एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी अर्सो बाद जिंदगी आफरीन हुई थी एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी शकसियत तो सबकी बेबाक थी जमुरियत मे थोडी, मुरझा सी गयी थी जब आन पडे आमने सामने […]
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एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी अर्सो बाद जिंदगी आफरीन हुई थी एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी शकसियत तो सबकी बेबाक थी जमुरियत मे थोडी, मुरझा सी गयी थी जब आन पडे आमने सामने […]
दिल खाली-खाली क्यू है शाम भी क्यू तन्हा-तन्हा लागे है । बिन कारन, क्यू बेचैनी का साया है यह कैसा उलझन वाला पल आया है उम्मीदों की किरण कहाँ अब, घोर निराशाओं की काली छाया […]
कोई साधारण चीज नहीं ईश्वर की वाणी है कविता, मन के भीतर उग रहे भाव का मधुर प्रकटन है कविता। दूजे का दर्द, स्वयं का मन जीवन के सुख-दुख का लेखन, कुछ अपनी और पराई […]
दूध के दाँत पालने में ही टूट गये गरीबी का थप्पड़ इतनी जोर से पड़ा लाद दी जिम्मेदारी की पोटली कंधों पर बचपन के खिलौने पल में टूट गये थमा दी चाय की केतली जब […]
जब उसने आँखे खोली, तब पाया एक नया संसार, रंग बिरंगी थी दुनिया उसकी, और खुशिया आपार, खेलती थी आँख मिचौली, संग अपने हमजोली, न पड़ती थी डॉट उन्हें, दो बोल मीठे बोलते, पा लेते […]
शिक्षा की चौपाल लगी कहाँ रहे अब पढ़ने वाले। संभावित प्रश्नों को रटकर कागज पर हीं बढ़ने वाले।। कई तरह के बोर्ड यहाँ हैं हर भाषा हैं माध्यम के। अंग्रेजी में काम करे सब डाले […]
हम भी हैं मुश्किलों से, हारने वालों में से है नहीं कोई भी चुनौती क्यू न आए, घबरायेगे हम तो नहीं कैसा भी हो अनल, स्वर्ण जैसे जलता है नहीं पर जबतक ना तपे वो, […]
बहुत ही कोशिश की,जरा हम भी बदले से जाएँ पर कैसे अब तक यह मन, बात समझ न पाए । अपनों से दर्द मिले थे अकसर शिकवा-शिकायत चलता ज्यादा- कमतर अनजान भी कैसे चोट पहुँचाए, […]
मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। […]
करुण रस की कविता:- ***************** जिसने हमको प्यार किया मेरी राह में सुबहो से शाम किया ना कद्र की हमनें एक पल भी उसकी अपशब्दों का उस पर वार किया एक रोज़ मैं बैठी थी […]
हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था […]
हिन्दी के व्याख्याता एक बोल रहे थे सेमिनार में। हिन्दी का प्रसार हो जन-जन और सरकार में।। बजवाई खूब तालियाँ बात- बात पे मञ्च से। समय खत्म होते ही बेमन आए मञ्च से।। खूब अनोखे […]
सीमित अक्षर, सीमित मात्राऐं रचा शब्दों का असीमित भण्डार बना विशाल वृन्द भरे शब्दकोश बेशुमार कैसा खेल रचाया है इन शब्दों ने महकाया काव्य दरबार वही शब्द संभावनाएं अपार क्षमता भरपूर भिन्न भाव अमिल सोच […]
हिंदी दिवस:- चौदह दिसंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है उसी दिन क्यों हिंदी को सम्मान दिलाया जाता है हिंदी तो ऐसे ही वाणी है जो भारतीय परंपरा पर चलती है देशी हो […]
एकता के सूत्र में विविधता को पिङोती, जनमानस की भाषा है जो देवनागरी लिपि में गुथी हुई,अपनी राजभाषा रूप धर आई है जो। हर जन के दिलों में उमंग सी बहती हुई अभिलाषा सी हमारे […]
कहाँ रहे अब किताबों के दिन !! अब तो बस अलमारी में रखी हुई किताबें धूल खाया करती हैं गुजरती हूं जब कभी उनके करीब से तो मुझे बड़ी उम्मीद से देखती हैं कि शायद […]
मैंने बड़े प्यार से पूछा आज उससे अगर मैं ना रहूं तो मेरी कमी तुम्हें खलेगी ? उसनें जवाब दिया- बादल चाहे जितने हों पर धूप तो रहेगी।
आब-ए-चश्म रातों में न आओ आँख में रात सोने दो, जरा आराम करने दो, सुबह को फिर वही, उनकी जुदाई याद कर के हम, बुला लेंगे तुम्हें, लेकिन अभी आराम करने दो। आब-ए-चश्म – आँसू
सोचता है मन कि पूरी रात भर उडगन, समय कैसे बिताते हैं अपने घौंसलों मे रह। न मोबाइल न टीवी है न खाना बनाना है, साँझ होते ही दुबक कर बैठ जाना है। जो पा […]
कबूतरों का झुंड एक उड़ रहा था आकास में। बीच झाड़ियों के बहुत दाने पड़े थे पास में।। युवा कबूतर देख-देख ललचाया खाने के आश में । बोल उठा वो सबके आगे उतर चलें चुगने […]
चलिए एकबार फिर से, खुद पर एतवार करते हैं । बहुत कर लिया गैरो से, इसबार खुद से ही प्यार करते हैं ।। बहुत किया भरोसा, जो भरोसे के हरगिज़ काबिल नहीं थे, खुद पर […]
************ हास्य रचना********* एक सखी ने पूछा वॉट्सअप पर दूजी से, क्या चल रहा है ज़िन्दगी में… दूजी वाली बोली… Jsdfghyybttuiokhfeyppourebm पहली ने कहा, ये क्या है,कुछ समझ नहीं आया.. दुजी वाली बोली, वो ही […]
गायब इस धरा से आज, इंसान क्यूं है।। कोई हिन्दू, कोई यहां मुसलमान क्यूं है, एक थाली में खाने वाले, सुख दुख में साथ निभाने वाले मिलके त्यौहार मनाने वाले बने आज शैतान क्यूं हैं, […]
लहरें होकर अपने सागर से आज़ाद तेज़ दौड़ती हुई समुद्र तट को आती हैं , नहीं देखती जब सागर को पीछे आता तो घबरा कर सागर को लौट जाती हैं , कुछ ऐसा था मेरा […]
जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा मुस्कान हो या फिर हो […]
अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता […]
❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ *************************** पहली मुलाकात और पहली भेंट आज भी याद है मुझे… वह बरगद के नीचे बैठकर करी थी जो बातें हमने दिल आज भी बेताब है… तुम कुछ लाए थे […]
मेरा जिससे था प्रेम प्रसंग वो रहता था हर पल मेरे संग हम एक दूजे के साये थे जन्मों बाद करीब आए थे.. वो हाथों में हाथ लिए बैठा था बोला मुझसे विवाह रचा लो […]
सीता वियोग में बहुत विकल थे प्रज्ञा के श्रीराम ! एकाएक याद हो आई सिय से प्रथम मिलन की बेला !! ज्यों घोर तिमिर में कौंध उठी हो अकस्मात दामिनी त्यों राम हृदय में जगमगा […]
सोची समझी चाल से, शायद जानबूझकर पार्टियां वे कर रहे, विश्व को मौत में ढकेल कर। जिस वुहान से इसकी शुरुआत हुई इससे निजात की, तैयारी थी क्या कर रखी। मास्क को दे तिलांजली, दुनिया […]
जो भी लिखता हूँ कविता आप इश्रत ही समझना, न मुझसे, न खुद से बस खुदा से तिश्रगी रखना। जब कभी मित्र बनकर बैठना चाहोगे तो मैं भी बिठाउँगा खुशी से आपको दिल के बियाँबा […]
अक्सर मैं भूल जाती हूं , अपनी राह। ख्वाब अनेकों हैं, अब खत्म है चाह। कभी उम्र की सीमा रोक देती है, कभी दूसरों की सलाह। पर भुला कर बढ़ती हूं आगे, फिर से उठते […]
आजाद किसे कहें? सब बंधे हैं बंधन में। हर शाम पंछी, अपना घोंसला तलाशता है। जहां चाह होती है, अपने आशियाने की। वह बोलते नहीं तो क्या, दिख जाती है उनकी ममता, जब चुग कर […]
