मत काटो मेरी पंख ;मेरे अपनों
मैं बुलंदी के आसमानों में उड़ना जानता हूं।
छोड़ दो मुझे मेरे रास्ते पर ,
मैं ठोकरो से संभलना जानता हूं।
सपनों की पंख
Comments
11 responses to “सपनों की पंख”
-
उत्तम
-

बहुत-बहुत धन्यवाद सर 🙏 ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें 🙏😊
-
-
शानदार
-

बहुत बहुत आभार 🙏
-
-

nice
-

धन्यवाद 🙏 जी
-
-
Very nice
-

बहुत-बहुत आभार व धन्यवाद
-
-

Nice
-

Thank you 🙏
-
-
मेरे पंख।
कवि ने उत्तम
उपमा का प्रयोग किया है
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.