गिर गया तो क्या हुआ पाना मुकाम अभी बाकी है जान भर ली है पैरों मे मैंने आसमां तक ऊँची छलांग अभी बाकी है.
गिर गया तो क्या हुआ पाना मुकाम अभी बाकी है जान भर ली है पैरों मे मैंने आसमां तक ऊँची छलांग अभी बाकी है.
जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन वो बेहया सब बेनक़ाब निकली उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने हर आरज़ू कमनसीब निकली लगी मेहंदी वो हाथों […]
जिनके अल्फाज़ आईने के तरह साफ होते हैं, जमाने की हवा उनके खिलाफ होते हैं। औरों के काम को वहीं आग का नाम देते, जिनके आवाजों में अक्सर उबलते भाप होते हैं। जंगल का नाग […]
हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती हूँ तुमसे यही कामना रक्षा उसकी सदा करना मुश्किलों से हो जब भी उसका सामना हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती […]
मेरे महबूब के हुस्न की जो बात है। चौदहवीं के चांद तेरी क्या बिसात है।। चांद भी देख गश खाएगा, मेरे महबूब को देख शर्माएगा। मेरे महबूब से हंसीन ये रात है। चौदहवीं के चांद […]
तुम्हारे अंदर जो मैं है, वह तुम्हें पीछे धकेलता है। तुम्हारे अंदर जो पीड़ा है, वह तुम्हें दया सिखाती है। तुम्हारे अंदर जो प्यार है, वह तुम्हें भावुक बनाता है। तुम्हारे अंदर जो एक जानवर […]
••• अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं। उन घरोंदों को फिर सजाना है।। क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको। फिर उस उम्मीद को […]
अपने गली का होने ना दिया, खुद के घर चैन से सोने ना दिया। जाते-जाते मुड़ा इस कदर, मुस्कान मेरा ले गया, फिर भी मुझे रोने ना दिया। अपना कह कर अपना बना ना सका, […]
जिंदगी आज फिर एक सवाल पूछती है! अपने साथ है या साथ छोड़ गए?? झूठे आडंबरो के लिए नाता तोड़ गए!! तुम तो उनके अपने थे?? फिर परायों के लिए, तुम्हें आज अकेला क्यों छोड़ […]
हे घनश्याम गोपाल मुरारी। मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। दीनबंधु करुणा के सागर। भगतबच्छल प्रभु आरतहर।। जगतपति जगतारनहारी, मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। तेरी कृपा बरस रही निश-दिन। बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।। दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’, मेरी […]
चिर परिचित जब कोई आ टकराता ख्वाब में, फिजा का हर रंग तब घुल जाता शवाब में। स्वप्न सुनहरा पलकों पर घर कर लेता, रात छोटी पर जाती ख्यालों के ठहराव में। वक्त का फासला […]
उम्र भर पिता ने जो, पाई पाई रखा था सहेज। बिटिया के ब्याह में, आज वह दे दिया दहेज।। ब्याह में लिए कर्ज का चुका रहे अभी किस्तें। थमा दिया जाता मांगों के फिर नए […]
सांवले सलोने चेहरे पर चमकती सफेद दंत पंक्ति, खूबसूरत उन्हें बनाती है। खेतों में काम करती महिलाएं, हंसी -ठिठोली करते -करते काम निपटाती हैं। नपी तुली देह, चंचल निगाहें, साड़ी में लिपटी वे सशक्त महिलाएं, […]
हिन्दी कविता – नाम हिंदुस्तान हमारा | नाम हिंदुस्तान हमारा होगा काम तमाम तुम्हारा | रहो अपनी औकात बुरा होगा अनजाम तुम्हारा | हर तरफ घिर चुके निगाहों सबकी गिर चुके तुम | टकराए जो […]
हिन्दी गजल- बचना भगवान भी जरूरी | हिन्द जमीं राम भी जरूरी और रहीम भी जरूरी | बना रहे सबमे भाईचारा दिलो यकीन भी जरूरी | दो कदम तुम बढ़ो और दो कदम हम भी […]
किसी को इश्क का नशा, किसी को रश्क का नशा। किसी को शय का नशा, किसी को मय का नशा। किसी को दौलत का नशा, किसी को शोहरत का नशा। किसी को इबादत का नशा, […]
