हमको गैरों से भी मोहब्बत है, अकेला तुमसे होता,तो मर जाते। घर से दूर हैं घर के वास्ते, वरना हम भी सोचते हैं ,काश घर जाते। हम खड़े हैं हमने माज़ी से सबक लिया, वक़्त […]

सूना जाए राखी का त्यौहार, राखी भेजी है, डाक से इस बार ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें, ना मिले मां पापा का प्यार। ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं, ना कर […]

रोज मिलने के वादे तोड़ते हो जो तुम बात तेरी ये मुझको गवारा नहीं। बात ही बात पे रूठते हो जो तुम जानते हो तेरे बिन गुजारा नहीं। रोज अपनी गली देखते हो मुझे आशिक […]

टूटते क्यों नहीं सत्ता के पाषाण ह्रदय तटबंध उन आँसुओं के सैलाब से जो बहते है गुमसुम बच्चों की खाली थाली देखकर जब चीख उठते हैं पैरों के बड़े बड़े लहूलुहान चीरे फटे कंधे साहस […]

पार्थ! तुम भटक रहे हो क्या? उस धर्म के मार्ग से जिस मार्ग का अनुसरण करने का पाठ आप पढ़ाते रहे हैं वनवास के समय अपने प्रवचनों में … वो रण वांकुरे, जिन्होंने तुम्हारा वनवास […]

कौन कहता है कि मेरे सगे भाई नहीं हैं इसलिए राखी पर रोऊँगी। वे लाखों वीर सिपाही मेरे ही तो भाई हैं जो भारत मां की रक्षा को निडर खड़े हैं सीमा पर, उनको मैं […]

मैंने राखी भेजी है राखी पर अपने भैया को भैया इस बार पहन लेना पिछली बार की तरह इसे साइड पर को मत रख देना थोड़ी सी देर पहन लेना।

केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]

तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं। —————————————- दिल बहुत बार दुखाया तूने पर तुझे देख कर यही एहसास होता है कि सदियों से तुझे जानता […]

दूरियां कितनी भी हों मिटाता चला जाऊंगा तेरे दिल में कितनी भी कड़वाहट हो मैं अपने व्यवहार से तेरे दिल में जगह बनाऊंगा तू कितनी भी कोशिश कर ले तुझे भी हो जाएगा मेरी वफाओं […]

आज पुष्प सुगंध फैला जा कल मंदिर में चढ़ना है अरे तुझे इस बाग़ में अपनी छाप छोड़कर जाना है, ताकि विदाई के मौके पर अन्तस् से निकले आंसू रोक न पाए खोटी कविता धरा […]

सिसकते जज्बात हँसने लगे तुम्हें देखकर न जाने ऐसा क्या था तुममें! जो मेरी बिखरी जिंदगी को तुमने दो पल में ही समेट लिया। और ऐसा समेटा कि मैं कभी फिर बिखर ना सका। टूटा […]

जहां गंगा पवित्र है , वही पवित्र तो नाला भी होता था कभी, अगर गंगा पाप धोती है ! तो नाला पापों को समेटता है अपने में। पर नाले को कौन पूजेगा, पर कभी नाला […]

अपना शीश चढ़ा देते हैं जो भारत के कदमों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें सलाम करते हैं हम. सरहद पर सीना ताने बन्दूक लिए हैं कन्धों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें […]

जाओ न इस तरह से बरसात की ऋतु है, रूठो न इस तरह से बरसात की ऋतु है। छोटी सी जिंदगी है दूरी में मत बिताओ, तन्हा रहो न ऐसे बरसात की ऋतु है। बाहर […]

क्या कहने उस दिन के जब गुरूजी हुआ करते थे। घर में हो या पाठशाला में तन-मन से बच्चे पढ़ते थे।। एक आदर था सबके दिल में ग्रंथ गुरू और ज्ञान प्रति। होकर उत्तीर्ण कक्षा […]

1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]

आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य […]

माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर […]

तुम तो हो फ़ाजिल मनुज हम कहे जाते पिशुन हैं गिरे निर्वास गुल, क्यों उठाकर सूँघते हो। वह प्रभा जिससे तुम्हें अनुरक्ति हमसे हो गई, असलियत वो है नहीं केवल दिखावा है हमारा, वास्तविकता में […]

तुमसे ही लिखना सीखा है तुमसे से ही कहना सीखा है, जो बात उगी भीतर के मन में उसको ही कहना सीखा है। सच्चाई तो सच्चाई है सच पर ही चलना सीखा है, झूठ से […]

“मित्र” वो मेरा सगा नहीं है , मगर भाई से बढ़कर है। कोमिडन नहीं है, मगर हंसाता है; कार्टून से बढ़कर है। थोड़ा जिदी है, मगर इतराता नहीं है‌। बेपरवाह है खुद के लिए, पर […]

मैं भी साधारण मानव हूँ, तुम भी साधारण मानव हो कमियां तुम में भी मुझ में भी आंसू तुम में भी मुझ में भी। गलती तुम से भी हो जाती है गलती मुझ से भी […]

ना गम है ना दर्द है जो बिताया दोस्तों के साथ वो ही सुनहरा वक्त है ना है कोई खून का रिश्ता फिर भी निभाते ये दिलवाले है एक दूसरे में खुश रहते ये मस्त […]

वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में जो माँ की महिमा का बखान करे। शारदे की लेखनी भी माँ बनके मातृशक्ति का भरसक गान करे।। माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है माँ हीं तो है पालनकारी। […]

विदा देने में रोता तो कैसे उनके जाने में रोता तो कैसे यात्रा का सफर का है जीवन इन पड़ावों में रोता तो कैसे। वो चले छोड़ जीवन की धारा थम गई उनकी धड़कन सदा […]

माँ!!! तूने जो संस्कार मुझमें कूट कूट कर भरे उसने ही ईंट-गारा बनकर मुझे बनाया मनुष्य रूप। तेरी दी हुई शिक्षा ने हर जंग में मेरा साथ दिया, कर्म पथ की ओर समर्पित रहा भटकाव […]

जीवन की गाडी चले निरंतर पहियों की पकड़ सड़क से हो। कोई फिसले नहीं कहीं पर , पहचान सुपथ पर पकड़ से हो। ह्रदय हो तो हो प्रेम भरा जिसकी पहचान धड़क से हो। आवाज […]

आओ कवितायें करते हैं मीठी-मीठी, प्यारी प्यारी श्रृंगार भरी, मनुहार भरी दिल में उगते नव प्यार भरी आओ कवितायें करते हैं, रूठी – रूठी, टूटी- फूटी, योग भरी , वियोग भरी, चाहत में भी, दुत्कार […]

छोटे से भानिज को अपने साथ ले आया था अपने शहर मैं, क्योंकि उसके पापा गंभीर रोग से पीड़ित होकर चल बसे थे संसार से, उस दुर्गम पर्वतीय गाँव में तीसरी- चौथी कक्षा में प्राइमरी […]

रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे […]