सोचता हूँ, क्यों ये बंदूकें है तनी? उन जीवों पर जो दिखते हूबहू हम जैसे, नेताओं के कठपुतले बन, मात्र खून के कतरे है बहे। सोचता हूँ जब माता-पिता के विषय में, आँखों से मन […]