कलम चलाए बगैर चैन कहां! आंखों के समंदर को स्याही में घोलकर उड़ेले बिना चैन कहां! दफन जज्बातों को उधेड़े बिना चैन कहां! आतिश ए इश्क को सुलगाए बिना चैन कहां! तुम मेरे हो दिल […]
कलम चलाए बगैर चैन कहां! आंखों के समंदर को स्याही में घोलकर उड़ेले बिना चैन कहां! दफन जज्बातों को उधेड़े बिना चैन कहां! आतिश ए इश्क को सुलगाए बिना चैन कहां! तुम मेरे हो दिल […]
ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ […]
मेरे देश के किसान, तू अब जाग, कर हिम्मत, ना तू अब ऐसे मर, तेरी मेहनत एक दिन रंग लाएगी, तू अब ऐसे ना डर, कर दो देश को अब तू खबर, जी रहे हैं […]
कल भी वही दौर था, आज भी वही दौर है । पन्ने पलट लो, इतिहास गवाह बतौर है । तख्तो-ताज लूट गये । राजे-महराजे मिट गये । इस सियासती जंग में, अपने अपनों से छुट […]
मैंने ज्यादा किताब पढ़ा नही पर मुश्किल ए ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया
धड़ाधड़ अंधाधुन हो रहा पेड़ों की कटाई, मूक बाधिर बने रहे तनिक लाज नहीं आई, सूलग रहा आरे आज राजनीति के करतुतो से, पर्यावरण प्रेमी को दबोच रहें हैं आरे कालोनी से, महेश गुप्ता जौनपुरी
तेरा तिरछी नजर से देखते रहना मुझको बेपनाह प्यार की बक्शीश सा लगता है फिर एक ख्वाब आंखों में ठहर जाता है दिल में एक शर र सी सुलगती है मेहताब फिर आज जमी पे […]
तेरा तिरछी नजर से देखते रहना मुझको बेपनाह प्यार की बक्शीश सा लगता है फिर एक ख्वाब आंखों में ठहर जाता है दिल में एक शर र सी सुलगती है मेहताब फिर आज जमी पे […]
जालिम हमें हमारी दिल की गुमान दे दो। रखो जमीन अपनी कुछ आसमान दे दो।। जज़्बात की ये कैंची मेरे पंख पे चलाके। पंगु बना न देना जालिम करीब आके।। मत छीन जिन्दगानी ना मौत […]
प्रेम ने दिया है किसी को गम, तो दी है किसी को खुशियां, कोई तन्हाई में जलता है तो, किसी को मिलता है सनम का साथ, क्यों नहीं मिलता सभी को प्रेम की बरसात, हुए […]
तुझ में सब कुछ पाया मैंने, तू ही तो मेरा सवेरा, ओ मेरे मनमीत कहां हो तुम तुझे ढूंढे यह दिल मेरा, आने से होती है तेरे शम्मा ये गुलजार ये रौशन बहारा, तेरे ही […]
शब्द-शब्द पिरोकर, कविता की माला बनाऊं तुम्हारे लिए। माला के हर मनके में, मन के मनोभाव सजाऊं तुम्हारे लिए। लहराते उजले दामन में, प्रेम का रंग चढ़ाऊं तुम्हारे लिए। थरथराते गुलाबी अधरों पे, प्रेम का […]
बुद्धू सा मन चंचल सा यह तन बहका बहका सा लगे सांसो का भी चलन। १. दर्पण बनी तेरी आंखें मेरे सनम सरगोशियां तेरी सीने में दे जलन। बतियां तेरी मुझे बहका ना दे सनम, […]
बाहर कितनी खामोशी है अंतर्मन द्वंद सा मचा कहां? चेहरा हंसता सा दिखता है आंखों में नमी, दुख छुपा कहां? जीव्हा कुछ ना कुछ बोल रही शब्दों में फिर वो रवानी कहां? तुम भी जी […]
नन्हा सा बेटा बोला, लिपट कर मेरे पैर। आज ले चलोगे पापा, संग अपने सैर। कब जाते हो, कब आते हो, पता ही नहीं चलता, लगाते हो बड़ी देर। ना चलेगा कोई बहाना, थक गया […]
बचपन जिस आंगन में बीता, वह बस एक पड़ाव था मंजिल का। उन रास्तों से आगे बढ़कर, मंजिल तक जाना बाकी था। जिस घर में उस ने जन्म लिया क्या पता था!! यह घर उसका […]
