प्रियतमे तेरे स्वरूप का कैसे वर्णन करूँ अब मैं, सब उपमान सुंदरता के आ गए पूर्व की कविता में। काले बादल से सुन्दर बाल, कमल की पंखुड़ियों से गाल, झील सी आंख, शुक की सी […]

जीवन क्या है? क्या है जीवन! लकड़ी का कोई फट्टा-सा, पेड़ का कोई पत्ता-सा कब टुट जाएं कुछ पता नहीं, मानो कोई गुब्बारा-सा तैरता मटका बेचारा-सा कब फूट जाए पता नहीं।

महान तपस्वियों का देश रहा है हमारा भारत वर्ष, आओ फिर से तपस्या करें। कैसी तपस्या, कुछ दूसरे तरह की, तपस्या। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की तपस्या। भ्रष्टाचार के समूल नाश की तपस्या। जरुरतमंद […]

मन को छोटा न कर दुःख दर्द तो मेहमान हैं, आते हैं जाते हैं ये गम स्थाई नहीं हैं ये मेहमान हैं।। न घबरा दुःखों से ये तेरी परीक्षाएं हैं, ये तो तेरे कार्य की […]

रामलला ******* खत्म हुआ वनवास रामलला का शुरू हुआ निर्माण भव्य मन्दिर का पुत्र भाई तात नृप सखा का स्वरूप निभाते तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो राम कहाते मानवता प्रेम मित्रता सद्भाव का पाठ […]

कोई गरीबी का मारा , कोई बदनसीबी का मारा , कोई वक्त से परेशान हैं , कोई अपनों का मारा । मगर वो बेपरवाह सा, मगन अपने दर्द में, जो है इश्क का मारा।

श्री राम का जहां जन्म हुआ मंदिर वहीं बनाएंगे। दुश्मनों के सीने पर हम ध्वज भगवा फहराएंगे।। बचपन बीता जहां आराध्य का वहीं पूजन उनका कराएंगे। मान रखा जहां पिता वचन का मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा […]

लगाव नहीं जिस देश के युवाओं को राजनीति व अर्थशास्त्र के क्षेत्र में । वो कैसे जानेंगे हम किस व्यवस्था में जी रहे हैं और कैसी स्थिति है हमारी देश की? वो कैसे बदलेंगे कुव्यवस्था […]

हम भारत के वासी है, संस्कृति हमारी पहचान है । सारी जहां में फैली हुई, हमारी मान-सम्मान है । सादगी है हमारी सबसे निराली, अजब न्यारी है संस्कृति हमारी । प्रशंसक है सारी दुनिया हमारी, […]

रोती धरती चिखता अम्बर, सारा जहां है सोता-सा । आज भी धरती रोती अपने पुत्रों के इच्छाओं पे । मारुत भी आज दुषित हो चुका है, मानव के व्यवहारों से । मानव अब मानव बनने […]

रात भर के अंधेरे को जिस तरह सूर्य ने आकर , भगाया एक ही क्षण में, उस तरह आस का सूरज उगाओ आप भी मन में। भगाओ दूर चिंता को नजर रख लक्ष्य पर अपनी […]

अहिल्या पत्थर बनायी जाती है —————******—————— करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है । हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।। युग युगांतर से यही,बस होता आया है अहम तुष्टि हो नर […]

इल्म भी नहीं हुआ तेरे जाने का आज भी कही बसती हो मेरे दिल मे इन बारिस की शामों मे अक्सर याद आती हो हा तेरा घरौंदा छोड़ उड़ गई पर देखो आज भी संभाल […]

मेरा भारत कमजोर नहीं मेरा भारत कमजोर नहीं तू चाइना आँख दिखाना मत, औरों के कंधे पर रखकर हमको बन्दूक दिखाना मत। हम तेरी गीदड़ भभकी का उत्तर देने में सक्षम हैं, जल-थल- नभ में […]

ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना, लेकिन क्या भारतमाता के सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन सृजन से दूर चले जाएँ। नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का सृजन युवा रक्त से हो, इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत सृजन […]

रक्षा का त्योहार है, ये बंधन नहीं है, प्यार है। मूल्य ना आंको भेंट का, यह प्रेम का उपहार है। दुरियां- नजदिकीयां, ये भृम का जंजाल है। भाव बिना हैं तीर्थ क्या, प्रेम हो तो […]

तू ठेस देने वालों से न घबरा तेरे में हुनर बहुत है, तेरी लेखनी की धार में खनक बहुत है। हवाएं तो आती रहेंगी जाती रहेंगी, आँख में रेत का कण डालकर रुलाती रहेंगी, लेकिन […]

कवियों की नगरी में भी दिल दुखाने लगें हैं लोग ना चाहते हुए भी पास आने लगे हैं लोग। आम जिंदगी से परेशान होकर जी लेते हैं हम कल्पना में, वहाँ भी हलचल मचाने लगे […]

