अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।
अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।
चार राखी लाना पापा अबकी रक्षाबन्धन में। बड़े प्यार से बांधूगी मैं वीरों के अभिनन्दन में।। पहली राखी बांधूगी मैं भारत के वीर शहीदों को। दूसरी राखी बांधूगी मैं शरहद के वीर सपूतों को।। तीसरी […]
ज़िंदगी की तपिश बहुत हमने सही, ये तपन अब खलने लगी। रौशनी की सदा आस ही रही, रौशनी की कमी अब खलने लगी। बहुत चोटें लगीं, बहुत घाव सहे सहते ही रहे कभी कुछ ना […]
मित्र दिल के सैनिकों की जब खड़ी होंगी कतारें उन कतारों में विभूषित आप सेनापति रहें।
आया राखी का पावन त्योहार भैया। तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई। मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।। आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया। आजा, तुझको पुकारे […]
वो वक़्त जब कॉलेज में थे, तुम मिलने आया करते थे। कहते थे बस दोस्त रहेंगे, कॉफी साथ पिया करते थे। कहते थे तुम प्यार मत करना बातें रातभर किया करते थे। दोस्तों को अक्सर […]
जिंदगी में मुकाम और भी हैं मंज़िल एक है पर रास्ते और भी हैं। कितनी छोटी है जीवन की चादर पैर पसारने के आसमान और भी हैं। यूंँ नहीं बढ़ते हैं यहाँ फासले दुश्मनी के […]
जीवन का सफ़र सुहाना है साथी, गर साथ तुम्हारा है। जीवन की इस बगिया में, मैं तेरा सहारा हूं, तू मेरा सहारा है। बच्चों की ज़िम्मेदारी करनी है पूरी, अब ये काम हमारा है। जीवन […]
जिन्दगी में मुश्किलें हैं, और भी तो अड़चनें हैं, आपसे हम दूर रहकर क्या हमेशा खुश रहे हैं।
सख्ती से नहीं नरमी से पेश आएंगे किसी के प्यार में हम यह भी कर जाएंगे। यूं तो बुरे नहीं हैं हम साहब पर किसी के मार्गदर्शन में हम और सुधर जाएंगे।
तू दोस्ती करेगा पर एक शर्त मेरी, जब भी मैं हार बैठूँ तू साथ ही रहेगा। आ दोस्त आ गले मिल तेरे बिना मैं सूना, तेरा है दर्द मेरा चिंता न कर मैं हूँ ना।
दुत्कार में सत्कार देती बेटियाँ दूसरों के हित मे जीतीं बेटियाँ, बेटियाँ में ही रमा संसार है बेटियों से ही बना संसार है।
मेरे गम!मुझे तू, इतना रुसवा ना कर , मैं बारिश के इंतजार में हूं, फिर उसमें नहाकर ,सब आंसू बहाकर, तुझे हल्का-सा कर दूंगा।
विदेशी वस्तुओं का क्यू ना बहिष्कार करें आज से ही एक नया युग का सूत्रपात करें ।। विदेशी वस्तुओं का,सिलसिलेवार ढंग से, सरकार तहकीकात करे चिन्हित वैसी विदेशी वस्तुओं से जनता का साक्षात्कार करें फिर […]
#shayri 2liner इतनी दीवानी नहीं हूँ तेरी जो तेरे प्यार में अपनी नब्ज काट लूंगी, ज्यादा तड़पाया जो तुमने इस रक्षाबंधन तुझको राखी बाँध दूंगी।
अभी-अभी धारा से उठे हैं , चलना भी सीख जाएंगे, कभी उठेंगे तो कभी गिरेंगे, कभी बिना गिरे भी संभल जाएंगे।
#shayri 2liner 🤣 आँखों में पानी लेकर मुझे मत भरमाया करो। मैं तुम्हारी सारी हकीकत जानती हूँ यूं बातें ना बनाया करो।
