जय जवान हम सब का सलाम, जज्बे को सलाम हिम्मत को सलाम। अपनी तूफानी इरादों से, लगा देते जो दुश्मन पर लगाम। उन शूरवीरोंको हम सबका बारंबार प्रणाम। जीवन दे देते अपना जो, हम सब […]

दुर्गा का ले अब अवतार, कर दे मर्दन, तोड़ दे सारे मोह के बंधन। तू ही तो है गृहस्थी का आधार, तेरे बिना घर केवल नरक का द्वार। मांगी जाती है कदम-कदम पर अग्नि परीक्षा, […]

हे प्रभु! करुणानिधि… अब शीघ्र करुणा कीजिए। हम दीन अब किसको पुकारे ! नाथ दर्शन दीजिए। जो पाप थे हमने किए, वह स्वयं ही फल पा चुके। इन अधर्मों की वजह से हम, सर्वत्र अपना […]

टुकड़ा हो तुम दिल का, मुराद हो तुम मन का, भोला है तू मन का, शैतान भी है तू बडा, मेरा तू है लाडला, अगर मैं रूठ जाऊं तो, तुझे चैन नहीं आता, तुझे मेरी […]

जब भूलना ही था तो अपना बनाया क्यों। भटके को सही राह, तुमने दिखाया क्यों। तन्हा हम कैसे भी हो, जी ही तो रहे थे, उम्मीद का शम्मा जला, तुमने बुझाया क्यों। भूलने की बात […]

शेषांश,,,,,,,,, दो रुपये का ब्लेड भला दाढ़ी काटे फिर उग आये। मुट्ठी एक चना से भूखा अपनी भूख मिटा पाए।। लो मैडमजी आ गए हम महिला काॅलेज के द्वारे। दस के बदले बीस रुपये देने […]

प्यार होता ही है गहराइयों में, वरना गहरे पानी में कौन डूबकी लगाता है। तेरी तीखी निगाहों का मिलना, सर्द रातों में भी आतिश मुझे बनाता है। याद नहीं रहता उस वक्त कुछ भी, जब […]

जर्रा हूं मैं आकाश नहीं, आकाश तले ही रहने दो। पिंजर हूं कोई मोम नहीं, पत्थर सा मुझे यूं रहने दो। आतिश हूं मैं आफताब नहीं, जलता बुझता सा रहने दो। कब से जी भर […]

जरा हूं मैं आकाश नहीं, आकाश तले ही रहने दो। पिंजर हूं कोई मोम नहीं, पत्थर सा मुझे यूं रहने दो। आतिश हूं मैं आफताब नहीं, जलता बुझता सा रहने दो। कब से जी भर […]

आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो पहले ही शर्मा कर हाथो से चेहरे को ढक लेती हो तुम. मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की लालिमा […]

आती है बहुत ही याद तेरी, तेरे जाने के बाद तेरी, कब तक तुम आओगे यहा, यह खबर नहीं है तेरी, महफिल है सजी यहां, बस तुम ही नहीं हो यहा, घर आ जाओ तुम […]

ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं। मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं। बैठी पलकें बिछाए, तेरा दीदार हो जाए, तेरे इंतज़ार की घड़ी बढ़ाना नहीं। ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं। मेरे […]

आखिर कौन किसको देखने छत पर आया करता है, चाँद इस ज़मीं पे या उस आसमान पे छाया करता है, इंतज़ार कौन और किसका बड़ी बेसबरी से करता है, पहले अंधेरा या रौशनी कौन किसको […]

बनते हैं ऐसे गुनाहगार, नशे की लत ने ले ली जिंदगी, उसके भाई और पिता की, फिर वह जैसे तैसे पला फुटपाथ पर, फिर उसे भी लगी आदत नशे की, करने के लिए नशा वो […]

बनते हैं ऐसे गुनाहगार नशे की लत ने ले ली जिंदगी उसके भाई और पिता की फिर वह जैसे तैसे पल्ला फुटपाथ पर फिर उसे भी लगी आदत नशे की करने के लिए नशा वो […]

दुनिया में ‘चेहरे पर चेहरा चढ़ाए’ हुए लोग। ‘मुंह में राम बगल में छुरा’ छिपाए हुए लोग। ‘अपने मुंह मियां मिट्ठू’ बनते हुए देखे हैं, ‘नाच ना आवें आंगन टेढ़ा’ बताए हुए लोग। ‘पूत के […]

