धुंध का गुबार सी आधी नींद की खुमारी सी इत्र और शराब सी खिल उठे गुलाब सी बादलों में बिजली सी चंदन की महक सी चांदनी रात सी काली घटाएं जुल्फों सी मल्लिका ए हुस्न […]
धुंध का गुबार सी आधी नींद की खुमारी सी इत्र और शराब सी खिल उठे गुलाब सी बादलों में बिजली सी चंदन की महक सी चांदनी रात सी काली घटाएं जुल्फों सी मल्लिका ए हुस्न […]
स्मृतियां, विस्मृतियां आती नहीं जाती रही। हृदय में कोलाहल मचाती रही। अश्रु मिश्रित सी रातों में, दुख सुख की बदली छाती रही। झंकृत ,अलंकृत सी सांसों को, मधुर बयार महकाती रही। एक अल्हड़ बाला हृदय […]
ये विलासिता, वैभवता व भौतिकता की पराकाष्ठा। ये क्षणिक सुविधाएं प्राप्त होती, करने से थोड़ी चेष्टा। परंतु छू सकते हैं, गगन की ऊंचाई मात्र ही नहीं, सुदूर क्षितिज भी, गर मन में हो दृढ़ आत्मनिष्ठा। […]
हिमालय ताज सर पर सजा डटकर खड़ा अम्बर में सटा स्थिरता जिसकी पहचान है ऐसा ही हर भारतीय का रुझान है क्योंकि इस देश का कण-कण-सवर्ण महान है नम्र ह्रदय उच्च विचार मानते हम अतिथि […]
सृजन प्रकृति का मनमोहक है बड़ा, इंद्रधनुषी रंगों से सजा ये दृश्य प्रकृति का, मनमोहक है बड़ा, ये नदियां अल्लड बाला सी, अठखेलियां करती हुई, ये ऊंचे ऊंचे पहाड़ उसे प्यार से निहारते हुए, ये […]
गुलाब सी हो जिंदगी तुम्हारी, जो काँटों के बीच भी हँसीन हो। हर कदम हो तुम्हारा फ़तह का, हर पल जिंदगी बेहतरीन हो। देवेश साखरे ‘देव’
मैं अंधभक्त बना रहा चीख पुकार को सुनता रहा एकता का गुणगान करता रहा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाई भाई करता रहा खून के छींटों पर आंख मूंद चलता रहा मैं अंधभक्त बना रहा मैं […]
वो इश्क के चक्कर में लाइलाज बैठे थे करके इंग्लिश में पी एच डी बर्बाद बैठे थे चौराहे के राहों में पलकें बिछा कर बैठे थे प्यार के चक्कर में उनके इंतजार में बैठे थे […]
वसंती आयी वसंती आयी देखो देखो वसंती आयी साथ में हरियाली लायी फूलों की महक लायी भौरो को संग लेकर आयी ओंस की बूदो को लायी घर ऑगन को महकायी वसंत आयी वसंती आयी देखो […]
त्रिविध ताप कर शमित हमारे भोले शंकर। राह कठिन, मंजिल भी धूमिल, पैरों में छाले, उजड़ा दिल। आज हमें दर्शन दे देखूँ तुझको जी भर। त्रिविध ताप कर शमित हमारे भोले शंकर। फैल रहा प्रतिपल […]
बिस्तर की सलवटें, शबे-हाल बयां करती है। भीगा सिरहाना, हिज़्रे-मलाल बयां करती है। बेशक लाख छुपाओ, ग़मे-जुदाई का दर्द लेकिन, बेरंग सा चेहरा, बेनूर हुस्नो-जमाल बयां करती है। मुस्कुराहट के पीछे, गम छुपाने का हुनर […]
उसका मेरे दिल में आना आसां लगता है, उसका मेरे दिल से जाना झांसा लगता है, ………… राही अंजाना
तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो इत्र बन कर मेहकती रहूंगी तुम्हारे बदन की खुशबू के साथ तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो रुमाल बन कर, तुम्हारे […]
बेक़रारी का आलम है, दीवाने की मानिंद। ना सहरे-सकूँ मिलता, ना आती शबे-नींद। तेरी आँखों से पिया करते थे जामे-शराब, तेरी जुदाई में अब कहीं, हो ना जाऊँ रिंद। देवेश साखरे ‘देव’ रिंद- शराबी
मेंहमाँ हैं तेरे दर पे इस कदर सारी अर्ज़ियाँ मेरी इक तेरी इज़ाज़त पे कबूल होती हैं मर्ज़ियाँ मेरी।। राही अंजाना
