बड़े शहर की जिंदगी को छोड़ , अब छोटे शहर की जिंदगी को, जीकर देख रहे हैं यहां भी लोग हैं; वहां भी लोग थे, यहां सोच बड़ी, वहां सोच छोटी , न निभाते हैं […]
संपादक की पसंद
बड़े शहर की जिंदगी को छोड़ , अब छोटे शहर की जिंदगी को, जीकर देख रहे हैं यहां भी लोग हैं; वहां भी लोग थे, यहां सोच बड़ी, वहां सोच छोटी , न निभाते हैं […]
कविता : सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है जो खो गया है मेरी जिंदगी में आकर उस पर गजल लिखने के दिन आ गए हैं दिल दिमाग का हुआ है बुरा हाल अब तो रात […]
किसी की रूसवायी की वज़ह क्यूँ बनें ऐ मेरी जिंदगी, चलो हम ही चले जाते हैं । औरों की परेशानी का सबब क्यूँ बने किसी की आँखों की चुभन क्यूँ बने तेरा चैन यूँ ही […]
गीत, गज़लें लिख रही हूँ कुछ अलग ही दिख रही हूँ होंठों पर हैं लफ्ज अटके मन ही मन में पिस रही हूँ आ गई अब शाम, दिन की दोपहर ही लग रही हूँ गुनगुनी-सी […]
पाकर सब नदियों का पानी सागर को खूब मचलते देखा। पत्थर के कलेजे रखनेवाले हिमालय को पिघलते देखा।। गम्भीर बड़ा आकाश मगर हमने उसको भी रोते देखा। सबको पाक करे जो नदियाँ बीच कीचड़ में […]
हमें आता जाता कुछ भी नहीं, सिर्फ शब्दों में खेल रहा हूं| परिणाम का हमें कुछ पता नहीं, मीठा खट्टा बोल रहा हूं| शब्द आन मान शान हैं, शब्द शब्द वेदी बाण है| शब्द राजाओं […]
अपने भाई दूज की तुमको खिला मिठाई आँखों में थी हया ग्लास पानी का लाई… तुम तिरछी नज़रों से मुझको यूँ देख रहे थे मन ही मन में कितने लड्डू फूट रहे थे… ना तुम […]
जूम गूगल मीट पे क्लास चल रही है | नेटवर्क भी सही नहीं, फिर भी बात हो रही है| मोर मोरनी बिछड़ गए, राधा बन घर रो रही| है गरीबी की मार से, खुद फोन […]
आओ थाली बजाते हैं! गरीबी का मुंह दिखाने वाली, बेरोजगारी के लिए , आओ ताली बजाते हैं! देश की कमर तोड़ने वाली मरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए, आओ थाली बजाते हैं! झूठ को सच बनाने […]
तुम नारी हो, यूं अबला न बनो । दुर्गा – अवतारी हो, सबला तो बनो । बीती बातों को छोड़ परे, आगे के रस्ते तय तो करो । रस्ता था, कांटो वाला बीत गया रस्ता […]
बहुत दिनों के बाद , जब खोला मैंने यादों का पिटारा । कुछ बचपन की किलकारियां गूंजी, कुछ मां की मीठी लोरी, कुछ पापा की डांट मिली। कुछ दिखे खेल पुराने जो खेलें अपनों संग, […]
ऐ जिन्दगी ! कभी तो तू मेरी होती जिधर को मैं कहती, उधर रूख़ करती ।। तू जिधर इशारा करती, मुङ जाते हैं उधर तेरे आगे अपनी मर्जी चलती है किधर काश! बस एक बार […]
मुझको सो जाने दो जीवन रात हुई अब बहुत घनी नैनों से ओझल हैं सपनें साँसों से भी ठनी-ठनी आसमान बाँहें फैलाकर मेरे स्वागत को आतुर है धरती पर बस बोझ बनी हूँ मिट्टी में […]
बचपन जल रहा है, जल उसे बुझा न सकेगा, जल रहा है बड़ों की इच्छाओं के तले, उनकी आशाओं के तले, चाहते हैं पूरे हो सब ख्वाब, पर कभी पूछते नहीं उनसे, बांधकर एक सीमित […]
लफ्जों की पोटली , बांध लो ना तुम , क्या कहते हैं ,वो जरा सुन लो ना तुम, तब मांपना और तोलना , उनकी बातों को , फिर वह पोटली खोल देना तुम, तर्क वितर्क […]
जिंदगी को कहीं कैद कहीं आजाद देखा फिर भी न बदलता उसका स्वभाव देखा बुंद बनकर आसमां से लहराते आते देखा कयी बोझिल चेहरे को पल में हर्षाते देखा चूल्हे पर जलकर फिर आसमां में […]
