भगवान् की कृपा से मैने आमों के पेड़ों से भरा इक घर पाया हरेक पेड़ ने अलग-अलग रंग रूप पाया सबका आकार अलग,महक अलग फ़िजा में अलग ही महक उठी जब पेड़ों पर बौर आया […]
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भगवान् की कृपा से मैने आमों के पेड़ों से भरा इक घर पाया हरेक पेड़ ने अलग-अलग रंग रूप पाया सबका आकार अलग,महक अलग फ़िजा में अलग ही महक उठी जब पेड़ों पर बौर आया […]
आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन त्राहि त्राहि कर रही तेरी […]
धूप में बाप और चूल्हे पर मां जलती है, तब कहीं जाकर एक औलाद पलती है।
यारा! तुझ संग जिंदगी गुजारनी है मोहब्बत में तेरी हर शाम महकानी है, तेरे ही नाम से लहराता है आँचल मेरा तेरी दीवानी बन हर रात महकानी है, बिन तेरे प्यासी हूँ मेरे हमसफ़र प्रेम […]
चलो आज अपनी तन्हा जिन्दगी को नया रूप देते हैं सशंकित ह्रदय में फिर से नव उम्मीदों के बीज बोते हैं । रोज की भागदौड़, दोहरे कामों से मन है बेहाल घर-बाहर की जिम्मेदारियां, फिर […]
नम्रता ही तो है आभूषण हर्षित करता है सबका मन जीवन में कोई अवरोध नहीं प्रगति भी रुकता है कहीं कर्महीन का सहारा भाग्य उत्साही का तो हर दिन सौभाग्य — सब कुछ वह तुरंत […]
समझ में बिलकुल नहीं आता ये कैसी फितरत है इनकी जहाँ देखा नफ़ा अपना हाथ थाम ली उनकी । हल्ला मचा करके बस बात रखनी है फिक्र कहाँ इनको, अपनी भेट भरनी है हमारे धरतीपुत्र […]
तुम बांध लो अपना सामान, कुछ भूल ना जाना, यह सुनते ही, बेटी का दिल बोला! यह घर भी, अपना-सा नहीं लगता। चार दिन बीत जाने के बाद, दोहराए जाते हैं यही सवाल! कि कब […]
कुछ तो खास है उसकी मुस्कुराहट में, जब भी देखता हूं, दिल मिजाज़ करने लगता है। लाख समझा लूं मैं इस दिल को मगर कमबख्त, तुझे देखकर बेवजह ही धड़कने लगता है। शाम की चादर […]
नन्ही-सी परी मेरी लाडली अब बड़ी हो गई बैग लेकर स्कूल पढ़ने जाने लगी हाथों में कॉपी पेन लेकर लिखने लगी अंग्रेजी में कविता सुनाने लगी आँखों में उसके हैं अनगिनत सपनें मेरी आँखों में […]
वृद्धाश्रम में छोड़कर बूढ़े पिता को लौट आया घर, जरा सा चैन पाया मुस्का रही अर्धांगिनी ने जल पिलाया आज उसकी रुचि भरा भोजन बनाया। बोली बड़ी आफत हुई है दूर हमसे खांसी की आवाजों […]
दिनकर ऐसा सूर्य है जिसने हिन्दी जगत को अपनी लेखनी की किरणों से चमकाया देशहित में लिखकर देश का गौरव खूब बढ़ाया जिनके सूर्यातप के आगे शशि भी मलिन हो जाए ऐसे राष्ट्रकवि को प्रज्ञा […]
साई भजन – तुही तू है | साई तेरी दुआ से दुनिया मे रोशनी है | गर कर दे तू करम यहा कुछ नहीं कमी है | तेरी रहमतों से कायम ये दुनिया जहा है […]
जाना ही था उसको,चला ही गया वो, जाते-जाते बेजान कर गया वो।। जाने वाले को रोक पाया है कहाँ कोई होता है वही जो, नसीब में सबके होई जिन्दा हैं पर जान ले गया वो […]
बारी-बारी लूटा मुझको बारी-बारी रौंदा नारी होने पर बेबस थी खत्म हो गया जीवन का औधा ना..री…ना रो एक दिन मिलेगा तुझको इन्साफ सबने यही समझाया जब कोर्ट में सवालों ने किया शर्मिंदा कुछ भी […]
क्यों जताया जाता है प्रतिपल मैं दूसरे घर की लक्ष्मी हूँ हूं कुछ दिनों की मेहमान क्यों कहा जाता है हर पल यह एहसास होता है कि किस घर की हूँ मैं अपने ही माँ-बाप […]
