5 Comments

  1. व्यभिचार छोड़ भले मानुष बनो, इंसान बनो तुम नेक।
    मनुष्य को सही दिशा की ओर अग्रसर करती हुई आपकी यह रचना
    बहुत खूब एकता जी👏👏

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