रसोई घर में खलबली

आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है
चाय और काफ़ी रहती थी सगी बहनों सी
ग्रीन टी आकर सौतन सी अकड़ रही है
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है

दूध,दही,छाछ की बहा करती थी नदियां
स्मूदी,माॅकटेल रंगीन बोतलों में बंद रंग जमा रही है
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है

मक्खन और घी से महकता था आंगन
चीज़ और म्योनीज चिकनी चुपड़ी बातें कर भरमा रही है
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है

दाल,रोटी सब्जी,चावल,पापड़ अचार से सजती थी थाली
पिज्जा, बर्गर, चाइनीज थाली से छेड़खानी कर रही है
चम्मच और छुरी-कांटे में थोड़ी तनातनी चल रही है
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही हैं।

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Responses

  1. दूध,दही,छाछ की बहा करती थी नदियां
    स्मूदी,माॅकटेल रंगीन बोतलों में बंद रंग जमा रही है
    ______अनु जी आपने वर्तमान खान पान को लेकर बहुत ही सुन्दर तरीके से व्यंग्य प्रस्तुत किया है।बहुत ख़ूब, सुन्दर प्रस्तुति

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