मैं तुम्हारी धरोहर मैं पृथ्वी बोलूँ आज अपने दिल की, सुनू,देखूँ मैं भी तुमसा तुम ये जानो, बोला तुम्हरा हर शब्द हर पल मैं सुनती, सुनू वो जिसे सुन खिल उठती मैं भी, दिल न […]

मैं अन्नदाता देख अपनी थाली में खाना रूखा सूखा, हो उदास सोचे किसान फ़िर एक बार, हूँ किसान कहलाता मैं जग में अन्नदाता, रहता साथ अन्न के, मिले मुझे ये मुश्किलों से, मेहनत मेरी रोटी […]

लिये छः ऋतुयें आये नया साल, हर ऋतु गुजरे मेरी संग मां के, त्यौहार मेरे न तुमसे, संग मां के, मेहनत मेरी ,उगले सोना मेरी माँ, समझता मैं खिलखिलाना मां का, सिसकता मैं देख सुखी […]