**************** मेरी किस्मत रंगी है काले रंग में दर्द ही है जीवन के हर अंग में.. आँसुओं की लकीरें कभी मिटती नहीं बल्कि और गहरा जाती हैं जब किसी की बातें मेरे दिल को दुःखाती […]
मेरे जो अपने थे ,न जाने आज वो किधर गये जो सपने संजोये थे ,वो सारे टूटकर बिखर गये खुशियां मेरे आंगन की ,न जाने कहाँ बरष गयीं और एक हम जो बूँद बूँद को […]
हर घर की यह बस मिलती-जुलती गाथा है बेटी का कुछ वर्षों का मैके से नाता है । हीना रचने से पहले थी अलहङ अब चौका-चुल्हा बना भाग्य विधाता है थोड़ी सी भूल, भूलवश हुई […]
प्रभु ने कुछ और भी बाते समझाई थीं 20-25 साल हुए थे,नन्हे फ़रिश्ते ने कुछ भुलाई थीं किसी -किसी के याद रही, पर कोई फरिश्ता भूल गया प्रभु ने कुछ यूं समझाया था ……… फ़िर […]
मेरी जिंदगी की एक शाम थी मैं घर जा रही थी कोई नहीं था साथ में अकेली ही आ रही थी.. कुछ मनचले पीछा कर रहे थे रोज की तरह मैंने भी नजरंदाज कर दिया […]
प्रभु ने कहा , नन्हे फ़रिश्ते से, तुम्हे धरा पर जाना होगा मानव रूप मिलेगा तुमको इस धरा को स्वर्ग सा सुंदर बनाना होगा नन्हा फरिश्ता पूछे प्रभु से, उस दुनियां में कैसे रह पाऊंगा, […]
जीवन के पहले प्रभात में ली मैंने अंगड़ाई बाल्यकाल था बीता किशोरावस्था की बेला आई.. रोंक-टोंक थी ज्यादा मुझ पर समझ नहीं मैं पाती थी बचपन से मैं ट्यूशन पढ़ने चाचा जी के घर जाती […]
वो गोरी भी ना थी, ज्यादा सुंदर भी ना थी, ना देती थी प्रेम कभी, फ़िर भी वो योग्य बहुत थी कदम से कदम मिलाती थी वो साथ मेरे आती जाती थी मैं चाहता तो […]
नारी तू जो चाह ले रच दे नव संसार तू होने वाले अपमान का करती क्यूँ न प्रतिकार तू ।। कभी दाव पे लगा दिया खुद तेरे ही परमेश्वर ने मौन हुए सब देख रहे, […]
अभी-अभी कुछ बूंदों से रूबरू हुए, चमकते हैं मोती से, बरसते हैं बुंदों की तरह। पर आयानास ही नहीं बरसते। जब बनते हैं गम के बादल, सिमट जाते हैं पलकों पर। फिर गिरते हैं धीरे-धीरे […]
आईने तू इस तरह से मत दिखा तो शक्ल मेरी इन दिनों यौवन में हूँ चिंताएं मेरी लाजमी हैं। सोचता था मैं, कड़ी मेहनत से तारे तोड़ लाऊं। लेकिन यहां तो सारे पथ हैं बन्द […]
खूबसूरती को तुम्हारी, क्या नया उपमान दूँ, उपमान तो कितने ही बेहतर दूं ,भले न दे सकूँ लेकिन इतना तो कर सकूं कि घर के बाहर व भीतर तुम्हें उचित सम्मान दूं।
आज हमारा जीवन रक्षक, अन्न- दाता कर्म भूमि छोड़ कर दर – बदर सड़कों पर, संघर्ष करता, गरीब हर साल और गरीब होता जाता, सदियों से हक के लिए लड़ता , हर बार ठगा जाता […]
सदा अगलात ही न खोज मेरी वाणी में, कभी तो सत्य के अल्फाज भी ग्रहण कर ले। प्यार के नैन को उपयोग में ला, बन्द नफरत की निगाहें कर ले। न भर अस्काम खोज कर […]
ख्वाहिशों की बदलियां छटने लगी हैं आजकल मुहब्बत की रेत फिसलने लगी है आजकल काजल आँखों का दुश्मन बन बैठा है मेहंदी से भी अब कोई कहाँ नाम लिखता है दिल की किताब के सारे […]
सुण वे महिया, सुणंदा जा वे, की केंदा है तेनु मेरा ए छल्ला । दिलां विच ही ना रै जावे, थोड़ी तू वी सुण जा मेरे दिल दियां गल्लां ।। मेरे दिल नू तोड़ तू […]
कभी कल्पना की गलियों में, जब कवि-रूप में मैं चली । फ़िर जो देखा स्वपन-लोक में , उसका वर्णन करने चली । सुन्दर शहर है सपनों का , कुछ अनजाने कुछ अपनों का । सुन्दर-सुंदर […]
