलों को भूल तेरी राहों को अपना आई हूँ   हाथो की मेहँदी में तेरे इश्क का रंग चडा आई हूँ इन सभी लकीरो में एक तेरा ही नाम सजा आयी... »

माँ

आँखे तुझ पर थम गई जब तुझको बहते देखा। सोच तुझमे रम गई जब तुझको सेहते देखा ।। अपनी कलकल लहरों से तूने प्रकृति को संवरा है। सबको शरण में लेती माँ तू तेरा ह्रदय किनारा है।। हमे तू नजाने कितनी अनमोल चीज़े देती है । और बदले में हमसे कूड़ा करकट लेती है।। खुद बच्चे बन गए,तुझको माँ कह दिया। तूने भी बिन कुछ कहे हर दर्द को सेह लिया ।। तेरे जल में कितने जलचर जलमग्न ही रहते है। और कर्मकाण्ड के हथियारो से जल में... »

मां

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“आसमाँ” #2Liner-16

ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता; . कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..‪#‎अक्स‬ »

माँ

कुछ खास नहीं था कहना , कुछ बात नहीं था कहना , जो बोल न पाया ख्यालों की अंजुमन मैं , बिन बोले तुम तक वह बात पहुंच गयी , आस्चर्य मैं पढ़ जाता हूँ मैं , मेरे दिन की रहमत होगी जरूर तुम , नहीं तोह तुम तक मेरी हर अनकही बात कैसे पहुंच जाती हैं »

दिल क्यूँ मांगो “More” ….!

   दिल क्यूँ  मांगो “More” ….! दिल तुम्हरी नहीं मानेगे हम, क्यूँ तुम मांगो “More” “More” “More” ही दुःख का कारण, सुख ले जावे चोर…..! इतना सारा पास जो अपने, देख तो उसकी ओर, जो कुछ है, इसमे ही समाया समाधान संतोष….. ! भगवत्प्रेम और भक्तिभाव में होकर मन मदहोश, सुख है, जो है, उसका करना परिपूर्ण उपभोग, सुख है, जो है, उसका करना प्यार से सद्उपयोग …..! ये जीवन है प्रभु की पूजा, ठान ले तू हररोज, प्रभु ... »

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