ये पता है कि दुश्वारियां बहुत हैं
मोहब्बत की पथरीली राहों में ।
न जाने फिर भी क्यों बेचैन रहता है
दिल सिमटने को किसी की बाहों में।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज
मोहब्बत
Comments
4 responses to “मोहब्बत”
-

बहुत खूब👌👌👏👏
कम शब्दों में बड़ी बात-

धन्यवाद
-
-

सुन्दर
-
बेहतरीन
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.