चाँद देखो, चाँद की शीतल छटा का लाभ लो। दाग-धब्बे खोजने की मंद आदत त्याग दो। इंसान में कमियां भी होंगी और अच्छाई भी होगी बस कमी ही खोजने की मंद आदत त्याग दो। हो […]

तुम्हारे हाथ में अपनत्व की जो कुछ लकीरें हैं उन्हीं में एक मैं भी हूँ जरा सा गौर से देखो। आईना सामने रख खुद की नजरों में जरा देखो, मिलूंगा नीलिमा में तुम जरा सा […]

वे सो रहे हैं व्यवस्था को, जेब में लेकर, हम रो रहे हैं , हाथ में मोमबत्तियां लेकर! वे जागते हैं अक़्सर चुनाव में, और हम हादसों में ….

निरुत्तर हो गए हम आपकी बात सुनकर निकल पाया न मुंह से एक भी शब्द छनकर। कह दिया आपने सब कह नहीं पाए थे जो हम, आपकी बात सुनकर सोचते रह गए हम। कभी उस […]

वो कहते हैं बलात्कार की घटना हमने सबसे पहले दिखलाई है पीड़िता के घर तक सबसे पहले हमारी पत्रकार पहुंच पाई है हमने दिखलाया सबसे पहले पीड़िता के भाई को पीड़िता की आवाज सबसे पहले […]

मैं जब-जब अकेला होता हूं, दर्द के संताप को, बाहों में लेकर रोता हूं। खो जाता हूं ,उन यादों में, उलझे हुए उन ख्वाबों में, वक्त की जबरई को, गले लगाकर; खोता हूं, जब-जब अकेला […]

स्वपन में मैं रसोई में खड़ी थी, रसोई में रखे, कैंची, चाकू और बेलन में, ज़बरदस्त जंग छिड़ी थी कि यदि चाहे, तो कौन दे सकता है, ज्यादा घाव मुझे भी हुआ सुनने का चाव.. […]

वित्त – विभूति कहीं जले तो, जल ही उस बुझाए कहीं दिल जले तो क्या किया जाए.. अम्बर से पानी बरसे, तो , छतरी को लिया जाए नयनों से पानी बरसे, तो क्या किया जाए […]

दो पंक्तियों से मेरी ऐसी मिठास फैले, मिट जायें नफ़रतें सब दूर हों झमेले। कविता तो प्रेम को है बस प्रेम ही हो मकसद लिखूं प्रेम लिख दूँ निकलें न पद विषैले। क्या पा सकूँगा […]

छोटी सी मासूम कली थी, अपने घर में, मां की गोद में बड़े लाडों से पली थी मुस्कान के आगे जिसकी, पूरा घर था खिल गया उसको शर्म सार करके, किसी को क्या मिल गया […]

बापू हमारे, जन- जन के प्यारे मिली आजादी बापू तेरे सहारे ।। वर्षों से भारत माता सिसक रही थी पाँवो में गुलामी की बेङी पङी थी दिल में हमारे न कोई ललक बची थी स्वाधीन […]

जिनके तेज के आगे, चाँद की चमक फीकी हो ऐसा कौन है जिसने, अहिंसा से लङाई जीती हो । बिन गोली- बारूद के चला था फ़िरंगी से उलझनें सोचा भी नहीं था कभी, चला है […]

बापू तुम्हारे सपनों को हम साकार करेंगे। हम हिन्द के हैं बालक सेवादार बनेंगे।। इसे प्यार करेंगे।। मूल मंत्र जो दिया आपने, सत्य अहिंसा का सबको। अपनाऐंगे हम जीवन में, जीवन को साकार करेंगे।। हम […]

महात्मा गांधी सत्य अहिंसा को अपनाकर जीवन को साकार किया। एक वस्त्र में खुद को रखकर जन जन का उद्धार किया।। बाल्य काल में शिक्षा सेवा योग मार्ग को अपनाया। जन हितकारी न्याय के खातिर […]