प्रकृति ने हमें क्या-क्या ना दिया! यह कल-कल करती नदियां, यह स्वच्छ धरा यह नीलगगन। यह सुंदर चांद, तारे ,सूरज, लंबे , हरे भरे हैं वृक्ष यहां। फलों से लदे बागान यहां। ऊंचे ऊंचे पर्वत […]
आओ दिवाली ऐसी मनाए , थोड़ी खुशियां हम भी लुटाए। जो तरसे इन खुशियों को इन, आओ दिवाली उन सब की मनाए। थोड़ी मिठाई हम भी खाएं, थोड़ी उनमें बांट के आए। हंसते चेहरे देखोगे […]
नेताजी लाल पीले हैं, मुंह में है आग, ताशे उनकी ढीले हैं। विपक्षी दलों पर आरोपों की कंकरिया फिकवा रहे, वादों पर वादों की फुलझड़ीया जला रहे। एक दूसरे का कच्चा चिट्ठा जनता को सुना […]
जय जवान हम सब का सलाम, जज्बे को सलाम हिम्मत को सलाम। अपनी तूफानी इरादों से, लगा देते जो दुश्मन पर लगाम। उन शूरवीरोंको हम सबका बारंबार प्रणाम। जीवन दे देते अपना जो, हम सब […]
दुर्गा का ले अब अवतार, कर दे मर्दन, तोड़ दे सारे मोह के बंधन। तू ही तो है गृहस्थी का आधार, तेरे बिना घर केवल नरक का द्वार। मांगी जाती है कदम-कदम पर अग्नि परीक्षा, […]
हे प्रभु! करुणानिधि… अब शीघ्र करुणा कीजिए। हम दीन अब किसको पुकारे ! नाथ दर्शन दीजिए। जो पाप थे हमने किए, वह स्वयं ही फल पा चुके। इन अधर्मों की वजह से हम, सर्वत्र अपना […]
टुकड़ा हो तुम दिल का, मुराद हो तुम मन का, भोला है तू मन का, शैतान भी है तू बडा, मेरा तू है लाडला, अगर मैं रूठ जाऊं तो, तुझे चैन नहीं आता, तुझे मेरी […]
जब भूलना ही था तो अपना बनाया क्यों। भटके को सही राह, तुमने दिखाया क्यों। तन्हा हम कैसे भी हो, जी ही तो रहे थे, उम्मीद का शम्मा जला, तुमने बुझाया क्यों। भूलने की बात […]
शेषांश,,,,,,,,, दो रुपये का ब्लेड भला दाढ़ी काटे फिर उग आये। मुट्ठी एक चना से भूखा अपनी भूख मिटा पाए।। लो मैडमजी आ गए हम महिला काॅलेज के द्वारे। दस के बदले बीस रुपये देने […]
प्यार होता ही है गहराइयों में, वरना गहरे पानी में कौन डूबकी लगाता है। तेरी तीखी निगाहों का मिलना, सर्द रातों में भी आतिश मुझे बनाता है। याद नहीं रहता उस वक्त कुछ भी, जब […]
जर्रा हूं मैं आकाश नहीं, आकाश तले ही रहने दो। पिंजर हूं कोई मोम नहीं, पत्थर सा मुझे यूं रहने दो। आतिश हूं मैं आफताब नहीं, जलता बुझता सा रहने दो। कब से जी भर […]
जरा हूं मैं आकाश नहीं, आकाश तले ही रहने दो। पिंजर हूं कोई मोम नहीं, पत्थर सा मुझे यूं रहने दो। आतिश हूं मैं आफताब नहीं, जलता बुझता सा रहने दो। कब से जी भर […]
आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो पहले ही शर्मा कर हाथो से चेहरे को ढक लेती हो तुम. मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की लालिमा […]
आती है बहुत ही याद तेरी, तेरे जाने के बाद तेरी, कब तक तुम आओगे यहा, यह खबर नहीं है तेरी, महफिल है सजी यहां, बस तुम ही नहीं हो यहा, घर आ जाओ तुम […]
ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं। मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं। बैठी पलकें बिछाए, तेरा दीदार हो जाए, तेरे इंतज़ार की घड़ी बढ़ाना नहीं। ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं। मेरे […]
आखिर कौन किसको देखने छत पर आया करता है, चाँद इस ज़मीं पे या उस आसमान पे छाया करता है, इंतज़ार कौन और किसका बड़ी बेसबरी से करता है, पहले अंधेरा या रौशनी कौन किसको […]
बनते हैं ऐसे गुनाहगार, नशे की लत ने ले ली जिंदगी, उसके भाई और पिता की, फिर वह जैसे तैसे पला फुटपाथ पर, फिर उसे भी लगी आदत नशे की, करने के लिए नशा वो […]