बढ़ी हुई दाढ़ी थी उसकी फटा पुराना कपड़ा था। सुन्दर सुखद सुशील सलौना रिक्शावाला तगड़ा था।। कह के बैठ गई रिक्शा में महिला काॅलेज चलो भाई। खींच खींच के चलने लगा वह ओवरब्रिज की चढ़ाई।। […]

सहधर्मिणी, वह संगिनी, गृह स्वामिनी वह वह वामांगिनी आर्य पग धरे वह साथ हो,सुखद अनुभूति का अहसास हो। वह स्मिता वह रागिनी वह साध्वी, धर्मचारिणी। निश्छल हंसी उज्जवल छवि सुरम्यता बेमिसाल हो। शीतल भी हो […]

आलसी लोग जो ना मेहनत करते दिन के उजयारो मे देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे. सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते कांप -कांप कर जाने […]

दिल रोया, आंखों ने अश्क बहाया तेरी याद में। रौशनी भाती नहीं, चराग़ बुझाया तेरी याद में। तस्वीर बातें करती नहीं, अब जी भरता नहीं, इंतजार में दिन गिन-गिन बिताया तेरी याद में। ख्वाबों में […]

एक आवाज देकर, मुझे बुला लो तू सनम, दौड़ी चली आऊंगी, कुछ नहीं सोचूंगी सनम, तूने अब तक मुझे, पुकारा ही नहीं, तूने अब तक मुझे, ठीक से जाना ही नहीं, मैं तो तेरे प्यार […]

बेरोजगारी की जलन। नभ पर घटा घनघोर है तम भी बिछा हर ओर है, इन झुरमुटों को चीरकर आता न अब शीतल पवन। बेरोजगारी की जलन। शत-शत किताबें क्रय किया ले ऋण भी अगणित व्यय […]

क्यू कोलाहल से भरा हृदय! सरगम सांसों की धीमी कयू? आंखें पथरायी सी दिखती हैं, पहले सा ना उनमें पानी क्यू? चेहरे पर ना वह आभा है! तेजस्वी था निस्तेज है क्यू? क्यू हंसी नहीं […]

बारिश कि बूंदे दिल का ऐ आलम हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ फूलों की डाली,भवरों का मंडर महकती ये वादी,सावन की ये हरियाली हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ खींचा चला जा रहा हूँ तेरी खुशबू […]

रौशनी में अक्स दिखा, लगा तुम आए। हर एक आहट पर ऐसा लगा तुम आए। इंतज़ारे-बेक़रारी बढ़ती गई, साँसे घटती गई, हर एक सदा पर ऐसा लगा तुम आए। देवेश साखरे ‘देव’

क्यों ये ऊंच-नीच की दीवार है? आते हैं दुनिया में सभी तो, खाली हाथ ही होता है सभी का, क्यों यह जात पात की दीवार है? एक सा रंग होता है सभी के लहु का, […]

ऐ भारत के अमीरों, जरा देखो इन गरीबों को, फटे हैं कपड़े तन पर इनके, उजरे हैं बाल इनके, दो वक्त की रोटी नहीं नसीब में इनकी, बच्चे इनके हैं भूख से बिलख रहे, किसी […]

तेरी महफ़िल में सनम, कभी आएंगे न हम, चाहे तुम कितनी गुजारिश कर लो, हम न कभी आएंगे सनम, इस कदर हम इतनी दूर निकल आए हैं हम, तेरी महफिल में सनम, कभी आएंगे न […]

जब तुम आँखों से आस बन के बहते हो उस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैं लड़खड़ाती गिरती और संभलती हुई सिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैं लोगो की नज़रो में अपनी […]

धुंध का गुबार सी आधी नींद की खुमारी सी इत्र और शराब सी खिल उठे गुलाब सी बादलों में बिजली सी चंदन की महक सी चांदनी रात सी काली घटाएं जुल्फों सी मल्लिका ए हुस्न […]

स्मृतियां, विस्मृतियां आती नहीं जाती रही। हृदय में कोलाहल मचाती रही। अश्रु मिश्रित सी रातों में, दुख सुख की बदली छाती रही। झंकृत ,अलंकृत सी सांसों को, मधुर बयार महकाती रही। एक अल्हड़ बाला हृदय […]

ये विलासिता, वैभवता व भौतिकता की पराकाष्ठा। ये क्षणिक सुविधाएं प्राप्त होती, करने से थोड़ी चेष्टा। परंतु छू सकते हैं, गगन की ऊंचाई मात्र ही नहीं, सुदूर क्षितिज भी, गर मन में हो दृढ़ आत्मनिष्ठा। […]

हिमालय ताज सर पर सजा डटकर खड़ा अम्बर में सटा स्थिरता जिसकी पहचान है ऐसा ही हर भारतीय का रुझान है क्योंकि इस देश का कण-कण-सवर्ण महान है नम्र ह्रदय उच्च विचार मानते हम अतिथि […]

सृजन प्रकृति का मनमोहक है बड़ा, इंद्रधनुषी रंगों से सजा ये दृश्य प्रकृति का, मनमोहक है बड़ा, ये नदियां अल्लड बाला सी, अठखेलियां करती हुई, ये ऊंचे ऊंचे पहाड़ उसे प्यार से निहारते हुए, ये […]

मैं अंधभक्त बना रहा चीख पुकार को सुनता रहा एकता का गुणगान करता रहा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाई भाई करता रहा खून के छींटों पर आंख मूंद चलता रहा मैं अंधभक्त बना रहा मैं […]

वो इश्क के चक्कर में लाइलाज बैठे थे करके इंग्लिश में पी एच डी बर्बाद बैठे थे चौराहे के राहों में पलकें बिछा कर बैठे थे प्यार के चक्कर में उनके इंतजार में बैठे थे […]

वसंती आयी वसंती आयी देखो देखो वसंती आयी साथ में हरियाली लायी फूलों की महक लायी भौरो को संग लेकर आयी ओंस की बूदो को लायी घर ऑगन को महकायी वसंत आयी वसंती आयी देखो […]

त्रिविध ताप कर शमित हमारे भोले शंकर। राह कठिन, मंजिल भी धूमिल, पैरों में छाले, उजड़ा दिल। आज हमें दर्शन दे देखूँ तुझको जी भर। त्रिविध ताप कर शमित हमारे भोले शंकर। फैल रहा प्रतिपल […]

बिस्तर की सलवटें, शबे-हाल बयां करती है। भीगा सिरहाना, हिज़्रे-मलाल बयां करती है। बेशक लाख छुपाओ, ग़मे-जुदाई का दर्द लेकिन, बेरंग सा चेहरा, बेनूर हुस्नो-जमाल बयां करती है। मुस्कुराहट के पीछे, गम छुपाने का हुनर […]

तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो इत्र बन कर मेहकती रहूंगी तुम्हारे बदन की खुशबू के साथ तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो रुमाल बन कर, तुम्हारे […]

बेक़रारी का आलम है, दीवाने की मानिंद। ना सहरे-सकूँ मिलता, ना आती शबे-नींद। तेरी आँखों से पिया करते थे जामे-शराब, तेरी जुदाई में अब कहीं, हो ना जाऊँ रिंद। देवेश साखरे ‘देव’ रिंद- शराबी

ज़ुल्फ तुम्हारा, जैसे काली घटा हो। चाँद के रुख़्सार से, इसे तुम हटा दो। बिखरने दो चाँदनी हुस्नो-जमाल की, इसपे जैसे कोई चकोर मर मिटा हो। पहलू में बैठो, लौटा दो मुझे दिले-सुकूँ, मेरी नींद, […]

के तेरे दर पे मैं खुल कर के सब कुछ अर्ज़ करता हूँ, तुझको पाने की खातिर मैं खुद को यूँ खर्च करता हूँ, गर तू समझे मेरी खामोशी तो मुझे अच्छा लगता है, जो […]

दिल और दिमाग के बीच सन्तुलन बैठाना मुश्किल था, पहली बार देखा था उसे अमलन छुपाना मुश्किल था, अकेले ही काटी थी यूँही राहों पर उम्र भर जो जिंदगी, मिला जो उनसे तो ठहरी अंजुमन […]

डांटती भी,दुलराती भी। झीकती भी, मुस्काती भी। दिन भर ताना -बाना बुनती, काम में दिनभर उलझी रहती। कढ़ाई में जब छुन -छुन करती गीत कोई तब गुन-गुन करती। शब्दों के तीर छोडा करती, तीखे नयनों […]