आजादी

आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

कभी नक्सलियों, आतंकियों से आजादी,
कभी रिश्वतखोरों, भ्रष्टाचारियों से आजादी ।
कब ली राहत की साँस हमने,
भूली बिसरी बातें हैं, नहीं अब याद भी ।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

चल रही कहीं जिस्म की निलामी,
बरकरार है दहशत की गुलामी ।
बारूद के ढेर पे बैठे हम सारे,
कब निगल जाए हमें और हमारे औलाद भी।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

कभी जात – पात की बंदिशें,
कभी मजहब के नाम पे रंजिशें।
साम्प्रदायिक बेड़ियों में जकड़े हुए हम,
समानता की लाख कर लो फरियाद भी।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

अदृश्य गुलामी से हम क्या उबर पायेंगे,
सही मायने में आजादी महसूस कर पायेंगे ।
दूसरों की गुलामी ही क्या गुलामी है,
पल-पल की गुलामी से हो रहे भले बर्बाद भी।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

आओ आजादी की एक लौ जलाते हैं,
जश्ने – आजादी दिल से मनाते हैं ।
संकल्प लें आज स्वस्थ भारत बनाने की,
नई पीढ़ी को दें, संपूर्ण आजादी की सौगात भी।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी,
आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।।

देवेश साखरे ‘देव’

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

Responses

New Report

Close