बनते हैं ऐसे गुनाहगार नशे की लत ने ले ली जिंदगी उसके भाई और पिता की फिर वह जैसे तैसे पल्ला फुटपाथ पर फिर उसे भी लगी आदत नशे की करने के लिए नशा वो […]
दुनिया में ‘चेहरे पर चेहरा चढ़ाए’ हुए लोग। ‘मुंह में राम बगल में छुरा’ छिपाए हुए लोग। ‘अपने मुंह मियां मिट्ठू’ बनते हुए देखे हैं, ‘नाच ना आवें आंगन टेढ़ा’ बताए हुए लोग। ‘पूत के […]
बढ़ी हुई दाढ़ी थी उसकी फटा पुराना कपड़ा था। सुन्दर सुखद सुशील सलौना रिक्शावाला तगड़ा था।। कह के बैठ गई रिक्शा में महिला काॅलेज चलो भाई। खींच खींच के चलने लगा वह ओवरब्रिज की चढ़ाई।। […]
सहधर्मिणी, वह संगिनी, गृह स्वामिनी वह वह वामांगिनी आर्य पग धरे वह साथ हो,सुखद अनुभूति का अहसास हो। वह स्मिता वह रागिनी वह साध्वी, धर्मचारिणी। निश्छल हंसी उज्जवल छवि सुरम्यता बेमिसाल हो। शीतल भी हो […]
आलसी लोग जो ना मेहनत करते दिन के उजयारो मे देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे. सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते कांप -कांप कर जाने […]
दिल रोया, आंखों ने अश्क बहाया तेरी याद में। रौशनी भाती नहीं, चराग़ बुझाया तेरी याद में। तस्वीर बातें करती नहीं, अब जी भरता नहीं, इंतजार में दिन गिन-गिन बिताया तेरी याद में। ख्वाबों में […]
एक आवाज देकर, मुझे बुला लो तू सनम, दौड़ी चली आऊंगी, कुछ नहीं सोचूंगी सनम, तूने अब तक मुझे, पुकारा ही नहीं, तूने अब तक मुझे, ठीक से जाना ही नहीं, मैं तो तेरे प्यार […]
बेरोजगारी की जलन। नभ पर घटा घनघोर है तम भी बिछा हर ओर है, इन झुरमुटों को चीरकर आता न अब शीतल पवन। बेरोजगारी की जलन। शत-शत किताबें क्रय किया ले ऋण भी अगणित व्यय […]
मेरे ख्वाबों में बस तुम हो, कोई और नहीं है सनम, तुम्हें यकी हो न हो, पर यही सच है सनम, तुम मुझ पर यूं शक ना करो, मैं बस तेरी हूं तेरी हूं सनम, […]
Baithe hai khali tera naam lete hai Baithe hai khali tera naam lete hai Yahi to pyar hai mera Yahi to pyar hai mera Tara intzaar karte hai Tara intzaar karte hai
क्यू कोलाहल से भरा हृदय! सरगम सांसों की धीमी कयू? आंखें पथरायी सी दिखती हैं, पहले सा ना उनमें पानी क्यू? चेहरे पर ना वह आभा है! तेजस्वी था निस्तेज है क्यू? क्यू हंसी नहीं […]
बारिश कि बूंदे दिल का ऐ आलम हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ फूलों की डाली,भवरों का मंडर महकती ये वादी,सावन की ये हरियाली हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ खींचा चला जा रहा हूँ तेरी खुशबू […]
रौशनी में अक्स दिखा, लगा तुम आए। हर एक आहट पर ऐसा लगा तुम आए। इंतज़ारे-बेक़रारी बढ़ती गई, साँसे घटती गई, हर एक सदा पर ऐसा लगा तुम आए। देवेश साखरे ‘देव’
क्यों ये ऊंच-नीच की दीवार है? आते हैं दुनिया में सभी तो, खाली हाथ ही होता है सभी का, क्यों यह जात पात की दीवार है? एक सा रंग होता है सभी के लहु का, […]
ऐ भारत के अमीरों, जरा देखो इन गरीबों को, फटे हैं कपड़े तन पर इनके, उजरे हैं बाल इनके, दो वक्त की रोटी नहीं नसीब में इनकी, बच्चे इनके हैं भूख से बिलख रहे, किसी […]
तेरी महफ़िल में सनम, कभी आएंगे न हम, चाहे तुम कितनी गुजारिश कर लो, हम न कभी आएंगे सनम, इस कदर हम इतनी दूर निकल आए हैं हम, तेरी महफिल में सनम, कभी आएंगे न […]
जब तुम आँखों से आस बन के बहते हो उस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैं लड़खड़ाती गिरती और संभलती हुई सिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैं लोगो की नज़रो में अपनी […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.