उन्हें देख हिल गए, कांप गए अंग्रेज, धोती वाले बापू जी की बात ही निराली थी। उखाड़ा फिरंगी राज, एक किया था समाज, राष्ट्रवादी भावना की, लहर सी ला दी थी। सत्य के अहिंसा के, […]

विश्व गुरु की संस्कृति की आज ये यात्रा अंतिम निकल रही, चिता जल रही संस्कारो की मर्यादाएं राख हो रही।। धुंआ हैवानियत का उड़ रहा दरिंदगी की लपटें निकल रही, देवी रूप में जिसकी पूजा […]

दुष्टों ने हिंद की बेटी को पलित किया, हिन्द का दिल सहम उठा l वर्षों पहले दुष्टों के विरोध में नारा उठा था, हिन्द ने केंडल मार्च निकाला था l हिन्द ने न्याय के लिए […]

बापू गांधी और लाल बहादुर, दोनों हैं इस देश की शान एक का नारा सत्य , अहिंसा , दूजे का जय -जवान, जय-किसान अपने इस देश की खातिर, दोनों ने अपने प्राण किए न्यौछावर, दिया […]

ईश्वर का खेल निराला है सब कुछ अपने प्रारब्ध और कर्म से ही मिलता है जैसे तुझे ताली मुझे गाली। सृजनहार ही सब सृजन करता है हमने तो बस गलतफहमी पाली, वही सींचता है लेखनी […]

कैसे कहें ” सुरक्षित हैं तू” —————–******* हम भारत की आधी आबादी, कबतक सहे दुराचार बढता ही जा रहा, थमता नहीं, हिंसक व्यवहार आख़िर क्यूँ नहीं, कोई कर पा रहा इसका निराकार सारी कोशिशें, सारे […]

मन के इतने खूबसूरत आप कैसे हो गए, आपको किसने सिखाया इस तरह से स्नेह करना। आप मे इतनी अधिक ममता की बातें हैं भरी, कि आप ऐसी लग रही हो एक मिश्री की डली। […]

किसी ने पूछा पंडितजी क्यों लिखते हो आखिर कविता। क्या कुछ हासिल होता है या फिर यूँही रहे हो समय बिता।। छन्द हमारा पिता बन्धुओं और भाषा अपनी जननी प्यारी। बेशक तुकबन्दी हो अपनी पर […]

पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता […]

माँ भारती, अब भी चुप क्यों, फिर बिटिया हुई शिकार दुष्कर्म, असह्य पीङ, कत्ल, कर दिया अंतिम संस्कार । अपमान हर महिला का, हर पिता हुआ शर्मसार अनवरत् चलता है, थमता नहीं, होता बारम्बार ।। […]

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले, न ही दलित की बेटी हुं। मैं निर्भया आज की , इंसाफ़ मांगती, मैं पहले देश की बेटी हुं। क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय, जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया, […]

इस महामारी में आमजन के कष्टों की दासताँ जानना हो तो बस एक दिन गुजारिए उनके बीच, उनसे मिल, जिनके दिन बितते आजीविका तलाशते रातें बीतती आने वाली परेशानियोंको गिन। हमें तो बस उन्ही नीतियों […]

लो आ गया चौके छक्कों का सफर ये सुहाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना गूंजा रण ताली से सारा जमाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना बुमराह की यार्कर ,रसेल का सिक्सर आर्चर की […]

इस छोटी सी उम्र में, देखते हो ना मुझे, कभी ढाबों या चाय के ठेले पर, कभी किसी गैराज में, कभी लाल बत्ती पर , अखबार का बेचना, ठेले का धकेलना, कभी सोचा है तुमने, […]

यह कैसी है आपदाएं, कितना विनाश करती हैं! छीन कर सब मेरा, और मुझसे सवाल करती है। बाहर की भीषण तबाही, मेरे भीतर तक मचती है। सुख-चैन गंवा कर जोड़ा था, जिंदगी भी तौबा करती […]

