Chandrika maurya's Posts

सोचता हूँ….

सोचता हूँ, क्यों ये बंदूकें है तनी? उन जीवों पर जो दिखते हूबहू हम जैसे, नेताओं के कठपुतले बन, मात्र खून के कतरे है बहे। सोचता हूँ जब माता-पिता के विषय में, आँखों से मन के भाव झलक पड़े। “हमारा आशीर्वाद है, लौट तुम्हे आना है” बस यही शब्द याद रहे। सोचता हूँ जब प्यारी बहन के बारे में, जिसकी डोली मुझे उठानी है, उसकी खुशियों में अपनेपन की मिठास मुझें मिलानी है। सोचता हूँ जब उन प्यारे नन्हें ह... »