पहले तुझसे बात करने से पैर कॉप ते थे लैब थर थरा उठते थे पर कभी तुझे बोल ना सका दिन तेरे दिदार की चाहत में होती थी हर किसी से मुस्कुराहट से बात होती […]
महफ़िल में मेरे बहुत है पर तेरे जैसा कोई नही मुफलिस सी ज़िन्दगी में एक तेरा ही सहारा था खुदा ने उसे ही छीन लिया ज़िन्दगी के कुछ पल जो खुशी के थे उसी में […]
तुम्हारे सुर्ख लबो में वो कशिश है, जो किसी शराब में नहीं। तुम्हारे तन कि वो मदहोश खुशबू है, जो किसी गुलाब में नहीं। तुम्हारे आगोश में वो जादू है, जो किसी भी शबाब में […]
हिन्दी गजल- बंजर भूमि की रोटी | बहारों के मौसम गुल खिल जाये दिखाना मुझे | बागो फूल भवरा गर मिल जाये दिखाना मुझे | जहर भर दिया फिज़ाओ मिल हमने और तुमने | मिट्टी […]
हिन्दी कविता- राम लीला जलाना बुराई जलाओ पुतला रावण जलाने से क्या फायदा | मन रावण को मारो नकली रावण जलाने से क्या फायदा | रहे सलामत सम्मान साहित हर घर की बहू बेटियाँ देश […]
••• किये जिस पे भी तुमने तंज़ वो सब तुम्हारे हैं। रंज जिस से भी करोगे वो सब तुम्हारे हैं।। रूबरू लौट कर आयेंगे वो जानिब को तेरी। अज़ल से बहते हुए दरिया के सभी […]
‘समय जगा रहा है’ कठिनाइयां बहुत हैं,चेतावनी विविध हैं, संघर्ष पथ कठिन हैं, जो एकता विहीन हैं। जागों भारतीयों जागों, समय जगा रहा हैं, वो अकेला ही क्यों दुष्कृत्य भगा रहा हैं ? माँगता सहयोग […]
इश्के-फ़साना हमारा, मशहूर जमाने में। हमारी मोहब्बत पाक है, सही माने में। सीने में दिल तेरे नाम से ही धड़कता है, दिलो-जाँ कुर्बान, क्या रखा नज़राने में। बे-इंतिहा इश्क की इंतिहा गर गुलामी है, मुझे […]
भारत का एक शेर वो वीर शिवाजी था। मुगलों के खिलाफ टेढ़ी लकीर शिवाजी था । जो चला ज्वाल की वेग से वह तीर शिवाजी था । जिससे हिलते थे सिंघआषन मुगलों के वह समीर […]
जहां स्वयं भूतनाथ विराजे,महांकाल के वेश में, कण-कण में सुंदरता झलके मेरे मध्यप्रदेश में, जीवनदायिनी रेवा बहती,विंध्याचल विराट है; रत्न अमोल भरे अपार है, यह खनिज सम्राट है। भीमबेटका खजुराहो से,संस्कृति की पहचान है; मोक्षदायिनी […]
सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं नि:संदेह मेरा दहन किया जाए। परंतु केवल वो ही समक्ष आए। जिसमें न हो रत्ती भर अहंकार। जिसने न किया हो व्यभिचार। जिसने किया पतितों का उद्धार। जिसने किया पर-दुखों […]
जीवन हर पल एक खेल होता है। यहाँ सभी के कर्मों का मेल होता है। जिंदगी के खेल बड़े निराले होते हैं। किश्मत का हर सिक्का हेड, टेल होता है। इस खेल में तो कोई […]
इश्क का बुखार बड़ा ही लज्जतदार। आत्मा पर हो जाता एक जुनून सा सवार। कर देता अच्छे खासे इंसान को बेकार। हंसता खेलता इंसान लगने लगता बीमार मीठा जहर यह बड़ा ही असरदार। पीना हर […]
तजुर्बों का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
तजुर्बा का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल
रावण का पुतला जला जला अम्बर को काला कर डला। अहंकार का पुतला जला न पाया खुद को रावण कर डाला।। सत्य धर्म के ख़ातिर वन-वन भटके नारायण। जिनकी दिनचर्या कथा रुप में लिखा गया […]
एक चाहत भरी नजर दिल में रोशनी सी भर गई तुम्हें याद करना इंतहा इबादत बन गई हर अक्स में तुम्हे खोजना जुनून बन गया चेहरा तुम्हारा मेरे लिए आईना बन गया तुम्हें दूर जाते […]