ज़ुल्फ तुम्हारा, जैसे काली घटा हो। चाँद के रुख़्सार से, इसे तुम हटा दो। बिखरने दो चाँदनी हुस्नो-जमाल की, इसपे जैसे कोई चकोर मर मिटा हो। पहलू में बैठो, लौटा दो मुझे दिले-सुकूँ, मेरी नींद, […]
के तेरे दर पे मैं खुल कर के सब कुछ अर्ज़ करता हूँ, तुझको पाने की खातिर मैं खुद को यूँ खर्च करता हूँ, गर तू समझे मेरी खामोशी तो मुझे अच्छा लगता है, जो […]
दिल और दिमाग के बीच सन्तुलन बैठाना मुश्किल था, पहली बार देखा था उसे अमलन छुपाना मुश्किल था, अकेले ही काटी थी यूँही राहों पर उम्र भर जो जिंदगी, मिला जो उनसे तो ठहरी अंजुमन […]
डांटती भी,दुलराती भी। झीकती भी, मुस्काती भी। दिन भर ताना -बाना बुनती, काम में दिनभर उलझी रहती। कढ़ाई में जब छुन -छुन करती गीत कोई तब गुन-गुन करती। शब्दों के तीर छोडा करती, तीखे नयनों […]
कलम चलाए बगैर चैन कहां! आंखों के समंदर को स्याही में घोलकर उड़ेले बिना चैन कहां! दफन जज्बातों को उधेड़े बिना चैन कहां! आतिश ए इश्क को सुलगाए बिना चैन कहां! तुम मेरे हो दिल […]
ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ […]
मेरे देश के किसान, तू अब जाग, कर हिम्मत, ना तू अब ऐसे मर, तेरी मेहनत एक दिन रंग लाएगी, तू अब ऐसे ना डर, कर दो देश को अब तू खबर, जी रहे हैं […]
कल भी वही दौर था, आज भी वही दौर है । पन्ने पलट लो, इतिहास गवाह बतौर है । तख्तो-ताज लूट गये । राजे-महराजे मिट गये । इस सियासती जंग में, अपने अपनों से छुट […]
मैंने ज्यादा किताब पढ़ा नही पर मुश्किल ए ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया
धड़ाधड़ अंधाधुन हो रहा पेड़ों की कटाई, मूक बाधिर बने रहे तनिक लाज नहीं आई, सूलग रहा आरे आज राजनीति के करतुतो से, पर्यावरण प्रेमी को दबोच रहें हैं आरे कालोनी से, महेश गुप्ता जौनपुरी
तेरा तिरछी नजर से देखते रहना मुझको बेपनाह प्यार की बक्शीश सा लगता है फिर एक ख्वाब आंखों में ठहर जाता है दिल में एक शर र सी सुलगती है मेहताब फिर आज जमी पे […]
तेरा तिरछी नजर से देखते रहना मुझको बेपनाह प्यार की बक्शीश सा लगता है फिर एक ख्वाब आंखों में ठहर जाता है दिल में एक शर र सी सुलगती है मेहताब फिर आज जमी पे […]
जालिम हमें हमारी दिल की गुमान दे दो। रखो जमीन अपनी कुछ आसमान दे दो।। जज़्बात की ये कैंची मेरे पंख पे चलाके। पंगु बना न देना जालिम करीब आके।। मत छीन जिन्दगानी ना मौत […]
प्रेम ने दिया है किसी को गम, तो दी है किसी को खुशियां, कोई तन्हाई में जलता है तो, किसी को मिलता है सनम का साथ, क्यों नहीं मिलता सभी को प्रेम की बरसात, हुए […]
तुझ में सब कुछ पाया मैंने, तू ही तो मेरा सवेरा, ओ मेरे मनमीत कहां हो तुम तुझे ढूंढे यह दिल मेरा, आने से होती है तेरे शम्मा ये गुलजार ये रौशन बहारा, तेरे ही […]
शब्द-शब्द पिरोकर, कविता की माला बनाऊं तुम्हारे लिए। माला के हर मनके में, मन के मनोभाव सजाऊं तुम्हारे लिए। लहराते उजले दामन में, प्रेम का रंग चढ़ाऊं तुम्हारे लिए। थरथराते गुलाबी अधरों पे, प्रेम का […]
बुद्धू सा मन चंचल सा यह तन बहका बहका सा लगे सांसो का भी चलन। १. दर्पण बनी तेरी आंखें मेरे सनम सरगोशियां तेरी सीने में दे जलन। बतियां तेरी मुझे बहका ना दे सनम, […]
बाहर कितनी खामोशी है अंतर्मन द्वंद सा मचा कहां? चेहरा हंसता सा दिखता है आंखों में नमी, दुख छुपा कहां? जीव्हा कुछ ना कुछ बोल रही शब्दों में फिर वो रवानी कहां? तुम भी जी […]