कितनी जाजिब हो तुम कितना मीठा कहती हो, सबको खुश रखने को सब कुछ खुद पर सहती हो। परिवार बनाने वाली हो प्यार लुटाने वाली हो खुद तो सब कुछ हो मेरा मुझको सब कुछ […]
कविता – तेरी खता ————————- तेरी खता फिर से तुझे, बदनाम कर सकती| तेरे लफ्जों के कारण ही, तुझे शैतान कह सकती| कहां अगर तू ये सच्चाई, तुझे बदनाम करते हैं| करें सबसे शिकायत जो […]
एक सवाल पूंछना है तुमसे एक बार आकर तो मिलो सब कुछ तो ठीक हो गया है तुम्हारे जाने के बाद… पर नींद कहाँ गुम हो गई यही पूंछना है मुझे रातें चाँद, तारे देखकर […]
तू शक्तिशाली!,मैं दलित ! तू स्वर्ण ! मैं नीच! यह शब्द स्वार्थ में , तूने ही मुझे दिए। तू मालिक, मैं दास, तेरी विचारधारा में; मेरा उपहास, शोषण का खाता, यहां हर रोज खुलता है, […]
आंगन में एक पाटा रखकर पण्डित और परिचितों को बुलाकर लगा तैयारी में पूरा घर पकवान और मिष्ठान बनाकर हाथ जोड़कर सब बैठे हैं दादी की बरसी है आज एक बरस होने को आया पर […]
नन्ना-सा ,एक छोटा-सा , टहनी बड़ी, मगर कोमल-सा, अकेला मनोहर पौधा, तेज हवाओं में ,वो झूला झूले, कभी इधर कभी उधर, क्रीडा ललाम बड़ी सुहावनी, बारिश में वो नृत्य करें, मगर माली ठहरा क्रुर-सा, पौधा […]
कविता- प्यार है या जख्म ————————– क्या कसूर था मेरा, बस आके एक बार बता जा| खुश है- आ उन्नीस बरस का प्यार बता जा| करले तुलना प्यार से अपने, अब पूछो जरा मन सम्मान […]
आज तोड़ दी मैंने पीली पत्तियां पौधों से उसी तरह जैसे मैं दिल से बेदखल हुई थी तुम्हारे ! हरी पत्तियों पर जब पड़ती हैं ओस की बूंदें तो तुम्हारे होंठों पर टूटते गुलाब याद […]
बिटिया रानी बाज़ार गयी छोटा सा सामान लेने को, लौटी तो लगी उदास सी कुछ पूछा तो हो गई रोने को। दादी माँ ने पुचकारा फिर बोलो गुड़िया क्या हुआ तुम्हें, कहीं किसी ने कुछ […]
ऐ !आयतें मुझे नजरबंद, कर ले कहीं , काश ! कोई दुआ में, पढ़ ले कहीं।
क्या है आरक्षण और क्यों है आरक्षण ? क्यों हमें जाति के नाम पर अलग करते हो ? जब देखो तब हम युवाओं का बँटवारा करते रहते हो.. सवर्ण के हों इतने नंबर तब ही […]
जब तलक राह में आपके गम की छाया न हो तब तलक, आप महसूस कैसे करोगे स्वाद इसका है बिल्कुल अलग। जब तलक कोई ठोकर तुम्हें गिराती नहीं भूमि पर, तब तलक किस तरह इल्म […]
मैं अंतर्मुखी हूं, इसीलिए कभी – कभी कुछ दुखी हूं, और कभी – कभी कुछ सुखी हूं । बोलने से पहले तौलती हूं, यदा – कदा मन का कह नहीं पाती, तो थोड़ी खौलती हूं […]
लड़की हूं लड़की होने का, दस्तूर निभा रही हूं। न जता सकी उस प्यार को, फिर भी निभा रही हूं। शौक रखती थी कुछ पाने का, अब उसे दबा रही हूं। कभी कोई सोचता नहीं, […]
पाकीज़गी अब दिखती नहीं , इन आबो-हवा में भी । कभी दम घुटता है तो, कभी मन । कभी सास भी बेपरवाह हो जाती है , हां, यह रुख भी बदला है , अब सुकून […]
कितनी पी लेते हो जो होश नहीं रहता है जमाना तुम्हें शराबी कहके हँसता है… इतना धुत हो जाते हो कि कुछ भी याद नहीं रहता है! किसे क्या कहते हो कुछ होश तुम्हें रहता […]
पुरानी सी डायरी के फ़टे पन्ने पर लिखी अधूरी नज्म हूं मैं जिसकी खूशबू बरकरार है अभी भी कई मौसम गुजर जाने के बाद
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