रहस्यवाद का जामा पहने स्त्री! एक अनसुलझा रहस्य! उलझे हुए धागों की एक गुत्थी। शायद! पुरुष के लिए एक मकड़जाल। पर हर स्त्री अपने आप में हैं बेमिसाल। कभी वह खुली किताब बन जाती , […]
काश ! मुझे सहारा तेरा मिल गया होता, तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता, मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है, यह तन्हाई काटे नहीं कटती है, बिखर के रह गया है […]
काश!मुझे सहारा तेरा मिल गया होता, तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता, मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है, यह तन्हाई काटे नहीं कटती है, बिखर के रह गया है तेरे बिन […]
क्यों है ये जात-पात की ऊंची दीवार। धर्म के नाम पर हर कोई लड़ने को तैयार। सब एक ही तो है, ये हवा जिसमें हम सांस लेते हैं। ये पानी जो हम सभी पीते हैं। […]
निज आंगन में बैठा- बैठा देख रहा था चन्द्र वदन को। धवल सुशीतल चन्द्रकिरण ने नहलाया बसुधा के तन को।। सुधा सुधाकर बरसाए पर निज मस्तक न धो पाए। दाग चढ़ा कैसा माथे पर अंखिया […]
गुलशन तेरी बात हीं कुछ और है। तेरी महक से महके सब क्या सज्जन क्या चोर है।।
हर शख्स से हर अक्स से विनती मेरी हर सांस से हर जात से हर पात से हर शहर ग्राम और प्रांत से। धरती हमारी मां है यह भारत हमारा है वतन। सोचो मगर क्यों […]
नदियां हैं जीवनदायिनी, उज्जवल है मोक्ष प्रदायिनी। कचरा ना इन में डालो तुम, बर्बादियों ना पालो तुम। शीशे सी साफ हो जब झांको तुम । सुंदर धरा यह हरी भरी लगती है तुमको भी भली। […]
एक दिन मैंने पुत्र से कहा, बेटा, तू मेरा हमसूरत है, तू ही मेरी ज़रूरत है। छोड़ अकेले मुझे जाना नहीं, खून के आंसू मुझे रुलाना नहीं। तुम से ही ज़िंदगी ख़ूबसूरत है। तू ही […]
आसुओं के पानी से जितना धुलता जाता हूँ मैं, लोग जितना रुलाते हैं उतना खुलता जाता हूँ मैं, देखने में सबको बेशक बड़ा नज़र आता हूँ मैं, सच ये के हर पल बचपन में मुड़ता […]
रोज सुबह बच्चों को उठाती, कभी-कभी पानी छिड़काती। एक-एक करके काम निबटाती, बीच-बीच में लेती जाती , हम सब के झगड़ों में रस। बीच में कहती हो गया बस, पढ़ो लिखो ना लडों भिडो। पड़ […]
वो जिंदगी बेमानी, जिसमें कोई रवानी ना हो। किस काम की जवानी, जिसकी कहानी ना हो। मैंने भी मोहब्बत किया है, हाँ बेहद किया है, किसी से दिल्लगी नहीं की, जो निभानी ना हो। हमारा […]
लोग बन कर फिरते है बेहरुपीये ताकि तुमको छल सकें कुछ रास्ते बिन काँटों के भी छोड़ दो जिनपर अनजान राही चल सकें
घर एक सपना, होता है, हर एक का सपना, तिनका तिनका जोड़ कर, बनाया तू आशियाना, बुढ़ापे का सहारा होता है घर अपना, आती है सच्ची खुशियां जब घर हो कोई अपना, जो भी हो, […]
मतभेदों की महफ़िल में मनभेदों का खुलासा हो गया, अच्छाखासा मुस्कुराता हुआ मेरा दिल रुहासा हो गया।। राही अंजाना
चाहा सिर्फ तुझको मैंने साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं जी लिया प्यार का हर लम्हा चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं वो जा चुकी है जिंदगी से भूलूंगा ये सचाई नहीं […]
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