पगली लड़की /03
( पगली लड़की /03 )
ना जाने क्यों इतनी अधुरी
सी लगती हैं जीवन
गुनगुनाता मचलते
मस्ती में चले जा रहा था
आगे से मेरे आ रही थी
एक पगली सयानी लड़की
नयनो से मेरे जब मिले नयन
रुक सी गयी जीवन के पल
ठहाके मार हँसने लगी
वह पगली लड़की मेरे दिल में समाई
मुड़कर जब देखा उसने
कोयल कि किलकारी गुँजी
एक रोज सपने में मेरे हंसकर आयी
क्या बताये यारो वह मेरे दिल को भाई
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
Nice