❤❤ मेरा रक्षाबंधन ❤❤ ——————- दो भाईयों के बीच का झगड़ा जब तक ना सुलझाती बहन बोलो आता कैसे चैन? ———————– सावन है मनभावन है अम्बर से बरसे नैन बोलो आता कैसे चैन? -‐——————– एक […]
मेरा सब कुछ ले ले तू बस अपना स्नेह मुझे दे दे दो बात प्रेम के बोल मुझे मैं इसी बात का भूखा हूँ, तेरे सुन्दर बोलों पर मैं अपनी राह बदल लूंगा, सारी बातों […]
चल मेरे प्यारे साथी अब असली कविता करते हैं। दुःख-दर्द दूर हो मानव का ऐसी कवितायें करते हैं।
कहते हैं नारी पानी-सी होती है जिस रिश्ते में बंधती है उसी की हो जाती है। पर प्रज्ञा की यही वेदना है क्या नारी का कोई अस्तित्व नहीं? वह पानी-सी है। उसका कोई स्वरूप नहीं? […]
बरसात आ रही है फिर धूप आ रही है फिर बरसात फिर धूप, बारी – बारी से आ रही है, दोनों से ही तत्व हासिल कर धरती हरियाली उगा पा रही है।
राखी का त्योहार है आया भाई बहन का प्यार समाया रोली, चंदन,मीठा, अक्षत रक्षाकवच के साथ सजाया सूनी कलाई पर बहन ने अपना स्नेह भरा एक धागा बाँधा भाई ने अपनी बहना को सारा आशीषों […]
कौन बुरा; कौन अच्छा, जान पाना; बड़ा ही मुश्किल है। कौन झूठा; कौन सच्चा, हृदय में उतरना मुश्किल है। कौन बैहरूपिया, कौन लंगोटिया, किस में छिपा है ,असीम स्वार्थ, ये भी परखना मुश्किल है। कौन […]
खूब प्यार बरसाते बादल से सीखो तुम तुम भी मनुहार खाली-मूली बोल रहे हो करते कब हो मुझसे प्यार।
वाह, झमाझम बारिश देखो सुन्दर सावन बरस रहा, तन भीगा मन भीगा मेरा तेरा मन क्यों तरस रहा, आ जा पास प्रियतम मेरे, एक नई शुरूआत करें, आज मिटा लें अपनी दूरी एक नई शुरूआत […]
अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त चंद पैसों में तोले जाओगे जैसे ही आगे बढ़ोगे तमाम तरह की गालियां खाओगे।
कैसे और किससे करें हम जिक्र ए गम, लफ़्ज दबे बैठे हैं, उनको भी है ये भ्रम।। सुनने को कोई उनको शायद ही यहां रुकेगा, कोई तो सुनके उनको फिर से अनसुना करेगा।। लफ्ज़ आ […]
कभी इस तरफ देख लिया करो हम कभी तुम्हारे सरमाए थे हर ग्येर से बात करते हो हम तोह तुम्हारे अपने थे
ये कातिलों का शहर है, जनाब! यहां किसी को गन से मार दिया; तो किसी को छुरे से , मार दिया। मगर मेरा क़ातिल बड़ा ही शातिर है कम्बख़त ने इश्क से मार दिया।
मैं शिक्षक हूँ संसार में ज्ञान फैलाता हूँ अपनी कलम की धार को अपने साहित्य की तलवार बनाता हूँ। तुम जी लो तुम्हारे लिए यह नया मन्ज़र है मैं तो हर मन्ज़र के उस पार […]
तुम्हारी छोटी सोंच मुझे हैरान करती है सदियों से मेरा अंदाज़ निराला है। बस तुम जैसों के ही पेट में दर्द होती है। चंद सिक्कों और ताज़ की जरूरत नहीं मुझको शोहरत तो अभिषेक के […]
मैं सिर्फ अपने हुनर की पैमाइश करता हूँ नुमाइश नहीं करता। सभी के साथ मोहब्बत से पेश आता हूँ पक्षपात नहीं करता।
घमंड इंसान को गिरा देता है, अहंकार मौलिकता को चुरा लेता है, जो समझता है मैं ही इस जंगल का शेर हूँ उस शेर को सवा शेर हरा देता है। शेरों का सा संघर्ष इंसान […]