लोगों की नज़रों का क्या कहना झटपट रंग जमाते हैं झूँठे-मूँठे रिश्ते खूब बनाते हैं। माँ को कुछ समझते ही नहीं हर गलियारों में शोर मचाते हैं। बहन को माँ कहने लगे हैं लोग लोगों […]

कभी तुम झगड़ती हो, तो कभी रुठ जाती हो। फिर कभी चाय का कप लेकर, मुझे मनाती हो। पल-पल गुजरती जिन्दगी, रेत सी फिसलती जाती है। ओर तुम सारा दिन, मकां को घर बनाती हो। […]

दिल में कुछ ,जबान पर कुछ नजर आता है अपनों में भी ,शत्रु नजर आता है कुछ पलों की मुलाकात से ,पहचान नहीं सकते किसी के ह्रदय में क्या है ,जान नहीं सकते हर चेहरे […]

एक रात की बात बताऊं मित्रों , मेरे घर पर आए चोर । थी मैं अकेली उस दिन घर पर, मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर । “पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना […]

ये कैसी है रीति ये कैसी है नीति? निज राष्ट्र की जनता भूख से हैं मरती । ये अन्न स्वयं उगाती फिर भी ये अन्न को क्यूँ तरसती? ये कर भी देती राष्ट्र को फिर […]

हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी, लोभी, भिखारी, दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है । प्रभु […]

कौन-सी नीतियों पे हमारी देश चल रही है? कौन-से व्यवस्था में हम जी रहे हैं? हर-जगह शोषण-ही-शोषण दिखाई दे रही है? आमजनता का बुरा हाल है इस देश में, और सरकार अपने ही नीति पे […]

तुम जो पूछते हो और सब ठीक ठाक अपनी तकलीफे गिनाऊ तोह क्या सच मे सुनोगे नहीं ना, तोह क्यों पूछते हो

चिख-चिल्लाकर ही देशभक्ति दिखाई जा सकती है क्या? जो मौन है कुछ बोलते नही, क्या वह देशभक्त नहीं है क्या है? जो चीखते है हम भगत है, वह भगत सिंह को जानते है क्या? कवि […]

निज राष्ट्र की दुर्दशा अब कोई क्यूँ कहता नहीं? भारतेन्दु हरिश्चन्द्रजी कह गये भारत दुर्दशा, अब कोई कवि महाराज जी ऐसी कविता क्यूँ लिखते नहीं? अंग्रेजों ने हमारी मान-सम्मान व सारी मर्यादा को मिट्टी में […]

।। दुषित व्यवस्था व वेतन की माँग ।। अब किसी मुद्दे पर प्रेम से बात से होती कहाँ? जो समाधान जनहित के लिए निकले किसी समस्या का । अब तो संसद में सिर्फ बहस ही […]

आइनस्टाईन जी कहते हैः- हम सबसे एक जैसा बात करते हैं, चाहे वह कुड़ा उठाने वाला बालक हो या चाहे वह किसी विश्वाविद्यालय का आचर्य हो कुल लोग जहां में मजदुर को हीन समझते हैं,इन्हें […]

होते हम खूद ही दुःखों का जनक और मिथ्यारोपन लगाते गैरों पर । अपने व्यवहार प्रतिकूल संबंध बनाते, ये नहीं देख पाते हम । इसलिए तो जगह-जगह पे ठोकर खाते-फिरते हैं हम । निज स्वभाव […]

तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया । तुझे भूलाके हमने खूद को याद किया ।। अपनी पहचान भूलाके हमने साथ प्यार का सपना देखा । कमबख्त! तुने मुफलिस समझे मेरा प्रेम-प्रस्ताव अस्वीकार किया […]

मा समान नहीं जग में कोई ।। मा समान नहीं जग में कोई, पिता सम नहीं कोई महान । भाई जैसा न कोई साथी है, बहन जैसा न किसी का प्यार । आध अंग की […]

तुम कर लो लाख कोशिशे हिन्द को बर्बाद करने की । चाहे कोई भी भयंकर कुटनीति अपनाओ तुम । हो सके तो तुम अपनी सारी शक्ति लगा दो । मगर हो नहीं सकता सदा असत्य […]

गजल ।। क्या लिखूँ जो दुनिया को भाये । मैं नहीं तो क्या कोई तो भाये जहां को ।।1।। जहां को अगर लगते है शख्स वो प्यारे । तो मैं क्यूँ महफिल में सरेआम बदनाम […]

अंधियारा उजियारा का क्या संबंध है ? जैसे जिन्दगी में कभी दुःखों का पहाड़ है । तो कभी पवित्र आँगन में बहार है । जैसे सावन में मेघ के जल धरा के लिए अमृतसमान है […]