सरकारें बदलती हैं यहाँ पर नवयुवकों को आश्वासन देती हैं झूठे भाषण देती हैं पर नौकरियां नहीं देती हैं हर जगह लम्बी हैं कतारें व्यवस्था में हैं खामियां बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी […]
हर तरफ तेरे नजारे नजर आ रहे है | तेरे इश्क के इशारे नजर आ रहे है | हुश्न ऐसा चाँद फीका हुआ जाता है | अंधेरों हुश्न करारे नजर आ रहे है | आंखो […]
हे हिमाद्रि ! सदियों से जब मैं नहीं थी तब भी तुम यूँ ही अडिग खड़े थे और आज भी एक इंच तक ना हटे भारत का शीर्ष मुकुट बनकर खड़े हो तुम गंगा को […]
शिव गिरिजा संग आए घूमने पृथ्वी लोक में एक बार। कहीं पे देखा झगड़ा -झंझट और कहीं पे देखा प्यार।। पति -पत्नी की जोड़ी कोई झगड़ रहे थे आपस में। छींटाकसी और गालियों से माहौल […]
जब से तुझसे मिला दुगनी हयात होती गई, मेरे लिए तू मेरी कायनात होती गई.. यूँ रहा रंग भी अब तक की मुलाकातों का, के लब खामोश थे आँखों से बात होती गई.. न कोई […]
…….. हास्य- रचना.. विवाहित व्यक्ति, पत्नी से शिकायत करे यूं, क्या कमाल की सब्जी बनाई है, लव यू । बस, नमक थोड़ा सा ज्यादा है, सुनो, आज तुम्हारा क्या इरादा है । मेहमान आएं तो […]
मासूम बचपन कुचला जा रहा भीतर से सहमा, बाहर से उददंड हुया बिखरता हुया , गैज़ेटस के तले , अपनों के स्नेह-सानिध्य से वंचित सहमा हुया, आयायों के तले , सर्वगुण- संपन्न बनाने की होड़ […]
वो भी क्या दौर था जवानी का पहला पहला साल था इनायत थी परवरदिगार की अचानक वो रूबरू हुआ था । पेहेली नजर में दिल दे बैठा था में शायद फ़तेह पाली थी उसने मेरी […]
अब्सार आपके समुन्दर हैं प्यार के, सुकूँ मिल रहा है, आपको निहार के। प्रातः की बेला है नई रोशनी है, आप हो बगल में और क्या कमी है। सदा पास रहना यूँ ही मुस्कुराना, यही […]
कवि कलम कहती है मत रह तू निराशा में पथिक, भूल जा बीती सभी कुछ चुन नई राहें पथिक। याद मत कर दर्द को या दर्द की उस बात को तू, भूल जा बच्चा सा […]
तेरे प्यार मे इतने दिवाने थे मेरे सनम के तेरे नाम को अपनी हतेली पर जबरन जोड चुके थे हम अच्छी वाली जिंदगी का ख्वाब तेरे संग ही बुना करते थे हम एक पल भी […]
मेरे होंठों की मुस्कान पर ना जाओ दोस्तों! ये तो मेरे यार की तरह फरेबी है! मेरे आँसू हैं मेरी असली पहचान जो बंद कमरे निकलते हैं कभी तकिये से आकर पूँछों हम उसे कितना […]
फिर मुस्कुरा दो ठीक वैसे ही कि जैसे मुस्कुराए थे मिले पहली दफा जब। जिंदगी की आपाधापी चलती रहेगी अंत तक प्रेम को भी दें समय सच्चा यही है फलसफा अब।
मेरे जीवन की कहानी दुःख ही रही आखिर क्या लिखूँ आज जो अभी तक मैंने लिखा नहीं… विधाता ने मेरे भाग्य में आँसुओं के सिवा कुछ भी लिखा नहीं… मेरे पतझड़ समान जीवन पर बरसात […]
दो पल बैठो पास हमारे ये पल यूँ ही गुजर जाएंगे दो पल का है साथ हमारा ये पल लौट कर ना आएंगे दो पल तुमसे बात तो कर लूँ ये पल पलकों में ही […]
कुर्सी क्या है ? कितना मुश्किल है इसे समझना। सब राजनीति की संरचना है, सुन रखे हैं पुराने वादें, अब नए वादों में फंसना है। ये तो कुर्सी का मसला है। कहीं सत्ता की चाल […]
“आज जरुरत है हिंदी की” आज जरुरत है हिंदी की हम सबको जोड़े रखने की शोषण – अत्याचार मिटा कर देश में अमन जगाने की आज जरुरत है हिंदी की ……………. स्वतंत्रता के घन-घोर संघर्ष […]
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