किसी को मत गिराया करो लंगड़ी देकर, किसी को मत रोका करो टंगड़ी दे कर। दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं, कमजोर को मत डराया करो धमकी देकर।
तूम सागर हो तो , हम लहर है तुम्हारी। तुम वजा हो; उसकी , जो लगी है हमें बीमारी। शायद ही कोई लम्हा हो, जब आए ना याद तुम्हारी। अब ख़ुदा ही जाने , क्या […]
हंसता चहरा रो दिया, आचंल पूरा भीगो दिया, आज पहली बार। बन्जर है अब दिल की जमीं, शायद कुछ थी हम में ही कमी, मायूस दिल है रो दिया, लगता कुछ है खो दिया, आज […]
मंजिल तक पहुँचने में कठिनाइयां न आएं तो मजा नहीं आता, कोई बेवजह दर्द दे तो सहा नहीं जाता।
करते रहो संघर्ष तुम संघर्ष से ही पा सकोगे, बस संघर्ष झगडे सा नहीं बल्कि मेहनत से आगे बढ़ने का हो, कुछ अच्छा करने का हो।
थोड़ी मोहलत मांगता हु रब बस एक बार उनका दीदार हो जाए फासले जो फैसलों की वजह से थे बस उस पर सुलह हो जाए यूँ रूठना भी कुछ होता है क्या एक बार मुरना […]
मेरे भारत की शान निराली, सुंदरता के क्या कहने देखो कश्मीर, हिमालय के ऊँचे – ऊँचे निर्मल पर्वत, सुंदरता से हैं भरे हुए भारत माँ के हैं गहने । कश्मीर स्वर्ग धरती का है, औ […]
झूठ की दुकान खूब चली, “सच”, सच बोलता रहा उसकी ना चलनी थी, ना चली, पर ये ज्यादा लंबा चलने वाला ना था काठ की हांडी में एक बार तो पका लिया, फिर दोबारा चढ़ी, […]
ओ !! प्रियतम मेरे तू ही बता, मेरा मन इतना विचलित क्यों ? मैं सच के पथ से विचलित क्यों ? जो दर्द उठाता कल तक आवाज उठाता था कल तक वह दर्द उठाना छोड़ा […]
3: इन्सानियत कहाँ जिनसे जीवन के गुल खिले, मरते ही शूल हो गये जिन्दगी जीने की चाह में क्यूँ, मशगूल हो गये ।। यह ऐसी महामारी है जिसने इन्सानियत में सेंध लगाई है अमानवीय बन […]
आज हम कहाँ और कहाँ है हमारी संवेदना भूल गयें अपनों को,कहाँ कैसी है वेदना ।। भूल बैठे उन भावनाओं को जब किसी मृत के शव पर लिपटकर रोया करते थे देते अंतिम विदाई, सुध […]
मत समझना कि नादान कवि हूँ बहकी बहकी सी कविता कहूंगा जिस तरफ बह रही हो हवा धूल सा उस दिशा को बहूँगा। राज दरबार का कवि नहीं हूँ आम जनता बातें कहूंगा सो न […]
लम्बे- लम्बे हो गए दिन , रात समुन्दर जैसी हैं , तेरे बिन; इश्क के मंजर में, हालत बंजर जैसी हैं । किया है तूमने जादू हम पर, तेरी आंखों में मदहोशी है, कैसे ना […]
बहन बुला लो घर में रक्षाबंधन आया है, पुआ बना लो घर में रक्षाबंधन आया है। रंग-बिरंगे रेशम धागे सजी कलाई भाई की मुंह मीठा करवालो रक्षाबंधन आया है।
जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो […]
जिसको बोल कर, मन हो जाए प्रसन्न , ऐसी मेरी यह भाषा है । भाव को मेरे बना दे दर्पण , करती है शब्दों का समर्पण , ऐसी मेरी यह भाषा है। जैसा चाहूं वो […]
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