अगर जग बदलता है बदलने दीजिए वक्त के साथ ही चलना सीखिए आसमानों को छूने की हसरत है अगर दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए जीवन जीने का आनन्द है तभी दर्द औरों का उठाकर […]
मां ने जब रोटियां बनाना सिखाया , मुझे कुछ समझ ना आया , कभी रोटियां जली तो कभी हाथ, फिर सीख ही गई मैं, रोटियां बनाना, और अब रोटियां नहीं जलती , बस जलते हैं […]
हैसियत क्या थी मेरी पूछिए मत, बस किताब के कोरे पन्ने थे , लिखते रहे अपनी रूबानी, जब बनी ना कोई गजल ना कोई नज़्म, फटकर सिमटकर पैरों तले बस कुचले गए।
आज कर दूं, आंखें नम या समंदर कर दूं , मेरे भीतर का वो दर्द ; कैसे संदल कर दूं।
कविता- कंघी —————— कभी इसको रख गोदी मे रोटी देती थी, कभी इसको काजल कंघी तेल कराती थी, कभी इसको कंधो पर रख कर, मेले कि शैर कराती थी, थक! जाता था, लाल मेरा जब, […]
हां, झूठी है औरत, अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित, औरों के लिए जगे रात तक हां, झूठी है औरत। मायके की तारीफ़ करे ससुराल में, ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में। कोशिश […]
अजीब सी है ये ज़िन्दगी, कभी, फूलों सी कोमल लगी। कभी शमशीर की धार हुई, दिल के जज्बातों को जब- जब किया बयां, एक कविता हर बार हुई ।
तराशने वालों ने, पत्थर को भी तराशा है, नदानों के आगे हुआ, हीरे का भी तमाशा है।
इस तरह क्यों भेद का तुम भाव रखते हो, बताओ, मैं तुम्हारी ही तरह इन्सान हूँ इंसान समझो। मुफलिसी है श्राप मुझ पर बस यही है एक खामी, अन्यथा सब कुछ है तुम सा एक […]
आपको लगता है क्या मैं चाँद हूँ या चाँदनी रात के झुरमुट में बैठी हूँ मैं कोई अप्सरा गीत हूँ या हृदय की टूटी-फूटी रागिनी… आपको लगता है क्या.. अमरत्व का वरदान हूँ या करुणत्व […]
नातियाँ धरातल तक पहुंचें बेरोजगारी पर नया करो कुछ यह सबसे प्रमुख मुद्दा है इस मुद्दे पर किया करो कुछ। देखो ! देश के नौजवान कैसे सड़कों पर भटक रहे हैं, रोजगार का संकट सिर […]
इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज […]
सुबह सुबह में चलो साफ करें अपने घर और दिल को साफ करें, सोहती फेर लें, पोछा लगा के साफ करें अर्श से फर्श तक न दाग रहें। यदि कहीं लूतिका ने जाल बुन के […]
‘हाँ मैंने उसको रोका था, फिर भी वो चौखट लाँघ गई.. जैसे बस जागने वाले तक, हो इस मुर्गे की बाँग गई.. बाकी सब निष्फल सिद्ध हुआ, हम क्या थे वो कल सिद्ध हुआ.. उस […]
महज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होती ज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है .. बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती है कभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है … नहीं […]
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई | कविता- ज्ञान दाता | ज्ञान दाता विज्ञान दाता तुम ही हो | हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो | जीवन मे अंधेरा बहुत था तुमसे पहले| […]
सावन की रिमझिम बूंदों में, भीगे तुम भी, भीगे हम भी भीग गया है तन – मन सारा। नभ से मेघा जल बरसाते, धरती को हैं सरस बनाते गीले हैं आगे के रस्ते। अरे! अरे, […]