नन्हा सा बेटा बोला, लिपट कर मेरे पैर। आज ले चलोगे पापा, संग अपने सैर। कब जाते हो, कब आते हो, पता ही नहीं चलता, लगाते हो बड़ी देर। ना चलेगा कोई बहाना, थक गया […]
बचपन जिस आंगन में बीता, वह बस एक पड़ाव था मंजिल का। उन रास्तों से आगे बढ़कर, मंजिल तक जाना बाकी था। जिस घर में उस ने जन्म लिया क्या पता था!! यह घर उसका […]
पहले तुझसे बात करने से पैर कॉप ते थे लैब थर थरा उठते थे पर कभी तुझे बोल ना सका दिन तेरे दिदार की चाहत में होती थी हर किसी से मुस्कुराहट से बात होती […]
महफ़िल में मेरे बहुत है पर तेरे जैसा कोई नही मुफलिस सी ज़िन्दगी में एक तेरा ही सहारा था खुदा ने उसे ही छीन लिया ज़िन्दगी के कुछ पल जो खुशी के थे उसी में […]
तुम्हारे सुर्ख लबो में वो कशिश है, जो किसी शराब में नहीं। तुम्हारे तन कि वो मदहोश खुशबू है, जो किसी गुलाब में नहीं। तुम्हारे आगोश में वो जादू है, जो किसी भी शबाब में […]
हिन्दी गजल- बंजर भूमि की रोटी | बहारों के मौसम गुल खिल जाये दिखाना मुझे | बागो फूल भवरा गर मिल जाये दिखाना मुझे | जहर भर दिया फिज़ाओ मिल हमने और तुमने | मिट्टी […]
हिन्दी कविता- राम लीला जलाना बुराई जलाओ पुतला रावण जलाने से क्या फायदा | मन रावण को मारो नकली रावण जलाने से क्या फायदा | रहे सलामत सम्मान साहित हर घर की बहू बेटियाँ देश […]
••• किये जिस पे भी तुमने तंज़ वो सब तुम्हारे हैं। रंज जिस से भी करोगे वो सब तुम्हारे हैं।। रूबरू लौट कर आयेंगे वो जानिब को तेरी। अज़ल से बहते हुए दरिया के सभी […]
‘समय जगा रहा है’ कठिनाइयां बहुत हैं,चेतावनी विविध हैं, संघर्ष पथ कठिन हैं, जो एकता विहीन हैं। जागों भारतीयों जागों, समय जगा रहा हैं, वो अकेला ही क्यों दुष्कृत्य भगा रहा हैं ? माँगता सहयोग […]
इश्के-फ़साना हमारा, मशहूर जमाने में। हमारी मोहब्बत पाक है, सही माने में। सीने में दिल तेरे नाम से ही धड़कता है, दिलो-जाँ कुर्बान, क्या रखा नज़राने में। बे-इंतिहा इश्क की इंतिहा गर गुलामी है, मुझे […]
भारत का एक शेर वो वीर शिवाजी था। मुगलों के खिलाफ टेढ़ी लकीर शिवाजी था । जो चला ज्वाल की वेग से वह तीर शिवाजी था । जिससे हिलते थे सिंघआषन मुगलों के वह समीर […]
जहां स्वयं भूतनाथ विराजे,महांकाल के वेश में, कण-कण में सुंदरता झलके मेरे मध्यप्रदेश में, जीवनदायिनी रेवा बहती,विंध्याचल विराट है; रत्न अमोल भरे अपार है, यह खनिज सम्राट है। भीमबेटका खजुराहो से,संस्कृति की पहचान है; मोक्षदायिनी […]
सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं नि:संदेह मेरा दहन किया जाए। परंतु केवल वो ही समक्ष आए। जिसमें न हो रत्ती भर अहंकार। जिसने न किया हो व्यभिचार। जिसने किया पतितों का उद्धार। जिसने किया पर-दुखों […]
जीवन हर पल एक खेल होता है। यहाँ सभी के कर्मों का मेल होता है। जिंदगी के खेल बड़े निराले होते हैं। किश्मत का हर सिक्का हेड, टेल होता है। इस खेल में तो कोई […]
इश्क का बुखार बड़ा ही लज्जतदार। आत्मा पर हो जाता एक जुनून सा सवार। कर देता अच्छे खासे इंसान को बेकार। हंसता खेलता इंसान लगने लगता बीमार मीठा जहर यह बड़ा ही असरदार। पीना हर […]
तजुर्बों का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
तजुर्बा का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
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