ले देकर कुछ यादें हैं मेरे पास जो दिल की तिजोरी में संभाल के रखीं हैं गरीबी जब आयी करीब मेरे तो लोगों ने हिदायत दी कि कर लूं सौदा कुछ यादों का चंद पैसों […]

है हिदायतें देती मां मुझे। घर जल्दी आना बेटी देर न करना। मैं सोचती हूं अक्सर! क्या यह देश मेरा घर नहीं! क्या यह लोग मेरा परिवार नहीं! फिर क्यों नहीं सुरक्षित , मैं अपने […]

ॠणी आपके हैं हम सभी, त्याग, तप, पौरूष की गाथा भूलेगे ना कभी । 28 सितम्बर, 1907 का था वो पावन दिवस बसंती चोला धारी, वीर क्रांतिकारी, सेनानी भगतसिंह का पंजाब की , पावन धरा […]

है डर मुझे आज भी, उन सुनसान गलियों से। वह सन्नाटे में चिल्लाते , शोर की गहराइयों से। वह डरा देती है, मुझे। मैं जब उस ओर गुजरती हूं। याद आता है, मुझे उसका चेहरा। […]

मेरी बेटी। छोटी सी गुड़िया, कभी हंसती, कभी रोती। तो कभी रुलाती, तो कभी हंसाती। मेरी बेटी। अभी सीखा है, उसने शब्दों से खेलना। भाता है उसे, एक ही सार में, स्वर और व्यंजनों को […]

मैं अभिमन्यु मां के पेट में ही मज़दूरी के गुर सीख चुका था; किंतु निकल नहीं पाया इस चक्रव्यूह से- इसी से पीढ़ी दर पीढ़ी मज़दूरी की विरासत बांट रहा हूं !

कविता क्या होती है कुछ शब्दों की तुकबंदी, या लय का विस्तार। जो अंत मन को व्यक्त कर लेती है या फिर सौंदर्य श्रृंगार। कविता क्या होती है? जिसने देश की खुशबू और होता है […]

मैं जिंदगी जी रहा हूं। दूसरों के दिए एहसानों, पर पल रहा हूं। भटक रहा हूं मैं, अपने आप से। घर के रास्ते, बार-बार टोह रहा हूं। कहां जाऊं, मैं किस डगर। जो भूख मिटा […]

लगता पूछती हो, बता माँ कबतक बंदिशो में रहना होगा कब खुलकर हंसना, बोलना बेखौफ़ घर से निकलना होगा । कब मैं भी बेखौफ़, सुबह की सैर पर जाया करूँगी दिन ढले भी निश्चिंतता से, […]

मेरा सूट पूछ रहा साड़ी से, क्या हुआ बहन, बहुत दिन हुए नहीं गए, कहीं गाड़ी से मैडम भी नहीं दिखती आजकल, अब तो मैं भी डरने लगा हूं.. मैडम को देखने को , तरसने […]

पता नहीं किस बात पर इतराता है आदमी कब समझेगा अर्थ ढाई आखर का आदमी भूल बैठा है आज वो निज कर्तव्य को खून क्यों मानव का बहाता है आदमी क्यों शब्दों के बाण से […]

दुखी वही है जिसका वर्तमान खोया है कल जो बीत गया कल जो आने वाला है दो कल के अदृश्य महलों में मन विचरता रहता है मन कितना निष्ठुर है खुद देख लो, दो कल […]

कल तलक फिरता था वह मेरा बनके दीवाना हम आंखों ही आंखों में बात किया करते थे आज बहुत दूर है वो हमसे मगर फिर भी हम सपनों में उनसे रोज़ मिला करते हैं।

खुशियों की गुल्लक टूट गई जब अपनों से ही शूल मिला विश्वास करें भी तो कैसे जब कांटो में लिपटा फूल मिला। सगे-संबंधियों ने मुंह मोड़ा शायद कुछ हम मांग न ले कहीं मिले तो […]