हास्य- कविता सत्य – नारायण जी की पूजा थी, शर्मा जी के धाम। गुप्ता जी भी पहुंच गए, छोड़ के सारे काम। आरती के समय सामने, जब थाली आई, डाला दस रुपए का फटा नोट, […]
मैं शिक्षक हूं वर्तमान का, मुझे बच्चों से डर लगता है, मजबूर-सा हूं पढ़ाने में, बेरोजगारी से डर लगता है। सम्मान-वम्मान जुति बराबर मगर लाचारी से डर लगता है, अध्यापन ही एक काम नहीं अतिरिक्त […]
गुरू की महिमा का मैं, कैसे करूं बखान । गुरू से ही तो किया है, ये सब अर्जित ज्ञान। ऐसा कोई कागज़ नहीं, जिसमे वो शब्द समाएं। ऐसी कोई स्याही नहीं, जिससे सारे गुरू – […]
गुरु अर्चना ,गुरु प्रार्थना ,गुरु जीवन का आलंबन है गुरु की महिमा ,गुरु की वाणी जैसे परमात्मा का वंदन है प्रेम का आधार गुरु है ,ज्ञान का विस्तार गुरु है भविष्य का निर्माण वही है […]
कितनी उधेड़बुन करती हूं, मैं इन धागों के साथ । जिसे जिंदगी कहते हैं , कभी गम की गांठ खोलती हूं। कभी खुशियों की गांठ बांधती हूं । बस लगी रहती हूं ,इसे सुलझाने में। […]
पलकों पर नींद बिखरी पड़ी होती है , फुर्सत में समेट कर सोते हैं।।
क्या उकेर देती , मैं इन कोरे पन्नों के ऊपर। अपने भीतर की वेदना या दूसरों की प्रेरणा । अनकही बातें या सुनी सुनाई बातें। नहीं जानती इसका अर्थ क्या होता । क्या उकेर देती, […]
‘उलझ पड़ें न कहीं हम, के इस ज़िन्दगी से, अपनी क्या बनेगी, आज तक बनी किसकी है.. इसलिए रखता हूँ हर आतिश को खुद में दफन, कहीं वो पूछ न बैठे कि आगज़नी किसकी है..’ […]
यूँ रास्तों में कैसे बैठे हुए हो यौवन क्यों बाजुओं में माथा टेके हुए हो यौवन। क्या कोई ऐसा गम है या कोई ऐसी पीड़ा, जिसकी तपिश से इतने मुरझा गए हो यौवन। यह बात […]
प्रेम के सागर में अमृत रूपी गागर है माँ मेरे सपनों की सच्ची सौदागर है भूल कर अपनी सारी खुशियां हमको मुस्कुराहट भरा समंदर दे जाती है अगर ईश्वर कहीं है ,उसे देखा कहाँ किसने […]
कौन कहता है कि बारिश थम गई नैन में अब भी घुमड़ते मेघ हैं, रो रहा आकाश शायद अब नहीं यूँ तड़पती बून्द परिचय दे रही। जिंदगी सुनसान सड़कों सी बनी लालसाएँ ढेर सारी शेष […]
गमगीन है हिन्दुस्तान ———————- प्रणवदा थे राजनीति का एक जीता-जागता, सजीव संस्थान निधन,राजनीति ही नहीं, जनता के लिए भी बङा नुकसान । गुणी, पढ़े लिखे, सादगी की थे जो जीती-जागती प्रतिमान इस दौर में ढूँढे […]
आज धरा से मिला आकाश ,तो अच्छा लगा। नन्हीं – नन्हीं बूंदों से हरी हो गई घास ,तो अच्छा लगा। तल्ख़ हो जाए ,कुछ बातों से जब दिल, कोई दे जाए बातों की मिठास , […]
कितनी व्यथा है तुम्हारी जो कम होने का नाम ही नही लेती, आंख मेरी नम कर जाती रोटी से शुरू हुई पलायन तक गई पर मौत पर जा कर रुकी तुम्हारी उदर-ज्वाला संग जंग आंख […]
नन्हे से बच्चे को जब सड़क पर चाय बेचते देखती हूं इक बहन सिसकती है मां रोती है मेरे अंदर
यह कहक़हा लगा कर , मुझे झुकाकर कहां चल दिए। मेरी धूमिल आंखों से ओझल होकर, सच को झूठ बनाकर कहां चल दिए। मैं थी बेकसूर, तुम कसूरवार, ठहरा कर कहां चल दिए। मैं मांगती […]
नारी तुम पर कविता लिखने को वर्णांका असफल है मेरी तुम तो जीवन की जननी हो सब कुछ तो तुम ही हो मेरी। माँ बनकर जन्म दिया मुझको यह सुन्दर सा संसार दिखाया, अच्छी-अच्छी शिक्षा […]
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